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“पहले हम खारा कुएँ का पानी पीते थे, अब सभी लोग पेयजल के लिए विलोसित पानी का उपयोग कर रहे हैं”

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कवायद्वीप- जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को लो टेम्परेचर थर्मल डीसैलिनेशन (LTTD) प्लांट का दौरा किया और वहां स्थानीय निवासियों के साथ बातचीत की। इस दौरान कवायद्वीप के निवासी अब्दुल रहमान ने बताया कि पहले क्षेत्र में लोग खारा कुएँ का पानी पीते थे, लेकिन अब सभी के घरों में विलोसित (desalinated) पानी उपलब्ध है।

रहमान उन कई स्थानीय निवासियों में से थे जिन्होंने मंत्री को अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि LTTD तकनीक समुद्र के ऊपरी गर्म पानी और गहरे समुद्र के ठंडे पानी के तापमान के अंतर का उपयोग कर समुद्र के पानी को पीने योग्य पानी में बदलती है। इस तकनीक से अब पानी सीधे नलों के माध्यम से घरों तक पहुँचता है।

दूसरे निवासी वालिया बी ने कहा कि पहले उन्हें पानी रोज़ाना कुएँ से घर तक लाना पड़ता था, लेकिन अब पानी उनके दरवाजे तक उपलब्ध है।

मंत्री सिंह ने कहा कि कवायद्वीप में शुरू हुए यह परियोजना धीरे-धीरे अन्य द्वीपों तक भी फैल चुकी है। उन्होंने ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्ज़न (OTEC) परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की, जो न केवल स्वच्छ बिजली उत्पादन करेगी बल्कि ताजे पानी का उत्पादन भी करेगी।

सिंह ने बताया कि ये तकनीकें विशेष रूप से उन द्वीप क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं, जहां ताजे पानी के स्रोत सीमित हैं लेकिन समुद्र पानी प्रचुर मात्रा में है। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएँ डीज़ल आधारित आपूर्ति पर निर्भरता को भी कम करेंगी, जो मानसून के दौरान अक्सर प्रभावित होती है।

लक्षद्वीप में ताजे पानी की सीमित उपलब्धता, खारेपन और वर्षा पर भारी निर्भरता के कारण हमेशा पेयजल की चुनौती रही है। अधिकारियों ने बताया कि डीसैलिनेशन सुविधाएँ आने वाले वर्षों में द्वीपवासियों के लिए स्थायी और विश्वसनीय पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


भारतीय नौसेना की मानवीय पहल: लक्षद्वीप में संयुक्त सेवाओं का बहु-विशेषज्ञ चिकित्सा शिविर सफलतापूर्वक संपन्न

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भारतीय नौसेना ने 16 जनवरी 2026 को लक्षद्वीप द्वीपसमूह में आयोजित पाँच दिवसीय संयुक्त सेवाओं के बहु-विशेषज्ञ चिकित्सा शिविर का सफल समापन किया। यह शिविर कवरत्ती, अगत्ती, अमिनी, एंड्रोथ और मिनिकॉय द्वीपों में आयोजित किया गया, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच उत्कृष्ट तालमेल देखने को मिला। इस पहल ने दूरदराज़ द्वीपीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए सशस्त्र बलों की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया।

12 जनवरी 2026 को उद्घाटित इस चिकित्सा शिविर को लक्षद्वीप के केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन और स्थानीय स्वास्थ्य तंत्र का भरपूर सहयोग मिला। शिविर में कुल 4,719 मरीजों ने विशेषज्ञ और सुपर-स्पेशलिस्ट परामर्श का लाभ उठाया। यह लक्षद्वीप में अपने प्रकार का पहला और अब तक का सबसे बड़ा चिकित्सा शिविर रहा, जिसमें उन्नत चिकित्सा सेवाएँ एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गईं।

शिविर में न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एंडोक्रिनोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी जैसे सुपर-स्पेशलिटी क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ-साथ मेडिसिन, सर्जरी, ईएनटी, नेत्र रोग, त्वचा रोग, दंत चिकित्सा, रेडियोलॉजी और सामुदायिक चिकित्सा के विशेषज्ञ शामिल थे।

तेज़ी से चिकित्सा टीमों और अत्याधुनिक उपकरणों की तैनाती, तथा प्रत्येक द्वीप पर पूर्ण रूप से कार्यशील चिकित्सा सुविधाओं की स्थापना ने तीनों सेवाओं के बीच उच्च स्तर के समन्वय और संयुक्तता को दर्शाया। वायु और समुद्री मार्ग से चिकित्सा कर्मियों और संवेदनशील उपकरणों का सुव्यवस्थित परिवहन इस समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।

शिविर के दौरान 51 सामान्य शल्य क्रियाएँ, 71 मोतियाबिंद ऑपरेशन, 50 से अधिक एंडोस्कोपी, 50 से अधिक इकोकार्डियोग्राफी जांच, 250 से अधिक अल्ट्रासाउंड परीक्षण, 100 से अधिक दंत प्रक्रियाएँ और कई त्वचा रोग संबंधी उपचार किए गए। सभी सेवाएँ और दवाइयाँ पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की गईं, जिससे मरीजों को मुख्य भूमि के अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता में उल्लेखनीय कमी आई।

स्थायी योगदान के रूप में भारतीय नौसेना ने अगत्ती और अमिनी के स्वास्थ्य केंद्रों को दो ईसीजी मशीनें भी भेंट कीं। इसके साथ ही, जन जागरूकता के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें निवारक स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवनशैली, कैंसर जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य और बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) प्रशिक्षण शामिल था।

लक्षद्वीप के लोगों और प्रशासन द्वारा अत्यंत सराहा गया यह संयुक्त चिकित्सा शिविर अपने व्यापक प्रभाव, पेशेवर निष्पादन और मानवीय संवेदनशीलता के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। इस पहल के माध्यम से भारतीय सशस्त्र बलों ने एक बार फिर देश के दूरस्थ क्षेत्रों में नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया।


लक्षद्वीप में मत्स्य क्षेत्र की अपार संभावनाओं को खोलने के लिए पहली बार निवेशक सम्मेलन आयोजित

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मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार द्वारा 13 दिसंबर 2025 को लक्षद्वीप केंद्रशासित प्रदेश के बंगाराम द्वीप में पहली बार निवेशक सम्मेलन (Investors’ Meet) का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह; राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल; राज्य मंत्री  जॉर्ज कुरियन; तथा लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल की गरिमामयी उपस्थिति रही।

यह लक्षद्वीप में आयोजित अपनी तरह का पहला निवेशक सम्मेलन था, जिसमें देशभर से टूना एवं डीप-सी फिशरीज, सीवीड (समुद्री शैवाल) खेती, सजावटी मत्स्य पालन, अपशिष्ट प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लगभग 22 निवेशकों और प्रमुख उद्यमियों ने भाग लिया।

सम्मेलन के दौरान मत्स्य पालन विभाग ने मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र में निवेश के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया:

1. टूना एवं डीप-सी फिशरीज विकास

लक्षद्वीप भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा रखता है और यहां टूना सहित उच्च मूल्य वाली मछलियों के समृद्ध भंडार उपलब्ध हैं। वर्तमान में लगभग 15,000 टन उत्पादन हो रहा है, जबकि इसकी संभावित क्षमता 1 लाख टन तक आंकी गई है।
निवेश के अवसर टूना मछली पकड़ने, प्रोसेसिंग, कैनिंग, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और निर्यात में उपलब्ध हैं। पारंपरिक और टिकाऊ मछली पकड़ने की पद्धतियों के कारण लक्षद्वीप Marine Stewardship Council (MSC) जैसे वैश्विक ईको-लेबलिंग के लिए उपयुक्त है, जिससे अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों तक पहुंच संभव होगी।
स्मार्ट फिशिंग हार्बर, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग यूनिट, आधुनिक डीप-सी फिशिंग पोत और मदर वेसल जैसी अवसंरचना में निवेश से लक्षद्वीप को वैश्विक टूना हब बनाया जा सकता है।

2. सीवीड (समुद्री शैवाल)

लक्षद्वीप में 4200 वर्ग किलोमीटर से अधिक लैगून क्षेत्र सीवीड खेती के लिए अत्यंत अनुकूल है। बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए सीवीड फार्मिंग, नर्सरी, बायोमास प्रोसेसिंग और बायो-प्रोडक्ट निर्माण में बड़े निवेश अवसर हैं।
पीएमएमएसवाई के तहत लक्षद्वीप को सीवीड क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है, जहां सीवीड सीड बैंक और हैचरी स्थापित की जा चुकी हैं। निजी क्षेत्र के लिए ऑफशोर सीवीड खेती हेतु लीज नीति पर भी कार्य किया जा रहा है। सीवीड खेती पर्यावरण संरक्षण, कार्बन अवशोषण और समुद्री जैव विविधता को बढ़ावा देने में भी सहायक है।

3. सजावटी मत्स्य पालन (Ornamental Fisheries)

लक्षद्वीप में लगभग 300 समुद्री सजावटी मछली प्रजातियां पाई जाती हैं, जो वैश्विक एक्वेरियम बाजार के लिए उपयुक्त हैं। यहां हैचरी, ब्रूड बैंक और एकीकृत पालन इकाइयों की स्थापना से सतत और निर्यात-उन्मुख सजावटी मत्स्य उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है, साथ ही स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

4. ऑफशोर केज फार्मिंग

लगभग 4 लाख वर्ग किलोमीटर EEZ के साथ लक्षद्वीप ऑफशोर केज फार्मिंग के लिए अत्यधिक संभावनाशील है। देश के अन्य भागों में सफल पायलट परियोजनाओं—जैसे सीएमएफआरआई और एनएफडीबी द्वारा संचालित परियोजनाएं—ने इसकी तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता सिद्ध की है। निवेशक इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर टिकाऊ मैरिकल्चर को विकसित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

निवेश को सुगम बनाने हेतु लक्षद्वीप में सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इस निवेशक सम्मेलन से ₹500 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव सामने आने की संभावना है। यह पहल लक्षद्वीप की ब्लू इकोनॉमी को सशक्त बनाने के साथ-साथ सतत और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।


मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि में निवेश अवसरों पर लक्षद्वीप में निवेशक सम्मेलन का आयोजन

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भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (MoFAH&D) के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग द्वारा लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के सहयोग से “लक्षद्वीप द्वीपसमूह के मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र में निवेश अवसर” विषय पर एक निवेशक सम्मेलन का आयोजन 13 दिसंबर 2025 को बंगाराम द्वीप, लक्षद्वीप में किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, जॉर्ज कुरियन, तथा लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल सहित कई गणमान्य अतिथि शामिल होंगे।

निवेशकों के लिए अवसर

यह कार्यक्रम निवेशकों को लक्षद्वीप में मत्स्य व जलीय कृषि क्षेत्र के विकास की संभावनाओं को समझने व सहयोग के अवसर तलाशने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। एक विशेष इंटरैक्टिव सत्र में निवेशक अपने अनुभव और चुनौतियाँ साझा करेंगे, जिससे नीतिगत सुधारों की दिशा तय होगी।

प्रतिभागी

इस कार्यक्रम में मत्स्य पालन विभाग, NFDB, MPEDA, EIC, CMFRI, CIFT, CIFNET, NCDC, NCEL, FSI, UT प्रशासन लक्षद्वीप, स्थानीय मत्स्य समितियों के अधिकारी तथा लगभग 35 प्रमुख निवेशक भाग ले रहे हैं। ये निवेशक टूना, सीवीड, डीप-सी फिशिंग, वेस्ट मैनेजमेंट और ऑर्नामेंटल फिशरी जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं।

लक्षद्वीप में निवेश की संभावनाएँ

लक्षद्वीप द्वीपसमूह में मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं—

  • कुल कैच का 75% टूना

  • 4200 वर्ग किमी लैगून क्षेत्र

  • समृद्ध ऑर्नामेंटल फिश बायोडायवर्सिटी

संभावित निवेश क्षेत्र:

  • डीप-सी टूना फिशिंग

  • टूना प्रोसेसिंग और कोल्ड-चेन सुविधाएँ

  • सीवीड खेती और समुद्री कृषि (Mariculture)

  • ऑर्नामेंटल फिश प्रोडक्शन यूनिट्स

इन निवेशों से स्थानीय आजीविका को बढ़ावा मिलेगा और ब्लू इकॉनमी को मजबूती मिलेगी। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत 1 लाख करोड़ रुपये के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्य फोकस

  • टूना फिशिंग में पूर्ण hook-to-plate ट्रैसेबिलिटी

  • स्वच्छ लैगूनों में उच्च गुणवत्ता वाले सीवीड की खेती

  • ऑर्नामेंटल फिशरी के लिए समृद्ध प्राकृतिक संसाधन

मत्स्य क्षेत्र की पृष्ठभूमि

  • मत्स्य क्षेत्र देश के 3 करोड़ लोगों की आजीविका का आधार

  • भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक

  • 2015 के बाद से सरकार द्वारा कुल ₹38,572 करोड़ के निवेश स्वीकृत

  • कुल मछली उत्पादन बढ़कर 197 लाख टन

  • समुद्री उत्पादों का निर्यात मूल्य ₹62,400 करोड़

  • लक्ष्य: 2030 तक ₹1 लाख करोड़ का समुद्री निर्यात

सरकार के प्रयास

  • 16 डीप-सी फिशिंग वेसल्स की स्वीकृति

  • सितंबर 2024 में लक्षद्वीप को समर्पित सीवीड क्लस्टर के रूप में अधिसूचित

  • ऑर्नामेंटल फिशरी के 300 प्रजातियों के साथ प्रबल संभावनाएँ

निष्कर्ष

यह निवेशक सम्मेलन लक्षद्वीप की मत्स्य क्षमता को उजागर करने तथा इसे विकसित भारत 2047 के विज़न की दिशा में अग्रसर करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।


डॉ. अभिलक्ष लखी ने मुंबई में FSI और CIFNET की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप द्वीपों में मत्स्य क्षमता निर्माण पर दिया जोर

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मछलीपालन विभाग (DoF), मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के सचिव डॉ. अभिलक्ष लखी ने आज मुंबई में एक हाइब्रिड समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें मछली सर्वेक्षण भारत (FSI) और केंद्रीय मत्स्य नौवहन एवं इंजीनियरिंग प्रशिक्षण संस्थान (CIFNET) द्वारा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप द्वीप समूह में किए गए जनसंपर्क और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

अपने संबोधन में, डॉ. लखी ने क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की सहयोगात्मक योजना और अधीनस्थ कार्यालयों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि परिणाम अधिक प्रभावशाली और समेकित हों। उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह भारत की समुद्री मत्स्य विकास रणनीति में विशेष रूप से टूना मत्स्य क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने स्थानीय मछुआरों के कौशल विकास, आधुनिक मत्स्य तकनीकों को अपनाने, और कटाई पश्चात् प्रबंधन तकनीकों में सुधार के लिए लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. लखी ने सुझाव दिया कि इन क्षेत्रों के अत्यधिक प्रेरित और कुशल मछुआरों को उच्च गुणवत्ता वाले टूना (सशीमी-ग्रेड) के हैंडलिंग, प्रोसेसिंग और कोल्ड-चेन संरक्षण तकनीकों में विदेशी उन्नत प्रशिक्षण का अवसर दिया जाए।

उन्होंने कहा कि ऐसे कदम कटाई पश्चात् हानियों को कम करने और भारतीय समुद्री उत्पादों की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायक होंगे। साथ ही, उन्होंने FSI और CIFNET की भूमिका को द्वीपीय क्षेत्रों में समुद्री क्षमता सुदृढ़ करने में रणनीतिक बताया।

बैठक के दौरान FSI और CIFNET ने लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में चल रही गतिविधियों और जनसंपर्क पहलों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं। समीक्षा में मछुआरों और मत्स्य कर्मियों की तकनीकी दक्षताओं को बढ़ाने, प्रायोगिक प्रशिक्षण, फील्ड-स्तरीय प्रदर्शन, और तकनीकी प्रसार गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय मत्स्य समुदायों की आजीविका सुधारने के उपायों पर भी चर्चा की गई।

इस समीक्षा बैठक में NFDB, ICAR, MPEDA, NABARD, NCDC, महाराष्ट्र सरकार के मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, द्वीप प्रशासन के प्रतिनिधि, और अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

लक्षद्वीप में मत्स्य क्षेत्र के विकास और निवेश बढ़ाने पर उच्च स्तरीय परामर्श बैठक

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लक्षद्वीप में मत्स्य क्षेत्र के विकास पर उच्च स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित

लक्षद्वीप द्वीपसमूह में मत्स्य क्षेत्र के विकास, विशेष रूप से टूना मत्स्य पालन, समुद्री शैवाल (Seaweed) और Ornamental fisheries पर ध्यान केंद्रित करते हुए आज कोच्चि में उच्च स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल उपस्थित थे।

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने घोषणा की कि नवंबर 2025 में लक्षद्वीप में निवेशकों और निर्यातकों की बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि टूना मत्स्य पालन, समुद्री शैवाल और Ornamental fisheries में निवेश और निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने कहा, “यदि मछली पकड़ बढ़ती है, तो लक्षद्वीप की अर्थव्यवस्था विकसित होती है, और इसके परिणामस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था भी बढ़ती है। यह प्रधानमंत्री के 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में मदद करेगा।”

मंत्री ने लक्षद्वीप को एक रणनीतिक मत्स्य हब के रूप में उसकी अनूठी स्थिति पर भी प्रकाश डाला, जो भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का लगभग 20% हिस्सा है और विशाल गहरे समुद्र संसाधनों, विशेषकर उच्च-मूल्य टूना तक पहुंच प्रदान करता है। उन्होंने लक्षद्वीप में सतत मत्स्य पालन पद्धतियों जैसे कि पोल-एंड-लाइन और हैंडलाइन टूना मत्स्य पालन को वैश्विक स्तर पर पर्यावरण-स्नही और बाईकैच-मुक्त के रूप में मान्यता प्राप्त होने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप का रणनीतिक स्थान गहरे समुद्र में मत्स्य पालन गतिविधियों का विस्तार करने की महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रदान करता है।

मंत्री ने टूना मूल्य श्रृंखला के विकास, समुद्री शैवाल और Ornamental fisheries में उद्यमिता कार्यक्रम शुरू करने और FFPOs को सशक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रमाणन और ट्रेसबिलिटी सतत, पर्यावरण के अनुकूल टूना निर्यात को सहारा देगा। उन्होंने भारत सरकार और लक्षद्वीप प्रशासन के बीच एक संयुक्त कार्य समूह बनाने का आह्वान किया ताकि लंबित प्रस्तावों और तकनीकी आवश्यकताओं का समाधान किया जा सके, और हर हितधारक को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने संबोधन में लक्षद्वीप की भारत के मत्स्य क्षेत्र में रणनीतिक भूमिका पर प्रकाश डाला, और प्रधानमंत्री के “समुद्र से समृद्धि” दृष्टिकोण की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि आईटी क्षेत्र के बाद मत्स्य क्षेत्र भारत में दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता क्षेत्र है और इसलिए इसे नीतिगत ध्यान की आवश्यकता है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल और स्वदेशी लक्ष्यों के साथ मत्स्य क्षेत्र को जोड़ने पर जोर दिया।

MoS कुरियन ने CMFRI और KVK लक्षद्वीप, विशेषकर Ornamental fisheries में उनके कार्यों की सराहना की और कहा कि इसमें बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने स्थानीय मछुआरों को सशक्त बनाने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे, कोल्ड चेन सिस्टम और मूल्य वर्धित प्रसंस्करण में अधिक निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया।

लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल ने कहा कि लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा संघीय क्षेत्र है, जिसकी मुख्य भूमि से सीमित कनेक्टिविटी है और ऐतिहासिक रूप से यह विकासात्मक चुनौतियों का सामना करता रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के 75 वर्षों के बाद भी सुरक्षित पेयजल एक बड़ा मुद्दा था, लेकिन प्रधानमंत्री की पहल के कारण अब सभी द्वीपों में डिसेलिनेशन प्लांट स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि लक्षद्वीप के सभी कक्ष अब स्मार्ट क्लासरूम हैं, जिससे बच्चे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, और अस्पतालों और हवाई अड्डों का विकास भी किया जा रहा है।

प्रशासक ने कहा कि पोत प्रौद्योगिकी और मछली प्रसंस्करण पर प्रशिक्षण और जागरूकता की आवश्यकता है, साथ ही विभागीय योजनाओं के लिए एक संरचित आउटरीच योजना बनानी चाहिए ताकि अधिक हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं को प्राथमिकता देने और मत्स्य क्षेत्र में निजी निवेश आकर्षित करने के लिए निवेशकों की बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा।

मत्स्य विभाग, भारत सरकार के सचिव डॉ. अभिलाक्ष लिक्खी ने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) के तहत लक्षद्वीप के मत्स्य क्षेत्र को विभिन्न सहायता प्रदान की जा रही है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने समुद्री शैवाल की खेती के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ ऑफशोर क्लस्टर की जरूरत बताई और कहा कि स्मार्ट, इंटीग्रेटेड बंदरगाह विकसित किए जा रहे हैं ताकि मैकेनाइज्ड मछली पकड़ बढ़ाई जा सके।

लक्षद्वीप प्रशासन के सचिव (मत्स्य) राजथिलक एस ने टूना मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और लाइवबेट वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम रीफ्स की शुरूआत के अपडेट साझा किए। उन्होंने कहा कि INCOIS नियमित रूप से संभावित मत्स्य क्षेत्रों का डेटा स्थानीय मछुआरों के साथ साझा करता है और लाइवबेट की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गहरे समुद्र में मत्स्य पालन से उत्पादन में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है और रेफ्रिजरेटेड फिश वॉटर टैंक के परिचय से पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान कम होगा और हिस्टामिन सामग्री का मूल्यांकन संभव होगा।

इस परामर्श बैठक में लक्षद्वीप प्रशासन, मत्स्य विभाग (भारत सरकार), गृह मंत्रालय, बंदरगाह, जलमार्ग एवं शिपिंग मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, MPEDA, ICAR, NITI Aayog, NCDC और NABARD के प्रमुख हितधारक और प्रतिनिधि शामिल हुए।


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