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मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी, CSAM और डीपफेक सामग्री पर जताया खेद

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नई दिल्ली- मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार के समक्ष कंपनी के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material - CSAM), डीपफेक कंटेंट तथा कुछ परिचालन संबंधी त्रुटियों को लेकर खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी है।

यह माफी ऐसे समय में आई है, जब भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अवैध और हानिकारक सामग्री के खिलाफ कड़ा रुख अपना रही है। सरकार ने हाल ही में मेटा से इंस्टाग्राम पर प्रसारित CSAM से संबंधित सामग्री और विज्ञापनों को तत्काल हटाने तथा इस संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा था।

मेटा ने दोहराया कि उसकी CSAM के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति है और कंपनी ऐसे कंटेंट की पहचान कर उसे हटाने के लिए अपनी तकनीकी प्रणालियों और सुरक्षा उपायों को लगातार मजबूत कर रही है।

इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही (Platform Accountability), डीपफेक और अन्य हानिकारक सामग्री पर नियंत्रण तथा 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) प्रावधानों को लेकर बहस तेज हो गई है। सरकार ने संकेत दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों और उपयोगकर्ता सुरक्षा से जुड़े मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।

साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए FIU-IND और I4C के बीच समझौता

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नई दिल्ली- भारत में साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने सूचना साझा करने और समन्वय बढ़ाने के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते पर FIU-IND के निदेशक अमित मोहन गोविल और I4C के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  राजेश कुमार ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से निपटने में दोनों एजेंसियों के बीच सहयोग और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान के नए दौर की शुरुआत का प्रतीक है।

यह पहल ऐसे समय में की गई है जब भारत का डिजिटल भुगतान तंत्र तेजी से विकसित हुआ है, जिसके साथ नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने की आवश्यकता भी बढ़ गई है। यह MoU दोनों एजेंसियों को परिचालन संबंधी जानकारी विकसित करने, जांच एजेंसियों को सहयोग देने, वित्तीय अपराधों की रोकथाम, डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा और संपत्ति की रिकवरी में मदद करेगा।

समझौते का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर धोखाधड़ी पहचान प्रणाली को मजबूत करने के लिए प्रभावी फीडबैक तंत्र स्थापित करना है। साथ ही, वित्तीय संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश और ‘रेड फ्लैग’ संकेतकों का विकास और प्रसार भी किया जाएगा, जिससे साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम को और सुदृढ़ किया जा सके।

यह कदम साइबर अपराधों के खिलाफ ‘पूरे सरकार’ (Whole of Government) दृष्टिकोण को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

FIU-IND के बारे में:

फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया देश की केंद्रीय एजेंसी है, जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी प्राप्त, विश्लेषित और साझा करती है तथा मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ कार्रवाई का समन्वय करती है।

I4C के बारे में:

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) गृह मंत्रालय के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण इकाई है, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों को साइबर अपराध से निपटने के लिए एक समन्वित ढांचा और प्लेटफॉर्म प्रदान करती है। I4C ने नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), साइबर-पुलिस और सस्पेक्ट रजिस्ट्री जैसे प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, जो विभिन्न एजेंसियों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच रियल-टाइम जानकारी साझा करने में सहायक हैं।

साइबर ठगों से बचने की पॉवर कंपनी ने की उपभोक्ताओं से अपील,विद्युत उपभोक्ता रहे सतर्क, सतर्कता ही समझदारी

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मोर बिजली मोबाइल एप केवल Play Store या App Store से ही डाउनलोड करें

रायपुर- मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के पंजीयन अथवा किसी भी प्रकार के भुगतान के लिए किसी अनजान वॉट्सएप, मेल अथवा एसएमएस पर क्लिक करने से बचें । मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के नाम पर किसी भी लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड न करें। छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी अपनी किसी भी योजना अथवा सेवा के लिए कभी भी कोई एपीके पाइल अथवा कोई वेब लिंक नहीं भेजती है।

छत्तीसगढ राज्य पॉवर कंपनी से के एमडी भीम सिंह से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना को आम उपभोक्ता तक पहुँचाने पॉवर कंपनी मैदानी स्तर पर शिविर का करेगी। उपभोक्ता अपना कोई भी भुगतान सिर्फ मोर बिजली एप, कंपनी की वेबसाइट, एटीपी सेंटर अथवा नजदीकी कार्यालय में ही करें, किसी मैदानी कर्मचारी को भी नकद भुगतान न करने की सलाह दी गई है। पंजीयन राशि के भुगतान की सुविधा केवल मोर बिजली एप, एटीपी केंद्र और संबंधित विद्युत कार्यालय के माध्यम से ही उपलब्ध कराई गई है। बिजली बिल भुगतान हो या कोई अन्य सूचना पॉवर कंपनी अपने उपभोक्ताओं को संदेश सिर्फ CSPDCL-S सेंडर ID से ही भेजती है।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना अथवा विद्युत सेवा से संबंधित किसी अन्य जानकारी  के लिए पॉवर कंपनी की केंद्रीकृत कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1912 पर उपभोक्ता कॉल कर सकते हैं, अथवा नजदीकी सीएसपीडीसीएल के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

दूरसंचार धोखाधड़ी पर सख्त प्रावधान, ‘संचार साथी’ से नागरिकों की भागीदारी बढ़ी: डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर

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संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने आज लोकसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि दूरसंचार अधिनियम, 2023 की उप-धारा 42(3)(e) के तहत धोखाधड़ी, छल या व्यक्ति-भेषण (Personation) के माध्यम से सिम कार्ड या अन्य दूरसंचार पहचानकर्ता प्राप्त करना दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य सूची के विषय हैं।

मंत्री ने बताया कि दूरसंचार अधिनियम, 2023 की उप-धारा 42(3)(c) और 42(3)(f) के अंतर्गत दूरसंचार पहचानकर्ताओं के साथ छेड़छाड़ करना तथा यह जानते हुए भी ऐसे रेडियो उपकरणों को रखना या उपयोग करना, जिनमें अनधिकृत या छेड़छाड़ किए गए पहचानकर्ता हों, अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अतिरिक्त, टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम किसी भी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर दूरसंचार उपकरण की विशिष्ट पहचान संख्या को हटाने, बदलने या उसमें छेड़छाड़ करने तथा ऐसे हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर को रखने या उपयोग करने पर रोक लगाते हैं, जिनके बारे में जानकारी हो कि वे अवैध रूप से कॉन्फ़िगर किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने लाइसेंस शर्तों के माध्यम से यह अनिवार्य किया है कि सभी टेलीकॉम सेवा प्रदाता (TSPs) किसी भी ग्राहक को सब्सक्राइबर के रूप में जोड़ने से पहले उसकी उचित पहचान और सत्यापन सुनिश्चित करें।

डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि DoT ने नागरिक-केंद्रित ‘संचार साथी’ पोर्टल और ऐप विकसित किया है, जिसके माध्यम से नागरिक अपने मोबाइल हैंडसेट की प्रामाणिकता अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान (IMEI) के जरिए जांच सकते हैं। दूरसंचार धोखाधड़ी को रोकने और डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए ‘संचार साथी’ पहल के तहत व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। IMEI सत्यापन से जुड़े व्याख्यात्मक वीडियो और इन्फोग्राफिक्स DoT के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए गए हैं।

इसके साथ ही, ‘संचार मित्र’ योजना शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत छात्र स्वयंसेवकों को डिजिटल सुरक्षा, धोखाधड़ी से बचाव और संचार साथी पोर्टल व ऐप के उपयोग के बारे में नागरिकों को जागरूक करने के लिए जोड़ा गया है। स्थानीय भाषाओं में संवाद के माध्यम से यह पहल जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने में मदद कर रही है।

नागरिकों तक पहुंच के लिए बहुभाषी समाचार लेख, विज्ञापन, सार्वजनिक स्थलों पर डिजिटल स्क्रीन और होर्डिंग्स, टीवी और रेडियो संदेश, DoT की फील्ड इकाइयों द्वारा स्थानीय गतिविधियां, टेलीकॉम कंपनियों के साथ एसएमएस अभियान और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार किया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि ‘संचार साथी’ जनभागीदारी को भी बढ़ावा देता है, जिसके तहत नागरिक साइबर धोखाधड़ी में दूरसंचार संसाधनों के संदिग्ध दुरुपयोग की रिपोर्ट कर सकते हैं। इससे अधिकारी और टेलीकॉम ऑपरेटर संदिग्ध नंबरों और फर्जी कनेक्शनों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर पाते हैं, जिससे दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सके और निर्दोष उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

भारत में फर्जी समाचार से निपटने हेतु IT नियम और फैक्ट-चेक यूनिट की जानकारी: राज्यसभा में मंत्री डॉ. एल. मुरुगन द्वारा दी जानकारी

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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 19(1) के अंतर्गत संरक्षित है। भारत सरकार डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर फर्जी, गलत और भ्रामक सूचनाओं की बढ़ती घटनाओं से भी अवगत है।

इस संदर्भ में, सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत 25 फरवरी, 2021 को अधिसूचित किया है।

इन नियमों के भाग-III में समाचार और वर्तमान मामलों के प्रकाशकों द्वारा पालन किए जाने वाले आचार संहिता (Code of Ethics) का उल्लेख है। इसमें केबल टेलीविज़न नेटवर्क अधिनियम, 1995 के अंतर्गत निर्धारित कार्यक्रम संहिता तथा प्रेस काउंसिल अधिनियम, 1978 के तहत निर्धारित पत्रकारिता आचार संहिता का पालन शामिल है।

आचार संहिता के अनुपालन के लिए तीन-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र भी इन नियमों में प्रदान किया गया है।

इसके अलावा, भाग-II के अंतर्गत YouTube और Facebook जैसे मध्यस्थों पर यह दायित्व डाला गया है कि वे ऐसी सूचनाओं के प्रसार को रोकें जो स्पष्ट रूप से गलत, असत्य या भ्रामक हों।

फैक्ट चेक यूनिट (FCU) का गठन प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत नवंबर 2019 में किया गया था, ताकि केंद्र सरकार से संबंधित फर्जी खबरों की जांच की जा सके।

संबंधित मंत्रालयों/विभागों से सूचना की सत्यता की पुष्टि के बाद, FCU अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर सही जानकारी साझा करता है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत, सरकार भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा तथा सार्वजनिक व्यवस्था के हित में आवश्यक वेबसाइटों, सोशल मीडिया हैंडल और पोस्ट को ब्लॉक करने के आदेश जारी करती है।

सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री, डॉ. एल. मुरुगन ने आज राज्यसभा में डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी प्रदान की।

केंद्र और राज्यों की संयुक्त पहल: साइबर अपराध से निपटने के लिए देशभर में साइबर पुलिस स्टेशनों का तेज़ विस्तार

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‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार राज्य सूची के विषय हैं। इसलिए अपराधों की रोकथाम, पता लगाना, जाँच और अभियोजन, तथा साइबर अपराधों से निपटने के लिए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों की स्थापना का दायित्व मुख्य रूप से राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) का है। केंद्र सरकार राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को सलाह जारी करके और विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्रदान कर उनकी क्षमता-वृद्धि में सहयोग करती है।

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) अपनी रिपोर्ट “Data on Police Organizations” में साइबर सेल और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों का वार्षिक डाटा प्रकाशित करता है। नवीनतम रिपोर्ट वर्ष 2024 की है। पिछले पाँच वर्षों में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में कुल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों की संख्या 169 (2020) से बढ़कर 459 (2024) हो गई है। विस्तृत विवरण परिशिष्ट में दिया गया है।

साइबर अपराधों से निपटने के लिए केंद्र सरकार की प्रमुख पहलें

1. भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना

गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समग्र और समन्वित तरीके से निपटने के लिए I4C की स्थापना की है।

2. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP)

  • वेबसाइट: cybercrime.gov.in

  • सभी प्रकार के साइबर अपराध, विशेषकर महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराधों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग हेतु बनाया गया है।

  • यहाँ दर्ज शिकायतों पर आगे की कार्रवाई संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की एजेंसियाँ करती हैं।

3. नागरिक वित्तीय साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS)

  • वर्ष 2021 में शुरू की गई।

  • वित्तीय धोखाधड़ी की त्वरित रिपोर्टिंग और फंड्स को फ्रीज कराने में मदद करती है।

  • इसके लिए हेल्पलाइन 1930 संचालित की गई है।

4. साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (CFMC)

  • I4C में स्थापित अत्याधुनिक केंद्र।

  • इसमें विभिन्न बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटरों, टेलीकॉम, आईटी इंटरमीडियरीज और राज्यों की LEAs के प्रतिनिधि मिलकर कार्य करते हैं।

5. संयुक्त साइबर समन्वय टीमें (JCCTs)

मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापट्टनम और गुवाहाटी — इन सात क्षेत्रों में साइबर अपराध हॉटस्पॉट्स को ध्यान में रखते हुए JCCTs स्थापित की गई हैं।

6. ‘समन्वय’ प्लेटफ़ॉर्म

  • यह MIS, डेटा रिपॉजिटरी और समन्वय मंच है।

  • राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए साइबर अपराध डेटा, विश्लेषण और इंटरस्टेट लिंक तैयार करता है।

  • इसके माध्यम से अब तक 16,840 आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित हुई है और 1,05,129 साइबर जाँच सहायता अनुरोध पूरे किए गए हैं।

7. राज्यों में S4C/R4C केंद्र

  • राज्यों को I4C की तर्ज पर S4C/R4C स्थापित करने का अनुरोध किया गया है।

  • अब तक बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में S4C स्थापित हो चुके हैं।

परिशिष्ट: राज्य/केंद्रशासित प्रदेश अनुसार साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों की संख्या (2020–2024)

कुल संख्या: 169 (2020) → 459 (2024)
(डेटा: BPR&D — Data on Police Organizations, 2020–2024)

यह जानकारी गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने लोकसभा में लिखित उत्तर के रूप में दी।


केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का स्पष्टीकरण: संचार साथी ऐप पूरी तरह वैकल्पिक, सुरक्षित और उपभोक्ता केंद्रित

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केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज संचार साथी ऐप को लेकर स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह लोकतांत्रिक और पूरी तरह स्वैच्छिक (voluntary) है। उपयोगकर्ता अपनी सुविधा के अनुसार ऐप को सक्रिय कर सकते हैं और चाहें तो कभी भी इसे निष्क्रिय या हटा सकते हैं।

उपभोक्ता केंद्रित, सुरक्षित और पारदर्शी प्लेटफॉर्म

सिंधिया ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और संचार साथी ऐप हर मोबाइल उपयोगकर्ता को सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा:

“संचार साथी एक ऐप और पोर्टल दोनों है, जो नागरिकों को पारदर्शी और आसान टूल्स के माध्यम से खुद को सुरक्षित करने में सक्षम बनाता है। यह जनभागीदारी की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें नागरिक अपने डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।”

संचार साथी के प्रभाव और प्रमुख उपलब्धियाँ

लॉन्च के बाद से संचार साथी ने बड़े पैमाने पर प्रभाव डाला है:

  • 21.5 करोड़+ पोर्टल विज़िट

  • 1.4 करोड़+ ऐप डाउनलोड

  • 1.43 करोड़+ मोबाइल कनेक्शन नागरिकों द्वारा “Not My Number” चुनने पर डिस्कनेक्ट

  • 26 लाख खोए/चोरी हुए मोबाइल फोन ट्रेस किए गए

    • इनमें से 7.23 लाख फोन सफलतापूर्वक लौटाए गए

  • 40.96 लाख फर्जी कनेक्शन नागरिकों की रिपोर्ट के आधार पर डिस्कनेक्ट

  • 6.2 लाख फ्रॉड-लिंक्ड IMEI ब्लॉक

  • ₹475 करोड़ की संभावित वित्तीय धोखाधड़ी रोकी गई Financial Fraud Risk Indicator (FRI) के माध्यम से

साइबर सुरक्षा और नागरिक संरक्षण सर्वोपरि

संचार साथी में उपयोगकर्ताओं को कॉल लॉग से सीधे संदिग्ध धोखाधड़ी रिपोर्ट करने की सुविधा है, जिससे नागरिक स्वयं और दूसरों को डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षित रख सकते हैं।

 सिंधिया ने कहा:

“हर नागरिक की डिजिटल सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। संचार साथी स्वैच्छिक, पारदर्शी और पूरी तरह नागरिक सुरक्षा के लिए बनाया गया है। इसे कभी भी सक्रिय, निष्क्रिय या हटाया जा सकता है—सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए गोपनीयता से समझौता किए बिना।”


भारत सरकार ने की बड़ी कार्रवाई: मोबाइल के IMEI से छेड़छाड़ पर अब सख्त सजा, तीन साल तक की जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना

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मोबाइल कनेक्टिविटी में तेजी के साथ भारत में IMEI जैसी टेलीकॉम पहचान संख्या के दुरुपयोग के मामले भी बढ़े हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने इन टेलीकॉम पहचानकर्ताओं से छेड़छाड़ और गलत उपयोग रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं।

दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकम्यूनिकेशंस एक्ट, 2023 के तहत IMEI और अन्य डिवाइस पहचान संख्याओं से छेड़छाड़ को गंभीर अपराध बताया है और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

कानून में क्या है प्रावधान?

टेलीकम्यूनिकेशंस एक्ट, 2023 में IMEI से छेड़छाड़ पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • सेक्शन 42(3)(c): किसी भी टेलीकॉम पहचानकर्ता (IMEI सहित) से छेड़छाड़ करना अपराध।

  • सेक्शन 42(3)(e): फर्जी दस्तावेज़, धोखाधड़ी या किसी की नकल कर SIM या टेलीकॉम पहचानकर्ता प्राप्त करना अवैध।

  • सेक्शन 42(3)(f): ऐसे मोबाइल, मॉडेम, SIM Box या अन्य रेडियो उपकरण रखना, जिसमें जानबूझकर छेड़छाड़ किया गया IMEI हो — अपराध।

सजा क्या है?

➡️ तीन साल तक की जेल,
➡️ ₹50 लाख तक का जुर्माना, या
➡️ दोनों
ये अपराध गंभीर, गिरफ्तारी योग्य (Cognizable) और जमानत रहित (Non-bailable) हैं।

टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम, 2024 के तहत:

  • किसी भी व्यक्ति को IMEI बदलना, छेड़छाड़ करना, या ऐसे उपकरण रखना/खरीदना/बेचना मना है, जिनमें IMEI बदला जा सकता हो।

नागरिकों को क्या नहीं करना चाहिए?

🚫 छेड़छाड़ किए गए IMEI वाले मोबाइल का उपयोग
🚫 मॉडेम, मॉड्यूल, SIM Box जैसे उपकरण जिनमें IMEI बदला जा सके
🚫 फर्जी दस्तावेज़ों से SIM कार्ड लेना
🚫 दूसरों को अपने नाम के SIM कार्ड देना
🚫 कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी (CLI) बदलने वाले ऐप्स/वेबसाइट का इस्तेमाल

➡️ ध्यान दें:

यदि किसी व्यक्ति ने अपने नाम पर SIM लेकर किसी और को दे दिया और उसका दुरुपयोग हुआ, तो कानूनन मूल धारक को भी अपराधी माना जाएगा।

कैसे करें IMEI की जांच?

सरकार ने संचार साथी (Sanchar Saathi) पहल के तहत मोबाइल सुरक्षा के लिए डिजिटल टूल उपलब्ध कराए हैं।
नागरिक IMEI की जानकारी यहाँ देख सकते हैं:

🔗 https://ceir.sancharsaathi.gov.in/Device/SancharSaathiKym.jsp

Sanchar Saathi मोबाइल ऐप भी उपलब्ध है:

यह पोर्टल ब्रांड, मॉडल और डिवाइस की असली जानकारी देता है।

नागरिकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता

इन नियमों का पालन करने से न केवल मोबाइल धोखाधड़ी कम होगी, बल्कि देश की दूरसंचार व्यवस्था भी सुरक्षित होगी।

विस्तृत जानकारी के लिए विज़िट करें:


डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियम, 2025: भारत में डेटा सुरक्षा और नवाचार का नया ढांचा

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भारत सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियम, 2025 को अधिसूचित किया है, जिससे DPDP अधिनियम, 2023 का पूर्ण कार्यान्वयन सुनिश्चित हुआ। यह अधिनियम और नियम नागरिक-केंद्रित और नवाचार-सुलभ ढांचा प्रदान करते हैं, जो डिजिटल व्यक्तिगत डेटा के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित करता है।

DPDP अधिनियम, 2023

11 अगस्त 2023 को संसद द्वारा पारित इस अधिनियम ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए एक व्यापक ढांचा स्थापित किया। इसमें डेटा प्रबंधकों (Data Fiduciaries) की जिम्मेदारियों और व्यक्तियों (Data Principals) के अधिकारों और कर्तव्यों का विवरण है। यह SARAL डिजाइन — Simple, Accessible, Rational, Actionable — के सिद्धांत पर आधारित है, जिससे नियम सरल भाषा और चित्रों के माध्यम से समझने और पालन करने में आसान बनें।

मुख्य सिद्धांत:

  1. सहमति और पारदर्शिता

  2. उद्देश्य की सीमितता

  3. डेटा न्यूनतमकरण

  4. सटीकता

  5. संग्रह की सीमा

  6. सुरक्षा उपाय

  7. जवाबदेही

समावेशी और परामर्शी नियम-निर्माण

MeitY ने ड्राफ्ट DPDP नियमों पर दिल्ली, मुंबई, गुवाहाटी, कोलकाता, हैदराबाद, बैंगलोर और चेन्नई में सार्वजनिक टिप्पणियों और परामर्श आयोजित किए। स्टार्टअप, MSMEs, उद्योग निकायों, नागरिक समाज और सरकारी विभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम नियम अधिसूचित किए गए।

धीरे-धीरे और व्यावहारिक कार्यान्वयन

DPDP नियमों में 18 महीने का चरणबद्ध अनुपालन समय दिया गया है। डेटा प्रबंधकों को स्पष्ट सहमति नोटिस जारी करना अनिवार्य होगा, जिसमें डेटा संग्रह और उपयोग का उद्देश्य सरल भाषा में बताया जाएगा।

डेटा उल्लंघन सूचनाएँ

यदि व्यक्तिगत डेटा का उल्लंघन होता है, तो डेटा प्रबंधकों को प्रभावित व्यक्तियों को तुरंत सूचित करना होगा और उल्लंघन की प्रकृति, संभावित परिणाम और समाधान के उपाय बताने होंगे।

बच्चों और विकलांग व्यक्तियों की सुरक्षा

बच्चों का डेटा प्रोसेसिंग करने से पहले मान्य सहमति अनिवार्य होगी। विकलांग व्यक्ति जिनके लिए कानूनी निर्णय लेने में मदद की आवश्यकता है, उनके लिए सहमति कानूनी अभिभावक से प्राप्त करनी होगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही

डेटा प्रबंधकों को संपर्क जानकारी जैसे डेटा संरक्षण अधिकारी का विवरण प्रदर्शित करना होगा। महत्वपूर्ण डेटा प्रबंधकों के लिए स्वतंत्र ऑडिट, प्रभाव मूल्यांकन और तकनीकी due diligence अनिवार्य होगा।

डेटा प्रिंसिपल्स के अधिकार

व्यक्ति अपने डेटा को एक्सेस, सुधार, अपडेट या मिटाने का अधिकार रखते हैं। वे किसी और व्यक्ति को इन अधिकारों का प्रयोग करने के लिए नामित कर सकते हैं। डेटा प्रबंधकों को ऐसे अनुरोधों का उत्तर 90 दिनों के भीतर देना होगा।

डिजिटल-प्रथम डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड

बोर्ड पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप के माध्यम से नागरिकों को शिकायत दर्ज करने और ट्रैक करने की सुविधा देगा। बोर्ड के निर्णय के खिलाफ अपील TDSAT में की जा सकेगी।

निष्कर्ष

DPDP अधिनियम और नियम डेटा सुरक्षा को मजबूत करते हैं, नवाचार और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करते हैं, और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित, लचीला और वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाते हैं।

अधिक जानकारी: MeitY वेबसाइट

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