Media24Media.com: लक्षद्वीप में मत्स्य क्षेत्र की अपार संभावनाओं को खोलने के लिए पहली बार निवेशक सम्मेलन आयोजित

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लक्षद्वीप में मत्स्य क्षेत्र की अपार संभावनाओं को खोलने के लिए पहली बार निवेशक सम्मेलन आयोजित

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मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार द्वारा 13 दिसंबर 2025 को लक्षद्वीप केंद्रशासित प्रदेश के बंगाराम द्वीप में पहली बार निवेशक सम्मेलन (Investors’ Meet) का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह; राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल; राज्य मंत्री  जॉर्ज कुरियन; तथा लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल की गरिमामयी उपस्थिति रही।

यह लक्षद्वीप में आयोजित अपनी तरह का पहला निवेशक सम्मेलन था, जिसमें देशभर से टूना एवं डीप-सी फिशरीज, सीवीड (समुद्री शैवाल) खेती, सजावटी मत्स्य पालन, अपशिष्ट प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लगभग 22 निवेशकों और प्रमुख उद्यमियों ने भाग लिया।

सम्मेलन के दौरान मत्स्य पालन विभाग ने मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र में निवेश के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया:

1. टूना एवं डीप-सी फिशरीज विकास

लक्षद्वीप भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा रखता है और यहां टूना सहित उच्च मूल्य वाली मछलियों के समृद्ध भंडार उपलब्ध हैं। वर्तमान में लगभग 15,000 टन उत्पादन हो रहा है, जबकि इसकी संभावित क्षमता 1 लाख टन तक आंकी गई है।
निवेश के अवसर टूना मछली पकड़ने, प्रोसेसिंग, कैनिंग, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और निर्यात में उपलब्ध हैं। पारंपरिक और टिकाऊ मछली पकड़ने की पद्धतियों के कारण लक्षद्वीप Marine Stewardship Council (MSC) जैसे वैश्विक ईको-लेबलिंग के लिए उपयुक्त है, जिससे अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों तक पहुंच संभव होगी।
स्मार्ट फिशिंग हार्बर, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग यूनिट, आधुनिक डीप-सी फिशिंग पोत और मदर वेसल जैसी अवसंरचना में निवेश से लक्षद्वीप को वैश्विक टूना हब बनाया जा सकता है।

2. सीवीड (समुद्री शैवाल)

लक्षद्वीप में 4200 वर्ग किलोमीटर से अधिक लैगून क्षेत्र सीवीड खेती के लिए अत्यंत अनुकूल है। बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए सीवीड फार्मिंग, नर्सरी, बायोमास प्रोसेसिंग और बायो-प्रोडक्ट निर्माण में बड़े निवेश अवसर हैं।
पीएमएमएसवाई के तहत लक्षद्वीप को सीवीड क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है, जहां सीवीड सीड बैंक और हैचरी स्थापित की जा चुकी हैं। निजी क्षेत्र के लिए ऑफशोर सीवीड खेती हेतु लीज नीति पर भी कार्य किया जा रहा है। सीवीड खेती पर्यावरण संरक्षण, कार्बन अवशोषण और समुद्री जैव विविधता को बढ़ावा देने में भी सहायक है।

3. सजावटी मत्स्य पालन (Ornamental Fisheries)

लक्षद्वीप में लगभग 300 समुद्री सजावटी मछली प्रजातियां पाई जाती हैं, जो वैश्विक एक्वेरियम बाजार के लिए उपयुक्त हैं। यहां हैचरी, ब्रूड बैंक और एकीकृत पालन इकाइयों की स्थापना से सतत और निर्यात-उन्मुख सजावटी मत्स्य उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है, साथ ही स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

4. ऑफशोर केज फार्मिंग

लगभग 4 लाख वर्ग किलोमीटर EEZ के साथ लक्षद्वीप ऑफशोर केज फार्मिंग के लिए अत्यधिक संभावनाशील है। देश के अन्य भागों में सफल पायलट परियोजनाओं—जैसे सीएमएफआरआई और एनएफडीबी द्वारा संचालित परियोजनाएं—ने इसकी तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता सिद्ध की है। निवेशक इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर टिकाऊ मैरिकल्चर को विकसित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

निवेश को सुगम बनाने हेतु लक्षद्वीप में सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इस निवेशक सम्मेलन से ₹500 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव सामने आने की संभावना है। यह पहल लक्षद्वीप की ब्लू इकोनॉमी को सशक्त बनाने के साथ-साथ सतत और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।


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