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केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ के 85वें संस्करण का नेतृत्व किया, ‘नशा मुक्त भारत’ का दिया संदेश

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केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुजरात से देशभर में आयोजित ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ के 85वें संस्करण का नेतृत्व किया। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम का संदेश था—‘फिटनेस को हां, ड्रग्स को ना।’

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा फिट इंडिया आंदोलन के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में भारत के युवाओं को नशे के खिलाफ अभियान के केंद्र में रखा गया। पहल का उद्देश्य नशे जैसी हानिकारक आदतों के सकारात्मक विकल्प के रूप में फिटनेस को बढ़ावा देना और युवाओं को स्वस्थ एवं सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

डॉ. मांडविया ने ‘संडे ऑन साइकिल’ को एक जन आंदोलन बताते हुए कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के फिट इंडिया आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि देशभर में 10,000 से अधिक स्थानों पर युवाओं और नागरिकों ने साइकिलिंग के माध्यम से फिटनेस का संदेश दिया है।

दिसंबर 2024 में डॉ. मांडविया द्वारा शुरू किए गए ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान में अब तक देशभर में 30 लाख से अधिक लोग भाग ले चुके हैं।

दिल्ली में इसका मेगा आयोजन मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में किया गया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सामूहिक ‘नशा मुक्त भारत’ संकल्प रहा, जिसमें 1,000 से अधिक प्रतिभागियों ने नशे से मुक्त जीवन जीने और अपने परिवार, मित्रों तथा समुदाय को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।

रविवार सुबह तड़के ही फिटनेस गतिविधियां शुरू हो गईं। सुबह 5:30 बजे तक 1,000 से अधिक नागरिक कार्यक्रम स्थल पर पहुंच चुके थे। प्रतिभागियों ने योग और जुंबा सहित विभिन्न फिटनेस गतिविधियों में हिस्सा लिया। इसके बाद इंडिया गेट और कर्तव्य पथ के आसपास 5 किलोमीटर की साइकिलिंग राइड आयोजित की गई।

कार्यक्रम स्थल पर एक विशेष गेम जोन भी बनाया गया, जहां कैरम, शतरंज, लूडो और बैडमिंटन जैसी गतिविधियों के साथ-साथ टग ऑफ वॉर और बाधा दौड़ जैसी फिटनेस गतिविधियां भी आयोजित की गईं।

इस अवसर पर अभिनेता एवं मॉडल सिद्धार्थ निगम, अंतरराष्ट्रीय स्क्वैश खिलाड़ी और जूनियर नेशनल चैंपियन गुरवीर सिंह, IRS अधिकारी एवं फिट इंडिया एंबेसडर नरेंद्र कुमार तथा फिट इंडिया चैंपियन और प्रसिद्ध जुंबा प्रशिक्षक मीनल पाठक सहित कई विशेष अतिथियों ने भाग लिया।

साइकिलिंग राइड पूरी करने के बाद सिद्धार्थ निगम ने कहा कि सुबह 5 बजे दिल्ली के लोगों को इतने उत्साह और ऊर्जा के साथ साइकिल चलाते देखना शानदार अनुभव था। उन्होंने कहा कि ‘नशा मुक्त भारत’ की थीम लोगों को यह संदेश देती है कि हानिकारक नशे की जगह फिटनेस, मेहनत और अपने लक्ष्य हासिल करने की आदत अपनानी चाहिए।

उन्होंने युवाओं से ड्रग्स, सिगरेट और शराब से दूर रहने तथा प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट फिटनेस के लिए देने की अपील की। उन्होंने कहा—“Fitness ka dose, aadhe ghante roz.”

गुरवीर सिंह ने भी पहल की सराहना करते हुए कहा कि फिट इंडिया और नशा मुक्त भारत युवाओं को फिटनेस की ओर प्रेरित करने और नशे से दूर रखने वाली बेहतरीन पहल हैं। उन्होंने सभी से प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि के लिए देने का आग्रह किया।

उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के 39 पदक जीतने के प्रदर्शन की भी सराहना करते हुए कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने देश को गौरवान्वित किया है।

‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ का आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (CFI), राहगीरी फाउंडेशन और MY Bharat के सहयोग से किया जाता है।

यह साइकिलिंग अभियान देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ आयोजित किया जाता है। इसमें SAI क्षेत्रीय केंद्रों, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों (NCOEs), SAI प्रशिक्षण केंद्रों (STCs), खेलो इंडिया राज्य उत्कृष्टता केंद्रों (KISCEs), खेलो इंडिया केंद्रों (KICs) तथा हजारों नमो फिट इंडिया क्लबों के साथ साइकिलिंग प्रेमी, स्कूल और कॉलेज भी भाग लेते हैं।


एचपीवी टीकाकरण में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला बना प्रदेश में अव्वल

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विशेष टीकाकरण दिवस पर राज्य में सर्वाधिक बालिकाओं को लगी एचपीवी वैक्सीन, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में बड़ी उपलब्धि

स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ की प्रभावी रणनीति और जनजागरूकता अभियान से 74 विद्यालयों में चला व्यापक टीकाकरण अभियान, हजारों बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य की रखी मजबूत नींव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा  बालिकाओं के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संचालित जनकल्याणकारी स्वास्थ्य अभियानों का सकारात्मक परिणाम अब प्रदेशभर में दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित विशेष एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 17 जुलाई को आयोजित विशेष टीकाकरण दिवस पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने पूरे प्रदेश में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। यह उपलब्धि राज्य सरकार की दूरदर्शी स्वास्थ्य नीति, प्रभावी कार्ययोजना तथा स्वास्थ्य विभाग की सुदृढ़ कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण है।

राज्य सरकार बेटियों के स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। एचपीवी टीकाकरण जैसी पहल भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रत्येक पात्र बालिका तक यह सुरक्षा कवच पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है।

13 से 18 जुलाई तक आयोजित विशेष एचपीवी टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की पात्र बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाकर सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित करने का अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में अभियान की शुरुआत विकासखंड गौरेला के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवसा एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चुकतीपानी से की गई।

राज्य स्तर से जिले को 3,893 बालिकाओं के टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। विशेष टीकाकरण दिवस पर जिले के 74 विद्यालयों में चिकित्सा अधिकारियों एवं स्वास्थ्य अमले की उपस्थिति में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान संचालित किया गया। अभियान के दौरान लगभग 809 बालिकाओं का ऑनलाइन तथा 1,100 बालिकाओं का ऑफलाइन पंजीकरण एवं टीकाकरण किया गया। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने राज्य में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर नई उपलब्धि दर्ज की।

अभियान की सफलता में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभियान के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास गोपेश मनहर सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, चिकित्सा अधिकारी, शिक्षकों तथा विद्यालय प्रबंधन का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ।

स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विद्यालय आधारित टीकाकरण अभियान के माध्यम से बालिकाओं और उनके अभिभावकों को एचपीवी संक्रमण, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम तथा टीकाकरण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। यह अभियान केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि किशोरियों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और भविष्य में गंभीर बीमारियों से सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रभावी प्रयास भी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को प्राथमिकता तथा निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का यह परिणाम है कि प्रदेश में स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावी ढंग से सफल हो रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की यह उपलब्धि न केवल जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ जनस्वास्थ्य की सुरक्षा एवं स्वस्थ भविष्य के निर्माण के लिए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

नशा मुक्त भारत सप्ताह 2026 में 1.31 करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी, हरिद्वार में राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम के साथ हुआ समापन

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17 जून से 26 जून 2026 तक आयोजित नशा मुक्त भारत सप्ताह के दौरान देशभर में 1.31 करोड़ से अधिक नागरिकों ने विभिन्न जागरूकता एवं जनभागीदारी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस अभियान के तहत नशा मुक्ति मित्र पंजीकरण अभियान, सेमिनार, वेबिनार, बच्चों एवं युवाओं के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, लघु नाटिकाएं, स्लोगन लेखन प्रतियोगिताएं, ई-प्रतिज्ञा, रैलियां, योग सत्र, हस्ताक्षर अभियान, निबंध लेखन और चित्रकला प्रतियोगिताएं सहित अनेक सामुदायिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।

यह सप्ताह अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसका समापन 26 जून 2026 को देव संस्कृति विश्वविद्यालय (DSVV), हरिद्वार, उत्तराखंड में आयोजित राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम के साथ हुआ।

कार्यक्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पंड्या सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया।

4,000 लोगों ने निकाली नशा मुक्त रैली

कार्यक्रम के दौरान डॉ. वीरेन्द्र कुमार के नेतृत्व में नशा मुक्त रैली निकाली गई, जिसमें लगभग 4,000 नागरिकों ने भाग लेकर नशामुक्त भारत के राष्ट्रीय अभियान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने उपस्थित लोगों को नशा मुक्ति की शपथ तथा गरिमापूर्ण वृद्धावस्था (Ageing with Dignity) की शपथ दिलाई और नशामुक्त एवं समावेशी समाज के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

देशभर से हजारों लोगों की सहभागिता

कार्यक्रम में छात्रों, युवाओं, विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों के स्वयंसेवकों, उत्तराखंड सरकार के प्रतिनिधियों तथा स्थानीय हितधारकों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इसके अलावा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों, विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों, अनुदान प्राप्त संस्थानों, नशा मुक्ति उपचार केंद्रों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर नशा मुक्त भारत के संकल्प को मजबूत किया।

दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के बीच दो समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर रहा।

ये समझौते—

  • नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) तथा

  • अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY)

के अंतर्गत किए गए।

इनका उद्देश्य देशभर में जन-जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता, नशीले पदार्थों की मांग में कमी तथा गरिमापूर्ण वृद्धावस्था के संदेश को बढ़ावा देकर वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को मजबूत करना है।

उत्कृष्ट योगदान देने वालों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, जिलों, विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और अनुदान प्राप्त संस्थानों द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान के तहत किए गए कार्यों की सराहना की गई।

साथ ही, नशा मुक्ति मित्रों को समुदाय में जागरूकता फैलाने और लोगों को जोड़ने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

राज्य सरकारों द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हितधारकों को भी सम्मानित किया गया।

नशा मुक्त भारत के लिए जनभागीदारी का आह्वान

नशा मुक्त भारत सप्ताह 2026 और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के सफल आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि भारत सरकार 'सम्पूर्ण सरकार और सम्पूर्ण समाज' (Whole-of-Government & Whole-of-Society) दृष्टिकोण के माध्यम से नशामुक्त समाज बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने सभी नागरिकों, शैक्षणिक संस्थानों, युवा संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और समुदायों से इस राष्ट्रीय जनआंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने और "नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत" के लक्ष्य को साकार करने का आह्वान किया।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले कोलकाता में ‘दौड़ से ध्यान’ कार्यक्रम का आयोजन, हजारों लोगों ने लिया भाग

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कोलकाता- 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 के पूर्व आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत कोलकाता में “दौड़ से ध्यान 2026 – From Movement to Stillness” का भव्य आयोजन किया गया। स्वच्छता से स्वागत कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस अनूठी पहल ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, नागरिक जिम्मेदारी और समग्र कल्याण के संदेश को एक साथ जोड़ने का कार्य किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ आज सुबह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी तथा केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने संयुक्त रूप से किया। दोनों नेताओं ने कोलकाता नगर निगम (KMC) मुख्यालय से ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग तक आयोजित मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

मैराथन के बाद राइटर्स बिल्डिंग परिसर में योग और ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक शांति का संदेश दिया।

इस अवसर पर मंत्री इंद्रनील खान, अग्निमित्रा पॉल और तापस रॉय, विधायक विजय ओझा, पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव डॉ. मनोज कुमार अग्रवाल, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। प्रसिद्ध पूर्व टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भी योग सत्र में भाग लेकर कार्यक्रम को विशेष उत्साह प्रदान किया।

11 स्थानों पर एक साथ आयोजित हुई योग दौड़

इस पहल के तहत कोलकाता के 11 प्रमुख स्थानों पर एक साथ 2 किलोमीटर की योग रन आयोजित की गई। इसका उद्देश्य लोगों को योग को जीवनशैली के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

योग रन के प्रमुख स्थानों में शामिल रहे:

  • पी.ए.सी. टेंट मैदान

  • एलियट पार्क

  • आरएसएम स्क्वायर (सेंट्रल)

  • ताला पार्क (बेलगछिया)

  • सुभाष सरोवर (बेलियाघाटा)

  • कैप्टन भेरी (ईएम बाईपास)

  • गोलपार्क (विवेकानंद पार्क)

  • गीतांजलि स्टेडियम (कस्बा)

  • केएफआर ग्राउंड (बेहाला)

  • संघमित्रा स्कूल मैदान (वेस्ट पोर्ट)

  • चंडीपुरा रंगसारा ग्राउंड (भांगर)

योग का मूल संदेश: गति से स्थिरता की ओर

कार्यक्रम का मुख्य संदेश “दौड़ से ध्यान” योग के वास्तविक स्वरूप को दर्शाता है, जिसमें शारीरिक गतिविधि से मानसिक शांति, अनुशासन से संतुलन और सामूहिक प्रयास से समग्र कल्याण की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी जाती है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले पश्चिम बंगाल में आयोजित इस तरह के कार्यक्रम योग के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।


विशेष लेख -सहूलियत, सम्मान और सेहत...हर घर नल से बदली जिंदगी

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रोज सुबह उठते ही घर में नल से साफ पानी आते देखने की खुशी क्या होती है, इसे कमली से पूछिए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव को अपने आंगन में लगे नल से आ रहे पानी की धार को दिखाते खुशी से उनकी आंखें डबडबा गईं। जल जीवन मिशन ने कमली जैसी हजारों महिलाओं को अमूल्य खुशियां दी हैं। कभी पीने और निस्तारी के पानी के लिए दिनभर चिंतित रहने वाली इन महिलाओं का जीवन घर में लगे नल ने बदल दिया है।

उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव अपने चार दिनों के बस्तर प्रवास के दौरान जल जीवन मिशन का काम देखने कमली के भी गांव पहुंचे। कमली के गांव बस्तर जिले के तोकापाल विकासखण्ड के दुगनपाल में उन्होंने कुछ और घरों में भी जाकर नल से पानी आते देखा। जल जीवन मिशन से घर में पानी पहुंचने की खुशी सभी महिलाओं के चेहरे पर दिख रही थी।

जल जीवन मिशन दूरस्थ गांवों और वनांचलों की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहा है। आधी आबादी के एक बड़े हिस्से को पीने के पानी के लिए रोज जूझना पड़ता था। खासतौर से गर्मियों के दिनों में जब हर साल सिर पर पानी के बर्तन का सफर कुछ सौ मीटरों से कुछ किलोमीटरों में बदल जाता था। 

जीवन के लिए अनिवार्य जरुरत पानी की व्यवस्था गर्मियों में महिलाओं का जीवन दुष्कर बना देती थी। दुगनपाल में भी महिलाओं को रोज गांव के हैंडपंप या कुआं पर जाकर घर के सभी लोगों के लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता था। घर में नल लग जाने से अब इस समस्या से निजात मिल गई है। जल जीवन मिशन के काम जैसे-जैसे पूरे होते जा रहे हैं, महिलाओं की बाहर से पानी लाने की चिंता और तकलीफ दूर होते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में अब तक साढ़े आठ हजार से अधिक योजनाओं को पूर्ण कर संचालन के लिए पंचायतों को सौंपा जा चुका है।

जल जीवन मिशन महज हर घर तक पेयजल पहुंचाने की योजना नहीं है। यह महिलाओं की दिनचर्या और जीवन में भी बड़ा बदलाव ला रहा है। गांवों में परंपरागत रूप से घर में पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए पानी के इंतजाम का जिम्मा महिलाओं पर ही है। घर तक पानी की पहुंच न होने के कारण उन्हें हैंडपंपो, सार्वजनिक नलों, कुंओं या अन्य स्रोतों से रोज पूरे परिवार के लिए जल संग्रहण करना पड़ता है। 

रोजाना का यह श्रमसाध्य और समयसाध्य काम बारिश तथा भीषण गर्मी के दिनों में और कठिन हो जाता है। कई इलाकों में गर्मियों में जलस्रोतों के सूख जाने के कारण दूर-दूर से पानी लाने की मजबूरी रहती है। परिवार के लिए पानी की व्यवस्था हर दिन का संघर्ष बन जाता है। महिलाओं के दिन के कई घंटे इसी काम में निकल जाते हैं।

जल जीवन मिशन हर घर तक नल से जल पहुंचाने के साथ ही महिलाओं को कई समस्याओं से निजात दिला रहा है। घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचने से वे कई चिंताओं से मुक्त हो गई हैं। अब रोज-रोज पानी के लिए बहुत सारा श्रम और समय नहीं लगाना पड़ता। इससे उन्हें घर के दूसरे कामों, बच्चों की परवरिश, खेती-बाड़ी एवं आजीविका के अन्य कार्यों के लिए अधिक समय मिल रहा है और वे इन कार्यों पर अपना ज्यादा ध्यान व समय दे पा रही हैं।

जल जीवन मिशन से बारहों महीने घर पर ही जलापूर्ति से लगातार बारिश तथा गर्मी के दिनों में बाहर से पानी लाने की मुसीबत दूर हो गई है। गर्मियों में जलस्तर के नीचे चले जाने से तथा बरसात में लगातार बारिश से जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। गुणवत्ताहीन पेयजल से पेट तथा निस्तारी के लिए खराब जल के उपयोग से त्वचा संबंधी रोगों का खतरा रहता है। जल जीवन मिशन ने सेहत के इन खतरों को भी दूर कर दिया है।

फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल: स्वस्थ भारत के लिए जन आंदोलन बनता अभियान

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नई दिल्ली- देश में फिटनेस को जन आंदोलन बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय युवा एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल के 69वें संस्करण का नेतृत्व किया।

इस अवसर पर उन्होंने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से अपील की कि वे फिट इंडिया अभियान से जुड़ें और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें।

डॉ. मंडाविया ने कहा कि “संडे ऑन साइकिल अब एक राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर देश का युवा फिटनेस के प्रति अधिक जागरूक हुआ है। फिट इंडिया केवल संदेश नहीं, बल्कि विकसित भारत के लिए आवश्यकता है।”

फिटनेस और विकास का संबंध

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एक स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ समाज बनाता है और स्वस्थ समाज ही देश को विकसित बनाता है।

फिटनेस के साथ पर्यावरण संरक्षण

फिट इंडिया ऐप के जरिए साइक्लिंग करने पर कार्बन क्रेडिट अर्जित करने की सुविधा भी दी जा रही है, जिसे भविष्य में उत्पाद खरीदने में उपयोग किया जा सकेगा। यह पहल फिटनेस के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देती है।

कार्यक्रम की झलकियां

कार्यक्रम में सुबह से ही उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला:

  • जुम्बा, योग और खेल गतिविधियां

  • रस्सीकूद, टग ऑफ वॉर और फिटनेस गेम्स

  • फोटो बूथ और इंटरैक्टिव जोन

  • नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता

कॉमनवेल्थ गेम्स की कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज पिंकी जांगड़ा, फिटनेस इन्फ्लुएंसर दिनेश शेट्टी और सामाजिक कार्यकर्ता सोनिया सिसोदिया को सम्मानित किया गया।

व्यापक भागीदारी

देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह साइक्लिंग अभियान एक साथ आयोजित किया गया। इसमें छात्र, खिलाड़ी, पेशेवर, परिवार और विभिन्न आयु वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

जन आंदोलन की ओर

दिसंबर 2024 में शुरू हुए इस अभियान में अब तक 28 लाख से अधिक लोग और 2.63 लाख स्थानों पर भागीदारी दर्ज की जा चुकी है।

यह पहल न केवल फिटनेस को बढ़ावा दे रही है, बल्कि समाज में जागरूकता, सहभागिता और स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में एक मजबूत जन आंदोलन बनती जा रही है।

9 से 23 अप्रैल तक मनाया जाएगा पोषण पखवाड़ा 2026, बच्चों के बेहतर विकास और पोषण पर जोर

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नई दिल्ली- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 9 से 23 अप्रैल 2026 तक पोषण पखवाड़ा (Poshan Pakhwada) का 8वां संस्करण मनाने जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य देशभर में माताओं और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाना और स्वस्थ भारत की नींव को मजबूत करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोषण के महत्व पर जोर देते हुए कहा है कि “एक स्वस्थ और पोषित बच्चा ही एक मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। पोषण अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन आंदोलन है।”

इस वर्ष पोषण पखवाड़ा का राष्ट्रीय शुभारंभ 9 अप्रैल 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में होगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर और मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक मौजूद रहेंगे।

इस वर्ष की थीम

“जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क विकास को अधिकतम करना”
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिन और 6 वर्ष तक का समय उसके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान 85% तक मस्तिष्क विकास हो जाता है।

मुख्य फोकस क्षेत्र

  • मातृ एवं शिशु पोषण: गर्भावस्था, स्तनपान और सही आहार पर जोर

  • 0–3 वर्ष: बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए शुरुआती गतिविधियां

  • 3–6 वर्ष: खेल आधारित शिक्षा और समग्र विकास

  • स्क्रीन टाइम कम करना: बच्चों में स्वस्थ आदतें बढ़ाना

  • आंगनवाड़ी सशक्तिकरण: सामुदायिक भागीदारी और बेहतर सुविधाएं

देशभर में जागरूकता अभियान

इस पखवाड़े के दौरान देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों में

  • पोषण पंचायत

  • जागरूकता कार्यक्रम

  • खेल आधारित शिक्षा

  • स्वस्थ जीवनशैली अभियान
    आयोजित किए जाएंगे, जिनमें माताएं, परिवार और समुदाय सक्रिय रूप से भाग लेंगे।

जन आंदोलन के रूप में पोषण अभियान

पोषण अभियान आज एक जन आंदोलन बन चुका है, जिसमें लोगों की भागीदारी से कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मजबूत किया जा रहा है।

निष्कर्ष

पोषण पखवाड़ा 2026 का उद्देश्य यह संदेश देना है कि सही पोषण, देखभाल, शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी से ही एक स्वस्थ, शिक्षित और सशक्त भारत का निर्माण संभव है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने ‘स्वच्छता पखवाड़ा 2026’ के तहत चलाया स्वच्छता और जागरूकता अभियान

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खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) ने 16 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा के तहत स्वच्छता और जागरूकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया। इस अभियान के माध्यम से विभाग ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

वर्ष 2026 विभाग में स्वच्छता पखवाड़ा के क्रियान्वयन का लगातार 11वां वर्ष है। अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए DFPD से जुड़े सभी संगठनों और कार्यालयों को विस्तृत दिशा-निर्देशों के साथ गतिविधियों का कैलेंडर भेजा गया, ताकि अभियान में समन्वित और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

अभियान की शुरुआत 16 फरवरी 2026 को उद्घाटन समारोह के साथ हुई, जिसमें विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छता शपथ ली। यह शपथ खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार के नेतृत्व में दिलाई गई, जिसमें कार्यस्थलों और दैनिक जीवन में स्वच्छता के सर्वोत्तम तरीकों को अपनाने का संकल्प लिया गया।

पखवाड़े के दौरान कई गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें एकल-उपयोग प्लास्टिक के प्रयोग को हतोत्साहित करना, प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना और वृक्षारोपण अभियान शामिल थे। विभाग के कार्यालयों में स्वच्छता के महत्व को दर्शाने वाले बैनर और पोस्टर भी लगाए गए।

DFPD के अंतर्गत आने वाले सभी संगठनों ने “स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत” के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए दैनिक रूप से अभियान में भाग लिया। इस दौरान कार्यालय परिसरों की सफाई, अनावश्यक सामान हटाना, धूल-सफाई और सैनिटाइजेशन, कचरे का पृथक्करण तथा शौचालयों और अन्य साझा स्थानों की साफ-सफाई जैसे कार्य किए गए, जिससे कार्यस्थल को अधिक स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सके।

अभियान के अंतर्गत सफाई मित्रों के योगदान को सम्मानित करने के लिए एक सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्वच्छता कर्मियों को उनके समर्पित कार्य के लिए धन्यवाद स्वरूप उपहार भेंट किए गए।

विभाग ने स्वच्छता के इस अभियान को निरंतर जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि स्वच्छ और स्वस्थ भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सके।

कोयंबटूर में स्वास्थ्य क्षेत्र के दो बड़े कार्यक्रमों में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन शामिल, ‘स्वस्थ भारत–विकसित भारत’ पर दिया जोर

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कोयंबटूर- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित दो प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भाग लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे परिवर्तन को रेखांकित किया।

उपराष्ट्रपति ने कोवाई मेडिकल सेंटर एंड हॉस्पिटल (केएमसीएच) में केएमसीएच इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज एवं ओपीडी ब्लॉक तथा केएमसीएच मेडिकल कॉलेज पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने कोडिसिया हॉल, कोयंबटूर में आयोजित रामकृष्णा हॉस्पिटल के स्वर्ण जयंती समारोह और रामकृष्णा डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

दोनों कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये संस्थान गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और करुणा के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल एक सेवा क्षेत्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का मिशन है।

उन्होंने सरकार की पहलों के साथ तालमेल बिठाने में निजी स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि सरकारी संस्थानों के साथ-साथ विश्वसनीय निजी चिकित्सा संस्थान ‘स्वस्थ भारत’ और ‘विकसित भारत @2047’ की दिशा में देश की यात्रा में अहम भूमिका निभाएंगे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार हो रहे हैं। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना बन चुकी है, जिससे लगभग 50 करोड़ नागरिकों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है और गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है। साथ ही, देशभर में स्थापित स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों ने निवारक और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती दी है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, बुजुर्गों की देखभाल और गैर-संचारी रोगों का प्रबंधन भी शामिल है।

चिकित्सा पेशेवरों की कमी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। पिछले एक दशक में एमबीबीएस सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वर्ष 2029 तक 75,000 और सीटें जोड़ने की योजना है। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 300 से अधिक नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं, जिससे चिकित्सा शिक्षा महानगरों से बाहर तक पहुंची है।

केएमसीएच इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के उद्घाटन के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियां वैश्विक स्तर पर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन रही हैं। अत्याधुनिक न्यूरो-नेविगेशन और रोबोटिक सर्जरी सुविधाओं से युक्त यह संस्थान समय की जरूरत को पूरा करने वाला एक दूरदर्शी कदम है।

रामकृष्णा हॉस्पिटल के स्वर्ण जयंती समारोह में उपराष्ट्रपति ने वर्ष 2016 में बनाए गए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की सराहना की, जब केवल आठ घंटे में 13,206 अंगदान प्रतिज्ञाएं एकत्र की गई थीं।

भारतीय सभ्यतागत सोच का उल्लेख करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत में सदैव अच्छे स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन माना गया है। उन्होंने दोहराया कि “स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की नींव है” और स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को लागत नहीं, बल्कि देश के भविष्य में निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने दोनों कार्यक्रमों के दौरान लोगों से संवाद किया और सभी को पोंगल पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।

फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल का 57वां संस्करण: देशभर में जागरूकता और फिटनेस का संदेश, गोंडल और हैदराबाद में हुआ आयोजन

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आज सुबह देशभर में फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल का 57वां संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने राजकोट के निकट गोंडल में किया, जबकि केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने हैदराबाद में 1,000 से अधिक प्रतिभागियों के साथ कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

गोंडल में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 250 साइकिलिस्टों ने भाग लिया और फिटनेस एवं स्थिरता का संदेश फैलाया।
डॉ. मांडविया ने X (ट्विटर) पर लिखा, “भारत को फिट बनाने के लिए हमें हर रविवार साइकिल पर भाग लेना होगा।”

कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि साइकिल चलाना सभी उम्र के लोगों के लिए सर्वोत्तम व्यायाम है और यह कार्बन फुटप्रिंट कम करने में भी मदद करता है। उन्होंने सभी से नियमित रूप से साइकिलिंग करने की अपील की और कहा कि यह एक समुदाय भावना को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि “हम सभी को अपने शहर में हर रविवार किसी स्थान पर साइकिल चलाने के लिए जुड़ना चाहिए।”

उन्होंने शारीरिक और मानसिक फिटनेस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एक देश उतना ही मजबूत है जितने उसके नागरिक। विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रत्येक भारतीय को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है। यह वही दृष्टि है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास है।

इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले लोगों के साथ बातचीत के दौरान कई प्रेरणादायक कहानियाँ सामने आईं, जिसमें साइकिलिंग को समुदाय के साथ जुड़ाव का माध्यम बताया गया।

फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल अब एक राष्ट्रीय जन आंदोलन बन चुका है, जिसमें 22 लाख से अधिक नागरिक और 2 लाख से अधिक स्थान जुड़ चुके हैं।

इस कार्यक्रम का आयोजन हृदय-स्थिरता (Heartfulness Institute) के सहयोग से हैदराबाद के गाचीबावली स्टेडियम में भी किया गया, जिसमें कई दिग्गज खिलाड़ी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी, SAI के चेयरमैन शिवा सेना रेड्डी, बैडमिंटन महान पुलेला गोपीचंद, अर्जुन पुरस्कार विजेता शूटर एशा सिंह, पैरालिम्पिक कांस्य पदक विजेता दीप्ति जीवांजी सहित कई खिलाड़ियों और फिट इंडिया एंबेसडर को उनकी योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने कहा कि फिटनेस को रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना आवश्यक है और इस प्रकार के कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ और सक्रिय समाज के लक्ष्य को साकार करते हैं।

पुलेला गोपीचंद ने निरंतर शारीरिक गतिविधि के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह न केवल खेल में उत्कृष्टता लाती है, बल्कि अनुशासनपूर्ण जीवनशैली भी बनाती है।

फिट इंडिया मूवमेंट की शुरुआत 29 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य फिटनेस को हमारी दैनिक जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाना है।



कुपोषण के खिलाफ सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी, विकसित भारत के लिए सीएसआर की अहम भूमिका : पीयूष गोयल

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई एक सामूहिक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है, जिसमें सरकार, कॉर्पोरेट जगत, समुदायों और प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। नई दिल्ली में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा आयोजित पोषण पर आधारित सीएसआर कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कुपोषण का उन्मूलन विकसित भारत (Viksit Bharat) के निर्माण और देश के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अनिवार्य है।

पीयूष गोयल ने कहा कि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) व्यवसाय को सामाजिक प्रभाव से जोड़ने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है, विशेषकर कुपोषण जैसी गंभीर चुनौती से निपटने में। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून द्वारा निर्धारित शुद्ध लाभ का 2 प्रतिशत सीएसआर पर खर्च करना न्यूनतम सीमा है, इसे सीमा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सीएसआर को उन्होंने बोझ नहीं, बल्कि समाज में सार्थक योगदान का अवसर बताया।

उन्होंने कहा कि सेवा की भावना भारत के इतिहास, संस्कृति और परंपराओं में गहराई से रची-बसी है। अनेक व्यक्ति और संस्थान स्वेच्छा से अपने लाभ का बड़ा हिस्सा सामाजिक कार्यों में लगाते हैं, जो अनिवार्य सीएसआर से कहीं अधिक है। यह कार्यक्रम सभी हितधारकों के लिए कुपोषण के विरुद्ध प्रयास तेज करने का आह्वान है।

सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि सीएसआर सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है, जो परोपकार से आगे बढ़कर रणनीतिक सामाजिक निवेश का स्वरूप ले चुका है। उन्होंने शिशु संजीवनी जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए बताया कि सहकारी ढांचा स्थानीय भागीदारी, पारदर्शिता और प्रभाव सुनिश्चित करते हुए सीएसआर संसाधनों को ठोस सामाजिक परिणामों में बदलने में सक्षम है। उन्होंने एनडीडीबी की ‘गिफ्ट मिल्क’ और ‘शिशु संजीवनी’ जैसी पहलों की सराहना की, जो आकांक्षी जिलों, जनजातीय क्षेत्रों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों पर केंद्रित हैं तथा अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करती हैं। उन्होंने कहा कि एनडीडीबी फाउंडेशन फॉर न्यूट्रिशन जैसे संस्थागत मंचों को सीएसआर समर्थन देना केवल वैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के अनुरूप राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय योगदान है।

 पीयूष गोयल ने कहा कि कुपोषण एक जटिल चुनौती है, जिसके समाधान के लिए समन्वित कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम अंतर-मंत्रालयी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग, सहकारिता मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय प्रधानमंत्री के “समग्र सरकारी दृष्टिकोण” के अनुरूप मिलकर कार्य कर रहे हैं। जब पूरा तंत्र एकजुट होकर काम करता है, तो जमीनी स्तर पर कार्यक्रम अधिक प्रभावी बनते हैं।

उन्होंने कहा कि एनडीडीबी इस कार्यक्रम में एक छत्र संस्था की भूमिका निभा रहा है, जो सरकार और उद्योग के बीच सहयोग को सक्षम बनाता है। पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि दूध और मछली जैसे पोषक आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करना कुपोषण से लड़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण है, और सरकारी संस्थानों के माध्यम से इन्हें किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जा सकता है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए गोयल ने कहा कि गर्भावस्था और प्रारंभिक बाल्यावस्था में उचित पोषण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि कुपोषण की शुरुआत अक्सर जन्म से पहले ही हो जाती है। इन चरणों में पर्याप्त पोषण से दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होते हैं।

उन्होंने संतृप्ति (सैचुरेशन) के महत्व पर बल देते हुए कहा कि कार्यक्रम हर गांव, हर घर और समाज के हर वर्ग तक पहुंचने चाहिए। सहकारिता मंत्रालय और पंचायती राज संस्थाएं इन पहलों को जमीनी स्तर तक ले जाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

प्रधानमंत्री के नवाचार और नवाचारी वित्तपोषण पर जोर का उल्लेख करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार अकेले कुपोषण से नहीं लड़ सकती। यह कार्यक्रम सीएसआर को सीधे पोषण परिणामों से जोड़ने का एक नवाचारी मॉडल है, जो समाज और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए साझा मूल्य सृजित करता है।

उन्होंने कहा कि कुपोषण से निपटने से किसानों की आय भी बढ़ती है, विशेषकर मत्स्य पालन और पशुपालन के माध्यम से। एक ही कार्यक्रम किसानों, महिलाओं और बच्चों—तीनों को लाभ पहुंचा सकता है, जो इसकी समावेशी प्रकृति को दर्शाता है।

नीति और प्रबंधन के दृष्टिकोण से उन्होंने मूल कारणों के विश्लेषण पर जोर दिया और कहा कि गर्भावस्था से लेकर विकास के वर्षों तक निरंतर हस्तक्षेप से ही बौनापन और कम वजन जैसी समस्याओं को रोका जा सकता है। उन्होंने फिट इंडिया, योग और खेलों को भी स्वस्थ जीवन में सहायक बताया तथा कहा कि कुपोषण-मुक्त भारत विकसित राष्ट्र बनने की आधारशिला है। जल जीवन मिशन जैसी पहलों से स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता भी कुपोषण को बढ़ाने वाली बीमारियों को रोकने में सहायक है।

कॉरपोरेट जगत से अपील करते हुए पीयूष  गोयल ने कहा कि पोषण में निवेश, भारत के भविष्य के कार्यबल, बाजार और आर्थिक वृद्धि में निवेश है। स्वस्थ बच्चे स्वस्थ, उत्पादक और रोजगार-योग्य नागरिक बनते हैं, जिससे व्यवसायों को भी लाभ होता है।

उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि सीएसआर-आधारित पोषण पहलों को व्यवसाय और देश—दोनों के लिए लाभकारी के रूप में उजागर करें। कुपोषण के खिलाफ योगदान से मिलने वाला संतोष जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करता है।

कुपोषण के विरुद्ध जन-आंदोलन का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि सीएसआर केवल कॉरपोरेट तक सीमित न रहे। उन्होंने नागरिकों से व्यक्तिगत अवसरों और उत्सवों को समाज-सेवा से जोड़ने—जैसे अनाथालयों और अस्पतालों में बच्चों व मरीजों को भोजन कराने—की अपील की।

उन्होंने कहा कि जिस गति और पैमाने पर देश 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाल रहा है, उसी संकल्प के साथ कुपोषण के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी जानी चाहिए, ताकि कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे या रोकी जा सकने वाली बीमारियों के साथ जन्म न ले। अंत में, उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयास, नवाचार और समाज की सक्रिय भागीदारी से कुपोषण-मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

आयुष्मान भारत: समग्र स्वास्थ्य कवरेज, सुदृढ़ अवसंरचना और डिजिटल स्वास्थ्य की दिशा में परिवर्तनकारी पहल

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आयुष्मान भारत चार प्रमुख घटकों से मिलकर बना है:

(क) आयुष्मान आरोग्य मंदिर

आयुष्मान भारत का पहला घटक 1,50,000 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स (AB-HWCs) की स्थापना से संबंधित है, जिन्हें अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में जाना जाता है। इसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्रों (SHCs) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को उन्नत कर समुदाय के निकट समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन केंद्रों का उद्देश्य समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (CPHC) प्रदान करना है, जिसके तहत प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (RCH) तथा संक्रामक रोग सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है और गैर-संचारी रोगों जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा मौखिक, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच व उपचार सेवाएँ जोड़ी गई हैं। इसके अतिरिक्त मानसिक स्वास्थ्य, ईएनटी, नेत्र, मुख स्वास्थ्य, वृद्धावस्था, उपशामक देखभाल, ट्रॉमा केयर तथा योग जैसी स्वास्थ्य संवर्धन गतिविधियाँ भी चरणबद्ध रूप से शामिल की गई हैं।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाते हुए रोकथाम, संवर्धन, उपचार, पुनर्वास और उपशामक सेवाओं को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर तक जोड़ती है। किसी व्यक्ति की जीवन-कालीन स्वास्थ्य आवश्यकताओं का लगभग 80–90% भाग प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से पूरा होता है, जिससे बेहतर स्वास्थ्य परिणाम एवं जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

प्राथमिक स्वास्थ्य टीम द्वारा समुदाय स्तर पर जनसंख्या सूचीकरण, रोगों की प्रारंभिक पहचान, समय पर रेफरल, उपचार अनुपालन तथा फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाता है। आवश्यक दवाइयाँ एवं जांच सुविधाएँ समुदाय के निकट उपलब्ध कराकर सुदृढ़ एवं लचीली प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण किया जा रहा है।

उपलब्धियाँ (30.11.2025 तक):

  • 1,81,873 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित

  • 12 सेवाओं का विस्तारित पैकेज एवं टेली-परामर्श सुविधा

  • कुल 494.71 करोड़ लाभार्थी आगमन (फुटफॉल)

  • 41.93 करोड़ टेली-परामर्श

  • उच्च रक्तचाप की 39.50 करोड़ जांच

  • मधुमेह की 36.70 करोड़ जांच

  • मौखिक कैंसर की 32.40 करोड़ जांच

  • महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की 15.23 करोड़ जांच

  • महिलाओं में स्तन कैंसर की 8.37 करोड़ से अधिक जांच

  • 6.54 करोड़ योग/वेलनेस सत्र आयोजित

(ख) आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY)

आयुष्मान भारत का दूसरा स्तंभ प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना है, जो विश्व की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसके अंतर्गत प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क स्वास्थ्य कवरेज द्वितीयक एवं तृतीयक उपचार हेतु प्रदान किया जाता है।

प्रमुख तथ्य:

  • 12 करोड़ परिवार योजना के अंतर्गत आच्छादित

  • कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने संसाधनों से लाभार्थी आधार का विस्तार किया

  • फरवरी 2024 से लगभग 37 लाख आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएँ शामिल

  • 42.48 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी (1 दिसम्बर 2025 तक)

  • 10.98 करोड़ अस्पताल में भर्ती, कुल लागत ₹1.60 लाख करोड़

  • 32,574 अस्पताल (15,532 निजी सहित) पैनल में

  • महिलाओं की भागीदारी:

    • आयुष्मान कार्ड – लगभग 49%

    • अस्पताल में भर्ती – लगभग 48%

आयुष्मान वय वंदना कार्ड:

  • 29 अक्टूबर 2024 को 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए लॉन्च

  • अनुमानित 4.5 करोड़ परिवार / 6 करोड़ व्यक्ति लाभान्वित

  • अब तक 94,19,515 पंजीकरण

डिजिटल पहल:

  • Ayushman App (एंड्रॉयड आधारित) – फेस ऑथ, OTP, आईरिस एवं फिंगरप्रिंट से सत्यापन

  • दिल्ली और ओडिशा में 2025 से योजना का विस्तार

(ग) प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM)

यह आयुष्मान भारत का तीसरा स्तंभ है, जिसका कुल परिव्यय लगभग ₹64,180 करोड़ है। इसे 25 अक्टूबर 2021 को शुरू किया गया और यह FY 2021–22 से 2025–26 तक लागू है। यह देशभर में स्वास्थ्य अवसंरचना सुदृढ़ करने की सबसे बड़ी योजना है।

इस मिशन का उद्देश्य प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता बढ़ाना तथा वर्तमान एवं भविष्य की महामारियों/आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटना है।

प्रमुख लक्ष्य:

  • आईटी-सक्षम रोग निगरानी प्रणाली

  • ब्लॉक, जिला, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर सर्विलांस प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

  • प्रवेश बिंदुओं (Points of Entry) पर स्वास्थ्य इकाइयों का सुदृढ़ीकरण

  • वन हेल्थ अप्रोच के अंतर्गत अनुसंधान एवं जैव-चिकित्सीय क्षमता विकास

अवसंरचना प्रावधान:

  • 17,788 भवनरहित उप-स्वास्थ्य केंद्रों का आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में निर्माण

  • 11,024 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स

  • 3,382 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स

  • 730 जिला एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ

  • 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिलों में 50–100 बिस्तरों के क्रिटिकल केयर ब्लॉक

वर्तमान स्थिति (CSS घटक):

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों हेतु कुल आवंटन: ₹34,932.27 करोड़

  • ₹32,928.82 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति

  • 621 क्रिटिकल केयर ब्लॉक, 744 जिला प्रयोगशालाएँ, 9519 उप-स्वास्थ्य केंद्र AAM आदि स्वीकृत

12 केंद्रीय अस्पतालों (AIIMS, PGI, JIPMER, IMS-BHU आदि) में 150-बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक स्वीकृत हैं।

(घ) आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)

सितंबर 2021 में प्रारंभ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य नागरिक-केंद्रित, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

इसके माध्यम से नागरिक अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड (प्रिस्क्रिप्शन, जांच रिपोर्ट, डिस्चार्ज सारांश आदि) सुरक्षित रूप से संग्रहित कर सकते हैं और सहमति के आधार पर डॉक्टरों से साझा कर सकते हैं, जिससे निरंतर एवं बेहतर उपचार संभव होता है।

प्रमुख घटक:

  • ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) – नागरिकों की डिजिटल पहचान

  • HPR – स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्री

  • HFR – स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री

  • ड्रग रजिस्ट्री

इंटरऑपरेबिलिटी गेटवे:

  • Health Information Consent Manager (HIE-CM)

  • National Health Claims Exchange (NHCX)

  • Unified Health Interface (UHI)

इन पहलों के माध्यम से ABDM स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण सुनिश्चित करने हेतु अनाज आवंटन

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय आंगनवाड़ी केंद्रों पर हॉट कुक्ड मील (HCM) और टेक होम रेशन (THR) के लिए गेहूं, फोर्टिफाइड चावल और मिलेट्स को Wheat Based Nutrition Programme (WBNP) और Scheme for Adolescent Girls (SAG) के तहत सब्सिडी दरों पर खाद्य विभाग के माध्यम से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को आवंटित कर रहा है।

वर्तमान वित्तीय वर्ष में WBNP के तहत मिलेट्स निम्नलिखित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को आवंटित किए गए हैं:

अंडमान और निकोबार द्वीप, असम, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दादर और नगर हवेली और दमन और दीव, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखंड।

SAG के तहत मिलेट्स निम्नलिखित राज्यों को आवंटित किए गए हैं:
असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय और तेलंगाना।

महाराष्ट्र सरकार अस्पिरेशनल जिलों में 6 महीने से 3 साल तक के लाभार्थियों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं, तथा किशोरियों को मिलेट आधारित व्यंजन THR के रूप में प्रदान कर रही है। हालांकि, स्थानीय व्यंजनों के लिए विशिष्ट सामग्री का चयन राज्य सरकारों / स्थानीय अधिकारियों के विवेक पर निर्भर करता है और यह स्थानीय स्वाद, पसंद और उपलब्ध फलों व सब्जियों पर आधारित होता है।

यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

भारत में मोटापे को सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में संबोधित करने पर जोर: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

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“भारत में मोटापा एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर चुका है, यह केवल एक सौंदर्य-संबंधी मुद्दा नहीं है। इस चुनौती को वैज्ञानिक सटीकता और नीति अनुशासन के साथ संबोधित करने की आवश्यकता है,” यह बात केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री; पीएमओ के MoS, डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) के दौरान "क्लिनिशियन–साइंटिस्ट इंटरैक्शन ऑन ओबेसिटी" पैनल चर्चा में कही।

चिकित्सा, जैव-चिकित्सा अनुसंधान और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों की उपस्थिति में आयोजित इस सत्र ने भारत में बढ़ते मेटाबॉलिक स्वास्थ्य बोझ पर बहुआयामी दृष्टिकोण पेश किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने IISF में उपस्थित दर्शकों को संबोधित करते हुए बताया कि सामाजिक व्यवहार, बाजार की ताकतें और गलत जानकारी ने भारत में मोटापे की स्थिति को जटिल बना दिया है।

पैनल में भारत की वैज्ञानिक और चिकित्सा समुदाय के प्रमुख विशेषज्ञ शामिल थे, जिनमें डॉ. अश्वनी पारीक (कार्यकारी निदेशक, NABI), डॉ. विनोद कुमार पॉल और डॉ. वी.के. सरस्वत (सदस्य, नीति आयोग), प्रो. उल्लास कोलथुर (निदेशक, CDFD), डॉ. गणेशन कार्तिकेयन (कार्यकारी निदेशक, THSTI), और वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. संजय भड़ादा एवं डॉ. सचिन मित्तल शामिल थे।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारतीय समाज ने ऐतिहासिक रूप से मोटापे को केवल सौंदर्य-संबंधी मुद्दे के रूप में देखा, जिससे इस पर वैज्ञानिक चर्चा में देरी हुई। उन्होंने भारत में केंद्रीय या विसरल मोटापे की उच्च प्रवृत्ति पर विशेष ध्यान दिया और कहा, “भारतीयों के लिए, कमर का आकार वजन से अधिक महत्वपूर्ण कहानी बताता है।”

उन्होंने GLP-आधारित दवाओं के फैशनेबल उपयोग के संदर्भ में सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि कभी-कभी लंबी अवधि के प्रभाव वर्षों बाद ही स्पष्ट होते हैं। उन्होंने 1970-80 के दशक में अनियंत्रित रूप से परिष्कृत तेलों के उपयोग के उदाहरण का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी।

मिनिस्टर ने गलत जानकारी से उत्पन्न खतरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बिना योग्य चिकित्सक और स्वयं घोषित आहार विशेषज्ञ भारत के मेटाबॉलिक संकट को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने नीति निर्माताओं से ऐसे तंत्र बनाने का आग्रह किया जो मरीजों को भ्रामक हस्तक्षेप से बचा सकें।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत में बढ़ती मेटाबॉलिक जटिलताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया और कहा, “पहले हर तीसरे OPD मरीज में अप्रकाशित मधुमेह होता था; आज हर तीसरे मरीज में फैटी लिवर है। इसे संभालने के लिए हमें एक अधिक वैज्ञानिक और नियंत्रित पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है।”

अपने संबोधन का समापन करते हुए डॉ. सिंह ने कहा, “मोटापा केवल एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स का विषय नहीं है। यह एक सामाजिक समस्या है, जो संस्कृति, आदतों, बाजार और गलत जानकारी से आकार लेती है, और इसे अनदेखा करना संभव नहीं है।”

सत्र का समापन क्लिनिशियनों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और जनता के बीच गहन सहयोग की आवश्यकता के आह्वान के साथ हुआ, ताकि भारत की तेजी से बदलती मेटाबॉलिक स्वास्थ्य चुनौती का प्रभावी समाधान किया जा सके।

फ़िट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल: देशभर में बढ़ा फिटनेस का जन-आंदोलन

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प्रधानमंत्री मोदी ने आज मन की बात के 128वें संस्करण में अपने संबोधन के दौरान कहा, “हमारे युवा मित्रों के बीच कई अन्य प्रतियोगिताएँ भी बहुत लोकप्रिय होती जा रही हैं। बहुत से लोग फ़िट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए एक साथ आ रहे हैं। ये सभी फिटनेस को बढ़ावा देने के तरीके हैं।”

इत्तफ़ाक़ से, इस रविवार देशव्यापी साइक्लिंग ड्राइव के 51वें संस्करण का सफल आयोजन किया गया, जिसमें एथेंस 2004 ओलंपिक रजत पदक विजेता और राजस्थान के खेल मंत्री राजयवर्धन सिंह राठौड़ ने जयपुर में कार्यक्रम का नेतृत्व किया।

कर्नल राठौड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण की संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों की भी सराहना की।

कर्नल राठौड़ ने जयपुर के अमर जवान ज्योति पर आयोजित संडेज़ ऑन साइकिल कार्यक्रम के दौरान कहा, “दुनिया में बहुत कम ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो अपने नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण पर इतना ज़ोर देते हुए लगातार आह्वान करते हैं। नरेंद्र मोदी जी ने समय-समय पर फ़िट इंडिया के बारे में बात की है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारा तेल उपभोग कम करने से लेकर मिलेट्स (श्री अन्न) को बढ़ावा देने और मोटापे को कम करने के लिए निरंतर काम करने तक—हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री ने हमेशा हमें फिट रहने के सभी उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया है, चाहे वह योग हो, साइक्लिंग हो, दौड़ हो या अन्य माध्यम। संडेज़ ऑन साइकिल के माध्यम से देश में जो चेतना पैदा हुई है, वह इसका स्पष्ट उदाहरण है। आज जयपुर में करीब 1000 बच्चे इसमें भाग ले रहे हैं और उनके लिए साइकिलें भी उपलब्ध हैं।” कर्नल राठौर, जो स्वतंत्रता के बाद भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक रजत पदक विजेता हैं, ने यह भी जोड़ा।

फ़िट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल के 30 नवंबर वाले संस्करण में पूरे भारत से पत्रकारों ने भी अपने-अपने राज्यों और क्षेत्रों में आयोजित रैलियों में हिस्सा लिया।

राजस्थान में चल रहे खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के दौरान जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में एक विशेष फ़िट इंडिया ज़ोन भी स्थापित किया गया है, जो आगंतुकों को एक गतिशील, रोचक और इंटरएक्टिव अनुभव देने के लिए प्रमुख फिटनेस गतिविधियों को एक जगह लाता है।

इस ज़ोन में तीन प्रमुख घटक शामिल हैं—जुम्बा और रोप-स्किपिंग जैसी गतिविधियों के साथ एक ऊर्जावान फ़िटनेस चैलेंज ज़ोन (आकर्षक पुरस्कारों सहित), एक समर्पित साइक्लिंग ज़ोन, और अभिनव बिंद्रा टार्गेट परफॉर्मेंस द्वारा संचालित व्यापक शारीरिक एवं मानसिक फिटनेस आकलन।

फ़िट इंडिया संडेज़ ऑन साइकिल की शुरुआत दिसंबर 2024 में माननीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के मार्गदर्शन में हुई थी।

यह अब एक साप्ताहिक आयोजन है, जो माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “फ़िटनेस का डोज़, आधा घंटा रोज़” और “मोटापे के ख़िलाफ़ लड़ाई” के विज़न को मज़बूती देता है।

आज, संडेज़ ऑन साइकिल एक सच्चा जन-आंदोलन बन चुका है, जिसमें देशभर के आम लोग नेतृत्व कर रहे हैं।

4000 से अधिक नमो फ़िट इंडिया साइक्लिंग क्लब, तथा लाखों आम नागरिक नियमित रूप से साइक्लिंग करते हैं और हर सप्ताह भाग लेते हैं, जिससे यह पहल एक राष्ट्रव्यापी समुदाय-चालित फिटनेस क्रांति में बदल गई है। इन क्लबों द्वारा यह आयोजन हर सप्ताह किया जाता है।

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) भी अपने नेटवर्क में स्थित SAI ट्रेनिंग सेंटर्स (STCs)—जैसे असम के कोकराझार, पंजाब के जगतपुर और बादल, मणिपुर के उटलौ, लद्दाख के कारगिल आदि—में संडेज़ ऑन साइकिल गतिविधियों के माध्यम से एक मजबूत राष्ट्रीय भागीदारी सुनिश्चित करता है। यह कई खेलो इंडिया केंद्रों, जैसे भद्रक, झारसुगुड़ा, ढेंकनाल, और राष्ट्रभर के 23 SAI नेशनल सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस (NCOEs) में भी हर रविवार आयोजित किया जा रहा है।


IITF 2025 में आयुष मंत्रालय की भव्य प्रस्तुति: ‘आयुष के साथ – स्वस्थ भारत, श्रेष्ठ भारत’ थीम पर आकर्षण का केंद्र

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आयुष मंत्रालय ने इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य विरासत का व्यापक प्रदर्शन किया है। “आयुष के साथ – स्वस्थ भारत, श्रेष्ठ भारत” थीम के साथ स्थापित आयुष पवेलियन में हजारों आगंतुकों की उपस्थिति देखी जा रही है, जहां लोग आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी पर आधारित समग्र स्वास्थ्य समाधान को जानने के लिए उत्सुक हैं।

पवेलियन के प्रत्येक थीम आधारित स्टॉल में डिजिटल डायग्नोस्टिक्स, आहार संबंधी प्रदर्शन, इंटरैक्टिव गेम्स, विशेषज्ञ परामर्श और सभी आयु वर्ग के लिए सहभागितात्मक गतिविधियों के माध्यम से आयुष प्रणालियों की विशेषताओं को प्रदर्शित किया गया है।

AIIA स्टॉल: आयुर्वेदिक आहार का विस्तृत प्रदर्शन

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) का स्टॉल पवेलियन के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। यहां आयुर्वेद-आधारित फंक्शनल फूड्स जैसे रागी नाचोज़, सुंठ्यादि लड्डू, रागी-उड़द लड्डू, मूंग सूप प्रीमिक्स और यवाड़ी सत्तू का प्रदर्शन किया जा रहा है। विशेषज्ञ इन खाद्य पदार्थों के पोषण संबंधी लाभ जैसे एनीमिया प्रबंधन, प्रतिरक्षा वृद्धि और पाचन स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दे रहे हैं। आगंतुकों को आयुर्वेदिक अनाज, मसाले और जड़ी-बूटियों के उपयोग से संबंधित पुस्तिकाएँ भी वितरित की जा रही हैं।

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA), जयपुर: सात्त्विक आहार और व्यक्तिगत देखभाल

NIA ने सात्त्विक आहार पर केंद्रित प्रदर्शनी लगाई है, जिसमें त्रिफला जैम, रीजुवेनेटिंग ग्रैन्यूल्स, रागी बिस्किट, एलोवेरा जेल, लिप बाम और फुट क्रीम जैसे उत्पाद शामिल हैं। विशेषज्ञ सात्त्विक आहार के मानसिक स्पष्टता, ऊर्जा संतुलन और दीर्घकालिक स्वास्थ्य में योगदान को समझा रहे हैं।

RAV: आयुष आहार थीम पर आधारित उत्पाद और मिलेट क्विज़

राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (RAV) अपने स्टॉल पर पोषक कुकीज़, एनी ब्रेड, जीतायु टी, एनपी ड्रिंक और फुल मून चॉकलेट जैसे उत्पाद प्रदर्शित कर रहा है। मिलेट क्विज़ के माध्यम से आगंतुक बाजरे के आयुर्वेदिक महत्व को जान रहे हैं।

MDNIY: योग आधारित लाइव डेमो और Y-ब्रेक सत्र

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) कॉमन योग प्रोटोकॉल, रिदमिक योग, इंटरैक्टिव क्विज़ और कार्यरत लोगों के लिए “Y-Break” सत्र आयोजित कर रहा है, ताकि लोग सरल योग अभ्यासों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकें।

यूनानी चिकित्सा: डिजिटल मिज़ाज-असेसमेंट और पारंपरिक खाद्य पदार्थ

CCRUM और NIUM द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित यूनानी स्टॉल में हरीरा, यूनानी क़हवा, हलवा गी़क़वार, गुलकंद और तलबीनाह जैसे खाद्य पदार्थ आकर्षण का केंद्र रहे। डिजिटल मिज़ाज-परीक्षण (Damvi, Balghami, Safravi, Saudavi) आगंतुकों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य समझने में मदद कर रहा है।

सिद्ध चिकित्सा: पोषण, जागरूकता और चिकित्सा परामर्श

NIS और CCRS के स्टॉल में हिबिस्कस इंफ्यूज़न टी, पंचमुठ्टी कंजी, करिसलाई मिठाई और हलीम नाचोज़ जैसे सिद्ध-प्रेरित खाद्य पदार्थ प्रदर्शित किए जा रहे हैं। 100 से अधिक लोगों को निःशुल्क चिकित्सा परामर्श भी दिया गया।

CCRH: होम्योपैथी अनुसंधान और निःशुल्क ओपीडी

CCRH के स्टॉल में शोध प्रकाशन, क्लिनिकल अध्ययन और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी प्रदर्शित की जा रही है। होम्योपैथिक चिकित्सक पवेलियन में निःशुल्क ओपीडी चला रहे हैं।

Sowa-Rigpa (सोवा-रिग्पा): हिमालयी पारंपरिक चिकित्सा की झलक

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा प्रतिदिन लगभग 40 निःशुल्क परामर्श प्रदान कर रहा है तथा आगंतुकों को सowa-रिग्पा के आहार, आचरण और उपचार सिद्धांतों के बारे में जानकारी दे रहा है।

NMPB: औषधीय पौधों की जीवंत प्रदर्शनी

राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) अपने स्टॉल पर औषधीय पौधों का लाइव डिस्प्ले, पहचान, खेती और औषधीय उपयोग पर जानकारी दे रहा है। “अटल आयुष महोत्सव” के तहत औषधीय पौधों के पौधे भी वितरित किए जा रहे हैं।

IMPCL: उच्च गुणवत्ता वाली औषधियाँ

IMPCL ने अपनी WHO-GMP और ISO प्रमाणित इकाई द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक और यूनानी औषधियों का प्रदर्शन किया है, जिसकी वार्षिक आय वर्ष 2024–25 में लगभग ₹170 करोड़ रही।

PCIM&H: औषधीय मानकों और वैज्ञानिक प्रमाणीकरण पर फोकस

PCIM&H अपने फार्माकोपिया प्रकाशन, दवाइयों के नमूने और ऑडियो-विज़ुअल सामग्री के माध्यम से आयुष औषधियों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर जागरूकता बढ़ा रहा है।

CCRYN: प्राकृतिक चिकित्सा आधारित पोषण और IEC सामग्री

CCRYN के स्टॉल में तिल लड्डू, मूंगफली-तिल लड्डू, मखाना लड्डू और मिलेट नमकीन जैसे प्राकृतिक आहार प्रदर्शित किए गए हैं।

स्टार्ट-अप सेक्शन: नवाचार आधारित आयुर्वेदिक उत्पाद

आयुर्वेद आधारित स्टार्ट-अप्स स्किनकेयर, डिटॉक्स ड्रिंक्स, आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थ और वेलनेस उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं।

एक्टिविटी ज़ोन: बच्चों और युवाओं में स्वास्थ्य जागरूकता

ड्रॉइंग प्रतियोगिता, स्वास्थ्य-आधारित साँप-सीढ़ी, प्रकृति-परिक्षण, मिलेट क्विज़, स्लोगन रायटिंग और फोटो बूथ आगंतुकों में लोकप्रिय हैं।

समापन

IITF 2025 का आयुष पवेलियन सार्वजनिक भागीदारी, निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और आयुष चिकित्सा वितरण के साथ व्यापक लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। यह पवेलियन भारत की समृद्ध समग्र चिकित्सा परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।



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