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भारत में 2वें WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन: स्वास्थ्य, विज्ञान और कल्याण के लिए वैश्विक नेतृत्व

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भारत 2वें WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन (17–19 दिसंबर, 2025) की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन का विषय है, “लोगों और ग्रह के लिए संतुलन की बहाली: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान और अभ्यास।” इस अवसर पर WHO पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक पुस्तकालय (TMGL) का भी शुभारंभ करेगा, जो पारंपरिक, पूरक और समग्र चिकित्सा का सबसे बड़ा डिजिटल भंडार है।

भारत में आयुष प्रणाली (आयुर्वेद, योग, सिद्ध और यूनानी) की व्यापक पहुँच है, जिसमें 3,844 अस्पताल, 36,848 डिस्पेंसरी, 886 स्नातक और 251 परास्नातक कॉलेज तथा 7.5 लाख से अधिक पंजीकृत चिकित्सक हैं। आयुष मंत्रालय पारंपरिक चिकित्सा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में एकीकृत करने, वैज्ञानिक मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण और अनुसंधान को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करता है।

सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा के सुरक्षित, गुणवत्ता-प्रधान और समान रूप से सुलभ अभ्यास को बढ़ावा देना है। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम मंत्रिस्तरीय संवाद, तकनीकी सत्र और नवाचार प्रदर्शनियों के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा के वैज्ञानिक, नीतिगत और व्यावहारिक पहलुओं पर केंद्रित रहेगा।

मुख्य पहल:

  • पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैज्ञानिक और प्रमाण आधारित शोध को बढ़ावा देना।

  • आयुष सेवाओं का राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकरण।

  • डिजिटल नवाचार और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षित दस्तावेजीकरण।

  • पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक मानक और नीति निर्माण।

महत्व:

भारत पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक मंच पर नेतृत्व कर रहा है और आयुष प्रणाली के माध्यम से मानव कल्याण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्व स्तर पर योगदान दे रहा है।

नई दिल्ली में दूसरा WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन

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भारत 17 से 19 दिसंबर 2025 तक नई दिल्ली में द्वितीय WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन की सह-आयोजक भूमिका निभाएगा, जिसका आयोजन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से किया जाएगा। इस समिट में वैश्विक नेता, नीति निर्माता, शोधकर्ता और विशेषज्ञ भाग लेंगे और पारंपरिक चिकित्सा में नवाचार, साक्ष्य-आधारित प्रथाओं और भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करेंगे।

8 दिसंबर 2025 को आयुष मंत्रालय ने कर्टन राइज़र कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसकी अध्यक्षता प्रतापराव जाधव, माननीय केंद्रीय आयुष मंत्री ने की। अपने संबोधन में मंत्री ने भारत में पारंपरिक चिकित्सा में बढ़ते नेतृत्व और राष्ट्रीय शोध संस्थानों की वैज्ञानिक प्रमाणिकता और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने वाली भूमिका पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में, CCRAS का सेंट्रल आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट (CARI), दिल्ली आयुर्वेदिक शोध और चिकित्सीय उन्नति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। संस्थान के निदेशक एवं प्रभारी, डॉ. हेमंता पाणिग्रही ने बताया कि CARI के समेकित शोध—मुख्य रूप से क्लिनिकल, फंडामेंटल और पॉलिसी शोध—ने प्रमुख जीवनशैली और गैर-संचारी रोगों (NCDs) के समाधान में इसकी क्षमता को काफी बढ़ा दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान की विशेष क्लिनिक, चल रहे शोध अध्ययन और पेशेवर प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप साक्ष्य-आधारित पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े हैं।

आगामी WHO समिट में मंत्री स्तरीय चर्चाएँ, वैज्ञानिक पैनल, प्रदर्शनियाँ और वैश्विक ज्ञान-साझा सत्र शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के भीतर और अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत करना है।


भारत-जर्मनी सहयोग: आयुष मंत्रालय की पारंपरिक और एकीकृत चिकित्सा पर तीसरी संयुक्त कार्य समूह बैठक बर्लिन में संपन्न

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भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और जर्मनी के संघीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच वैकल्पिक चिकित्सा पर तीसरी संयुक्त कार्य समूह (JWG) बैठक 18 से 20 नवंबर 2025 को बर्लिन में आयोजित की गई, जो पारंपरिक और एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में भारत-जर्मनी सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोनालिशा दाश, संयुक्त सचिव, आयुष मंत्रालय ने किया। इसमें प्रो. (डॉ.) रबिनारायण आचार्य, महानिदेशक, CCRAS; डॉ. सुभाष कौशिक, महानिदेशक, CCRH; डॉ. कौस्तभ उपाध्याय, सलाहकार, आयुष मंत्रालय; और डॉ. काशीनाथ समागंदी, निदेशक, MDNY शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए प्रमुख जर्मन संस्थानों के साथ वार्ता की।

जर्मनी की ओर से कार्यक्रम का नेतृत्व पॉल जुबाइल, हेड ऑफ डिवीजन यूरोपियन एंड इंटरनेशनल हेल्थ पॉलिसी, जर्मन स्वास्थ्य मंत्रालय; प्रो. डॉ. मेड. गियोर्ग सिफ़र्ट, हेड ऑफ कॉम्पिटेंस सेंटर फॉर ट्रेडिशनल एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन, चारिटी बर्लिन; आंद्रेया गैले, सीईओ, BKK mkk (स्टैच्यूटरी हेल्थ इंश्योरेंस फंड); और डॉ. जैकलीन वीसनर, हेड ऑफ डिपार्टमेंट फॉर विटामिन्स, मिनरल्स, स्पेशल थेरेप्यूटिक अप्रोचेज, फेडरल इंस्टिट्यूट फॉर ड्रग्स एंड मेडिकल डिवाइसेज (BfArM) ने किया।

वार्ता के तीन मुख्य स्तंभ रहे—

  1. पारंपरिक चिकित्सा को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में समाहित करना।

  2. रोगियों की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिपूर्ति (reimbursement) मार्ग स्थापित करना।

  3. नियामक अनुमोदन तंत्र को मजबूत करना।

इन विषयों में दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता पर बल दिया गया कि वे सबूत-आधारित और नागरिक-केंद्रित पारंपरिक चिकित्सा प्रथाओं को बढ़ावा देंगे।

मुख्य कार्यक्रम में निम्नलिखित शामिल थे:

  • कॉम्पिटेंस सेंटर फॉर ट्रेडिशनल एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन, चारिटी यूनिवर्सिटी, जहां सहयोगी अनुसंधान के अवसरों की खोज और आयुष मंत्रालय के साथ प्रस्तावित एमओयू को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

  • कम्युनिटी हॉस्पिटल हावेल्होहे – क्लिनिक फॉर एन्थ्रोपोसॉफिक मेडिसिन, जहां एकीकृत देखभाल और अनुसंधान प्रथाओं की समीक्षा की गई।

  • फेडरल जॉइंट कमिटी (G-BA), जहां पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित बीमा और प्रतिपूर्ति तंत्र पर विस्तृत चर्चा हुई।

यह मिशन आयुष मंत्रालय के रणनीतिक प्रयासों को दर्शाता है, जिसमें आयुष प्रणालियों का वैश्विकरण, सबूत-आधारित एकीकरण के लिए मजबूत ढांचे का निर्माण, और उच्च-मूल्य वाले अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करना शामिल है, जिससे भारत का वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र में प्रभाव बढ़े।

मंत्रालय ने पुष्टि की कि जर्मनी के साथ सतत सहयोग अनुसंधान, नियामक समन्वय, और रोगियों की पहुँच को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और वैज्ञानिक प्रमाण पर आधारित एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल समाधान प्रदान करने में तेजी लाएगा।

नई दिल्ली में आयुष मंत्रालय और WHO द्वारा द्वितीय वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन से पूर्व राजदूत स्वागत समारोह का आयोजन

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भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने आज विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से नई दिल्ली में राजदूतों के लिए एक विशेष स्वागत समारोह का आयोजन किया। यह आयोजन 17 से 19 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में होने वाले द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन (Global Summit on Traditional Medicine) से पहले एक अग्रदूत कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया। इस उच्च स्तरीय बैठक में राजदूतों, उच्चायुक्तों और राजनयिक प्रतिनिधियों को शिखर सम्मेलन की दृष्टि, वैश्विक स्वास्थ्य से उसके संबंध और साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा को आगे बढ़ाने के लिए बहुपक्षीय सहयोग के अवसरों के बारे में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव, (स्वतंत्र प्रभार) आयुष मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री, वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय, और राजदूत सिबी जॉर्ज, सचिव (पश्चिम), विदेश मंत्रालय उपस्थित थे। इसके साथ ही WHO और आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया, जिनमें शामिल थे — डॉ. कैथरीना बोहमे, WHO महानिदेशक की वरिष्ठ सलाहकार एवं WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र (SEARO) की प्रभारी अधिकारी; मोनालिसा दास, संयुक्त सचिव, आयुष मंत्रालय; डॉ. पूनम खेत्रपाल, WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक (एमेरिटस) एवं पारंपरिक चिकित्सा पर WHO महानिदेशक की वरिष्ठ सलाहकार; तथा डॉ. श्यामा कुरुविल्ला, निदेशक, WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर।

मुख्य अतिथि प्रतापराव जाधव ने अपने संबोधन में कहा,

“यह शिखर सम्मेलन दुनिया भर में समान, सुलभ और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों की दिशा में हमारे साझा प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। पारंपरिक चिकित्सा हमारी सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक ज्ञान और प्रकृति तथा कल्याण के प्रति मानवता की सामूहिक समझ का भंडार है। विश्व अब पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समन्वित दृष्टिकोण की नई सराहना कर रहा है। WHO और जामनगर स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन के साथ मिलकर हम अनुसंधान को सशक्त करने, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि पारंपरिक चिकित्सा के लाभ सभी तक पहुँचें।”

वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय ने सभा की शुरुआत अपने वक्तव्य से की और कहा,

“इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का विषय ‘Restoring Balance: The Science and Practice of Health and Wellbeing’ (संतुलन की पुनर्स्थापना: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान और व्यवहार) हमारी समग्र स्वास्थ्य दृष्टि और पारंपरिक चिकित्सा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत WHO और वैश्विक साझेदारों के सहयोग से मानकों को सुदृढ़ करने, अनुसंधान को आगे बढ़ाने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रहा है। हमें विश्वास है कि यह वैश्विक संवाद सार्थक अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करेगा।”

डॉ. पूनम खेत्रपाल, WHO की क्षेत्रीय निदेशक (एमेरिटस) और पारंपरिक चिकित्सा पर WHO महानिदेशक की वरिष्ठ सलाहकार ने विशेष संबोधन में कहा,

“पारंपरिक चिकित्सा ‘Health for All’ (सभी के लिए स्वास्थ्य) के लक्ष्य को प्राप्त करने का अभिन्न हिस्सा है। 170 सदस्य देशों द्वारा इसके उपयोग की रिपोर्ट और वैश्विक ढांचे के सुदृढ़ होने से यह क्षेत्र पहले से कहीं अधिक सशक्त हुआ है। जामनगर में स्थित ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर और ट्रेडिशनल मेडिसिन ग्लोबल लाइब्रेरी साक्ष्य-आधारित, लोगों-केंद्रित और समग्र स्वास्थ्य सेवा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।”

राजदूत सिबी जॉर्ज, सचिव (पश्चिम), विदेश मंत्रालय ने कहा,

“यह आयोजन पारंपरिक चिकित्सा की समय-परखी उपचार पद्धतियों को आधुनिक वैज्ञानिक समझ के साथ एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ‘Restoring Wellbeing and Balance’ की साझा दृष्टि वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज में शामिल करने की बढ़ती मान्यता को दर्शाती है। आयुष मंत्रालय ने अनुसंधान, फार्माकोविजिलेंस और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों, विशेष रूप से WHO ग्लोबल सेंटर, जामनगर के माध्यम से इन प्रणालियों को सशक्त किया है।”

डॉ. श्यामा कुरुविल्ला, निदेशक, WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर ने आगामी शिखर सम्मेलन के वैश्विक परिप्रेक्ष्य और प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा,

“यह शिखर सम्मेलन पारंपरिक चिकित्सा के विज्ञान और व्यवहार पर आधारित होकर लोगों और ग्रह के लिए संतुलन बहाल करने की वैश्विक आंदोलन को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। यह आयोजन Global Traditional Medicine Strategy 2025–2034 (विश्व स्वास्थ्य सभा 78) के मार्गदर्शन में आयोजित होगा और नवीनतम अनुसंधान, साक्ष्य और नवाचारों को उजागर करेगा।”

इसके बाद मोनालिसा दास, संयुक्त सचिव, आयुष मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में होने वाले सम्मेलन के प्रतिभागियों, विषयगत सत्रों, मुख्य घोषणाओं और साझेदारियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का समापन डॉ. कैथरीना बोहमे, WHO महानिदेशक की वरिष्ठ सलाहकार और WHO SEARO की प्रभारी अधिकारी द्वारा किया गया। उन्होंने कहा,

“पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक स्वास्थ्य के केंद्र में है—यह ‘Health for All’ की दृष्टि को साकार करने की कुंजी है। हम देशों से मंत्री-स्तरीय भागीदारी को बढ़ावा देने का आह्वान करते हैं। जैसे-जैसे हम शिखर सम्मेलन की ओर बढ़ रहे हैं, आइए हम सुलभ, सस्ती, समावेशी और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराएं।”

यह राजनयिक स्वागत समारोह साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा को आगे बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सशक्त करने और एक ऐसे वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र के निर्माण के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रतीक रहा जिसमें पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान एक साथ मिलकर कार्य करें।

आयुष मंत्रालय ने सभी देशों से अनुरोध किया कि वे दिसंबर 2025 में होने वाले द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।


आयुष मंत्रालय और WHO द्वारा पारंपरिक चिकित्सा पर द्वितीय वैश्विक शिखर सम्मेलन का आयोजन

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आयुष मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के बीच समझौता — नई दिल्ली में होगा पारंपरिक चिकित्सा पर दूसरा वैश्विक शिखर सम्मेलन

आयुष मंत्रालय ने आज विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से पारंपरिक चिकित्सा पर द्वितीय WHO वैश्विक शिखर सम्मेलन का आयोजन करेंगे। इस शिखर सम्मेलन की थीम होगी — “मानव और पृथ्वी के लिए संतुलन की पुनर्स्थापना: कल्याण का विज्ञान और व्यवहार”।

यह सम्मेलन 17 से 19 दिसम्बर 2025 तक नई दिल्ली में आयोजित होगा।

समझौते पर हस्ताक्षर का आयोजन आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)प्रतापराव जाधव तथा आयुष मंत्रालय के सचिव की उपस्थिति में हुआ। यह अवसर द्वितीय शिखर सम्मेलन की योजना समूह की बैठक के दौरान आया, जिसका उद्देश्य आगामी सम्मेलन की तैयारियों और प्रगति की समीक्षा करना था।

यह वैश्विक शिखर सम्मेलन पारंपरिक चिकित्सा की भूमिका को वैश्विक स्वास्थ्य और सतत विकास में आगे बढ़ाने हेतु एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करेगा। इसमें विश्वभर के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और विभिन्न हितधारक भाग लेंगे।

आयुष मंत्रालय और WHO ने मिलकर यह पुनः पुष्टि की कि वे प्रमाण-आधारित पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो मानवता और पृथ्वी—दोनों के कल्याण में योगदान करती हैं।


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