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थल सेनाध्यक्ष ने स्वदेशी ‘एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल’ लॉन्च किया, -42°C तक करेगा प्रभावी कार्य

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नई दिल्ली- भारतीय सेना के थल सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल धीरज सेठ ने आज नई दिल्ली में स्वदेशी रूप से विकसित एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल का शुभारंभ किया। भारतीय सेना और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के संयुक्त प्रयास से विकसित यह विशेष ईंधन अत्यधिक ठंडे और दुर्गम क्षेत्रों में लड़ाकू एवं लॉजिस्टिक वाहनों की गतिशीलता, सुरक्षा और परिचालन क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगा। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सामान्य डीजल अत्यधिक कम तापमान में गाढ़ा हो जाता है और ईंधन फिल्टर को जाम कर देता है, जिससे ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों में वाहनों का संचालन प्रभावित होता है। एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल इस समस्या का समाधान करता है और माइनस 42 डिग्री सेल्सियस तक भी प्रभावी ढंग से कार्य करता है।

यह ईंधन BS-VI मानकों तथा IS 1460:2025 विनिर्देशों के अनुरूप है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे भारतीय सेना के मौजूदा वाहन बेड़े में बिना किसी इंजन संशोधन या पुनः अनुमोदन (Re-homologation) के सीधे उपयोग किया जा सकता है।

इस अवसर पर जनरल धीरज सेठ ने कहा कि XWG डीजल एक गेम-चेंजर स्वदेशी नवाचार है, जो अत्यधिक प्रतिकूल मौसम में सेना की गतिशीलता, परिचालन तत्परता और मिशन की विश्वसनीयता को नई मजबूती देगा। उन्होंने कहा कि इस ईंधन के उपयोग से कड़ाके की सर्दियों में वाहनों को चालू रखने के लिए अपनाए जाने वाले अतिरिक्त उपायों की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी, जिससे सैनिकों की सुरक्षा और मनोबल दोनों में वृद्धि होगी।

उन्होंने इस तकनीक को मात्र एक वर्ष में विकसित करने के लिए भारतीय सेना की टीम और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की सराहना की तथा विश्वास जताया कि भविष्य में भी इस तरह के सहयोग से विभिन्न परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष ईंधनों का विकास होगा।

सैन्य उपयोग के अलावा, XWG डीजल का लाभ ऊंचाई वाले और अत्यधिक ठंड वाले क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों को भी मिलेगा। इससे कठिन मौसम में संचालित वाहनों और उपकरणों की विश्वसनीयता, सुरक्षा और कार्यक्षमता में सुधार होगा।

यह स्वदेशी तकनीक भारत की रक्षा क्षमता को सशक्त बनाने के साथ-साथ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में नागरिक एवं सैन्य दोनों क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी।

सीएसआईआर ने आयोजित किया प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम, चार स्वदेशी तकनीकें उद्योगों को सौंपीं

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नई दिल्ली- वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने आज नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का आयोजन सीएसआईआर-केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (CSIR-CSIO), चंडीगढ़ द्वारा किया गया, जिसमें वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, प्रौद्योगिकी अपनाने वाले संस्थानों और अन्य प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।

इस अवसर पर चार स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का उद्योगों को हस्तांतरण, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आईओटी (IoT) आधारित जल सेवा वितरण, मापन एवं निगरानी प्रणाली का व्यावसायिक शुभारंभ तथा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), पंचकूला से स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन पर मिली रॉयल्टी का उल्लेख किया गया।

कार्यक्रम में सीएसआईआर की महानिदेशक एवं डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ सीएसआईआर-सीएसआईओ के निदेशक प्रो. शांतनु भट्टाचार्य, वरिष्ठ वैज्ञानिक, अधिकारी एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

प्रो. शांतनु भट्टाचार्य ने बताया कि इंडक्शन मोटर स्टेथोस्कोप (MSCOPE), पोर्टेबल एंड यूनिवर्सल मोटर-कम-पंप परफॉर्मेंस मॉनिटर (PU-MPPM) तथा आई-पावर क्वालिटी एनालाइज़र (IPQA) जैसी तकनीकों का लाइसेंस एम/एस पंप अकादमी प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु को दिया गया है। वहीं, एसयू-30 विमान के लिए हेड-अप डिस्प्ले (HUD) का ऑप्टिकल मॉड्यूल एवं बीम कंबाइनर असेंबली तकनीक भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), पंचकूला को हस्तांतरित की गई।

उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विकसित किफायती आईओटी आधारित जल सेवा वितरण, मापन एवं निगरानी प्रणाली के व्यावसायिक शुभारंभ की भी घोषणा की। यह प्रणाली जल की गुणवत्ता, मात्रा और सेवा वितरण की आधुनिक एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करेगी।

प्रो. भट्टाचार्य ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में BEL, पंचकूला से स्वदेशी सैन्य एवियोनिक्स तकनीकों—जिनमें हेड-अप डिस्प्ले (HUD), ड्रोग लाइट्स, टैक्सी लैंडिंग लाइट्स, HUD-I लेवल टेस्टर और बोरसाइट अलाइनमेंट टूल शामिल हैं—के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन के लिए 1.67 करोड़ रुपये की रॉयल्टी प्राप्त हुई है। उन्होंने इसे भारतीय उद्योग के साथ सीएसआईआर-सीएसआईओ की मजबूत साझेदारी और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण में उसके महत्वपूर्ण योगदान का प्रमाण बताया।

अपने संबोधन में डॉ. एन. कलैसेल्वी ने सफल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यावसायीकरण के लिए सीएसआईआर-सीएसआईओ की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीकों का सफल व्यावसायीकरण, अनुसंधान को उद्योग एवं समाज के लिए उपयोगी उत्पादों और प्रक्रियाओं में बदलने की दिशा में सीएसआईआर के मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने वैज्ञानिकों से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 'आत्मनिर्भर भारत' के विज़न के अनुरूप उद्योगोन्मुख अनुसंधान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का समापन सीएसआईआर-सीएसआईओ के बिजनेस डेवलपमेंट ग्रुप (BDG) के प्रमुख द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

भारतीय तटरक्षक बल के लिए चौथे नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) की कील रखी गई

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मुंबई- भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के लिए बनाए जा रहे छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) में से चौथे पोत की कील रखने (Keel Laying) की रस्म आज मुंबई में संपन्न हुई। यह पोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया जा रहा है।

अत्याधुनिक मशीनरी और आधुनिक प्रणालियों से लैस यह पोत आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश की स्वदेशी रक्षा एवं समुद्री निर्माण क्षमताओं को और मजबूत करेगा। यह परियोजना भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता बढ़ाने और तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

समारोह में भारतीय तटरक्षक बल और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि इन छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स के निर्माण का अनुबंध 20 दिसंबर 2023 को संपन्न हुआ था।

इन अत्याधुनिक पोतों के शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, तटीय सुरक्षा और समुद्री कानून प्रवर्तन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही, यह परियोजना भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


आत्मनिर्भर भारत को बड़ी मजबूती: भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर खरीदेगा रक्षा मंत्रालय

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना की क्षमताओं को और मजबूत करने तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए पुणे स्थित भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ लगभग 425 करोड़ रुपये की लागत से 12 सेट 1.25 मेगावाट मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर की खरीद का अनुबंध किया है।

यह अनुबंध नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के तहत हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना में कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश में रक्षा उत्पादन का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर आधुनिक युद्धपोतों में विद्युत उत्पादन का प्रमुख स्रोत होते हैं। ये जनरेटर नौसेना के महत्वपूर्ण लड़ाकू प्रणालियों, उन्नत हथियारों और अत्याधुनिक सेंसरों को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसलिए इन्हें नौसैनिक युद्धक क्षमताओं की रीढ़ माना जाता है।

इस अनुबंध के माध्यम से भारत में पहली बार बड़े पैमाने पर मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर के स्वदेशी निर्माण की क्षमता विकसित होगी। साथ ही, उपकरणों के पूरे जीवनचक्र (Life-Cycle) के दौरान रखरखाव और तकनीकी सहायता भी देश में ही उपलब्ध होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय नौसेना की परिचालन तैयारियों को बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।



भारतीय तटरक्षक बल में स्वदेशी एयर कुशन वाहन (होवरक्राफ्ट) शामिल, समुद्री सुरक्षा को मिलेगा बल

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भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के लिए चौगुले एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित छह स्वदेशी एयर कुशन वाहनों (ACVs)/होवरक्राफ्ट में से पहले वाहन को 18 जून 2026 को गोवा में सेवा में शामिल किया गया।

यह होवरक्राफ्ट समुद्री सुरक्षा, निगरानी, खोज एवं बचाव अभियानों सहित विभिन्न समुद्री दायित्वों में भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाएगा तथा उभरती चुनौतियों का सामना करने की उसकी क्षमता को मजबूत करेगा।

इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म का शामिल होना आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के साथ-साथ देश के समुद्री औद्योगिक आधार की बढ़ती क्षमता और मजबूती का भी प्रतीक है।

इस अवसर पर आयोजित समारोह में भारतीय तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारी तथा जहाज निर्माण उद्योग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह शामिलीकरण संगठन द्वारा आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि पर दिए जा रहे निरंतर जोर को दर्शाता है, जिससे देश के समुद्री हितों की सुरक्षा के उसके दायित्व को और सशक्त बनाया जा सके।

भारतीय तटरक्षक बल के लिए छह एयर कुशन वाहनों की खरीद का अनुबंध रक्षा मंत्रालय और चौगुले एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के बीच 24 अक्टूबर को हस्ताक्षरित किया गया था। इन स्वदेशी होवरक्राफ्टों के शामिल होने से तटरक्षक बल की तटीय एवं समुद्री क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया और निगरानी क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भारत में स्वदेशी टाइप-IV CNG कंपोजिट सिलेंडर निर्माण सुविधा स्थापित करने हेतु TDB और NTF Energy Solutions के बीच समझौता

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भारत सरकार के स्वच्छ ऊर्जा गतिशीलता को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने तथा आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत स्वदेशी विनिर्माण को सशक्त करने के दृष्टिकोण के अनुरूप, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार ने दिल्ली स्थित M/s NTF Energy Solutions Private Limited के साथ “टाइप-IV CNG सिलेंडर के व्यावसायीकरण हेतु विनिर्माण सुविधा की स्थापना” नामक परियोजना के लिए एक समझौता किया है।

इस परियोजना का उद्देश्य उन्नत विनिर्माण सुविधा स्थापित करना है, जिसके माध्यम से अत्याधुनिक फिलामेंट वाइंडिंग, ब्लो मोल्डिंग और उच्च-दबाव परीक्षण तकनीकों का उपयोग कर स्वदेशी रूप से विकसित टाइप-IV कंपोजिट CNG सिलेंडरों का उत्पादन और व्यावसायीकरण किया जाएगा। यह पहल स्वच्छ परिवहन और उभरते ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए उन्नत गैस भंडारण प्रणालियों में भारत की घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

टाइप-IV कंपोजिट सिलेंडर पारंपरिक इस्पात सिलेंडरों का अगली पीढ़ी का विकल्प हैं, जो लगभग 75% तक वजन में कमी प्रदान करते हैं, जिससे वाहन की दक्षता बढ़ती है और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है। इन सिलेंडरों में जंग-रोधी पॉलिमर लाइनर, अनुकूलित CFRP ले-अप और उन्नत मैकेनिकल लॉकिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है, जो सुरक्षा, टिकाऊपन तथा रिसाव, कंपन और दबाव चक्रों के प्रति प्रतिरोध को बढ़ाते हैं। इनका डिज़ाइन 600 बार से अधिक बर्स्ट प्रेशर प्राप्त करता है, जो नियामक मानकों से काफी अधिक है और संचालन सुरक्षा को मजबूत बनाता है।

यह तकनीक NTF Energy Solutions Pvt. Ltd. द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित की गई है और इसे भारत के तेजी से बढ़ते CNG मोबिलिटी इकोसिस्टम को समर्थन देने के लिए डिजाइन किया गया है। यह परियोजना सरकार के स्वच्छ परिवहन, स्वच्छ ईंधन और उन्नत मोबिलिटी घटकों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।

प्रस्तावित सुविधा स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल और उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं का उपयोग कर उच्च-दबाव कंपोजिट सिलेंडरों के लिए एक लागत-प्रतिस्पर्धी और भविष्य-उन्मुख उत्पादन प्रणाली विकसित करेगी। यह परियोजना आयात प्रतिस्थापन, तकनीकी आत्मनिर्भरता और देश में एक मजबूत स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

इस अवसर पर TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा, “उन्नत टाइप-IV कंपोजिट सिलेंडरों का विकास और व्यावसायीकरण भारत के स्वच्छ गतिशीलता ढांचे और स्वदेशी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। NTF Energy Solutions को TDB का समर्थन सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह सतत परिवहन, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत में योगदान देने वाली अगली पीढ़ी की तकनीकों को सक्षम बना रही है।”

NTF Energy Solutions Pvt. Ltd. के प्रबंध निदेशक नवीन जैन और निदेशक नमन जैन ने TDB के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सहायता स्वदेशी हल्के कंपोजिट सिलेंडर तकनीकों के व्यावसायीकरण को तेज करेगी, जिससे कंपनी भारत के स्वच्छ और अधिक दक्ष गतिशीलता समाधान की दिशा में संक्रमण में योगदान दे सकेगी।

भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण और घरेलू क्षमता निर्माण पर जोर: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा, “भारत महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण को तेजी से बढ़ाने, स्टार्टअप-प्रधान खनन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने और आयात निर्भरता कम करने के लिए मजबूत घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण कर रहा है।”




यह बात उन्होंने “नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट” (NMET) के संचालन निकाय की बैठक में जीपीओए कॉम्प्लेक्स में कही। बैठक की सह-अध्यक्षता कोल और खनन मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री एवं NMET के संचालन निकाय के अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी ने की। बैठक में खनन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, CSIR–इंस्टीट्यूट ऑफ मिनरल्स एंड मैटीरियल्स टेक्नोलॉजी (CSIR–IMMT) के निदेशक, एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टोरेट के निदेशक, परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रतिनिधि, अन्वेषण एजेंसियों के अधिकारी और राजस्थान, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि विशेष रूप से लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण की गति को वैश्विक मांग और भारत की रणनीतिक आवश्यकताओं के अनुरूप रखना जरूरी है। उन्होंने राजस्थान के सिवाना बेल्ट और जम्मू एवं कश्मीर के सलाल–हाइमना ब्लॉक में चल रहे कार्यों का उल्लेख किया और अधिक संभावित क्षेत्रों में स्वदेशी अन्वेषण प्रयासों को बढ़ाने का आह्वान किया।

मंत्री ने कहा कि भारत में कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खनन और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में प्रवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाना आवश्यक है। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की सफलता का हवाला देते हुए कहा कि इसी तरह की संस्थागत मदद, लक्षित प्रोत्साहन और मार्गदर्शन खनन तकनीकों और अन्वेषण विधियों में नवाचार को सक्षम कर सकते हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि निजी अन्वेषण एजेंसियों में क्षमता निर्माण दीर्घकालिक विकास के लिए अनिवार्य है। उन्होंने नोटिफाइड प्राइवेट एक्सप्लोरेशन एजेंसियों (NPEAs) की भूमिका को मजबूत करने, तकनीक और वित्त तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करने और परियोजना अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया।

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मंत्री ने आगे कहा कि तेजी से अनुमोदन, बेहतर खरीद प्रणालियाँ और समय पर प्री-एक्सप्लोरेशन क्लियरेंस अन्वेषण गतिविधियों में गति बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं में वन स्वीकृतियों से संबंधित मुद्दे समयसीमा पर प्रभाव डालते हैं और इन्हें हल करने के लिए समन्वित प्रयासों की जरूरत है।

स्थानीय भागीदारी पर उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में अन्वेषण चल रहा है, वहां निर्वाचित प्रतिनिधियों जैसे सांसद और विधायक को जोड़ा जा सकता है। इससे स्थानीय समुदाय में जागरूकता बढ़ेगी और परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एंड-टू-एंड घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास आवश्यक है, जिसमें प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन शामिल हैं। उन्होंने महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात में प्रसंस्करण क्षमता स्थापित करने के प्रयासों का उल्लेख किया, जो भारत की वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में स्थिति को मजबूत करेंगे।

मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से उन्नत तकनीकों और विशेषज्ञता तक पहुँच बनाई जा सकती है, जबकि CSIR–IMMT और परमाणु ऊर्जा विभाग जैसी संस्थाओं के माध्यम से स्वदेशी तकनीक विकास पर ध्यान बनाए रखना चाहिए।

बैठक के दौरान NMET की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने वार्षिक योजनाओं, परियोजना अनुमोदन, वित्तीय सहायता और संस्थागत तंत्र पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि NMET को नवाचार का समर्थन जारी रखना चाहिए, अन्वेषण एजेंसियों को सक्षम बनाना चाहिए, राज्यों को प्रोत्साहित करना चाहिए और महत्वपूर्ण खनिजों की वसूली के लिए पायलट परियोजनाओं को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है ताकि वे खनिज विकास के दीर्घकालिक लाभ को समझ सकें।

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इस अवसर पर जी. किशन रेड्डी ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज भारत के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे और उनके अन्वेषण को प्राथमिकता देने, तेज नीलामी प्रक्रिया सुनिश्चित करने और राज्यों व निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता है।

खनन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने NMET की गतिविधियों की प्रगति, स्टार्टअप पहल, परियोजना अनुमोदन तंत्र और समन्वय व दक्षता बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी।

हवाई बल परीक्षण पायलट स्कूल (AFTPS) में 1st टेस्ट कोर्स (अनमंडेड एरियल सिस्टम्स) और 25वें प्रोडक्शन टेस्ट पायलट कोर्स का समापन समारोह

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19 दिसंबर 2025 को एयरक्राफ्ट और सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट (ASTE) के एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल में 1st टेस्ट कोर्स (Unmanned Aerial Systems) [1TC(UAS)] और 25वें प्रोडक्शन टेस्ट पायलट (PTP) कोर्स का समापन समारोह आयोजित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि एयर मार्शल KAA संजीब, VSM, डायरेक्टर जनरल (एयरक्राफ्ट) थे। समारोह में IAF, DRDO, HAL, सोसाइटी ऑफ एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट्स (SETP) और सोसाइटी ऑफ फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर्स (SFTE) के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र अधिकारियों को ट्रॉफी प्रदान की गई। स्नातक PTP और TC (UAS) कोर्स अधिकारी उन अधिकारियों में शामिल हैं जो उत्पादन विमान के परीक्षण उड़ानों और स्वदेशी अनमंडेड एरियल सिस्टम्स के विकास के तहत परीक्षण गतिविधियों में भाग लेंगे। यह रक्षा एयरोस्पेस में ‘आत्मनिर्भरता’ प्रयासों को गति देगा।

एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल (AFTPS), ASTE के अधीनस्थ, देश में एकमात्र संस्था है जो फिक्स्ड-विंग, रोटरी-विंग और अनमंडेड एरियल सिस्टम्स के लिए एक्सपेरिमेंटल और प्रोडक्शन फ्लाइट टेस्ट क्रू को प्रशिक्षित करती है। वर्षों में AFTPS ने उच्च प्रशिक्षित टेस्ट क्रू तैयार किए हैं, जिन्होंने न केवल भारत की रक्षा एयरोनॉटिकल परियोजनाओं में बल्कि अंतरिक्ष परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें प्रतिष्ठित गगनयान प्रोग्राम शामिल है। इसने मित्र देशों के अधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया है। अब तक AFTPS से कुल 47 फ्लाइट टेस्ट कोर्स, 24 प्रोडक्शन टेस्ट पायलट कोर्स और 4 RPA टेस्ट कोर्स के अधिकारी स्नातक हो चुके हैं।

यह उल्लेखनीय है कि AFTPS विश्व के कुछ मान्यता प्राप्त टेस्ट पायलट स्कूलों में से एक है, जिसके काम और स्थिति को अंतरराष्ट्रीय निकायों जैसे SETP, SFTE और एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा मान्यता प्राप्त है।


टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड ने स्वदेशी EV चार्जर्स के व्यावसायीकरण हेतु Electrowaves Electronics को दी वित्तीय सहायता

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टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने हिमाचल प्रदेश के परवाणू स्थित M/s Electrowaves Electronics Pvt. Ltd. को स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित ईवी चार्जर्स के व्यावसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। यह कदम स्वच्छ गतिशीलता और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को सुदृढ़ करते हुए विदेशी आयात पर निर्भरता कम करेगा और देश में इलेक्ट्रिक परिवहन के प्रसार को गति देगा।

कंपनी द्वारा विकसित तकनीक में शामिल हैं:

  • 30–240 kW श्रेणी के DC फास्ट चार्जर्स

  • 15 kW और 30 kW पावर कनवर्टर मॉड्यूल (100–1000 VDC आउटपुट, 100A अधिकतम करंट)

  • PLC कम्युनिकेशन कंट्रोलर (DIN SPEC 70121 के अनुरूप, ISO 15118 के आंशिक अनुरूप)

  • OCPP कंट्रोलर (OCPP 1.6J एवं OCPP 2.0.1 के अनुरूप)

  • यूनिवर्सल DC चार्ज कंट्रोलर और पूर्ण HMI डिज़ाइन

  • घरेलू एवं सार्वजनिक उपयोग हेतु AC टाइप-2 चार्जर्स

TDB का यह सहयोग भारत में उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के उत्पादन को बढ़ावा देगा, जिससे स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और EV सेक्टर में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिलेगी।

TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि कंपनी का यह प्रयास नवाचार-आधारित आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा, सतत औद्योगिक विकास और स्वच्छ गतिशीलता की दिशा में देश के प्रयासों को गति प्रदान करेगी।

Electrowaves Electronics Pvt. Ltd. के प्रमोटर्स ने इस सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उनकी निर्माण क्षमता को विस्तार देने और भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में महत्वपूर्ण योगदान देने में मदद करेगा।

यह पहल मेकिन इंडिया को बढ़ावा देने, स्वदेशी तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने और अगली पीढ़ी की परिवहन प्रणालियों में घरेलू क्षमताओं को सुदृढ़ करने की TDB की निरंतर प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है।

सी-डॉट और NAM InfoCom ने मिशन क्रिटिकल कम्युनिकेशन सिस्टम (MCX) विकास के लिए किया समझौता

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भारत की संचार तकनीक में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) ने NAM InfoCom Pvt. Ltd. के साथ मिशन क्रिटिकल कम्युनिकेशन सिस्टम (MCX) समाधान के संयुक्त विकास के लिए समझौता किया। यह सहयोग सार्वजनिक सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए देश की स्वदेशी संचार अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

C-DOT के MCX एलायंस के तहत, देश में MCX इकोसिस्टम विकसित करने के लिए 10 विभिन्न संगठनों, विशेषकर स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी की जा रही है। इस साझेदारी का उद्देश्य पूर्ण रूप से स्वदेशी MCX समाधान विकसित करना है, जो मिशन क्रिटिकल पुश-टू-टॉक (MCPTT), मिशन क्रिटिकल डेटा (MCData), और मिशन क्रिटिकल वीडियो (MCVideo) सेवाओं का समर्थन करेगा।

NAM InfoCom द्वारा विकसित MC वीडियो समाधान, C-DOT के मौजूदा MCX सिस्टम के साथ सहज एकीकरण और इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करेगा। इस सहयोग में, C-DOT अपनी टेलीकॉम आर एंड डी और सिस्टम डिज़ाइन विशेषज्ञता प्रदान करेगा, जबकि NAM InfoCom सिस्टम इंटीग्रेशन, तैनाती और विभिन्न परिचालन परिदृश्यों के लिए अनुकूलन में योगदान देगा।

MC वीडियो समाधान की प्रमुख विशेषताएँ:

  • मल्टी-स्ट्रीम क्षमताओं का समर्थन

  • रिकॉर्डिंग फीचर

  • एक साथ कई समूह/वन-टू-वन वीडियो कॉल का समर्थन

  • 4G/5G नेटवर्क के तहत कम विलंब (low latency) और कम बैंडविड्थ

  • आपातकालीन और आपदा प्रबंधन, कानून और रक्षा संचालन में विशेष उपयोग

C-DOT के CEO डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा, “आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत, C-DOT स्टार्टअप्स के माध्यम से स्वदेशी सहकारी तकनीकी विकास को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है। यह पहल पहले प्रतिक्रिया देने वालों, रक्षा बलों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुरक्षा संगठनों के लिए सुरक्षित, भरोसेमंद और वास्तविक समय संचार समाधान सुनिश्चित करने का हिस्सा है।”

समझौते पर डॉ. राजकुमार उपाध्याय (CEO, C-DOT), शिखा Srivastava (EVP, C-DOT) और डी. अरुणन (Director, NAM InfoCom) की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

C-DOT के बारे में:

C-DOT भारत का प्रमुख टेलीकॉम R&D केंद्र है, जो देश की रणनीतिक और सामाजिक-आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्नत संचार तकनीकों के डिज़ाइन, विकास और तैनाती में सक्रिय है। C-DOT ने C-DOT Collaborative Research Program (CCRP) शुरू किया है ताकि उद्योग, अकादमिक संस्थानों, स्टार्टअप्स और अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी में टेलीकॉम तकनीकों का विकास किया जा सके।

NAM InfoCom Pvt. Ltd. के बारे में:

NAM InfoCom संचार अवसंरचना, मिशन-क्रिटिकल प्लेटफॉर्म, सिस्टम इंटीग्रेशन और सरकारी, रक्षा, सार्वजनिक क्षेत्र और एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए अनुकूलित IT समाधान में विशेषज्ञता रखने वाली कंपनी है। कंपनी में कॉन्वर्सेशनल AI और AI-ड्रिवन संचार समाधानों में भी मजबूत क्षमताएँ हैं।


स्वदेशी तकनीक से बना भारत का गर्व: राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत विकसित तीन अत्याधुनिक ऊष्मा परीक्षण उपकरण

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राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM), जो वस्त्र मंत्रालय की एक पहल है, ने सुरक्षात्मक वस्त्रों की संवहनीय (Convective), विकिरणीय (Radiant) और संपर्कीय (Conductive) ऊष्मा प्रतिरोध क्षमता जांचने के लिए तीन स्वदेशी उपकरण विकसित करने में सफलता प्राप्त की है। यह अभिनव परियोजना उत्तरी भारत वस्त्र अनुसंधान संघ (NITRA) द्वारा विकसित की गई है और भारत के तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में आत्मनिर्भर परीक्षण क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

NTTM द्वारा प्रायोजित इस परियोजना का शीर्षक “Indigenously Developed State of the Art Instruments to Test Convective, Radiant, and Conductive Properties of Protective Textiles” है, जिसके तहत तीन अत्याधुनिक परीक्षण प्रणालियों का विकास किया गया है —

  • Convective Heat Tester (ISO 9151)


  • Radiant Heat Tester (ISO 6942)


  • Contact (Conductive) Heat Tester (IS 12127)


ये उपकरण अग्निशामक परिधानों, औद्योगिक सुरक्षात्मक वस्त्रों और रक्षा अनुप्रयोगों में प्रयुक्त सामग्रियों की ऊष्मा प्रतिरोध क्षमता का मूल्यांकन करने में सक्षम हैं, जहाँ ऊष्मा से सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

इन उपकरणों को पूरी तरह से स्वदेशी डिज़ाइन और तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया है। ये प्रदर्शन के लिहाज से आयातित उपकरणों के बराबर हैं, लेकिन लागत में काफी सस्ते हैं — जहाँ आयातित मॉडलों की कीमत ₹15–40 लाख तक होती है, वहीं ये स्वदेशी उपकरण केवल ₹5–10 लाख की लागत में उपलब्ध हैं। कम कीमत और त्वरित उपलब्धता के कारण अब अधिक संस्थान और उद्योग उच्च गुणवत्ता वाले परीक्षण का लाभ उठा सकेंगे।

इस तकनीक को वाणिज्यिक उपयोग के लिए गाजियाबाद स्थित एम/एस एशियन टेस्ट इक्विपमेंट प्रा. लि. को स्थानांतरित किया गया है, जो “मेक इन इंडिया” पहल के अनुरूप है। ये उपकरण पहले ही कानपुर स्थित एम/एस ऐस इन्कॉर्पोरेशन और सीएफईईएस, डीआरडीओ, दिल्ली में स्थापित और प्रमाणित किए जा चुके हैं, तथा अब ट्रेड इंडिया, इंडियामार्ट, और अलीबाबा जैसे प्लेटफॉर्म्स पर वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध हैं।

स्वदेशी उपकरणों की उपलब्धता के बाद परीक्षण की अवधि लगभग 30 दिनों से घटकर केवल 3–5 दिन रह गई है और परीक्षण लागत भी ₹25,000–₹40,000 प्रति सैंपल से घटकर ₹6,000–₹10,000 रह गई है, जिससे भारतीय निर्माताओं और अनुसंधान संस्थानों के लिए परीक्षण सुविधा अधिक सुलभ हो गई है।

सीएफईईएस, डीआरडीओ जैसी संस्थाओं ने इन उपकरणों के प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त किया है। NITRA के अनुसार, इन उपकरणों को आयातित प्रणालियों के दीर्घकालीन अनुभव और फील्ड स्टडी के आधार पर विकसित किया गया है ताकि वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सके।

NTTM द्वारा वित्तपोषित इस परियोजना की सफल पूर्णता भारत के तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है। यह परियोजना नवाचार, स्थिरता और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।

भारतीय नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी सर्वे पोत ‘इक्षाक’, समुद्री सर्वेक्षण क्षमता को मिलेगा नया बल

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भारतीय नौसेना अपनी हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण क्षमता को और सुदृढ़ करने जा रही है, क्योंकि ‘इक्षाक’ (Ikshak) — सर्वे वेसल (लार्ज) [SVL] वर्ग का तीसरा पोत और दक्षिणी नौसेना कमान में तैनात होने वाला पहला पोत — नौसेना में शामिल किया जा रहा है। इस पोत को 06 नवम्बर 2025 को नौसेना बेस, कोच्चि में आयोजित एक समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की उपस्थिति में औपचारिक रूप से नौसेना में कमीशन किया जाएगा।

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड, कोलकाता द्वारा निर्मित यह पोत भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें 80% से अधिक स्वदेशी उपकरण और सामग्री का उपयोग किया गया है, जो GRSE और भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के बीच प्रभावी सहयोग को दर्शाता है।

‘इक्षाक’ नाम का अर्थ संस्कृत में ‘मार्गदर्शक (Guide)’ है, जो इस पोत की भूमिका को पूरी तरह परिभाषित करता है — सटीकता और उद्देश्य का प्रहरी। यह पोत बंदरगाहों, हार्बरों और नौवहन चैनलों के तटीय और गहरे जल में पूर्ण पैमाने पर हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने के लिए डिजाइन किया गया है। एकत्र किए गए आंकड़े समुद्री नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारत की समुद्री सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायक होंगे।

इस पोत में अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक और ओशनोग्राफिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनमें हाई-रेज़ोल्यूशन मल्टी-बीम इको साउंडर, ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV), रीमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) और चार सर्वे मोटर बोट्स (SMBs) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पोत में हेलीकॉप्टर डेक भी है, जो इसकी परिचालन सीमा को बढ़ाता है और बहु-आयामी मिशनों को संभव बनाता है।

‘इक्षाक’ का कमीशन भारतीय नौसेना के सर्वेक्षण और चार्टिंग ढांचे को सशक्त बनाने के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह पोत स्वदेशी सामर्थ्य, तकनीकी उत्कृष्टता और समुद्री नेतृत्व का प्रतीक है। अब ‘इक्षाक’ राष्ट्र की सेवा के लिए तत्पर है — अज्ञात समुद्री सीमाओं को मानचित्रित करने और भारत के विशाल समुद्री सीमांतों की रक्षा करने के लिए।


32,000 फीट से सफल कॉम्बैट फ्रीफॉल जंप: DRDO ने विकसित किया स्वदेशी मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम (MCPS)

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम (MCPS) ने हाल ही में 32,000 फीट की ऊंचाई से कॉम्बैट फ्रीफॉल जंप का सफल प्रदर्शन किया है। यह छलांग भारतीय वायु सेना (IAF) के परीक्षण जम्परों द्वारा की गई, जिसने इस स्वदेशी प्रणाली की दक्षता, विश्वसनीयता और उन्नत डिज़ाइन को प्रदर्शित किया। इस उपलब्धि के साथ, MCPS भारतीय सशस्त्र बलों में उपयोग में आने वाली ऐसी एकमात्र पैराशूट प्रणाली बन गई है, जो 25,000 फीट से अधिक ऊंचाई से तैनाती में सक्षम है।


यह प्रणाली DRDO की दो प्रयोगशालाओं —

  • एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE), आगरा, और

  • डिफेंस बायोइंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रोमेडिकल लेबोरेटरी (DEBEL), बेंगलुरु
    द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है।

MCPS में कई उन्नत सामरिक विशेषताएं शामिल हैं, जैसे कि कम अवतरण दर (lower rate of descent) और बेहतर स्टीयरिंग क्षमता। इससे पैरा ट्रूपर्स को विमान से सुरक्षित रूप से बाहर निकलने, निर्धारित ऊंचाई पर पैराशूट खोलने, सटीक नेविगेशन करने और निर्धारित ज़ोन पर सुरक्षित लैंडिंग करने की सुविधा मिलती है।

यह प्रणाली Navigation with Indian Constellation (NavIC) के साथ संगत है, जिससे यह किसी भी विरोधी देश के विरुद्ध स्वतंत्र रूप से उपयोग की जा सकती है और बाहरी हस्तक्षेप या सेवा बाधा (interference/denial of service) से सुरक्षित रहती है।

इस सफलता ने स्वदेशी पैराशूट प्रणालियों के सेना में शीघ्र समावेशन (induction) का मार्ग प्रशस्त किया है। इससे उपकरण की रखरखाव और मरम्मत में लगने वाला समय न्यूनतम रहेगा और विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होगी, विशेष रूप से युद्ध या संघर्ष के समय में।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, सशस्त्र बलों और उद्योग जगत को इस सफलता पर बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस उपलब्धि में शामिल DRDO टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि एरियल डिलीवरी सिस्टम्स में आत्मनिर्भरता (self-reliance) की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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