Media24Media.com: #InnovationForIndia

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #InnovationForIndia. Show all posts
Showing posts with label #InnovationForIndia. Show all posts

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अटल इनोवेशन मिशन के जमीनी नवप्रवर्तकों से की मुलाकात, नवाचार को विकसित भारत की आधारशिला बताया

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (31 जुलाई 2026) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों (Grassroots Innovators) के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवर्तकों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया, उनके नवाचारों को देखा तथा उनसे संवाद भी किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी विशाल क्षमता और नवाचार की भावना के बल पर जमीनी नवाचारों का वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय अनुभव, वैज्ञानिक सोच, व्यक्तिगत रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय ही जमीनी नवाचारों को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि देशभर के नवप्रवर्तक स्थानीय समस्याओं के ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं, जिनका महत्व राष्ट्रीय स्तर तक है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में प्रस्तुत नवाचार कचरे से संपदा (Waste to Wealth), ऊर्जा संरक्षण, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों की सुविधा, पर्यावरण संरक्षण, कृषि तथा कला संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सिर्फ विचारों से सामाजिक परिवर्तन नहीं आता, बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने के लिए उचित मार्गदर्शन, संसाधन और मंच की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर जमीनी नवप्रवर्तकों को तकनीकी सहायता, मार्गदर्शन और उनके नवाचारों को टिकाऊ उद्यमों में बदलने के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि "विकसित भारत" का सपना तभी साकार होगा, जब प्रत्येक नागरिक नवाचार की सोच के साथ समस्याओं के समाधान खोजने का प्रयास करेगा। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि देश के विभिन्न संस्थान और नागरिक इस साझा उद्देश्य के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं, जिससे नवाचार की संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सीमित संसाधनों, अनिश्चितताओं और अनेक चुनौतियों के बावजूद कई नवप्रवर्तकों ने अपने प्रयास जारी रखे। उन्होंने उनके समर्पण और सकारात्मक परिवर्तन लाने की भावना की सराहना की तथा उन्हें अपने नवाचारों को लगातार बेहतर बनाने, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत और अन्य नवप्रवर्तकों के साथ सहयोग बढ़ाने तथा अपने नवाचारों को व्यापक स्तर तक पहुँचाने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे नवाचारों का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचेगा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किए तीन क्रांतिकारी स्वदेशी नवाचार — QSIP, क्वांटम चिप और CAR-T सेल थेरेपी

No comments Document Thumbnail

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को भेंट की तीन अभूतपूर्व नवाचार उपलब्धियां — QSIP: भारत की अपनी क्वांटम सुरक्षा चिप, 25-क्यूबिट QPU: भारत की पहली क्वांटम कंप्यूटिंग चिप और CAR-T सेल थेरेपी: भारत की पहली स्वदेशी कैंसर सेल थेरेपी

चल रहे Emerging Science, Technology & Innovation Conclave (ESTIC 2025) के दौरान माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को तीन ऐतिहासिक नवाचार उपलब्धियां समर्पित कीं —

  1. QSIP (Quantum Security in Package) : भारत की अपनी क्वांटम सुरक्षा चिप।
  2. 25-क्यूबिट QPU (Quantum Processing Unit) : भारत की पहली क्वांटम कंप्यूटिंग चिप, जो भविष्य की कंप्यूटेशन शक्ति का प्रतीक है।
  3. CAR-T सेल थेरेपी : भारत की पहली स्वदेशी कैंसर सेल थेरेपी, जिसे भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया है।

इनमें से NexCAR19, जो विश्व की पहली humanised CAR-T therapy है, भारत में ImmunoACT द्वारा विकसित की गई है — यह वास्तव में “Made in India, for the World” नवाचार का उदाहरण है। इस परियोजना को Department of Biotechnology (DBT) और BIRAC द्वारा समर्थन प्राप्त हुआ है।

CAR-T सेल थेरेपी (Chimeric Antigen Receptor T-cell therapy) कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति बनकर उभरी है। विश्वभर में किए गए क्लिनिकल ट्रायल्स ने दर्शाया है कि यह थेरेपी Acute Lymphocytic Leukemia जैसे गंभीर कैंसर रोगियों में अत्यंत प्रभावी साबित हुई है।

NexCAR19, भारत की पहली living drug, ने जीन थेरेपी को न केवल किफायती बल्कि सुलभ भी बनाया है, जबकि वैज्ञानिक गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है।

ImmunoACT, जो IIT बॉम्बे की एक स्पिन-ऑफ स्टार्टअप है, को BIRAC के BioNest Initiative के तहत वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और संसाधन प्रदान किए गए, जब यह Society for Innovation and Entrepreneurship (SINE), IIT बॉम्बे के Technology Business Incubator में इनक्यूबेट की जा रही थी।

वर्ष 2021 में, भारत की पहली CAR-T थेरेपी के Lentivirus manufacturing और clinical trial के लिए DBT और BIRAC ने National Biopharma Mission के तहत आंशिक सहायता प्रदान की। यह परीक्षण ACTREC Centre, टाटा मेमोरियल अस्पताल में TMC-IIT Bombay Team द्वारा किया गया, जिसमें ImmunoACT निर्माण भागीदार के रूप में कार्यरत है।

हाल ही में, DBT ने BioE3 Policy के तहत Biomanufacturing initiative के माध्यम से ImmunoACT को 200-लीटर GMP lentiviral vector and plasmid प्लेटफॉर्म स्थापित करने हेतु वित्त पोषण प्रदान किया है। इस प्लेटफॉर्म से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और थेरेपी की लागत कम होगी। अनुमान है कि यह GMP ग्रेड gene delivery vector प्रति वर्ष कम से कम 1000 रोगियों की मदद कर सकेगा।

DBT प्रारंभिक एवं उन्नत translational research को भी बढ़ावा दे रहा है ताकि देश में CAR-T आधारित थेरेप्यूटिक्स विकसित कर विभिन्न प्रकार के कैंसर जैसे Multiple Myeloma (MM), Acute Lymphocytic Leukemia, B-cell Acute Lymphoblastic Leukemia, glioblastoma आदि का उपचार किया जा सके।

यह पहल भारत को कैंसर उपचार में आत्मनिर्भर और वैश्विक अग्रणी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

विकसित भारत के लिए नवाचार यात्रा में वैश्विक दृष्टिकोण और समन्वित प्रयास आवश्यक: केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली-केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान; पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज जोर देकर कहा कि विकसित भारत की नवाचार यात्रा के लिए वैश्विक सोच और पुनर्निर्देशित मानसिकता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र दोनों को संकोच छोड़कर वास्तविक तालमेल में काम करना चाहिए।

मानसिक बाधाओं को तोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए, डॉ. सिंह ने वैश्विक मानकों को अपनाने और वैश्विक दृष्टिकोण के साथ सोचने की अपील की। उन्होंने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट का विमोचन भारत की नवाचार क्षमता को विकसित भारत@2047 के विज़न के अनुरूप संरेखित करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के साथ मिलकर नीति आयोग मुख्यालय में नीति आयोग की रिपोर्ट “Pathways to Progress: Analysis and Insights into India’s Innovation Story” का विमोचन किया।

अपने संबोधन में डॉ. सिंह ने कहा कि स्टार्टअप्स को सफल व्यवसायों में बदलने के लिए शुरुआती उद्योग सहभागिता और समान निवेश साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत की वैक्सीन सफलता कहानी का उदाहरण दिया, जहां निजी कंपनियों को पहले दिन से ही शामिल किया गया, जिससे समय पर विकास और बड़े पैमाने पर वितरण संभव हुआ।

मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की निरंतर प्रगति—2015 में 81वें स्थान से 2025 में 39वें स्थान तक—यादृच्छिक नहीं है, बल्कि नीति चयन, उद्यमिता में निवेश और युवा नवप्रवर्तकों की प्रतिबद्धता का परिणाम है। आज भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जिसमें 1 लाख से अधिक सरकारी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न शामिल हैं।

महत्त्वपूर्ण रूप से, लगभग 50% स्टार्टअप्स Tier-2 और Tier-3 शहरों से उत्पन्न हो रहे हैं, जो उद्यमिता के लोकतंत्रीकरण और भारत की समावेशी नवाचार कहानी को दर्शाते हैं।

डॉ. सिंह ने लगातार चुनौतियों को भी स्वीकार किया: संस्थागत तालमेल की कमी, डीप-टेक वेंचर्स के लिए धैर्यपूर्ण पूंजी की आवश्यकता, शिक्षा–उद्योग संबंधों की कमजोरी, राज्य-स्तरीय नवाचार क्षमता में असमानता और बौद्धिक संपदा संरक्षण व व्यावसायिकीकरण में अंतर।

इन चुनौतियों को संबोधित करने के लिए, डॉ. सिंह ने BIRAC और IN-SPACe जैसी विशेष संस्थाओं को अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्लेटफ़ॉर्म सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहज सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय डीप-टेक स्टार्टअप नीति और अनुसंधान राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन (ANRF) जैसी सरकारी पहलें फ्रंटियर टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक हैं। ये प्रयास जोखिम लेने, रचनात्मकता और सहयोग को प्रोत्साहित करेंगे, जिससे भारत केवल वैश्विक प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और वैश्विक नेता बने।

आगे देखते हुए डॉ. सिंह ने कहा:

“भारत की नवाचार यात्रा केवल सरकार पर निर्भर नहीं हो सकती। इसके लिए पूरे राष्ट्र की भागीदारी आवश्यक है—सरकार सुविधा प्रदान करे, उद्योग पैमाना और निवेश लाए, अकादमिक संस्थान ज्ञान निर्माण में योगदान दें और युवा नवप्रवर्तक ऊर्जा और रचनात्मकता दें। साथ मिलकर हम आकांक्षाओं को उपलब्धियों में बदल सकते हैं और 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार कर सकते हैं।”

उन्होंने नीति आयोग की रिपोर्ट को केवल मूल्यांकन के रूप में नहीं, बल्कि रोडमैप और कार्ययोजना के रूप में देखने का आग्रह किया—सफल मॉडलों को स्केल करना, इनक्यूबेटरों का विविधीकरण, राज्य-स्तरीय क्षमताओं को सुदृढ़ करना और फ्रंटियर आर एंड डी में साहसिक निवेश करना।

रिपोर्ट विमोचन में उपस्थित थे:

  • डॉ. वी.के. सरस्वत, सदस्य, नीति आयोग

  • श्री संजय कुमार, सचिव, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग

  • डॉ. अभय करंडिकर, सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग

  • डॉ. राजेश गोखले, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग

  • डॉ. एम. रविचंद्रन, सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय

  • दीपक बगला, मिशन डायरेक्टर, अटल इनोवेशन मिशन (नीति आयोग)

  • डॉ. विवेक कुमार सिंह, वरिष्ठ सलाहकार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, नीति आयोग


शहरी जल वितरण में डिजिटल क्रांति: भारत-इज़राइल साझेदारी से विकसित होगा AI आधारित अनुकूली डिजिटल ट्विन फ्रेमवर्क

No comments Document Thumbnail

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार ने पुणे स्थित एम/एस कपिह डीप टेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है। यह समझौता “शहरी जल वितरण प्रणालियों के लिए अनुकूली डिजिटल ट्विन फ्रेमवर्क: भारतीय अवसंरचना हेतु एक संकल्पनात्मक कार्यान्वयन रणनीति” नामक परियोजना के लिए किया गया है।

इस पहल के तहत, TDB कुल परियोजना लागत ₹5.82 करोड़ में से ₹4.07 करोड़ की सशर्त अनुदान सहायता प्रदान करेगा। यह परियोजना भारत-इज़राइल औद्योगिक अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार कोष (I4F) कॉल फॉर प्रपोज़ल के अंतर्गत, इज़राइली साझेदार एम/एस रियाली टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के सहयोग से समर्थित है।

इस परियोजना का फोकस एक AI-आधारित अनुकूली डिजिटल ट्विन फ्रेमवर्क विकसित करना है, जो शहरी जल वितरण प्रणालियों के प्रदर्शन को वास्तविक समय में सिमुलेट, मॉनिटर और प्रेडिक्ट कर सके। इस समाधान में RealiteQ क्लाउड-आधारित SCADA प्लेटफॉर्म को उन्नत एनालिटिक्स के साथ एकीकृत किया गया है, ताकि भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप एक स्केलेबल और किफायती उपकरण विकसित किया जा सके।

डिजिटल ट्विन समाधान के कार्यान्वयन में जोखिम निवारण रणनीतियों को शामिल करके, यह परियोजना भारत के जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों को हल करने का प्रयास करेगी, जैसे कि:

  • पुराना और दबावग्रस्त बुनियादी ढांचा

  • नॉन-रेवेन्यू वॉटर (NRW) की उच्च हानियाँ

  • खंडित और सीमित मॉनिटरिंग सिस्टम

  • शहरी आपूर्ति श्रृंखलाओं में संसाधनों की अक्षमताएँ

इसकी व्यापक उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए, परियोजना के तहत कई पायलट परिनियोजन किए जाएंगे। इसके माध्यम से यह प्रदर्शित किया जाएगा कि भारतीय शहर किस प्रकार धीरे-धीरे AI-सक्षम मॉनिटरिंग और नियंत्रण प्रणालियाँ अपना सकते हैं। यह चरणबद्ध दृष्टिकोण शुरुआती लागत को कम करने और पुरानी अवसंरचना के साथ एकीकरण को आसान बनाने की उम्मीद है।

समझौते पर बोलते हुए, टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा:

“भारत की शहरी जल प्रणालियाँ गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं, जिनके लिए नवाचारपूर्ण और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों की आवश्यकता है। अनुकूली डिजिटल ट्विन फ्रेमवर्क के विकास का समर्थन करके, TDB ऐसे स्केलेबल और व्यावहारिक उपकरण उपलब्ध करा रहा है, जो दक्षता बढ़ा सकते हैं, अपव्यय घटा सकते हैं और शहरी अवसंरचना को अधिक लचीला बना सकते हैं।”

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.