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प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व बॉक्सिंग कप फाइनल 2025 में भारत के ऐतिहासिक प्रदर्शन पर खिलाड़ियों को बधाई दी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व बॉक्सिंग कप फाइनल 2025 में भारतीय बॉक्सरों के शानदार, ऐतिहासिक और रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन पर बधाई दी है। भारतीय खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में कुल 20 पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। यह उपलब्धि भारतीय बॉक्सिंग की ताकत, खिलाड़ियों के हौसले और उनकी निरंतर मेहनत का असाधारण प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय बॉक्सर अपनी लगन, जुनून और दृढ़ संकल्प के दम पर दुनिया में देश का मान बढ़ा रहे हैं। यह प्रदर्शन आने वाले वर्षों में भारतीय खेलों के लिए एक प्रेरक मील का पत्थर साबित होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा:

“हमारे शानदार एथलीट्स ने विश्व बॉक्सिंग कप फाइनल्स 2025 में असाधारण और रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन किया! उन्होंने 9 गोल्ड समेत कुल 20 पदक जीतकर नया इतिहास बनाया है। यह हमारे बॉक्सर्स के संकल्प और दृढ़ता का परिणाम है। उन्हें बधाई! आगे के प्रयासों के लिए शुभकामनाएँ।”

यह प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है, और आने वाली पीढ़ियों को नए सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देता रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम को विश्व विजेता बनने पर दी बधाई, कहा—“हर खिलाड़ी है चैंपियन, उपलब्धि प्रेरित करेगी आने वाली पीढ़ियों को”

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम को पहला ब्लाइंड महिला टी20 विश्व कप जीतकर इतिहास रचने पर हार्दिक बधाई दी। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अपराजित रहते हुए देश का मान बढ़ाया और खेल जगत में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया।

प्रधानमंत्री ने टीम की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को मेहनत, टीमवर्क और अटूट संकल्प का प्रेरणादायी उदाहरण बताते हुए कहा कि खिलाड़ियों का समर्पण एवं जज़्बा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

X पर साझा अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने लिखा:

“प्रथम ब्लाइंड महिला टी20 विश्व कप जीतकर इतिहास रचने के लिए भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम को हार्दिक बधाई! इससे भी अधिक गर्व की बात यह है कि टीम पूरे टूर्नामेंट में अपराजित रही। यह उपलब्धि कड़ी मेहनत, टीमवर्क और दृढ़ निश्चय का चमकदार प्रमाण है। हर खिलाड़ी एक सच्ची चैंपियन है! टीम को भविष्य के लिए मेरी ढेरों शुभकामनाएँ। यह अद्वितीय प्रदर्शन आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।”


उपराष्ट्रपति ने मनोरमा न्यूज़ न्यूज़मेकर अवॉर्ड 2024 प्रदान किया, मंत्री सुरेश गोपी को मिला सम्मान

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में आयोजित मनोरमा न्यूज़ न्यूज़मेकर अवॉर्ड 2024 समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार पर्यटन तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री और प्रख्यात फिल्म अभिनेता सुरेश गोपी को प्रदान किया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने सिनेमा और राजनीति के विशिष्ट चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सुरेश गोपी ने दोनों क्षेत्रों में असाधारण सफलता अर्जित की है। उन्होंने फातिमा माता कॉलेज, कोल्लम की अपनी हालिया यात्रा को भी याद किया — जो कि सुरेश गोपी, कॉलेज के पूर्व छात्र, के निमंत्रण पर हुई थी। उन्होंने कहा कि यह gesture मंत्री के अपने मूल से गहरे संबंध को दर्शाता है।

उन्होंने राष्ट्र में सकारात्मक विकासों को उजागर करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया, ताकि युवा पीढ़ी प्रेरित हो सके। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि पत्रकारिता की जिम्मेदारी है कि वह वंचितों और कमजोरों की आवाज बने। उन्होंने नशा-मुक्त समाज बनाने में मीडिया की अहम भूमिका को रेखांकित किया, यह बताते हुए कि जन-जागरूकता और जिम्मेदार जन-चर्चा को बढ़ावा देने में मीडिया अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक्स के इस युग में सच्चाई और फेक न्यूज़ में अंतर करना बेहद कठिन होता जा रहा है, ऐसे में प्रेस और मीडिया को लोकतंत्र में अत्यंत जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने तमिल कवि तिरुवल्लुवर के अमर वचनों को उद्धृत किया: “यदि कोई व्यक्ति शुद्ध हृदय से सत्य बोलता है, तो वह उन लोगों से भी बढ़कर है जो जीवनभर तपस्या करते हैं या अरबों दान में देते हैं।” उन्होंने प्रेस से आग्रह किया कि वे तिरुवल्लुवर की इन अनंत ज्ञान की बातों का पालन करें।

मनोरमा समूह की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए, सी. पी. राधाकृष्णन ने भाषा, सत्य, संस्कृति और मलयालम साहित्य एवं मीडिया में इसके अमूल्य योगदान के प्रति इसके समर्पण की सराहना की। उन्होंने मनोरमा न्यूज़ की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह वर्षों से केरल की प्रमुख जनमत-निर्माता और एक विश्वसनीय आवाज़ रही है, जो जनता की नब्ज़ को प्रतिबिंबित करती है।


दीपेश्वरी ने कबीरधाम जिले का नाम किया रोशन

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 राष्ट्रीय कूडो टूर्नामेंट में जीता कांस्य पदक

रायपुर-कबीरधाम जिले की प्रतिभाशाली बेटी दीपेश्वरी ने राष्ट्रीय स्तर पर जिले का मान बढ़ाया है। उन्होंने राष्ट्रीय कूडो टूर्नामेंट 2025-26 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अर्जित किया। उनकी इस उपलब्धि पर कलेक्टर गोपाल वर्मा ने उन्हें सम्मानित कर शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कलेक्टर ने कहा कि कबीरधाम जिले की बेटियाँ आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। दीपेश्वरी की यह सफलता पूरे जिले और प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि उनकी मेहनत और लगन से प्रेरणा लेकर जिले के अन्य युवा खिलाड़ी भी खेल के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ हासिल करेंगे। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा खेल प्रतिभाओं के प्रोत्साहन हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, संसाधन एवं मंच उपलब्ध कराकर उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के अवसर दिए जा रहे हैं। इस अवसर पर निगेश्वर नाथ योगी, हिम्मत साहू, नरेन्द्र साहू, नितेश चंदेल, छेदीलाल निषाद,  रोहिणी साहू, दुर्गा श्रीवास, देवकुमार साकेत एवं अनिल वर्मा उपस्थित थे। सभी ने दीपेश्वरी को बधाई देते हुए उनके समर्पण, साहस और प्रतिबद्धता की सराहना की। 

दूरदराज़ के आदिवासी गाँवों से आई उज्जवल सफलता: 597 EMRS छात्रों ने JEE और NEET में हासिल की कामयाबी

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देश के दूरदराज़ आदिवासी इलाकों से आने वाले 597 छात्रों ने 2024-25 में JEE Main, JEE Advanced और NEET जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। यह बड़ी छलांग पिछले साल के सिर्फ 16 छात्रों (JEE) और 6 छात्रों (NEET) की तुलना में बेहद प्रेरणादायक है।

यह सफलता Eklavya Model Residential Schools (EMRS) की विशेष शिक्षा और मार्गदर्शन की देन है, जो अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उन्हें बड़े अवसरों तक पहुँचाने में मदद करती हैं। कुल 230 EMRS स्कूलों में से 101 स्कूलों के छात्रों ने इन प्रतिष्ठित परीक्षाओं को पास किया।

प्रेरणादायक उदाहरण:

जतिन नेगी, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के सांगला गाँव से, जिन्होंने JEE Advanced में 421वीं रैंक हासिल की। उन्होंने IIT जोधपुर में B.Tech की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने कहा कि EMRS में शिक्षक और संरचित शिक्षा प्रणाली ने उनके सपनों को साकार करने में मदद की।

पड़वी उर्जस्वीबेन अमृतभाई, गुजरात के खपतिया गाँव की रहने वाली, ने NEET परीक्षा पास की और अब GMERS मेडिकल कॉलेज, जूनागढ़ में MBBS कर रही हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षक का मार्गदर्शन और मेहनत ने उन्हें सामाजिक बाधाओं को पार करने में मदद की।

EMRS छात्रों का प्रदर्शन (2024–25)

राज्य     JEE Main       JEE Advanced         NEET
आंध्र प्रदेश         17               1            0
छत्तीसगढ़         17               3           18
गुजरात        37               3          173
हिमाचल प्रदेश         3               1            7
झारखंड        6               0              0
कर्नाटक         7               0            0
मध्य प्रदेश      51              10          115
महाराष्ट्र         7               2            7
ओडिशा      10               4            0
तेलंगाना      60              10           24
उत्तर प्रदेश       1               0               0
उत्तराखंड       3               0            0
कुल     219              34          344

EMRS क्या हैं?

Eklavya Model Residential Schools (EMRS) केंद्रीय जनजाति मंत्रालय द्वारा स्थापित स्कूल हैं। ये स्कूल दूरदराज़ आदिवासी बच्चों को मुफ्त, CBSE-सम्बद्ध गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, हॉस्टल सुविधा, पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं।

संविधान और कानून की भूमिका

भारत के संविधान ने अनुसूचित जातियों और जनजातियों के छात्रों के लिए विशेष प्रावधान बनाए हैं। Articles 15 और 46, और Central Educational Institutions (Reservation in Admission) Act, 2006 जैसी कानून व्यवस्था सुनिश्चित करती हैं कि इन छात्रों को उच्च शिक्षा और रोजगार में समान अवसर मिलें।

विशेष शैक्षिक समर्थन

EMRS छात्रों को IIT-JEE और NEET की तैयारी के लिए डिजिटल ट्यूटरिंग, स्मार्ट क्लास, कौशल विकास लैब्स, अटल टिंकरिंग लैब्स और करियर मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं मिलती हैं। यह मदद छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए सक्षम बनाती है।

जतिन और पड़वी जैसी कहानियां यह दिखाती हैं कि सही शिक्षा, मेहनत और मार्गदर्शन से किसी भी दूरदराज़ आदिवासी क्षेत्र का बच्चा बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है।


उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्रवणबेलगोला में आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की शताब्दी स्मृति समारोह में की शिरकत

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में परमपूज्य आचार्य श्री 108 शांतिसागर महाराज जी की पुण्य स्मृति में आयोजित समारोह में भाग लिया। यह आयोजन आचार्य श्री के 1925 में महामस्तकाभिषेक समारोह हेतु इस पवित्र स्थल पर आगमन की शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की प्रतिमा का अनावरण भी किया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी के दिगंबर परंपरा के पुनर्जागरण में किए गए योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री का जीवन अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद जैसे जैन सिद्धांतों का सजीव उदाहरण है, जो आज भी आत्मिक शांति और सामाजिक सद्भाव के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।

उन्होंने कहा कि भौतिकवाद और अस्थिरता से भरे इस युग में आचार्य श्री का जीवन हमें यह संदेश देता है कि सच्ची स्वतंत्रता भोग में नहीं, बल्कि संयम में है; और सच्चा सुख बाहरी संपत्ति में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति में निहित है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस शताब्दी समारोह के माध्यम से श्रवणबेलगोला स्थित दिगंबर जैन मठ ने न केवल एक महान संत की स्मृति का सम्मान किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आध्यात्मिक ज्योति को पुनः प्रज्वलित किया है। उन्होंने कहा कि अनावृत की गई प्रतिमा सादगी, पवित्रता और करुणा की शक्ति की स्मृति दिलाने वाला प्रतीक बनकर खड़ी रहेगी।

उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी का संदेश समस्त भारतीयों को धर्म, सहिष्णुता और शांति के मार्ग पर अग्रसर करता रहेगा।

उन्होंने श्रवणबेलगोला के दो हजार वर्ष पुराने गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए भगवान बाहुबली की 57 फुट ऊँची एकाश्म मूर्ति को आध्यात्मिक श्रद्धा और कला कौशल का शाश्वत प्रतीक बताया।

राधाकृष्णन ने सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा आचार्य भद्रबाहु की प्रेरणा से श्रवणबेलगोला में संन्यास लेने के ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख किया और कहा कि यह घटना दर्शाती है कि सांसारिक उपलब्धियों के शिखर पर पहुँचने के बाद भी व्यक्ति को अंततः आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश करनी चाहिए।

उन्होंने भारत सरकार द्वारा प्राकृत भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने और जैन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण हेतु “ज्ञान भारतम मिशन” शुरू करने की सराहना की। उन्होंने तमिलनाडु और जैन धर्म के गहरे ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि जैन धर्म ने संगम कालीन और पश्चात् संगम कालीन तमिल साहित्य जैसे शिलप्पदिकारम में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उपराष्ट्रपति ने श्रवणबेलगोला दिगंबर जैन महास्थान मठ के वर्तमान प्रमुख अभिनव चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी की भी सराहना की, जो आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की परंपरा को स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों जैसे प्राकृत रिसर्च इंस्टीट्यूट के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि श्रवणबेलगोला भारत की आध्यात्मिक धरोहर का उज्ज्वल रत्न बना रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को धर्म, सहिष्णुता और शांति के मार्ग पर प्रेरित करता रहेगा।

इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी, कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा, योजना और सांख्यिकी मंत्री डी. सुधाकर, हासन से सांसद श्रेयस एम. पटेल, श्रवणबेलगोला दिगंबर जैन महास्थान मठ के संतगण और अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि,सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतें हुईं “बाल विवाह मुक्त”

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प्रधानमंत्री के 75वें जन्मदिवस पर छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक उपलब्धि

रायपुर-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 75वें जन्मदिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ ने सामाजिक सुधार में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतों को “बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत” घोषित किया गया है। यह मान्यता इस आधार पर दी गई है कि विगत दो वर्षों में इन पंचायतों में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।

इस उपलब्धि में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की सतत पहल, सक्रिय मार्गदर्शन और नेतृत्व को निर्णायक माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में विभाग ने गाँव-गाँव जागरूकता अभियान चलाया, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पंचायत प्रतिनिधियों को सक्रिय किया तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की।

राजवाड़े ने कहा कि सूरजपुर जिले की यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। प्रधानमंत्री के अमृत महोत्सव वर्ष में यह उपलब्धि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक सशक्त संदेश है।

सामुदायिक भागीदारी की सराहना
जिला प्रशासन ने महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय की संयुक्त भूमिका की सराहना की। सभी के सामूहिक प्रयास से यह सुनिश्चित हुआ कि शिक्षा और जागरूकता को प्राथमिकता मिले और कोई बाल विवाह न हो।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 10 मार्च 2024 को “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान” की शुरुआत हुई थी। यह अभियान यूनिसेफ के सहयोग से और मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने बाल विवाह उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और विभाग लगातार जनजागरूकता, निगरानी और सामाजिक सहभागिता को मजबूत कर रहा है।

सूरजपुर की इस सफलता से प्रेरित होकर अब छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी पंचायतों और नगरीय निकायों को “बाल विवाह मुक्त” घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिन जिलों में विगत दो वर्षों में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ, वहां शीघ्र ही प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।


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