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कचना धुरवा मंदिर – आस्था, इतिहास और वीरता का अद्भुत संगम

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कचना धुरवा मंदिर छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का एक अत्यंत प्रसिद्ध, ऐतिहासिक और पूजनीय देवस्थल है। यह मंदिर रायपुर–गरियाबंद राष्ट्रीय मार्ग पर बारूका (छुरा प्रवेश मार्ग) के समीप मुख्य सड़क के किनारे स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह स्थान केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी लोकगाथाओं, आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के कारण भी विशेष पहचान रखता है। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं और अपनी मनोकामनाएँ लेकर कचना धुरवा देव के चरणों में शीश नवाते हैं।

कचना धुरवा – आदिवासी समाज के आराध्य देव

कचना धुरवा को आदिवासी समाज एवं स्थानीय ग्रामीण अपने इष्टदेव, वन देवता और रक्षक देव के रूप में पूजते हैं। सदियों से यह मान्यता चली आ रही है कि इस क्षेत्र के घने जंगलों, पहाड़ियों और दुर्गम रास्तों से यात्रा करने वाले लोग सबसे पहले कचना धुरवा मंदिर में माथा टेककर सुरक्षित यात्रा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से कचना धुरवा देव की पूजा करता है, उसकी यात्रा सफल होती है तथा जीवन की अनेक बाधाएँ दूर हो जाती हैं। इसी आस्था के कारण आज भी राहगीर और वाहन चालक यहाँ रुककर पूजा-अर्चना करते हैं।

मंदिर परिसर में सफेद घोड़े पर सवार वीर राजा धुरवा की भव्य प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा उनके शौर्य, साहस, न्यायप्रियता और जनकल्याणकारी व्यक्तित्व का प्रतीक मानी जाती है। दूर से ही यह प्रतिमा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है और मंदिर की विशेष पहचान बन चुकी है।

अमर प्रेम और वीरता की लोकगाथा

कचना धुरवा मंदिर का इतिहास केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमर प्रेम, त्याग और अदम्य वीरता की लोककथा से भी जुड़ा हुआ है।

लोकमान्यताओं के अनुसार बिंद्रानवागढ़ के वीर राजकुमार धुरवा अपनी वीरता और पराक्रम के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे। कहा जाता है कि उनके पिता की हत्या शत्रु राजा द्वारा कर दी गई थी। अपने पिता की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए राजकुमार धुरवा ने दुश्मन राजा के विरुद्ध लगातार संघर्ष किया।

कहा जाता है कि उन्होंने अपने शत्रु से 46 बार युद्ध किया और हर बार असाधारण साहस का परिचय दिया। उनकी वीरता की चर्चा पूरे अंचल में होने लगी। किंतु जब युद्ध में विजय प्राप्त करना कठिन हो गया, तब शत्रु राजा ने छल का सहारा लिया।

लोककथा के अनुसार अंतिम युद्ध के दौरान राजकुमार धुरवा अपने सफेद घोड़े पर सवार होकर नदी पार कर रहे थे। उसी समय उनके घोड़े का एक पैर जल (नदी) में तथा दूसरा पैर थल (भूमि) पर था। इसी अवसर का लाभ उठाकर शत्रु ने धोखे से उन पर प्रहार कर दिया। इस विश्वासघाती हमले में राजकुमार धुरवा वीरगति को प्राप्त हुए।

उनके बलिदान से पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया। लोगों ने उनकी वीरता, न्यायप्रियता और जनसेवा को अमर बनाने के लिए उन्हें देवतुल्य मानकर पूजा आरंभ कर दी। समय के साथ विभिन्न स्थानों पर उनके स्मृति-स्थल और मंदिर स्थापित किए गए, जिनमें गरियाबंद का कचना धुरवा मंदिर सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध माना जाता है।

राजकुमारी कचना और अमर प्रेम की कथा

स्थानीय लोककथाओं में राजकुमार धुरवा के साथ राजकुमारी कचना का भी उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि दोनों का प्रेम त्याग, निष्ठा और समर्पण का अद्भुत उदाहरण था। धुरवा की वीरगति के बाद राजकुमारी कचना ने भी अपने प्रेम और समर्पण की ऐसी मिसाल प्रस्तुत की, जिसे आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाता है।

इसी कारण इस देवस्थल को "कचना धुरवा" के नाम से जाना जाता है। यह स्थान प्रेम, विश्वास, साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है।

अखंड ज्योति एवं नवरात्रि का भव्य मेला

कचना धुरवा मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, लेकिन चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि के अवसर पर यहाँ का वातावरण अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक हो जाता है।

इन पावन दिनों में मंदिर परिसर में अखंड ज्योति कलश स्थापित किए जाते हैं। श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक माता और कचना धुरवा देव की आराधना करते हैं। मंदिर परिसर दीपों की रोशनी, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों से गूंज उठता है।

नवरात्रि के दौरान यहाँ विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों सहित पड़ोसी राज्यों से भी हजारों श्रद्धालु पहुँचते हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मंदिर परिसर में नारियल बाँधते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।

मंदिर परिसर में स्थित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर

कचना धुरवा मंदिर परिसर केवल एक देवस्थल नहीं, बल्कि अनेक देवी-देवताओं की आराधना का प्रमुख केंद्र भी है। यहाँ श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर कई देवस्थलों के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।

मुख्य मंदिर के अतिरिक्त परिसर में निम्नलिखित देवस्थल स्थित हैं—

  • ग्राम देवी रूपई माता मंदिर

  • बंजारी माता मंदिर

  • सोनई माता मंदिर

इन सभी देवी-देवताओं की पूजा स्थानीय ग्रामीण एवं श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हैं।

लोक आस्था और मान्यताएँ

कचना धुरवा मंदिर के संबंध में अनेक लोकमान्यताएँ प्रचलित हैं। लोगों का विश्वास है कि—

  • सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है।

  • यात्रा प्रारंभ करने से पहले यहाँ दर्शन करने से यात्रा सुरक्षित रहती है।

  • मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु नारियल, ध्वज और प्रसाद अर्पित करते हैं।

  • संकट और कठिनाइयों से मुक्ति के लिए लोग विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

  • यह स्थान वन, प्रकृति और मानव के बीच गहरे आध्यात्मिक संबंध का प्रतीक माना जाता है।

प्राकृतिक सौंदर्य

मंदिर चारों ओर से हरियाली, पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ है। शांत वातावरण, शुद्ध हवा और धार्मिक आस्था का संगम इस स्थान को और भी आकर्षक बनाता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं करते, बल्कि प्रकृति की गोद में आध्यात्मिक शांति का भी अनुभव करते हैं।

सांस्कृतिक महत्व

कचना धुरवा मंदिर आदिवासी संस्कृति, लोकपरंपरा और छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यहाँ आयोजित धार्मिक अनुष्ठान, लोकगीत, लोकनृत्य और मेले इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखते हैं। यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों को वीरता, त्याग, प्रेम और लोकआस्था की प्रेरणा देता है।

निष्कर्ष

कचना धुरवा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि वीरता, प्रेम, त्याग, लोकविश्वास और आदिवासी संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यहाँ की ऐतिहासिक लोकगाथाएँ, सफेद घोड़े पर विराजमान वीर धुरवा की प्रतिमा, नवरात्रि का विशाल मेला, अखंड ज्योति, प्राकृतिक वातावरण और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इस स्थान को छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण देवस्थलों में शामिल करती हैं।

जो भी श्रद्धालु इस पवित्र धाम में श्रद्धा और विश्वास के साथ पहुँचता है, वह आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और कचना धुरवा देव का आशीर्वाद लेकर लौटता है। यही कारण है कि गरियाबंद जिले का यह पावन देवस्थल आज भी लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर कोलकाता-2026 में ‘बेस्ट डेकोरेशन ऑफ स्टॉल एंड अपीयरेंस’ सम्मान से बढ़ी प्रदेश की प्रतिष्ठा

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21 राज्यों के बीच छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अभिनव पवेलियन को मिला राष्ट्रीय सम्मान

 तीन दिवसीय आयोजन में निवेश, पर्यटन साझेदारी और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई ऊंचाई

रायपुर- ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (टीटीएफ) कोलकाता-2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। तीन दिवसीय इस प्रतिष्ठित पर्यटन आयोजन के सफल समापन पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को देश के 21 राज्यों की सहभागिता के बीच उसके आकर्षक, सृजनात्मक एवं प्रभावशाली पवेलियन के लिए      “बेस्ट डेकोरेशन ऑफ स्टॉल एंड अपीयरेंस” सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवन, प्राकृतिक पर्यटन, धार्मिक धरोहरों और आधुनिक पर्यटन दृष्टिकोण को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के सफल प्रयासों की महत्वपूर्ण पहचान है।

10 से 12 जुलाई तक कोलकाता के विश्व बंगला प्रांगण में आयोजित देश के प्रतिष्ठित पर्यटन व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का पवेलियन तीनों दिनों तक आगंतुकों, पर्यटन विशेषज्ञों, टूर ऑपरेटर्स और निवेशकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, चित्रकोट एवं तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर, भोरमदेव, धार्मिक एवं इको-टूरिज्म, पर्यटन रिसॉर्ट्स तथा राज्य के विविध पर्यटन परिपथों को आधुनिक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जिसे व्यापक सराहना मिली।

आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव एस भारतीदासन तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंसियों, होटल समूहों, पर्यटन विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ अनेक महत्वपूर्ण बी-टू-बी बैठकों में सहभागिता की। इन बैठकों में पर्यटन निवेश, संयुक्त पर्यटन पैकेजों के विकास, विपणन सहयोग, नए पर्यटन बाजारों तक पहुंच तथा छत्तीसगढ़ में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इन संवादों से राज्य के पर्यटन क्षेत्र में भविष्य की नई साझेदारियों और निवेश के अवसरों को भी मजबूती मिली।

मेले में छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ राज्य तथा अन्य राज्यों के लगभग 28 पंजीकृत टूर ऑपरेटर्स, होटल संचालकों, होम-स्टे संचालकों और पर्यटन उद्यमियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। इससे राज्य के पर्यटन उत्पादों को राष्ट्रीय पर्यटन उद्योग के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा नए व्यावसायिक संबंध स्थापित करने का अवसर प्राप्त हुआ।

आयोजन के उद्घाटन अवसर पर गोवा के पर्यटन मंत्री रोहन ए. खंवटे, उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष तथा थाईलैंड की महावाणिज्य दूत सिरीपोर्न तांतीपन्याथेप सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का अवलोकन किया था। सभी अतिथियों ने राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, धार्मिक विरासत और पर्यटन विकास की संभावनाओं की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ को उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में रेखांकित किया।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में राज्य पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि टीटीएफ जैसे राष्ट्रीय मंच राज्य की पर्यटन संभावनाओं को देश और दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इस सम्मान ने यह सिद्ध किया है कि छत्तीसगढ़ आज अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक वैभव और उत्कृष्ट पर्यटन संसाधनों के बल पर राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

पर्यटन एवं संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव एस भारतीदासन ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर छत्तीसगढ़ की प्रभावी सहभागिता से राज्य में पर्यटन निवेश, पर्यटकों की संख्या और निजी क्षेत्र की भागीदारी में सकारात्मक वृद्धि होगी।

’उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ जंगली कुत्तों (ढोल) का झुंड’

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’वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के मजबूत होने का मिला संकेत’

’अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 के कैमरा ट्रैप में पहली बार रिकॉर्ड हुआ चार ढोलों का संगठित झुंड’

रायपुर- वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 के दौरान उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार दुर्लभ भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का संगठित झुंड रिकॉर्ड हुआ है। वन विभाग ने इसे जंगल के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और बेहतर वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण संकेत बताया है।

’दुर्लभ वन्यजीव की मौजूदगी से मजबूत हुआ संरक्षण का भरोसा’

ढोल (भारतीय जंगली कुत्ता) देश के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त मांसाहारी वन्यजीवों में शामिल है। इनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि टाइगर रिजर्व में शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ी है और प्राकृतिक आवास पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हुआ है। इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलित और स्वस्थ होने का संकेत मिलता है।

’संरक्षण के लिए उठाए गए प्रभावी कदम’

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। इनमें वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर प्राकृतिक स्वरूप में विकसित करना, वन्यजीव अपराधियों और शिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, एंटी-पोचिंग अभियान को मजबूत करना तथा कैमरा ट्रैप और आधुनिक तकनीक से लगातार निगरानी करना शामिल है। इन प्रयासों में स्थानीय ग्रामीणों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई।

’956 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से हुई मुक्त’

वन विभाग ने रिजर्व क्षेत्र की लगभग 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इससे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास और आवागमन के मार्ग फिर से उपलब्ध हुए। साथ ही 550 से अधिक वन्यजीव अपराधियों और अवैध शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत किया गया।

’ढोल क्यों हैं जंगल के लिए महत्वपूर्ण’

ढोल झुंड में रहने वाले सामाजिक और अनुशासित वन्यजीव हैं। ये चीतल, सांभर और जंगली सूअर जैसे शाकाहारी जीवों की संख्या को संतुलित रखते हैं, जिससे जंगल का प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। यही कारण है कि इनकी मौजूदगी किसी भी वन क्षेत्र के स्वस्थ और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है।

’जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि’

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक ने बताया कि ढोल के संगठित झुंड का रिकॉर्ड होना यह प्रमाणित करता है कि रिजर्व की खाद्य-श्रृंखला मजबूत हुई है और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण विकसित हुआ है। यह उपलब्धि वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में किए गए वैज्ञानिक प्रबंधन, कड़ी सुरक्षा और प्रभावी संरक्षण प्रयासों का परिणाम है।

’वन्यजीव संरक्षण का उभरता मॉडल बन रहा छत्तीसगढ़’

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुर्लभ वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। राज्य सरकार के संरक्षण प्रयासों से यह रिजर्व मध्य भारत में वन्यजीवों के सुरक्षित और समृद्ध आवास के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।

रामगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत को विश्व पटल पर दिलाएंगे नई पहचान - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य समापन

रामगढ़ के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये की घोषणा, उदयपुर एवं डूमरडीह को मिलाकर नगर पंचायत बनाने की घोषणा

मुख्यमंत्री ने 6 पहाड़ी कोरवा बच्चों का कराया शाला प्रवेश, टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स का किया सम्मान

रायपुर- रामगढ़ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन का केंद्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपरा, प्रकृति पूजा, आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। सरगुजा की यह पवित्र भूमि प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है। अनेक प्राचीन ग्रंथों में रामगढ़ का उल्लेख मिलता है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को प्रमाणित करता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के ऐतिहासिक दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के  समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनश्रुतियों के अनुसार त्रेतायुग में वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने इस क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। सीताबेंगरा गुफा आज भी श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है तथा रामगढ़ की हवाओं और शिलाओं में रामायण की स्मृतियां आज भी जीवंत हैं।

उन्होंने कहा कि सीताबेंगरा गुफा भारत की सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में से एक मानी जाती है, जहां हजारों वर्ष पूर्व सांस्कृतिक आयोजन और नाट्य प्रस्तुतियां होती थीं। वहीं जोगीमारा गुफा अपनी प्राचीन भित्तिचित्र कला के लिए विश्वविख्यात है। हाथीपोल जैसी प्राकृतिक शैल संरचना तथा यहां के प्राचीन शिल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साक्षी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकवि कालिदास द्वारा मेघदूतम् की रचना इसी क्षेत्र में किए जाने का उल्लेख मिलता है, जिससे रामगढ़ का साहित्यिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार रामगढ़, सीताबेंगरा और जोगीमारा जैसी ऐतिहासिक धरोहरों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। यहां पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य से परिचित हो सकें। उन्होंने कहा कि जिस भव्यता के साथ इस वर्ष रामगढ़ महोत्सव का आयोजन हुआ है, उसी भव्यता के साथ यह महोत्सव प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में सरगुजा जिले में 2,387 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश में लोगों के पक्के आवास का सपना तेजी से साकार हो रहा है। 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति प्रदान की गई है तथा प्रतिदिन लगभग 1,600 आवास बनकर तैयार हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के कारण बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। पुनर्वासित नक्सलियों तथा विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) परिवारों को भी आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों से 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। 13 लाख किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस प्रदान किया गया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1,000 रुपये अंतरित किए जा रहे हैं। रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या दर्शन कराया गया है। तीर्थयात्रा दर्शन योजना के अंतर्गत देश के 19 प्रमुख तीर्थस्थलों को शामिल किया गया है, जहां वरिष्ठ नागरिक अपनी इच्छा के अनुसार दर्शन कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए विभिन्न विभागों में लगातार भर्ती प्रक्रिया संचालित की जा रही है। आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रारंभ की गई है, जिसके माध्यम से लोगों की शिकायतों का प्रभावी समाधान किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रामगढ़ के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही क्षेत्रवासियों की मांग पर उदयपुर एवं डूमरडीह को मिलाकर नगर पंचायत के गठन की घोषणा भी की।इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामगढ़ महोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककला और गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का सशक्त माध्यम है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य कर रहा है।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सभी को रामगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लगभग 50 वर्षों से आयोजित हो रहा यह महोत्सव ऐतिहासिक, पौराणिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने पहाड़ी कोरवा बच्चों का कराया शाला प्रवेश, टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंच से विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के छह बच्चों का शाला प्रवेश कराया। उन्होंने बच्चों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाई तथा स्कूल बैग, वॉटर बॉटल सहित अध्ययन सामग्री प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने 26 से 30 जून तक सरगुजा जिले के विभिन्न पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर विशेष डॉक्यूमेंट्री तैयार करने वाले टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया।

समापन समारोह में विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, विधायक शकुंतला पोर्ते, विधायक उद्देश्वरी पैंकरा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर सहित अन्य विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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जोगीमारा गुफा शिलालेख एवं हाथीपोल का किया अवलोकन

हमारी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय "रामगढ़ महोत्सव-2026" के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन किया तथा इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की अनूठी प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य एवं पर्यटन का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत भी विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान रखती है। रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर प्राप्त हों।

उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख एवं चित्रकला की अनुपम धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों में अपनी कालजयी कृति "मेघदूतम्" की रचना की थी, जिसका आरंभ "आषाढस्य प्रथमदिवसे" से होता है। इसी ऐतिहासिक एवं साहित्यिक स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की भित्तिचित्र परंपरा तथा यहाँ प्राप्त प्राचीन अभिलेख इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।

रामगढ़ की एक अन्य महत्वपूर्ण पहचान "हाथीपोल" नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी तथा 15 से 20 फीट ऊँची यह प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ इस सम्पूर्ण क्षेत्र को और अधिक रहस्यमयी, आकर्षक एवं ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं। रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित इन कलात्मक गुफाओं का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

इन्फ्लुएंसर मीट से छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान, डिजिटल मंचों पर गूंजेंगी प्रदेश की खूबसूरती

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पाँच दिवसीय फेम टूर में मैनपाट, सतरेंगा और रामगढ़ महोत्सव का अनुभव ले रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय वैभव

रायपुर- डिजिटल माध्यमों के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड द्वारा 26 से 30 जून 2026 तक पाँच दिवसीय "इन्फ्लुएंसर मीट एवं फेमिलराइजेशन (फेम) टूर" का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित प्रमुख सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि उनके माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार देश और दुनिया तक पहुंच सके।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मैनपाट, प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सतरेंगा तथा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के रामगढ़ महोत्सव का भ्रमण कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान इन्फ्लुएंसर्स प्राकृतिक छटा, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक लोककलाओं, पर्यटन सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही वे विभिन्न डिजिटल मंचों के लिए आकर्षक फोटो, वीडियो और रचनात्मक सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की विशेषताएं लाखों दर्शकों तक पहुंचेंगी।

मैनपाट अपनी मनोहारी वादियों, तिब्बती संस्कृति, झरनों और प्राकृतिक आकर्षणों के कारण प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान रखता है। वहीं सतरेंगा इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ गंतव्य है, जहां विशाल जलाशय, प्राकृतिक वातावरण और रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके साथ ही रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागी छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और ऐतिहासिक विरासत से भी रूबरू हो रहे हैं।

यह आयोजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा के नेतृत्व, प्रबंध संचालक विवेक आचार्य के सक्षम संचालन तथा उपमहाप्रबंधक  पूनम शर्मा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड की टीम द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है। आयोजन का अंतिम दिन 30 जून को निर्धारित है।

डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर्यटन प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में इस इन्फ्लुएंसर मीट के माध्यम से तैयार की जा रही डिजिटल सामग्री छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को देश और दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता और दृश्यता बढ़ेगी, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, हस्तशिल्प, लोककला, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

इस प्रकार के नवाचार आधारित प्रचार अभियान राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आगामी समय में भी पर्यटन के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे अभिनव प्रयास निरंतर किए जाते रहेंगे।

जशपुर-प्रकृति और सुंदर झरनों का आनंद लेने एक बार प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रानीदाह का भ्रमण जरूर करें

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जशपुरनगर- छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की हरी-भरी पहाड़ियों और घने साल के जंगलों के बीच स्थित रानीदाह जलप्रपात जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता का एक अद्भुत प्रतीक है। यह झरना जशपुर नगर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ख़ूबसूरत सड़कों से होकर जब कोई इस स्थल तक पहुँचता है, तो सामने फैली हरियाली, चट्टानों से गिरता दूधिया जल और पक्षियों की आवाज़ें मिलकर एक अविस्मरणीय दृश्य प्रस्तुत करती हैं। बरसात के मौसम में रानीदाह अपने पूरे वैभव पर होती है, जब पानी कई धाराओं में बँटकर ऊँची चट्टानों से नीचे गिरता है। गर्मी के मौसम में जल प्रवाह भले थोड़ा कम हो जाए, लेकिन आसपास की प्राकृतिक शांति और वातावरण का सौंदर्य हमेशा समान रूप से मनमोहक रहता है।

रानीदाह जलप्रपात केवल प्राकृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी लोककथाओं और रहस्यमयी कहानियों के कारण भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि बहुत समय पहले ओडिशा की एक राजकुमारी, रानी शिरोमणि जशपुर की इन पहाड़ियों में आ पहुँची थीं। जब उसके पिता और पाँच भाई उनका पीछा करते हुए यहाँ पहुँचे, तो रानी ने अपमान और जबरन विवाह से बचने के लिए इसी गहरी खाई में छलांग लगा दी और अपने प्राण त्याग दिए। उसी समय से यह झरना “रानीदाह” के नाम से जाना जाने लगा, जिसका अर्थ है “रानी का जलप्रपात।” कहा जाता है कि झरने के पास स्थित कुछ चट्टानें “पाँच भैया” के नाम से जानी जाती हैं, जो रानी के भाइयों के प्रतीक माने जाते हैं। यह कथा आज भी स्थानीय लोगों के बीच पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती है और इस स्थल को एक रहस्यमयी और भावनात्मक पहचान देती है।

पर्यटकों के लिए रानीदाह जलप्रपात एक शांत और मनोरम पिकनिक स्थल है।

पर्यटन के जरिए नई पहचान गढ़ेगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता और सांस्कृतिक समृद्धि को दुनिया के सामने लाना हमारा उद्देश्य: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश को मिल रही नई गति

500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश के साथ छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाएं: हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश को लेकर इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड ने दिखाई रुचि

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी नई पहचान गढ़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने, निवेश अनुकूल नीतियों और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण प्रदेश में पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अपने निवास कार्यालय में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटक सुविधाओं के विकास एवं विस्तार तथा हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में शामिल हुए। बैठक में देश की प्रतिष्ठित इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ उत्तर से दक्षिण तक नैसर्गिक विरासत की अमूल्य धरा है, जहां नदियां, पहाड़, घने जंगल, जलप्रपात, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और जनजातीय परंपराएं छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य दुनिया को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और प्राकृतिक विविधता से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं और पर्यटकों के लिए बेहतर ठहराव, परिवहन तथा आधुनिक सुविधाओं के विकास के माध्यम से छत्तीसगढ़ को आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य में लगातार निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं और इसी क्रम में इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड द्वारा छत्तीसगढ़ में निवेश की इच्छा जताई गई है, जो प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निवेश से पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे।

बैठक के दौरान इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष अपने निवेश प्रस्ताव के महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए और बताया कि कंपनी छत्तीसगढ़ में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश की योजना पर कार्य कर रही है, जिसे शीघ्र आगे बढ़ाया जाएगा। कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस निवेश से प्रदेश में पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा।

वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है तथा सभी आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है।

बैठक में यह भी बताया गया कि  पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश के रास्ते व्यापक रूप से खुले हैं। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र को आधुनिक अधोसंरचना, उच्चस्तरीय सुविधाओं और निवेश प्रोत्साहन नीतियों के माध्यम से विकसित करने की दिशा में विशेष पहल कर रही है। प्रदेश की बेहतर मानसूनी परिस्थितियां, समृद्ध प्राकृतिक संपदा और निवेश अनुकूल नीति पर्यटन विकास के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही हैं।

बैठक में उद्योग विभाग के अधिकारियों ने निवेश प्रोत्साहन नीति तथा उपलब्ध इंसेंटिव्स की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यदि कोई निवेशक 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करता है अथवा 1000 से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है, तो उसे ‘बी-स्पोक पॉलिसी’ के तहत अतिरिक्त प्रोत्साहन एवं विशेष लाभ प्रदान किए जाएंगे। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत संरचना, सड़क संपर्क, आवासीय सुविधाओं तथा पर्यटक सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 

बैठक में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, वित्त सचिव डॉ. रोहित यादव, निवेश आयुक्त ऋतु सेन, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, उद्योग सचिव रजत कुमार, पर्यटन विभाग सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

​आरंग की गौरवगाथा पर आधारित डॉक्युमेंट्री फिल्म डिजिटल मीडिया पर हुई वायरल, मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों ने की सराहना

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आरंग- ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी आरंग की समृद्ध विरासत और गौरवशाली इतिहास अब डिजिटल पर्दे पर जीवंत हो उठा है। स्वयंसेवी संस्था 'पीपला वेलफेयर फाउंडेशन' द्वारा आरंग की गौरवगाथा पर केंद्रित एक विशेष डॉक्युमेंट्री फिल्म का निर्माण किया गया है, जो इन दिनों विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रही है। दर्शक इसे आरंग की धरोहर को समझने के लिए एक सशक्त माध्यम मान रहे हैं।

​ महोत्सव के दौरान मिली सराहना 

फाउंडेशन के सदस्यों ने बताया कि इस डॉक्युमेंट्री का विशेष फिल्मांकन 'राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव-2026' के उपलक्ष्य में किया गया था। महोत्सव के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों ने इस लघु फिल्म को देखा और इसकी गुणवत्ता व शोध की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। शासन-प्रशासन के स्तर पर मिली इस सराहना ने स्थानीय कलाकारों और संस्था के उत्साह को दोगुना कर दिया है।

​ अनुभवी टीम का मिला साथ 

इस डॉक्युमेंट्री की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्रभावी पटकथा और दमदार आवाज है। फिल्म की पटकथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संरक्षक और वरिष्ठ पत्रकार आनंदराम 'पत्रकारश्री' ने तैयार की है। डॉक्युमेंट्री को अपनी गंभीर और प्रभावशाली आवाज से आकाशवाणी व दूरदर्शन के वरिष्ठ उद्घोषक शशांक खरे ने सजाया है, जो दर्शकों को इतिहास के पन्नों से जोड़े रखती है।

​ तकनीकी पक्ष और टीम वर्क 

संयोजक महेंद्र कुमार पटेल की परिकल्पना पर आधारित इस फिल्म का बेहतरीन फिल्मांकन प्रतीक टोंड्रे द्वारा किया गया है, वहीं टिंकू चेलक ने आधुनिक वीडियो एडिटिंग के जरिए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्वरूप दिया है। संस्था के अध्यक्ष दूजेराम धीवर के कुशल संयोजन और प्रस्तुति के चलते यह प्रोजेक्ट समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण हो सका।

वीडियो की मुख्य विशेषताएं: 

 ऐतिहासिक साक्ष्य: फिल्म में आरंग के प्राचीन मंदिरों, राजा मोरध्वज की कथा और पुरातात्विक महत्व के स्थलों को खूबसूरती से दर्शाया गया है।

​ सिनेमैटोग्राफी: ड्रोन शॉट्स और क्लोज-अप एंगल्स के माध्यम से आरंग की वास्तुकला को बारीकी से उकेरा गया है।

​ सांस्कृतिक धरोहर: यह फिल्म न केवल एक वीडियो है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए आरंग के इतिहास का एक डिजिटल दस्तावेज भी है।

​सोशल मीडिया पर इस फिल्म को मिल रहे हजारों व्यूज और शेयर यह दर्शाते हैं कि लोग अपनी जड़ों और क्षेत्रीय इतिहास को जानने के लिए कितने उत्सुक हैं। पीपला वेलफेयर फाउंडेशन की इस पहल को नगरवासियों ने आरंग के गौरव को विश्व पटल पर लाने वाला एक ऐतिहासिक कदम बताया है।

संस्कृति को सहेजने गढ़ रीवा में होगा चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव

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महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह 

आरंग-  ऐतिहासिक गढ़  रीवा गांव में चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव के आयोजन को लेकर मंगलवार को बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्राम के सरपंच घसियाराम साहू ने किया।

बैठक में ग्राम के प्रबुद्धजन, गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने मिलकर महोत्सव के आयोजन पर चर्चा की और अपने विचार रखे।

इस अवसर पर सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू, वरिष्ठ नागरिक मेहत्तर राम साहू, संतोष साहू, हीराधर धीवर, हीरालाल धीवर तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने आयोजन की रूपरेखा, प्रचार-प्रसार और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की।

73 वर्षीय सरपंच घसियाराम साहू ने कहा कि गढ़ रीवा और आरंग क्षेत्र से जुड़ी लोरिक-चंदा  की गाथा को चंदैनी लोकनाट्य परंपरा आज विलुप्ति के कगार पर है। इसे सहेजने के लिए ग्रामीणों और पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के सहयोग से महोत्सव आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने कहा कि अपनी संस्कृति को बचाने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। चंदैनी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा है, लेकिन आज इसकी कुछ ही टीमें सक्रिय रह गई हैं।

बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि 15 अप्रैल के बाद ग्राम रीवा में लोरिक-चंदा की प्रेमगाथा पर केंद्रित चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

बैठक में घसियाराम साहू, सूरज साहू, संतोष कुमार साहू, मेहत्तर राम साहू, महेन्द्र कुमार पटेल, गोवर्धन साहू, प्रेमलाल साहू, हीराधर धीवर, वेद प्रकाश साहू, मनबोध साहू, रमेश चंद्राकर, बेनीराम साहू, अश्वनी चंद्राकर, अनिल साहू, हीरालाल धीवर, भागवत साहू, त्रिलोकीनाथ साहू, महेंद्र साहू, इंद्रपाल और फत्ते साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

विशेष लेख-सीएम विष्णु देव साय बस्तर में देंगे राज्य की सबसे बड़े ‘हेरिटेज मैराथन’ की सौगात

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‘बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ की थीम पर 22 मार्च को होगा राज्य का सबसे बड़ा स्पोर्ट्स इवेंट

फिटनेस और विरासत का उत्सव- बस्तर को ग्लोबल टूरिज्म मैप पर लाने की बड़ी तैयारी

बस्तर को देश का प्रमुख टूरिज्म और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन बनाना हमारा संकल्प- साय

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में खेल, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ का आयोजन रविवार 22 मार्च को करने जा रही है। यह राज्य का अब तक का सबसे बड़ा रनिंग इवेंट होगा, जिसकी शुरुआत जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान से होगी और समापन विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात पर होगा। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस रूट पर दौड़ते हुए प्रतिभागियों को बस्तर की अद्भुत वादियों और सांस्कृतिक पहचान का अनूठा अनुभव मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आयोजन को छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि बस्तर हेरिटेज मैराथन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध परंपरा, प्राकृतिक संपदा और जनभागीदारी का उत्सव है। उन्होंने कहा कि ‘बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ के संदेश के साथ यह आयोजन न केवल फिटनेस को बढ़ावा देगा, बल्कि बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को अवसर देना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।

मैराथन में 42 किलोमीटर (फुल मैराथन), 21 किलोमीटर (हाफ मैराथन), 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर (फन रन) की श्रेणियां रखी गई हैं, ताकि हर आयु वर्ग और फिटनेस स्तर के लोग इसमें भाग ले सकें। प्रतिभागियों के लिए कुल 25 लाख रुपये की आकर्षक पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। पंजीकरण शुल्क मात्र 299 रुपये रखा गया है, जबकि बस्तर संभाग के सातों जिलों के प्रतिभागियों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है, जिससे स्थानीय स्तर पर अधिकतम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

प्रतिभागियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मैराथन मार्ग पर व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। पूरे रूट पर नियमित अंतराल पर रिफ्रेशमेंट पॉइंट्स (आरपीएन) स्थापित किए जाएंगे, जहां एनर्जी ड्रिंक्स और पानी की उपलब्धता रहेगी। इसके अलावा मेडिकल सपोर्ट, इमरजेंसी सेवाएं और सुव्यवस्थित रूट मैनेजमेंट भी सुनिश्चित किया गया है ताकि प्रतिभागियों को सुरक्षित और सुगम अनुभव मिल सके। इस आयोजन को और यादगार बनाने के लिए प्रत्येक प्रतिभागी को फिनिशर मेडल, ई-सर्टिफिकेट और प्रोफेशनल रनिंग फोटोग्राफ्स प्रदान किए जाएंगे। साथ ही जुम्बा सेशन और लाइव डीजे जैसे आकर्षक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रतिभागियों में उत्साह और ऊर्जा बनी रहे।

‘रन फॉर नेचर, रन फॉर कल्चर’ (प्रकृति के लिए दौड़ो, संस्कृति के लिए दौड़ो) की थीम पर आधारित यह मैराथन बस्तर की प्राकृतिक धरोहर और जनजातीय संस्कृति को देशभर के सामने प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह अवसर न केवल दौड़ने का है, बल्कि बस्तर को करीब से जानने और उसकी विरासत को महसूस करने का भी है। इच्छुक प्रतिभागी https://www.bastarheritage. run/registration लिंक के माध्यम से या आधिकारिक पोस्टर में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘फिट इंडिया’, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के विजन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने हमेशा भारत की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर दिया है। बस्तर हेरिटेज मैराथन उसी सोच को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है, जहां खेल, संस्कृति और प्रकृति एक साथ जुड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार बस्तर को देश के प्रमुख पर्यटन और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह के आयोजनों से न केवल युवाओं में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। बस्तर के कारीगरों, कलाकारों और छोटे-छोटे व्यवसायों को भी इसकाप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह देश के हर कोने से युवाओं और नागरिकों को आमंत्रित करते हैं कि वे बस्तर आएं, यहां की प्रकृति, संस्कृति और ऊर्जा को महसूस करें और इस ऐतिहासिक मैराथन का हिस्सा बनें।

यात्रा वृत्तांत से सजीव होती है इतिहास और संस्कृति की तस्वीर- मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री ने 'मोदी के राज्य से लौटकर' पुस्तक का किया विमोचन

छत्तीसगढ़ की महिला पत्रकारों के गुजरात भ्रमण पर आधारित निशा द्विवेदी की पुस्तक

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज यहां छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित अपने कार्यालय के सभा कक्ष में युवा पत्रकार निशा द्विवेदी की पुस्तक 'मोदी के राज्य से लौटकर' का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा वृत्तांत से पाठकों के लिए इतिहास और संस्कृति की तस्वीर सजीव हो जाती है। पुस्तक में निशा द्विवेदी ने एक पत्रकार की नजर से गुजरात यात्रा का वर्णन किया है जो बहुत सराहनीय है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनसेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे नेतागण और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हमारे पत्रकार साथियों के जीवन में यह एक समानता है कि दोनों ही अपने कार्यक्षेत्र में हमेशा व्यस्त रहते हैं। सक्रिय पत्रकारिता के बीच यात्रा वृत्तांत जैसी रचना के लिए समय निकाल पाना जरूर कठिन रहा होगा। ये बहुत सुखद है कि द्विवेदी ने अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को किताब के रूप में हम सभी के सामने लेकर आई हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पत्रकार बहनों से मिलना हुआ था। मुलाकात में महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण के विषय में भी चर्चा हुई। ये बहुत खुशी की बात है कि पहली बार छत्तीसगढ़ की 26 महिला पत्रकारों का दल गुजरात राज्य के भ्रमण पर गया। भ्रमण से लौटने के बाद मैंने मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार बहनों से मुलाकात की। उसी समय मैंने उन्हें यह सुझाव दिया था कि वे अपनी यात्रा के अनुभवों को जरूर लिखें। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा इस वर्ष के बजट में भी हमने पत्रकारों के एक्सपोजर विजिट का प्रावधान किया है। हमारे पत्रकार साथी बड़े परिश्रम से सामाजिक सरोकार का कार्य करते हैं। हमारी सरकार हर स्तर पर पत्रकार साथियों को प्रोत्साहित कर रही है। अभी तक पत्रकारों के विविध दल महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, राजस्थान जैसे अनेक राज्यों में हुए हैं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुजरात भ्रमण का उद्देश्य महिला पत्रकारों को विकास के मॉडल को देखने, समझने और उससे सीखने का अवसर देना था। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी इच्छा थी कि इस यात्रा को कोई महिला पत्रकार पुस्तक के रूप में लिखे, और यह पुस्तक उसी भावना का परिणाम है।

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक सुशांत शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, जनसंपर्क आयुक्त डॉ रवि मित्तल, रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी सहित अनेक पत्रकारगण उपस्थित रहे।

बस्तर पंडुम उत्सव पर प्रधानमंत्री मोदी ने दी छत्तीसगढ़वासियों को बधाई

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रायपुर- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ में 7 से 9 फरवरी तक आयोजित हुए “बस्तर पंडुम” उत्सव के लिए प्रदेशवासियों को बधाई दी है। इस विशेष आयोजन में बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत को भव्य रूप से प्रदर्शित किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमारी विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस प्रयास से जुड़े सभी लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले बस्तर का नाम सुनते ही माओवाद, हिंसा और विकास में पिछड़ेपन की तस्वीर सामने आती थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आज बस्तर विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास के लिए जाना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि उनकी यही कामना है कि बस्तर का भविष्य शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव की भावना से भरा हो।




राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अमृत उद्यान विंटर एनुअल्स संस्करण 2026 का उद्घाटन किया

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (1 फरवरी 2026) राष्ट्रपति भवन स्थित अमृत उद्यान के विंटर एनुअल्स संस्करण 2026 के उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाई।

अमृत उद्यान आम जनता के लिए 3 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक खोला जाएगा। उद्यान सप्ताह में छह दिन (मंगलवार से रविवार) सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहेगा, जिसमें अंतिम प्रवेश शाम 5 बजे होगा। सोमवार को रखरखाव के कारण तथा 4 मार्च को होली के अवसर पर उद्यान बंद रहेगा।

विशेष श्रेणियों के लिए उद्यान खुलने की तिथियाँ:

  • 3 मार्च – रक्षा कर्मियों के लिए

  • 5 मार्च – वरिष्ठ नागरिकों के लिए

  • 10 मार्च – महिलाओं एवं जनजातीय महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए

  • 13 मार्च – दिव्यांगजनों के लिए

अमृत उद्यान में प्रवेश और बुकिंग पूर्णतः निःशुल्क है। टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है, जिसे
पर किया जा सकता है। इस वर्ष ऑन-द-स्पॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। आगंतुकों को सलाह दी गई है कि वे अपने स्लॉट पहले से ऑनलाइन बुक करें। किसी भी तिथि की बुकिंग पिछले दिन सुबह 10 बजे बंद हो जाएगी।

प्रवेश एवं आवागमन व्यवस्था:

सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास राष्ट्रपति एस्टेट के गेट नंबर 35 से होगा।
आगंतुकों की सुविधा के लिए सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक शटल बस सेवा हर 30 मिनट में उपलब्ध रहेगी, जो सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी। अंतिम शटल बस शाम 4:00 बजे रवाना होगी।

दर्शनीय मार्ग:

बल वाटिका – प्लूमेरिया गार्डन – बरगद उद्यान – बोन्साई गार्डन – बाब्लिंग ब्रुक – सेंट्रल लॉन – लॉन्ग गार्डन – सर्कुलर गार्डन।

इस वर्ष ट्यूलिप और विभिन्न प्रजातियों के गुलाबों के साथ-साथ आगंतुक बाब्लिंग ब्रुक (झरनों वाला जल प्रवाह) और रिफ्लेक्सोलॉजी पाथ से युक्त बरगद उद्यान का भी आनंद ले सकेंगे।

आगंतुक मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक चाबियाँ, पर्स/हैंडबैग, पानी की बोतलें तथा शिशुओं के लिए दूध की बोतल साथ ले जा सकते हैं। मार्ग में पेयजल, शौचालय एवं प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध रहेंगी।

अमृत उद्यान के अतिरिक्त, लोग राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रपति भवन संग्रहालय का भी मंगलवार से रविवार तक भ्रमण कर सकते हैं। साथ ही प्रत्येक शनिवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में चेंज-ऑफ-गार्ड समारोह भी देखा जा सकता है। 



राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान आम जनता के लिए खुलेगा

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राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान आम जनता के दर्शन हेतु 3 फरवरी से 31 मार्च, 2026 तक खुला रहेगा। इस दौरान लोग सप्ताह में छह दिन उद्यान का भ्रमण कर सकेंगे। उद्यान प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहेगा, जबकि अंतिम प्रवेश शाम 5:15 बजे तक होगा।

सोमवार को रखरखाव के कारण तथा 4 मार्च को होली के अवसर पर उद्यान बंद रहेगा।

अमृत उद्यान में प्रवेश और बुकिंग पूर्णतः निःशुल्क है। आगंतुक पहले से ऑनलाइन बुकिंग https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर कर सकते हैं। वहीं, वॉक-इन विज़िटर्स के लिए प्रवेश द्वार के पास सेल्फ-सर्विस विज़िटर रजिस्ट्रेशन कियोस्क की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास राष्ट्रपति भवन परिसर के गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू और राष्ट्रपति भवन के मिलन बिंदु के पास स्थित है।

आगंतुकों की सुविधा के लिए सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक शटल बस सेवा भी उपलब्ध कराई जाएगी। यह शटल सेवा सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक हर 30 मिनट में चलेगी। शटल बसों की पहचान ‘Shuttle Service for Amrit Udyan’ के बैनर से की जा सकेगी।

अमृत उद्यान का यह आयोजन प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण होगा, जहां वे राष्ट्रपति भवन के सुंदर और सुसज्जित उद्यानों का आनंद ले सकेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने नागालैंड के हॉर्नबिल फेस्टिवल की सांस्कृतिक समृद्धि और आदिवासी विरासत का सम्मान किया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नागालैंड के हॉर्नबिल फेस्टिवल की जीवंत ऊर्जा की सराहना की और इसे भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और आदिवासी विरासत की स्थायी जीवंतता का सशक्त प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज उत्तरी पूर्व भारत नए, आत्मविश्वासी भारत का चेहरा प्रस्तुत करता है। नागालैंड की अनूठी सांस्कृतिक पहचान की प्रशंसा करते हुए मोदी ने कहा कि यह राज्य केवल त्योहारों का आयोजन नहीं करता, बल्कि स्वयं त्योहार का प्रतीक है, और इसलिए इसे “लैंड ऑफ फेस्टिवल्स” का गौरवपूर्ण खिताब प्राप्त है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी और कहा:

“इस प्रेरक आलेख में, केंद्रीय मंत्री @JM_Scindia ने नागालैंड के हॉर्नबिल फेस्टिवल को मानव आत्मा का कैलेडोस्कोप और प्राचीन और आधुनिक का सशक्त संगम बताया है। उन्होंने दोहराया कि हमारा देश तभी आगे बढ़ेगा जब उत्तर-पूर्व चमकेगा।

उत्तर-पूर्व को नए, आत्मविश्वासी भारत का चेहरा बताते हुए मंत्री ने कहा कि नागालैंड केवल उत्सव मनाता ही नहीं है, बल्कि स्वयं उत्सव का प्रतीक है, और यही कारण है कि इसे “लैंड ऑफ फेस्टिवल्स” कहा जाता है।”

भारत में पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि: 11 वर्षों में अवसंरचना और कनेक्टिविटी ने दी नई दिशा

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केंद्रीय पर्यटन मंत्री, गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज कहा कि स्वतंत्रता के बाद के दशकों में भारत में सड़क और रेल अवसंरचना में क्रमिक विकास देखने को मिला, लेकिन पिछले 11 वर्षों में सड़क परिवहन, रेलवे और जलमार्गों में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है। इस विशाल उन्नति ने न केवल राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को सशक्त किया है, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि भी सुनिश्चित की है।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत का पर्यटन क्षेत्र पिछले दशक में ऐतिहासिक विस्तार का अनुभव कर रहा है। यह वृद्धि लक्षित नीति हस्तक्षेप, व्यापक अवसंरचना निर्माण और निरंतर वैश्विक ब्रांडिंग प्रयासों के माध्यम से संभव हुई है। इन उपलब्धियों ने भारत को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्रियों दोनों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित किया है।

पर्यटकों की संख्या में तेज़ी

  • 2014–2024 के दौरान भारत ने 161.16 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन (ITAs) दर्ज किए।

  • विदेशी पर्यटक आगमन (FTAs) 2014–2024 के दौरान 86.22 मिलियन तक बढ़ा, जो 2004–2013 में 52.99 मिलियन था।

  • विदेशी मुद्रा आय (FEEs) 2014–2024 में ₹18.85 लाख करोड़ रही, जो 2004–2013 में ₹6.01 लाख करोड़ थी।

  • घरेलू पर्यटक यात्राएँ (DTVs) 2014–2024 में 18,639.35 मिलियन हुईं, जबकि 2004–2013 में यह 6,779.10 मिलियन थी।

पर्यटन अवसंरचना का विशाल विस्तार

स्वदेश दर्शन योजना (2015 onwards)

  • 76 परियोजनाएँ स्वीकृत, ₹5,290.33 करोड़ का बजट; 75 परियोजनाएँ पूर्ण।

स्वदेश दर्शन 2.0 – सतत एवं गंतव्य-केंद्रित पर्यटन

  • 53 परियोजनाएँ स्वीकृत, ₹2,208.27 करोड़ का बजट।

चैलेंज-बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट (CBDD)

  • 36 परियोजनाएँ स्वीकृत, ₹648.11 करोड़ का बजट, जिनमें शामिल हैं:

    • आध्यात्मिक पर्यटन

    • संस्कृति और धरोहर

    • जीवंत गांव कार्यक्रम

    • इकोटूरिज्म और अमृत धरोहर स्थल

प्रतीकात्मक पर्यटन केंद्रों का विकास (SASCI – 2024–25)

  • 40 परियोजनाएँ 23 राज्यों में स्वीकृत, ₹3,295.76 करोड़ के 50-वर्षीय ब्याज-मुक्त ऋण के तहत।

केंद्रीय एजेंसियों को सहायता

  • 57 परियोजनाएँ स्वीकृत, ₹845.51 करोड़ का बजट (ASI, पोर्ट ट्रस्ट, ITDC, रेलवे आदि के लिए)।

  • 34 परियोजनाएँ पूरी, 9 परियोजनाएँ बंद।

कनेक्टिविटी में सुधार: राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार

  • भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार 2014 से 60% हुआ, 91,287 किमी से बढ़कर 1,46,195 किमी।

  • तुलना के लिए, 2004 में राष्ट्रीय राजमार्ग 65,569 किमी था।
    (स्रोत: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, वार्षिक रिपोर्ट 2024–25)

भारत की समेकित दृष्टि – अवसंरचना विकास, सतत पर्यटन और बेहतर कनेक्टिविटी – ने बड़े सामाजिक-आर्थिक लाभ सुनिश्चित किए हैं, स्थानीय आजीविका सशक्त हुई है और भारत को एक वैश्विक पर्यटन महाशक्ति के रूप में स्थापित किया है। पिछले दशक की ये उपलब्धियाँ सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, जो पर्यटन को राष्ट्रीय विकास का महत्वपूर्ण चालक बना रही है।


गंगटोक में आयोजित होगा उत्तर-पूर्व क्षेत्र का 13वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट 2025

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भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए 13वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (ITM) का आयोजन 13 से 16 नवंबर 2025 तक गंगटोक, सिक्किम में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत करेंगे। इस अवसर पर सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उत्तर-पूर्वी राज्यों के पर्यटन मंत्री एवं पर्यटन मंत्रालय तथा राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट, पर्यटन मंत्रालय की एक वार्षिक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य उत्तर-पूर्वी क्षेत्र — “भारत की अष्टलक्ष्मी” — की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करना है। यह आयोजन क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए सतत और समावेशी पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। गंगटोक में आयोजित यह 13वां संस्करण मंत्रालय की इस प्रतिबद्धता को दोहराता है कि उत्तर-पूर्व को ईको-टूरिज़्म, वेलनेस, संस्कृति और एडवेंचर के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा।

गंगटोक में इस आयोजन का विशेष महत्व है। सिक्किम को सतत और जिम्मेदार पर्यटन का आदर्श राज्य माना जाता है। स्वच्छ प्राकृतिक सौंदर्य, जैविक खेती, आध्यात्मिक विरासत और जीवंत स्थानीय संस्कृति के कारण सिक्किम उस सामुदायिक और पर्यावरण-सचेत पर्यटन का उत्कृष्ट उदाहरण है जिसे मंत्रालय पूरे देश में प्रोत्साहित करना चाहता है। यह आयोजन मंत्रालय की ‘ट्रैवल फॉर लाइफ’ पहल के अनुरूप है।

13वें अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में देश-विदेश से व्यापक भागीदारी होगी। 19 देशों (जैसे स्पेन, थाईलैंड, फ्रांस, रूस, जर्मनी, वियतनाम आदि) से प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में 39 अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर, 5 अंतरराष्ट्रीय इन्फ्लुएंसर, 50 घरेलू खरीदार, 20 घरेलू इन्फ्लुएंसर एवं ट्रैवल मीडिया, और 91 घरेलू विक्रेता शामिल होंगे। आयोजन में तकनीकी सत्र, पैनल चर्चाएं, उत्पाद प्रस्तुतिकरण और B2B मीटिंग्स आयोजित की जाएंगी ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिल सके।

राज्य पर्यटन अधिकारियों के साथ चर्चाएं सिनेमैटिक टूरिज्म, होमस्टे, युवा उद्यमिता, डिजिटल नवाचार, स्थायित्व और साहसिक पर्यटन जैसे विषयों पर केंद्रित होंगी। कार्यक्रम में उत्तर-पूर्व की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, प्रतिभागियों को गंगटोक और उसके आसपास के प्रमुख स्थलों जैसे रुमटेक मठ, दो द्रुल छोर्टेन और नामग्याल तिब्बतोलॉजी संस्थान के तकनीकी भ्रमण का अवसर भी मिलेगा।

उत्पाद प्रस्तुतियों में वन्यजीव और नदी क्रूज़ पर्यटन, त्योहारों, विरासत, हस्तशिल्प, खानपान और साहसिक गतिविधियों जैसे क्षेत्रों की संभावनाएं प्रदर्शित की जाएंगी। आयोजन के बाद, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू प्रतिभागियों के लिए उत्तर-पूर्वी राज्यों के विभिन्न गंतव्यों की यात्राओं का आयोजन किया जाएगा ताकि वे क्षेत्र की सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें।

गंगटोक में आयोजित 13वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट 2025, उत्तर-पूर्व की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव होने के साथ-साथ, सरकार की इस दृष्टि को भी सुदृढ़ करता है कि उत्तर-पूर्व को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। अपनी शांत प्राकृतिक दृश्यों, जीवंत समुदायों और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता के साथ, सिक्किम इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रस्तुत करता है — जो एकता में विविधता और जिम्मेदार पर्यटन आधारित विकास की भावना का प्रतीक है।

जशपुर जम्बुरी में पर्यटकों ने लिया ग्रामीण संस्कृति, रोमांच और आतिथ्य का अनूठा अनुभव

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ग्राम केरे में आठ होम स्टे की सुविधा, देशदेखा में रॉक क्लाइंबिंग और लोक नृत्य-संस्कृति का आकर्षण

रायपुर-छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में आयोजित जशपुर जम्बुरी ने पर्यटन को नया आयाम देते हुए स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और रोमांच को एक साथ जोड़ा है। जिला प्रशासन द्वारा 6 से 9 नवम्बर तक आयोजित इस चार दिवसीय आयोजन में देशभर से आए पर्यटकों को जशपुर की सुन्दर वादियों, लोक संस्कृति और आतिथ्य का सजीव अनुभव प्राप्त हो रहा है।

ग्राम केरे में पर्यटकों के लिए आठ होम स्टे की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जहाँ मेहमानों को सभी आवश्यक सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। प्रशासन की इस पहल ने ग्रामीण पर्यटन को नई दिशा दी है और स्थानीय परिवारों को भी आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर मिला है।

होम स्टे में ठहरे पर्यटक केवल अतिथि नहीं, बल्कि स्थानीय परिवारों के सदस्य बनकर रह रहे हैं। वे जशपुर की जीवनशैली, खान-पान और परंपराओं को नजदीक से महसूस कर रहे हैं। पर्यटकों ने कहा कि “होम स्टे में रहना होटल से कहीं बेहतर अनुभव है। यहाँ की सादगी, आत्मीयता और घरेलू भोजन ने मन मोह लिया।”

होम स्टे की यह अवधारणा स्थानीय जीवन से सीधा जुड़ाव प्रदान करती है। यहाँ पर्यटक घरेलू वातावरण में रहकर न केवल स्थानीय संस्कृति और भाषा को समझते हैं, बल्कि परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद भी लेते हैं। यह मॉडल होटल की तुलना में अधिक किफायती होने के साथ-साथ व्यक्तिगत और पारिवारिक वातावरण भी प्रदान करता है।

भारत के कई राज्यों — हिमाचल, उत्तराखंड, केरल, सिक्किम और असम — की तरह अब छत्तीसगढ़ भी होम स्टे आधारित ग्रामीण पर्यटन के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जशपुर की पहाड़ियाँ और हरियाली इस अवधारणा को और अधिक आकर्षक बनाती हैं।

जशपुर जम्बुरी में रोमांच प्रेमियों के लिए भी विशेष आकर्षण रहा। देशदेखा क्षेत्र में लगभग 120 पर्यटकों ने रॉक क्लाइंबिंग का रोमांचक अनुभव लिया, जो पूरी सुरक्षा और विशेषज्ञों की निगरानी में संपन्न हुआ। पर्यटक हरी-भरी वादियों के बीच एडवेंचर और सुकून दोनों का आनंद ले रहे हैं।

पहले दिन पंजीकृत पर्यटकों को जशपुर की पारंपरिक शैली में दोना-पत्तल में भोजन परोसा गया। दिनभर की गतिविधियों के बाद संध्या बेला में पर्यटक लोक कलाकारों के साथ झूमते नजर आए। चांदनी रात और संगीत की स्वर-लहरियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।

जशपुर जम्बुरी की विशेषता रही स्टार-गेजिंग सेशन, जिसमें पर्यटकों ने खुले आसमान के नीचे तारों को निहारते हुए प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का अनुभव किया। लोक कलाकारों के गीत, नृत्य और चांदनी की उजास ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।

जिला प्रशासन द्वारा निवास, भोजन, सुरक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुदृढ़ व्यवस्था ने जशपुर जम्बुरी को एक आदर्श ग्रामीण-पर्यटन उत्सव बना दिया है। इस आयोजन से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है, बल्कि जशपुर को “प्रकृति, संस्कृति और एडवेंचर का संगम” के रूप में राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिली है।


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