Media24Media.com: विकसित भारत के लिए नवाचार यात्रा में वैश्विक दृष्टिकोण और समन्वित प्रयास आवश्यक: केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह

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विकसित भारत के लिए नवाचार यात्रा में वैश्विक दृष्टिकोण और समन्वित प्रयास आवश्यक: केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह

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नई दिल्ली-केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान; पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज जोर देकर कहा कि विकसित भारत की नवाचार यात्रा के लिए वैश्विक सोच और पुनर्निर्देशित मानसिकता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र दोनों को संकोच छोड़कर वास्तविक तालमेल में काम करना चाहिए।

मानसिक बाधाओं को तोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए, डॉ. सिंह ने वैश्विक मानकों को अपनाने और वैश्विक दृष्टिकोण के साथ सोचने की अपील की। उन्होंने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट का विमोचन भारत की नवाचार क्षमता को विकसित भारत@2047 के विज़न के अनुरूप संरेखित करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के साथ मिलकर नीति आयोग मुख्यालय में नीति आयोग की रिपोर्ट “Pathways to Progress: Analysis and Insights into India’s Innovation Story” का विमोचन किया।

अपने संबोधन में डॉ. सिंह ने कहा कि स्टार्टअप्स को सफल व्यवसायों में बदलने के लिए शुरुआती उद्योग सहभागिता और समान निवेश साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत की वैक्सीन सफलता कहानी का उदाहरण दिया, जहां निजी कंपनियों को पहले दिन से ही शामिल किया गया, जिससे समय पर विकास और बड़े पैमाने पर वितरण संभव हुआ।

मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की निरंतर प्रगति—2015 में 81वें स्थान से 2025 में 39वें स्थान तक—यादृच्छिक नहीं है, बल्कि नीति चयन, उद्यमिता में निवेश और युवा नवप्रवर्तकों की प्रतिबद्धता का परिणाम है। आज भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जिसमें 1 लाख से अधिक सरकारी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न शामिल हैं।

महत्त्वपूर्ण रूप से, लगभग 50% स्टार्टअप्स Tier-2 और Tier-3 शहरों से उत्पन्न हो रहे हैं, जो उद्यमिता के लोकतंत्रीकरण और भारत की समावेशी नवाचार कहानी को दर्शाते हैं।

डॉ. सिंह ने लगातार चुनौतियों को भी स्वीकार किया: संस्थागत तालमेल की कमी, डीप-टेक वेंचर्स के लिए धैर्यपूर्ण पूंजी की आवश्यकता, शिक्षा–उद्योग संबंधों की कमजोरी, राज्य-स्तरीय नवाचार क्षमता में असमानता और बौद्धिक संपदा संरक्षण व व्यावसायिकीकरण में अंतर।

इन चुनौतियों को संबोधित करने के लिए, डॉ. सिंह ने BIRAC और IN-SPACe जैसी विशेष संस्थाओं को अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्लेटफ़ॉर्म सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहज सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय डीप-टेक स्टार्टअप नीति और अनुसंधान राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन (ANRF) जैसी सरकारी पहलें फ्रंटियर टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक हैं। ये प्रयास जोखिम लेने, रचनात्मकता और सहयोग को प्रोत्साहित करेंगे, जिससे भारत केवल वैश्विक प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और वैश्विक नेता बने।

आगे देखते हुए डॉ. सिंह ने कहा:

“भारत की नवाचार यात्रा केवल सरकार पर निर्भर नहीं हो सकती। इसके लिए पूरे राष्ट्र की भागीदारी आवश्यक है—सरकार सुविधा प्रदान करे, उद्योग पैमाना और निवेश लाए, अकादमिक संस्थान ज्ञान निर्माण में योगदान दें और युवा नवप्रवर्तक ऊर्जा और रचनात्मकता दें। साथ मिलकर हम आकांक्षाओं को उपलब्धियों में बदल सकते हैं और 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार कर सकते हैं।”

उन्होंने नीति आयोग की रिपोर्ट को केवल मूल्यांकन के रूप में नहीं, बल्कि रोडमैप और कार्ययोजना के रूप में देखने का आग्रह किया—सफल मॉडलों को स्केल करना, इनक्यूबेटरों का विविधीकरण, राज्य-स्तरीय क्षमताओं को सुदृढ़ करना और फ्रंटियर आर एंड डी में साहसिक निवेश करना।

रिपोर्ट विमोचन में उपस्थित थे:

  • डॉ. वी.के. सरस्वत, सदस्य, नीति आयोग

  • श्री संजय कुमार, सचिव, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग

  • डॉ. अभय करंडिकर, सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग

  • डॉ. राजेश गोखले, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग

  • डॉ. एम. रविचंद्रन, सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय

  • दीपक बगला, मिशन डायरेक्टर, अटल इनोवेशन मिशन (नीति आयोग)

  • डॉ. विवेक कुमार सिंह, वरिष्ठ सलाहकार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, नीति आयोग


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