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राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी उपलब्धि : जिला अस्पतालों में बढ़ी जटिल ऑपरेशन की क्षमता

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सूरजपुर जिला चिकित्सालय में 6 सफल टोटल हिप रिप्लेसमेंट ऑपरेशन, मरीजों को अब नहीं जाना पड़ेगा बड़े शहर

रायपुर- छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकेंद्रीकरण और जिला अस्पतालों को आधुनिक चिकित्सा सेवाओं से सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। सूरजपुर जिला चिकित्सालय ने सफलतापूर्वक 6 टोटल हिप रिप्लेसमेंट (टीएचआर) ऑपरेशन कर यह साबित किया है कि अब जटिल अस्थि शल्य चिकित्सा जैसी अत्याधुनिक सेवाएं भी जिला स्तर पर उपलब्ध हो रही हैं।

इस उपलब्धि से न केवल सूरजपुर बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को भी राहत मिलेगी। अब उन्हें महंगे इलाज के लिए रायपुर या अन्य बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे मरीजों का समय, धन और अनावश्यक परेशानी तीनों की बचत होगी।

सीएमएचओ डॉ. कपिल देव पैकरा और सिविल सर्जन डॉ. अजय मरकाम के नेतृत्व में अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय साहू एवं डॉ. अमन गुप्ता ने इन जटिल शल्यक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विकास भगत और डॉ. अनिल कुमार ने भी ऑपरेशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस उपलब्धि में नर्सिंग एवं ऑपरेशन थिएटर की पूरी टीम का भी उल्लेखनीय योगदान रहा। समर्पित टीमवर्क और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के कारण सभी ऑपरेशन सफल रहे।

ऑपरेशन के बाद सभी मरीज स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में तेजी से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार द्वारा जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक उपकरणों और बेहतर स्वास्थ्य अधोसंरचना पर किए जा रहे निवेश का सकारात्मक परिणाम अब आम नागरिकों तक पहुंच रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिला अस्पतालों में टीएचआर जैसी जटिल शल्य चिकित्सा की उपलब्धता से विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इससे गंभीर अस्थि रोगों के उपचार की पहुंच बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।

सीएमएचओ डॉ. कपिल देव पैकरा ने पूरी चिकित्सा टीम, नर्सिंग स्टाफ एवं सहयोगी कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि भविष्य में भी जिला चिकित्सालय सूरजपुर में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार किया जाएगा, ताकि प्रदेश के नागरिकों को अपने जिले में ही बेहतर और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो सके।

देहरादून में स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने संबोधित किया

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज देहरादून स्थित स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा पूरी करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है और यह सेवा व जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत भी है।

मंत्री नड्डा ने छात्रों से चिकित्सा पेशे के उच्चतम आदर्शों को अपनाने, निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने और मानवता की सेवा में अपने ज्ञान और कौशल को समर्पित करने का आह्वान किया।

उन्होंने पिछले 11 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई बड़ी प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में AIIMS की संख्या 6 से बढ़कर 23 हो गई है। उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव दर लगभग 89% तक पहुँच गई है, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है, और भारत ने वैश्विक औसत से तेज़ी से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की है।

केंद्रीय मंत्री ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान, आयुष्मान भारत योजना, आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च में कमी, टीबी और मलेरिया नियंत्रण, तथा 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना जैसी उपलब्धियों को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की असली ताकत समर्पित और संवेदनशील चिकित्सा पेशेवरों में निहित है।



मेडिकल वैल्यू ट्रैवल में भारत की वैश्विक उड़ान: आयुष आधारित समग्र स्वास्थ्य से बढ़ता अंतरराष्ट्रीय विश्वास

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भारत मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) के क्षेत्र में तेजी से उभरते हुए वैश्विक गंतव्यों में शामिल हो रहा है। विश्वस्तरीय चिकित्सा अवसंरचना, अत्यधिक कुशल स्वास्थ्य पेशेवरों, किफायती उपचार लागत और आयुष आधारित पारंपरिक व समग्र स्वास्थ्य प्रणालियों की विशिष्ट शक्ति के साथ भारत आज अंतरराष्ट्रीय रोगियों के लिए एक भरोसेमंद और आकर्षक स्वास्थ्य केंद्र बनता जा रहा है।

जटिल शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं से लेकर दीर्घकालिक वेलनेस थैरेपी तक, भारत एक एकीकृत स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करता है। यहां वैश्विक मानकों के अनुरूप अस्पतालों में अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा उपचार किया जाता है, वहीं आयुष प्रणालियां—आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी—रोकथाम, पुनर्वास और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती हैं।

वन अर्थ, वन हेल्थ – एडवांटेज हेल्थकेयर इंडिया 2023 में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था कि “भारत मेडिकल वैल्यू ट्रैवल और हेल्थ वर्कफोर्स मोबिलिटी को स्वस्थ ग्रह के लिए महत्वपूर्ण मानता है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत की प्राचीन परंपराएं—योग, ध्यान, आयुर्वेद और मोटे अनाज आधारित पारंपरिक आहार—आज की जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और तनाव से निपटने में दुनिया को समाधान प्रदान करती हैं।

वैश्विक विश्वास और गुणवत्ता आश्वासन को और सुदृढ़ करने के लिए प्रधानमंत्री ने 19 दिसंबर 2025 को भारत मंडपम में आयोजित द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के दौरान ‘आयुष क्वालिटी मार्क’ का शुभारंभ किया। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणन ढांचा आयुष उत्पादों और सेवाओं में विश्वसनीयता और मानकीकरण को बढ़ाता है।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि भारत की ताकत उसकी एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली में है। “मेडिकल वैल्यू ट्रैवल केवल किफायत नहीं, बल्कि विश्वास, गुणवत्ता और परिणामों से जुड़ा है। आयुष प्रणालियां पारंपरिक चिकित्सा के साथ मिलकर समग्र स्वास्थ्य समाधान प्रदान करती हैं,” उन्होंने कहा।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि के लिए मानकीकरण और विश्वसनीयता को अहम बताया। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता आश्वासन, डिजिटल सुविधा और वैश्विक मानकों के माध्यम से भारत एक भरोसेमंद वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में स्थापित हो रहा है।

आंकड़े इस बढ़ती प्रवृत्ति की पुष्टि करते हैं। 2020 में 1.82 लाख अंतरराष्ट्रीय मरीजों की तुलना में 2024 में 6.44 लाख विदेशी मरीज भारत आए। योग, आयुर्वेद और वेलनेस आधारित उपचार इस वृद्धि के प्रमुख आधार बने हैं।

भारत की मेडिकल वैल्यू ट्रैवल नीति में सार्वजनिक–निजी भागीदारी, चिकित्सा अवसंरचना में 100% एफडीआई, चिकित्सा सेवाओं के निर्यात को प्रोत्साहन और वैश्विक आउटरीच की अहम भूमिका रही है। आयुष आधारित मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को बढ़ावा देने के लिए 27 जुलाई 2023 को आयुष वीज़ा की शुरुआत की गई, जिससे विदेशी रोगियों और उनके परिजनों को उपचार के लिए सुविधा मिली।

मानकीकरण की दिशा में, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के लिए ISO 22525 को अपनाया है। साथ ही, लगभग 27 बीमा कंपनियां अब आयुष उपचारों को कवर कर रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मरीजों का भरोसा और बढ़ा है।

आयुष मंत्रालय ने मुंबई (2024) और चेन्नई (2025) में आयोजित वैश्विक सम्मेलनों के माध्यम से मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को प्रमुख विषय के रूप में आगे बढ़ाया है। कौशल विकास के लिए हेल्थ सेक्टर स्किल काउंसिल के तहत आयुष उप-परिषद की स्थापना की गई, जिसके अंतर्गत अब तक 37,000 से अधिक लोगों को प्रमाणित किया जा चुका है।

नीतिगत समर्थन, वीज़ा सुविधा, बीमा कवरेज और गुणवत्ता मानकों के समन्वय के साथ, भारत की मेडिकल वैल्यू ट्रैवल यात्रा अब केवल लागत लाभ तक सीमित नहीं रही, बल्कि एकीकृत, समग्र और प्रमाण-आधारित वैश्विक स्वास्थ्य विश्वास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह: स्वास्थ्य और फार्मा में AI का विवेकपूर्ण उपयोग और निजी क्षेत्र के सहयोग से भारत बनेगा वैश्विक हेल्थकेयर हब

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नई दिल्ली- विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज जोर देकर कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का विवेकपूर्ण उपयोग स्वास्थ्य और फार्मा क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो सकता है। उन्होंने उभरती जैवप्रौद्योगिकी और जीन थेरेपी परियोजनाओं में निजी क्षेत्र के साथ सरकार के मजबूत सहयोग पर भी प्रकाश डाला।

कन्फेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री (CII) फार्मा एवं लाइफ साइंसेज समिट 2025 में संबोधन करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबसे बड़ी परिवर्तन यह है कि सरकार उद्योग तक समान उत्साह के साथ पहुँचती है, जो पूरे सरकारी और उद्योग दृष्टिकोण को दर्शाता है।

मंत्री ने बताया कि AI अब केवल विकल्प नहीं बल्कि निदान, दवा खोज और स्वास्थ्य सेवा वितरण में एक आवश्यक उपकरण बन गया है। हालांकि, इसका उपयोग मानव-केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा, “वास्तविक चुनौती यह है कि हम AI को इस तरह एक हाइब्रिड मॉडल में एकीकृत करें जो तकनीक और मानवीय सहानुभूति का संतुलन बनाए।”

स्वास्थ्य नवाचार के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि AI-आधारित निदान मॉडल अब कल्चर परीक्षण का समय दिनों से मिनटों तक घटा रहे हैं, और AI संचालित टेलीमेडिसिन परियोजनाएँ स्थानीय बोलियों में दूरदराज के गांवों तक चिकित्सा सेवाओं का विस्तार कर रही हैं, जिससे रोगियों का आत्मविश्वास और परिणाम दोनों बेहतर हो रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की बढ़ती वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षमताओं को उजागर करते हुए कहा कि सरकार निजी क्षेत्र के साथ जीन थेरेपी, जैवप्रौद्योगिकी और टीका विकास जैसे सीमांत क्षेत्रों में सक्रिय रूप से भागीदारी कर रही है। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की कई पहल अब प्रमुख निजी कंपनियों के साथ सहयोग में काम कर रही हैं, ताकि सिंथेटिक एंटीबायोटिक्स, DNA और HPV वैक्सीन, और बायो-निर्माण जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी समाधान विकसित किए जा सकें।

सरकार की व्यापक अनुसंधान पहल का उल्लेख करते हुए मंत्री ने उद्योग नेताओं को हाल ही में घोषित ₹1 लाख करोड़ के R&D फंड का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया, जो स्वास्थ्य, कृषि और अन्य क्षेत्रों में गहरी तकनीक परियोजनाओं का समर्थन करता है। उन्होंने कहा, “पहली बार, सरकार नवाचार के लिए निजी कंपनियों को वित्तपोषित कर रही है — जो भारत की R&D पारिस्थितिकी में एक परिवर्तनकारी कदम है।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में आयातक से निर्यातक में बदलाव की भी सराहना की, विशेष रूप से टीकों, बायोसिमिलर और किफायती मेडिकल उपकरणों में। उन्होंने कहा, “हम अब उच्च गुणवत्ता वाली, लागत-कुशल स्वास्थ्य तकनीक का उत्पादन कर रहे हैं जो दुनिया भर में बाज़ार पा रही हैं।”

अपने संबोधन को समाप्त करते हुए मंत्री ने उद्योग हितधारकों से कहा कि वे केवल अपने क्षेत्रों का नेतृत्व न करें, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति में साझेदार के रूप में काम करें और नए सहयोग क्षेत्रों का सुझाव दें। उन्होंने कहा, “विज्ञान, चिकित्सा और प्रौद्योगिकी अब एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं, और हमें मिलकर वैश्विक स्वास्थ्य के भविष्य को आकार देने में एक बड़ी भूमिका के लिए तैयार रहना चाहिए।”

एएमआरआईटी फार्मेसी के 10 वर्ष पूरे: स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने किया समारोह का उद्घाटन

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में एएमआरआईटी (Affordable Medicines and Reliable Implants for Treatment) फार्मेसी की 10वीं वर्षगांठ समारोह का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम सस्ती दवाओं की उपलब्धता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा देने में सार्वजनिक क्षेत्र की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

2015 में स्थापना के बाद से, एएमआरआईटी फार्मेसियों ने जीवनरक्षक और आवश्यक दवाओं को 50% से 90% तक की छूट पर उपलब्ध कराकर मरीजों, विशेषकर निम्न-आय वर्ग के लोगों के इलाज की लागत को काफी कम किया है।

सभा को संबोधित करते हुए, नड्डा ने एएमआरआईटी के सफल संचालन के लिए एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को बधाई दी। उन्होंने याद किया कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सभी नागरिकों को सुलभ, किफायती और न्यायपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने का संकल्प लिया था। इसी दृष्टि के साथ जन औषधि और एएमआरआईटी जैसी पहल शुरू की गईं, ताकि दवाएं और चिकित्सा उपकरण कम कीमत पर उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने बताया कि एएमआरआईटी आज एक मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क बन चुका है, जिसमें 255 से अधिक फार्मेसियाँ संचालित हैं, और इसे पूरे देश में 500 आउटलेट तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। उन्होंने जोर दिया कि जहाँ आज हर एम्स में एएमआरआईटी फार्मेसी उपलब्ध है, अब लक्ष्य इसे हर मेडिकल कॉलेज और हर जिला अस्पताल तक पहुँचाना है ताकि किफायती दवाएं देश के हर नागरिक तक पहुंच सकें।

एएमआरआईटी फार्मेसी की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ब्रांडेड दवाओं पर 50% की औसत छूट से अब तक 6.85 करोड़ से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं। लगभग ₹17,000 करोड़ की एमआरपी वाली दवाएं अब तक वितरित की गई हैं, जिससे मरीजों को लगभग ₹8,500 करोड़ की बचत हुई है।

उन्होंने एएमआरआईटी फार्मेसियों के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि अधिक से अधिक लोग इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि और स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा के मार्गदर्शन में एएमआरआईटी की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और न्यायसंगत दवा पहुँचाना है।

उन्होंने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और एएमआरआईटी नेटवर्क की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि पूरा एचएलएल और एएमआरआईटी परिवार नेटवर्क के विस्तार, सिस्टम सुधारने और संचालन को और मजबूत करने के लिए “जोश, जूनून और जज़्बात” के साथ कार्य करता रहेगा।

धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए अनीता थम्पी ने स्वास्थ्य मंत्री नड्डा के नेतृत्व और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग और एचएलएल व एएमआरआईटी टीमों की प्रतिबद्धता की भी सराहना की, जिनकी मेहनत से सस्ती दवाएं लोगों तक पहुँची हैं।

इस अवसर पर नड्डा ने देशभर में 10 नई एएमआरआईटी फार्मेसियों का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने AMRIT ITes – Eco Green Version 2.0 नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया, जो संचालन को अधिक पारदर्शी, कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बनाएगा।

कार्यक्रम के दौरान एएमआरआईटी के दस वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक जारी की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती दवाएं पहुँचाने के लिए मोबाइल फार्मेसी वैन का भी शुभारंभ किया गया। इसके अलावा, दवाओं की उपलब्धता, कीमत और नजदीकी एएमआरआईटी फार्मेसी की जानकारी देने के लिए एक 24×7 नेशनल कॉन्टैक्ट सेंटर का उद्घाटन किया गया।

पृष्ठभूमि

एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड, एएमआरआईटी का कार्यान्वयन एजेंसी, स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत एक मिनी रत्न सार्वजनिक उपक्रम है। यह गर्भनिरोधक उत्पादों, अस्पताल उत्पादों, चिकित्सा उपकरणों, डायग्नोस्टिक सेवाओं (हिंदलैब्स), खुदरा फार्मेसी (AMRIT), एचएलएल फार्मेसी, आईवियर, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, प्रोक्योरमेंट और कंसल्टेंसी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं प्रदान करती है। एचएलएल 7 अत्याधुनिक फैक्ट्रियों, 5 सहायक कंपनियों और एक कॉर्पोरेट आरएंडडी केंद्र का संचालन करता है, जो भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने UCMS दीक्षांत समारोह में युवाओं को नवाचार और करुणा के साथ चिकित्सा सेवा के लिए प्रेरित किया

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के तेजी से बदलते परिदृश्यों पर प्रकाश डाला, और एक ऐसे परिवर्तनकारी दशक की ओर इशारा किया जिसने भारत में स्वास्थ्य देखभाल को अधिक सुलभ, किफायती और समावेशी बनाया है।

डॉ. सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (UCMS) के 54वें स्थापना दिवस और दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को डिग्रियां प्रदान की और नई पीढ़ी के चिकित्सकों से नवाचार को अपनाने के साथ करुणा के मूल्यों में बने रहने का आह्वान किया।

मंत्री ने कहा कि पिछले दशक में भारत में चिकित्सा शिक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसमें मेडिकल कॉलेजों और प्रशिक्षण अवसरों की संख्या में तेज वृद्धि हुई है। “दस साल पहले केवल लगभग 45,000 अंडरग्रेजुएट मेडिकल सीटें थीं; आज यह संख्या लगभग 1.5 लाख के करीब है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि AIIMS जैसे संस्थानों का विस्तार क्षेत्रीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने और अधिक महिलाओं को चिकित्सा करियर अपनाने का अवसर देने में सहायक रहा है।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवा वितरण में हुए परिवर्तन का वर्णन तीन पहलुओं में किया — सुलभ, किफायती और उपलब्ध। उन्होंने आयुष्मान भारत और जन औषधि केंद्र जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने राज्य और नागरिक के बीच संबंध को नए सिरे से परिभाषित किया है। अपने चिकित्सा अनुभव को साझा करते हुए, डॉ. सिंह ने बताया कि भारत में स्वास्थ्य बीमा ने पूर्व-मौजूद बीमारियों को भी कवर करना शुरू कर दिया है, जिसे उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में “सबसे मानवीय नवाचारों में से एक” बताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के जीवन विज्ञान क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक साख पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “यही विभाग — बायोटेक्नोलॉजी विभाग — जिसने COVID-19 के लिए दुनिया का पहला DNA टीका और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर रोकथाम के लिए HPV टीका विकसित किया। भारत अब 200 से अधिक देशों में देशज टीके सप्लाई करता है।”

उन्होंने भारत की पहली देशज एंटीबायोटिक ‘नाफिथ्रोमाइसिन’ और हेमोफीलिया के लिए सफल जीन थेरेपी परीक्षणों का भी उल्लेख किया, जो न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुए हैं। डॉ. सिंह ने UCMS और समान संस्थानों से निजी क्षेत्र के साथ सहयोग कर उन्नत क्लिनिकल ट्रायल और शोध करने का आग्रह किया। “सिलो में काम करने का युग समाप्त हो गया है,” उन्होंने कहा, और शैक्षणिक संस्थानों को उद्योग और सरकारी प्रयोगशालाओं के साथ एकीकृत होने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर संस्थान की 54 वर्षीय यात्रा को दर्शाते हुए एक स्मारिका जारी की गई, जिसमें चिकित्सा शिक्षा, शोध और सार्वजनिक सेवा में कॉलेज की उपलब्धियों को दर्शाया गया। स्मारिका ने विशेष रूप से GTB हॉस्पिटल के साथ UCMS की सामुदायिक स्वास्थ्य पहलों में योगदान को उजागर किया।

डॉ. सिंह ने उत्कृष्ट छात्रों और शिक्षकों को पुरस्कार और पदक भी प्रदान किए। उन्होंने विजेताओं को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि भारत की नई पीढ़ी के चिकित्सक देश के स्वास्थ्य क्षेत्र की प्राथमिकताओं को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

स्वास्थ्य चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री ने कहा कि आज के चिकित्सकों को “द्वि-चरणीय रोग स्पेक्ट्रम” — संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों के सह-अस्तित्व — के साथ-साथ वृद्ध होती आबादी और तेजी से बदलती तकनीक का सामना करना होगा। उन्होंने चिकित्सा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समावेश का उल्लेख किया, जिसका उन्होंने स्वयं टेली-मोबाइल क्लीनिक्स के माध्यम से अनुभव किया है। AI मरीज की भाषा में संवाद कर सकता है और मानव जैसी बातचीत से आराम भी प्रदान कर सकता है, जिसे उन्होंने सहानुभूति और नवाचार का सम्मिलित मॉडल बताया।

डॉ. सिंह ने स्नातकों को उनके अद्वितीय अवसर की याद दिलाई। “आज डिग्री प्राप्त करने वाले लोग 2047 में भारत की 100वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ के समय अपने करियर के सर्वोच्च स्तर पर होंगे। भाग्य ने आपको एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करने का अवसर दिया है।”

इस कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. (डॉ.) महेश वर्मा, चेयरमैन, गवर्निंग बॉडी, UCMS के स्वागत भाषण से हुई, इसके बाद प्रो. बालाराम पनी, डीन ऑफ कॉलेजेज, दिल्ली विश्वविद्यालय और मुख्य अतिथि ने संबोधन दिया। कार्यक्रम में UCMS के संकाय सदस्य, छात्र और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, और यह सरकार की व्यापक दृष्टि को भी दर्शाता है कि चिकित्सा शिक्षा को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने एम्स नई दिल्ली के 50वें दीक्षांत समारोह में युवा चिकित्सकों को सेवा, नैतिकता और नवाचार के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने आज नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के 50वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।

अपने संबोधन में मंत्री नड्डा ने सभी स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि AIIMS ने चिकित्सा विज्ञान, शिक्षा और रोगी देखभाल के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया है। उन्होंने युवा डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे सहानुभूति के साथ सेवा करें, उच्चतम नैतिक मानकों को बनाए रखें और नवाचार के माध्यम से देश की बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करें।

AIIMS, नई दिल्ली की सराहना करते हुए मंत्री नड्डा ने कहा, “चिकित्सा विज्ञान, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में AIIMS ने न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।” उन्होंने संस्थान की चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी सेवा में उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।

मंत्री नड्डा ने पिछले एक दशक में भारत के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां पिछली सदी के अंत तक भारत में केवल एक AIIMS था, वहीं आज देशभर में 23 AIIMS संस्थान कार्यरत हैं, जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा प्रशिक्षण को हर क्षेत्र तक पहुँचाने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है। इसी तरह, एमबीबीएस सीटें 51,000 से बढ़कर 1,29,000 और पीजी सीटें 31,000 से बढ़कर 78,000 हो गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगले पांच वर्षों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अतिरिक्त 75,000 सीटें जोड़ी जाएंगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किया है — मातृ मृत्यु दर (MMR) 130 से घटकर 88, शिशु मृत्यु दर (IMR) 39 से घटकर 27 हो गई है। 5 वर्ष से कम आयु मृत्यु दर (U5MR) और नवजात मृत्यु दर (NMR) में भी क्रमशः 42% और 39% की कमी आई है, जो वैश्विक औसत से बेहतर है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत में टीबी के मामलों में 17.7% की कमी आई है, जो वैश्विक दर 8.3% से दोगुनी है — जैसा कि द लैंसेट रिपोर्ट में बताया गया है।

अपने समापन भाषण में मंत्री नड्डा ने छात्रों से आग्रह किया कि वे शिक्षा और अनुसंधान में सक्रिय योगदान दें और AIIMS की गौरवशाली परंपरा और प्रतिष्ठा को बनाए रखें। उन्होंने उन्हें आजीवन सीखने वाले और नवोन्मेषी बनने की प्रेरणा दी, ताकि वे चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाते हुए समाज की सेवा कर सकें।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. वी. के. पॉल ने कहा, “हम पर समाज के प्रति गहरी जिम्मेदारी है, जिसने हमें संवारने का अवसर दिया। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ें, उत्कृष्टता को अपनी आदत बनाएं और नवाचार को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत।”

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अकादमिक क्षेत्र में आएं, ताकि वे अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य पेशेवरों को शिक्षित, मार्गदर्शन और प्रेरित कर सकें, जिससे ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में योगदान हो सके।

इस समारोह में कुल 326 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 50 पीएच.डी. विद्वान, 95 डीएम/एम.सी.एच. विशेषज्ञ, 69 एम.डी., 15 एम.एस., 4 एम.डी.एस., 45 एम.एससी., 30 एम.एससी. (नर्सिंग) और 18 एम.बायोटेक स्नातक शामिल थे। इसके अलावा, AIIMS में उत्कृष्ट सेवा और योगदान के लिए सात डॉक्टरों को आजीवन उपलब्धि पुरस्कार (Lifetime Achievement Award) से सम्मानित किया गया।


अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) ने 9वां स्थापना दिवस मनाया

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अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), जो आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संगठन है, ने अपने कैंपस, नई दिल्ली में आज अपना 9वां स्थापना दिवस मनाया।

मुख्य बातें:

  • मुख्य अतिथि का संबोधन:
    मुख्य अतिथि, सांसद रामवीर सिंह बिधूरी ने आयुर्वेदिक शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य सेवा में AIIA की नौ वर्षों की समर्पित सेवा के लिए संस्थान को बधाई दी। उन्होंने संस्थान के साथ अपने लंबे समय से जुड़े अनुभव साझा किए और स्वर्गीय सुषमा स्वरज एवं भैरों सिंह शेखावत के साथ AIIA की आधारशिला रखने की यादें साझा कीं।

  • रोगियों के प्रति प्रतिबद्धता:
    रामवीर सिंह बिधूरी ने कहा, “दिल्ली चारों तरफ़ से बीमारियों से घिरी है, और अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान लगातार अनगिनत रोगियों को राहत और आशा प्रदान करता है। हर दिन हजारों लोग परेशान चेहरों के साथ आते हैं और मुस्कान और स्वास्थ्य के साथ लौटते हैं।”

  • संस्थान की उपलब्धियां:

    • AIIA ने पिछले नौ वर्षों में 44 विशेषज्ञ क्लिनिकों के माध्यम से 30 लाख से अधिक रोगियों का उपचार किया।

    • भारत में सात नए स्वास्थ्य और वेलनेस सेंटर स्थापित किए।

    • 73 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एमओयू किए ताकि शोध में सहयोग बढ़ाया जा सके और आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया जा सके।

  • संस्थान निदेशक का संबोधन:
    प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने संस्थान की यात्रा और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और पूर्व निदेशकों का धन्यवाद किया। उन्होंने अस्पताल के निकट एक डिवाइडर बनाने और ओनिडा बस स्टैंड का नाम बदलकर AIIA बस स्टैंड करने का प्रस्ताव रखा।

  • सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन:
    दिवस की शुरुआत धन्वंतरि वाटिका में हवन समारोह से हुई और समापन AIIA के छात्रों और कर्मचारियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें आयुर्वेद की समृद्ध संस्कृति और दर्शन को प्रदर्शित किया गया।

AIIA आज भी आयुर्वेदिक शिक्षा, शोध और रोगी देखभाल में उत्कृष्टता का केंद्र है और पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणाली में भारत को वैश्विक नेता बनाने के दृष्टिकोण में योगदान दे रहा है।


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