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ग्राम खमतराई में उत्साह से जला आशीर्वाद का दीप, विकसित भारत का लिया संकल्प

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आरंग- ग्राम खमतराई में मुख्यकार्यपालन अधिकारी आरंग  राजेंद्र पांडे  के मार्गदर्शन में खमतराई के ग्रामपंचायत  सरपंच सती बिशन लहरी सरपंच एवं कल्याण डहरिया सचिव के संयोजन में प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर उत्साहपूर्वक आशीर्वाद का दीप प्रज्वलित किया गया। कार्यक्रम में ग्राम जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों नागरिकों, युवाओ महिलाओं बच्चे ने सहभागिता निभाते हुए दीप प्रज्वलित कर देश के विकास और जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

इस अवसर पर ग्राम पंचायत परिसर देशभक्ति के नारों से गूंज उठा।  जनप्रतिनिधियों नागरिकों शिक्षकों ने विकसित भारत के संकल्प को साकार करने तथा समाज में सेवा, सहयोग और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। साथ ही आगामी सेवा संकल्प अभियान को सफल बनाने के लिए सभी से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया गया।

इसी कड़ी में सेवा ही संकल्प अभियान अन्तर्गत ग्राम पंचायत ख़मतराई में पंचायत परिसर में 301, प्राथमिक स्कूल में 101, मिडिल स्कूल 101, हाई स्कूल में 151, जय स्तंभ चौक में 121, श्री राम मंदिर में 151, गायत्री मंदिर 51, सहाड़ा देव में 21, बंजरंग में 101, महामाया मंदिर में 51, गाँधी चौक में 101, वासुदेव चौक 151, धानमंडी में 201, प्रत्येक घर से 1-5 दिया के 551 घरों सहित ग्राम पंचायत ख़मतराई में कुल 2100 आर्शीवाद का दिया जलाया गया

सरपंच सती बिशन लहरी एवं कल्याण डहरिया के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में  दीपोत्सव  उत्सव के रूप में सभी नागरिकों उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने कहा कि दीप प्रज्वलन केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में सकारात्मक कार्यों के प्रति सामूहिक संकल्प का संदेश है। इस अवसर पर ग्राम पंचायत ख़मतराई के सरपंच सती बिसन लहरी, उपसरपंच,ज्ञानचंद लोधी, प्राचार्य  टिकेश्वरी चंद्राकर, संकुल समन्वयक हरीश दीवान, प्रधानपाठक, नरसिंग मानिकपुरी, शिक्षक भूषण जलक्षत्रि,सचिव कल्याण डहरिया, रोजगार सहायक अशवनी साहू, पंच गण कुमारी लोधी, मोहित साहू, गोदावरी साहू, प्रमिला साहू, रामकुमार लोधी, सुमति साहू, बूथ अध्यक्ष सीताराम साहू, पूनम चंद साहू मंडी अध्यक्ष, कोमन्नारायण साहू वरिष्ठ कार्यकर्त्ता, सनद साहू, सोमन साहू, धर्मेंद्र साहू, बलराम साहू, भागवत साहू, पुनौटिन यादव, गांधारी साहू, रेखा साहू मितानिन, झम्मन लोधी पायल साहू, डिम्पल साहू, चिंताराम लोधी, आजु राम साहू, नकुल साहू, भृत्य विनोद यादव, हितेश साहू, अशोक साहूआदि सभी की सहभागिता रही।


मन की बात में पीएम मोदी ने देश की प्रतिभाओं और जनभागीदारी को किया सलाम, नशामुक्त भारत से लेकर ‘वोकल फॉर लोकल’ तक कई मुद्दों पर रखी बात

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के नए एपिसोड में देशभर में अलग-अलग क्षेत्रों में अपने छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा बदलाव ला रहे नागरिकों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने इतिहास को रोचक बनाने की पहल, नशामुक्त भारत अभियान, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता, फूलों की खेती, वन संरक्षण, अंतरिक्ष विज्ञान, किसानों की नवाचारपूर्ण खेती और भारतीय सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार समेत कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ ऐसा मंच है, जहां देश के सामान्य नागरिकों की असाधारण पहल और उनके नए विचारों को सामने लाने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक अपनी ऊर्जा और रचनात्मकता से समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

इतिहास को रोचक बनाने की पहल की पीएम मोदी ने सराहना

प्रधानमंत्री ने मुंबई के कृष्ण शेषाद्रि की पहल का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने भारतीय इतिहास को रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने के उद्देश्य से bharatrajya.com वेबसाइट तैयार की है।

कृष्ण शेषाद्रि इंजीनियरिंग और MBA की पढ़ाई के बाद मार्केटिंग के क्षेत्र में आए, लेकिन इतिहास में उनकी रुचि बचपन से ही रही। उन्होंने तकनीक और इतिहास को जोड़कर ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया, जहां लोग अलग-अलग वर्षों का चयन करके यह जान सकते हैं कि उस समय भारत के विभिन्न हिस्सों में कौन-से राजा और साम्राज्य शासन कर रहे थे।

प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में कृष्ण शेषाद्रि ने बताया कि भारतीय इतिहास को अक्सर कुछ चुनिंदा साम्राज्यों के नजरिए से पढ़ाया जाता है। ऐसे में चोल, पल्लव, कश्मीर के कर्कोट वंश और असम के अहोम जैसे कई महत्वपूर्ण साम्राज्यों के योगदान की जानकारी लोगों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाती।

उन्होंने बताया कि वेबसाइट को लगातार बेहतर बनाने के लिए लोगों को Correction और Suggestion का विकल्प दिया गया है। इससे इतिहास से जुड़ी जानकारियों को बेहतर करने और नए फीचर जोड़ने में लोगों की भागीदारी हो रही है।

पीएम मोदी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इतिहास को कहानी की तरह प्रस्तुत करने से युवा और बच्चे इससे ज्यादा आसानी से जुड़ सकते हैं।

‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’ अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील

प्रधानमंत्री ने ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है—नशामुक्त युवा और नशामुक्त भारत।

पीएम मोदी ने कहा कि नशे की समस्या केवल एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करती, बल्कि उसका असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। उन्होंने युवाओं, संगीतकारों, छात्रों, थिएटर कलाकारों और कंटेंट क्रिएटर्स से अपील की कि वे अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने में करें।

उन्होंने कहा कि युवा कलाकार नशामुक्त जीवन का संदेश देने वाले गीत बनाएं, विद्यार्थी और थिएटर समूह छोटे नाटक तैयार करें और सोशल मीडिया क्रिएटर्स अलग-अलग भारतीय भाषाओं में प्रभावशाली कंटेंट बनाएं।

प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने प्रयासों को सोशल मीडिया पर #NashaMuktYuva के साथ साझा करने की अपील की।

 ‘हर घर तिरंगा’ और ‘सूर्यपथ तिरंगा’ का किया उल्लेख

पीएम मोदी ने अगस्त महीने को देशभक्ति की भावना से जुड़ा महीना बताते हुए राष्ट्रीय हथकरघा दिवस, भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ, विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस, स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत 8 करोड़ से ज्यादा तिरंगा सेल्फी अपलोड की गईं।

प्रधानमंत्री ने ‘सूर्यपथ तिरंगा’ पहल का भी उल्लेख किया। इसके तहत फिजी के सुवा से लेकर एशिया, अफ्रीका और यूरोप के विभिन्न देशों में स्थित भारतीय मिशनों और पोस्टों तक तिरंगा फहराया गया और अंत में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को तक यह यात्रा पहुंची।

पीएम मोदी ने कहा कि सूर्य की गति के साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तिरंगे का फहराया जाना देशवासियों के लिए गौरव और एकता का अद्भुत संदेश है।

 PM SVANidhi से मजबूत हो रहीं देश की लाखों महिलाएं

प्रधानमंत्री ने PM SVANidhi योजना के जरिए महिला सशक्तिकरण की दिशा में हो रहे बदलावों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि इस योजना के लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं और लगभग 35 लाख महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं।

पीएम मोदी ने गाजियाबाद की बबीता शर्मा का उदाहरण दिया। बबीता पहले सड़क किनारे पूजा सामग्री, फूल, दीये, अगरबत्ती और नारियल बेचती थीं। योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता मिलने के बाद उन्होंने अपना स्टॉक बढ़ाया और धीरे-धीरे उनका छोटा सा ठेला एक दुकान में बदल गया।

इसी तरह बेंगलुरु की टी.एस. निंगम्मा की कहानी भी प्रधानमंत्री ने साझा की। निंगम्मा और उनके पति इडली, डोसा और सांभर बेचने का छोटा व्यवसाय करते थे। PM SVANidhi से सहायता मिलने के बाद उन्होंने अपनी गाड़ी को बेहतर बनाया, थोक में सामान खरीदना शुरू किया और मेन्यू में नए व्यंजन जोड़े। इससे उनकी आमदनी बढ़ी और वे अपने तीन बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में सक्षम हुईं।

पीएम मोदी ने कहा कि जब किसी महिला का व्यवसाय आगे बढ़ता है तो उसके साथ पूरे परिवार का भविष्य आगे बढ़ता है।

स्वच्छता के लिए युवाओं की पहल की सराहना

प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के पटवाई गांव के युवाओं की स्वच्छता पहल का भी जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि आकाश और रोहन नाम के दो युवाओं ने अपने इलाके में गंदगी देखकर सफाई अभियान शुरू किया। धीरे-धीरे दूसरे युवा भी उनके साथ जुड़ते गए और ‘Clean-up Patwai’ नाम की टीम तैयार हुई।

इस टीम ने अब तक चार गंगा घाटों की सफाई की है और एक टन से अधिक प्लास्टिक कचरा हटाया है। इसके अलावा कई तालाबों और सार्वजनिक स्थानों की भी सफाई की गई है।

अमरनाथ यात्रा में स्वच्छता और सेवा का उदाहरण

पीएम मोदी ने हाल ही में हुई श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान स्वच्छता के लिए किए गए प्रयासों की भी सराहना की।

उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान 400 मीट्रिक टन से अधिक कचरा एकत्र कर उसका निपटारा किया गया। करीब 16 हजार श्रद्धालुओं ने स्वच्छता की शपथ ली, जबकि 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं को ‘Responsible Yatri’ प्रमाणपत्र दिया गया।

एक अनूठी पहल का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि यात्रा में इस्तेमाल होने वाले घोड़ों और खच्चरों के गोबर से बायोगैस तैयार की गई और इसी स्वच्छ ऊर्जा से ‘स्वच्छ ज्योति’ को रोशन किया गया।

नागालैंड की वेसालु पुरो ने फूलों की खेती से बनाई नई पहचान

प्रधानमंत्री ने नागालैंड के फेक जिले की वेसालु पुरो की प्रेरणादायक कहानी भी साझा की।

कृषि परिवार में पली-बढ़ीं वेसालु को बचपन से ही फूलों से विशेष लगाव था। वर्ष 2021 में उन्होंने छोटे स्तर पर फूलों की खेती शुरू की। बाद में उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से वैज्ञानिक तरीके से फूलों की खेती का प्रशिक्षण लिया।

उन्होंने सिर्फ एक चौथाई एकड़ जमीन पर हजारों ग्लेडियोलस बल्ब लगाए और पहली ही कोशिश में 5 हजार से अधिक फूल प्राप्त किए।

आज उनके फूल केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नागालैंड से दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक पहुंच रहे हैं।

ओडिशा में महिलाओं ने जंगल संरक्षण को बनाया आजीविका का माध्यम

प्रधानमंत्री ने ओडिशा के देब्रीगढ़ क्षेत्र के धोड़्रोकुसुम गांव की मैथिली भुए की कहानी भी सुनाई।

मैथिली भुए पहले जंगल से जलावन, महुआ, केंदू पत्ते, बांस की कोपलें और अन्य वन उपज एकत्र करती थीं। बाद में वे देब्रीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ीं और जंगल संरक्षण की दिशा में काम करने लगीं।

उनकी पहल से प्रेरित होकर आज 60 से ज्यादा महिलाएं वन संरक्षण से जुड़ी हैं। कुछ महिलाएं वन्यजीवों की सुरक्षा कर रही हैं, कुछ घास के मैदान विकसित करने में योगदान दे रही हैं और कई महिलाएं इको-टूरिज्म से जुड़ी गतिविधियों में भाग ले रही हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि इन महिलाओं ने दिखाया है कि प्रकृति की रक्षा करते हुए आजीविका और समृद्धि का रास्ता भी बनाया जा सकता है।

‘Mission ShaktiSAT’ से हजारों बेटियों को अंतरिक्ष विज्ञान का अवसर

प्रधानमंत्री ने Mission ShaktiSAT को भी विशेष उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से 108 देशों की 12 हजार छात्राओं को सैटेलाइट तकनीक और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर ग्रेटर नोएडा की गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत की गई। इसमें भारत सहित कई देशों की छात्राओं ने हिस्सा लिया। भारत के दूरदराज क्षेत्रों से चयनित छात्राएं भी इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

इस मिशन का लक्ष्य छात्राओं की भागीदारी से विकसित एक सैटेलाइट को चंद्रमा की कक्षा में भेजने की दिशा में काम करना है।

पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि इस पहल से जुड़ी कई बेटियां भविष्य में विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाएंगी।

एवोकाडो की खेती से किसानों की बढ़ रही आमदनी

प्रधानमंत्री ने किसानों के नवाचार का उदाहरण देते हुए एवोकाडो की खेती का भी उल्लेख किया।

आंध्र प्रदेश के कडप्पा के किसान वरदराज ने पारंपरिक फसलों के साथ एवोकाडो की खेती शुरू की। उन्होंने YouTube के माध्यम से इसके बारे में जानकारी जुटाई और अब तक करीब 4 टन एवोकाडो का उत्पादन कर चुके हैं।

तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन ने आधे हेक्टेयर में एवोकाडो की खेती शुरू की और इससे अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।

वहीं कर्नाटक के चिक्कमगलुरु में कुछ किसानों ने कॉफी के बागानों के बीच एवोकाडो के पौधे लगाए हैं। इससे उन्हें कॉफी और काली मिर्च के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत मिल रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि शहरों में लोग एवोकाडो टोस्ट खाते हैं, वहीं देश के किसान इसी एवोकाडो को अपनी आमदनी बढ़ाने का जरिया बना रहे हैं।

महानायक उत्तम कुमार को पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री ने भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता उत्तम कुमार की जन्मशती का उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।

उन्होंने कहा कि उत्तम कुमार ने अपने अभिनय से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। सत्यजीत रे की फिल्म ‘नायक’ को लेकर भी उन्होंने कहा कि फिल्म की पटकथा उत्तम कुमार को ध्यान में रखकर लिखी गई थी।

पीएम मोदी ने उनके अभिनय के साथ-साथ उनके परोपकारी स्वभाव की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तम कुमार का जीवन यह सीख देता है कि शुरुआती असफलताओं से निराश होकर कभी हार नहीं माननी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने बंगाली में श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि महानायक उत्तम कुमार हमेशा लोगों के दिलों में राज करते रहेंगे।

त्योहारों में ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश

आने वाले त्योहारों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों को जन्माष्टमी, विश्वकर्मा पूजा और दीपावली की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने एक बार फिर ‘वोकल फॉर लोकल’ का आह्वान करते हुए कहा कि इसका मतलब केवल मिट्टी के दीये खरीदना नहीं है, बल्कि घर में खरीदी जाने वाली ज्यादा से ज्यादा वस्तुओं में यह देखना भी है कि वे भारत में बनी हों।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश में बने उत्पादों पर गर्व करना और उन्हें बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज से भी ‘वोकल फॉर लोकल’ को आगे बढ़ाने में योगदान देने की अपील की।

पीएम मोदी का संदेश

‘मन की बात’ के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी के इर्द-गिर्द रहा। इतिहास से लेकर अंतरिक्ष तक, महिला उद्यमिता से लेकर किसान नवाचार तक और स्वच्छता से लेकर नशामुक्त भारत तक—पीएम मोदी ने देश के नागरिकों के छोटे प्रयासों को बड़े सामाजिक बदलाव की ताकत बताया।

उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों और पहलों की जानकारी ‘मन की बात’ के साथ साझा करें, ताकि उनकी कहानियां देश के दूसरे लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकें।

परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य और मूल्य शिक्षा की पहल: कोकड़ी सरकारी स्कूल ने 200 से अधिक परिवारों को किया सम्मानित

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महासमुंद- चेतना विकास मूल्य शिक्षा, जीवन विद्या अध्ययन, परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य व्यवस्था, अखंड समाज एवं सार्वभौम व्यवस्था तथा शिक्षा के मानवीयकरण की दिशा में कार्यरत कोकड़ी सरकारी स्कूल में ‘कोकड़ी दर्शन जनपहल-06’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय प्रबंध समिति, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के सहयोग और संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम में 200 से अधिक परिवारों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों में परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य व्यवस्था एवं अखंड समाज-सार्वभौम व्यवस्था की समझ विकसित करना तथा परिवार और समाज में स्वच्छता, नशामुक्ति, अपराधमुक्ति, शाकाहार, व्यवहार कुशलता, सही संबोधन, कृषि नवाचार, आवर्तनशील खेती, स्वावलंबन, हुनर एवं स्किल डेवलपमेंट जैसे विषयों को व्यवहार में उतारने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने बताया कि जनपहल में विकसित भारत-विकसित संसार की संकल्पना, सुखी एवं समृद्ध व्यक्ति-परिवार-समाज-देश-विश्व निर्माण, पशु-पक्षियों के संरक्षण एवं संवर्धन, प्रकृति संतुलन, सही आहार-विहार-व्यवहार, बच्चों एवं अभिभावकों के अभिव्यक्ति कौशल, गांव की छोटी-छोटी समस्याओं के स्थानीय समाधान, जनप्रतिनिधियों के कर्तव्य एवं दायित्व तथा शिक्षा के मानवीयकरण जैसे विषयों पर खुली चर्चा एवं परिचर्चा हुई।

विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले परिवारों का सम्मान

कार्यक्रम में गांव एवं आसपास के क्षेत्रों में अपने कार्यों से प्रेरणा देने वाले अनेक परिवारों एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। इनमें तेंदुवाही के समृद्ध किसान जागेश्वर सिंह पटेल, कोकड़ी में 40 से अधिक गिर गायों का पालन करने वाले रामशरण पटेल, नशामुक्त एवं शाकाहारी जीवन का उदाहरण प्रस्तुत करने वाले अशोक कुमार सोनवानी, मोहित भारती सहित अनेक परिवार शामिल रहे।

इसके अलावा मधुबन दर्रीपाली से पहुंचे लगभग 20 परिवारों सहित गणेश राम सहिस, पशु चिकित्सक डॉ. अनिल देवदास, समाजसेवी रायतुम संतोष कुमार साहू, सुशील आर्य पटेवा, नरसिंह यादव, कोमल यादव, पूरन साहू एवं खूबचंद भारती सहित अनेक परिवारों और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया।

अतिथियों ने कोकड़ी स्कूल को बताया प्रेरणादायी मॉडल

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शुक्लांबर पटेल, शिक्षक रायगढ़, उर्मिला मंगल सिदार, शिक्षक रायगढ़ तथा चंद्रकला बाबूलाल नायक, समाजसेवी रायगढ़ रहे। अतिथियों ने कोकड़ी सरकारी स्कूल के शैक्षिक प्रयोगों और जीवन विद्या अध्ययन आधारित गतिविधियों की सराहना की।

शुक्लांबर पटेल ने कोकड़ी सरकारी स्कूल को शिक्षा के मानवीयकरण की दिशा में विश्व स्तर पर पहचान बनाने वाला प्रेरणादायी विद्यालय बताते हुए कहा कि पूज्य ए. नागराज जी, मध्यस्थ दर्शन एवं जीवन विद्या अध्ययन के प्रणेता, स्वयं विद्वानों के साथ विद्यालय का भ्रमण कर चुके हैं। उन्होंने विद्यालय में किए जा रहे प्रयोगों को सरकार द्वारा आत्मसात कर अन्य विद्यालयों में भी लागू किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उर्मिला मंगल सिदार ने कोकड़ी सरकारी स्कूल को जीवन विद्या अध्ययन आधारित मॉडल स्कूल बताते हुए गेंदलाल कोकडिया द्वारा अपने वेतन के पैसे से तेंदुवाही में स्थापित मानवीय शिक्षा शोध केंद्र के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन के माध्यम से ग्रामीणों और शिक्षा जगत में मूल्य शिक्षा को लेकर महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।

जीवन विद्या आधारित संस्कारों पर भी हुई चर्चा

चंद्रकला बाबूलाल नायक ने जीवन विद्या अध्ययन आधारित विवाह, नामकरण एवं मृत्यु संस्कार जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं इन प्रयोगों को जीवन में अपनाया है। उन्होंने अपनी बेटी राखी का विवाह गेंदलाल कोकडिया के साथ जीवन विद्या अध्ययन आधारित पद्धति से किए जाने तथा अपनी सास के मृत्यु संस्कार को भी इसी दृष्टिकोण से संपन्न किए जाने का अनुभव साझा किया।

संकुल समन्वयक सुरेश कुमार साहू ने कोकड़ी सरकारी स्कूल को प्रेरणादायी विद्यालय बताते हुए चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशाला को समझने के लिए अन्य विद्यालयों के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का कोकड़ी स्कूल में शैक्षिक भ्रमण कराने की आवश्यकता बताई। उन्होंने जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शामिल करने तथा इसे शैक्षिक पाठ्यक्रम एवं पाठ्य-पुस्तकों का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

अभिव्यक्ति कौशल और व्यक्तित्व विकास पर जोर

कोकड़ी सरकारी स्कूल के सहयोगी शिक्षक हेमंत कुमार देवांगन ने जीवन विद्या अध्ययन से अपने जीवन में आए बदलावों को साझा करते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन से व्यक्ति के व्यक्तित्व एवं व्यवहार में सकारात्मक सुधार आता है।

राखी गेंदलाल कोकडिया ने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि चेतना विकास का अर्थ मानव की समझ का विकास है। उन्होंने कहा कि आदर्श परिवार व्यवस्था के लिए जीवन विद्या अध्ययन महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे परिवार के प्रति क्या, क्यों, कैसे और कितना की समझ विकसित होती है तथा संबंधियों के प्रति कर्तव्य और दायित्व की भावना मजबूत होती है। इससे परिवार में सुख, समृद्धि और आपसी सौहार्द का वातावरण बनता है।

रागेश्वर कोकडिया, सरस्वती शिशु मंदिर झलप ने बौद्धिक विकास को चेतना के विकास से जोड़ते हुए बच्चों के अभिव्यक्ति कौशल को बढ़ाने के लिए जीवन विद्या अध्ययन आधारित प्रेरणादायी अनमोल वचनों को उपयोगी बताया।

गांव को नशामुक्त और अपराधमुक्त बनाने का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में खूबचंद भारती, अशोक सोनवानी, नंदकुमार पटेल (पंच कोकड़ी) एवं मोहित भारती ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ललिता बरिहा, स्वास्थ्य कार्यकर्ता जानकी पटेल, विद्यालय प्रबंध समिति कोकड़ी के अध्यक्ष कामदेव यादव सहित ग्रामीणों एवं उपस्थित परिवारों ने अपने गांव को नशामुक्त, अपराधमुक्त, स्वच्छ, व्यवहारकुशल एवं संस्कारयुक्त गांव बनाने का संकल्प लिया।

‘कोकड़ी दर्शन जनपहल-06’ कार्यक्रम ने शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखते हुए परिवार, समाज, प्रकृति, कृषि, संस्कार, व्यवहार एवं मानवीय मूल्यों से जोड़ने का संदेश दिया। कार्यक्रम में शामिल परिवारों ने कोकड़ी सरकारी स्कूल के इन प्रयासों को ग्रामीण समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अटल इनोवेशन मिशन के जमीनी नवप्रवर्तकों से की मुलाकात, नवाचार को विकसित भारत की आधारशिला बताया

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (31 जुलाई 2026) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों (Grassroots Innovators) के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवर्तकों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया, उनके नवाचारों को देखा तथा उनसे संवाद भी किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी विशाल क्षमता और नवाचार की भावना के बल पर जमीनी नवाचारों का वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय अनुभव, वैज्ञानिक सोच, व्यक्तिगत रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय ही जमीनी नवाचारों को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि देशभर के नवप्रवर्तक स्थानीय समस्याओं के ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं, जिनका महत्व राष्ट्रीय स्तर तक है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में प्रस्तुत नवाचार कचरे से संपदा (Waste to Wealth), ऊर्जा संरक्षण, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों की सुविधा, पर्यावरण संरक्षण, कृषि तथा कला संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सिर्फ विचारों से सामाजिक परिवर्तन नहीं आता, बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने के लिए उचित मार्गदर्शन, संसाधन और मंच की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर जमीनी नवप्रवर्तकों को तकनीकी सहायता, मार्गदर्शन और उनके नवाचारों को टिकाऊ उद्यमों में बदलने के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि "विकसित भारत" का सपना तभी साकार होगा, जब प्रत्येक नागरिक नवाचार की सोच के साथ समस्याओं के समाधान खोजने का प्रयास करेगा। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि देश के विभिन्न संस्थान और नागरिक इस साझा उद्देश्य के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं, जिससे नवाचार की संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सीमित संसाधनों, अनिश्चितताओं और अनेक चुनौतियों के बावजूद कई नवप्रवर्तकों ने अपने प्रयास जारी रखे। उन्होंने उनके समर्पण और सकारात्मक परिवर्तन लाने की भावना की सराहना की तथा उन्हें अपने नवाचारों को लगातार बेहतर बनाने, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत और अन्य नवप्रवर्तकों के साथ सहयोग बढ़ाने तथा अपने नवाचारों को व्यापक स्तर तक पहुँचाने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे नवाचारों का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचेगा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विकसित भारत-विकसित संसार का आधार है जीवन विद्या अध्ययन : गेंदलाल कोकड़िया

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 महासमुंद- विकसित भारत और विकसित संसार के निर्माण के लिए जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा का व्यापक प्रसार आवश्यक है। यह बात शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय कोकड़ी के संचालक गेंदलाल कोकड़िया ने रायपुर स्थित निरंजन धर्मशाला में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन को देश के सभी राज्यों के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही शिक्षकों, अभिभावकों तथा शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के सदस्यों को चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं से जोड़ा जाना आवश्यक है, ताकि शिक्षा का मानवीयकरण हो सके।

बैठक में अभ्युदय संस्थान अछोटी (दुर्ग) में प्रस्तावित जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 की रूपरेखा तैयार की गई। इस अवसर पर भारत के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षक, अभिभावक, समाजसेवी एवं जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सात दिवसीय जीवन विद्या अध्ययन बिंदु शिविर का प्रबोधन सोम देव त्यागी भैयाजी ने किया। उन्होंने जीव चेतना और मानव चेतना के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए जीवन विद्या अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला। शिविर के पश्चात आयोजित संवाद में रंजीत अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल एवं अन्य वक्ताओं ने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति और जीवन कौशल को विकसित करता है।

अंतरराष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने भी जीवन विद्या के विभिन्न आयामों पर संवाद किया। शिविर में गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 200 जिज्ञासुओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम में मंजित चाचाजी, संस्थापक सदस्य अभ्युदय संस्थान अछोटी दुर्ग ने आगामी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों एवं लगभग 30 हजार प्रतिभागियों के लिए भोजन एवं आवास व्यवस्था संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा की। उन्होंने सभी सहयोगियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

बैठक में अंकित पोगुला (मानव तीर्थ, बेमेतरा) ने जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में बी.आर. अग्रवाल, रजनी, राकेश अग्रवाल, सुचित्रा श्रीवास्तव, मीना अग्रवाल, बसंत, पूनम साहू, गोविंद पटेल, महावीर अग्रवाल, चंद्रशेखर राठौर सहित देशभर से आए जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रभारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने कहा कि निरंतर सुख, मानवीय मूल्यों की स्थापना तथा अपराध एवं संघर्षमुक्त समाज के निर्माण के लिए जीवन विद्या अध्ययन एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हो सकता है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया।


पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा कर गांव के विकास में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री पंचायती राज दिवस के अवसर पर आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में हुए शामिल

पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही होगा गांवों का विकास: अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचेगा शासन की योजनाओं का लाभ - मुख्यमंत्री

रायपुर- डबल इंजन की हमारी सरकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में गांवों के समग्र विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 



मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही गांवों का विकास होगा और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं दीं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत प्रतिनिधि के रूप में की थी तथा पंच और सरपंच के दायित्व का निर्वहन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि के रूप में गांव के विकास को लेकर जो अनुभव प्राप्त होते हैं, वही आगे बढ़ने में सहायक होते हैं। आज हजारों जनप्रतिनिधि पंचायत से अपना सफर शुरू कर देश के उच्च सदनों तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है और जमीनी स्तर पर बेहतर कार्य करने से ही प्रभावी नीतियां बनती हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब ग्रामीणों को पक्के मकान मिल रहे हैं, साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से बैंकिंग, बिजली बिल भुगतान, पेंशन और बीमा जैसी सेवाएं अब ग्रामीणों के लिए सहज हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आई है। महिलाओं के लिए  महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से कई पूर्ण हो चुके हैं और इनसे महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि पंचायतों में संचालित सभी गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें, ताकि गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ सभी विकास कार्य पूर्ण हो सकें। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सफल क्रियान्वयन में पंचायतों की जिम्मेदारी बड़ी है और इसे समयबद्ध रूप से पूरा करने में पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

मुख्यमंत्री साय ने सुशासन तिहार के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से आमजनों की समस्याओं के समाधान के लिए शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सुशासन तिहार के आयोजन और इसके माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत लंबित बिजली बिलों के भुगतान के लिए विशेष अवसर प्रदान किया जा रहा है, जिसमें सरचार्ज पूरी तरह माफ किया गया है और अतिरिक्त रियायत का भी प्रावधान है।मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधियों से इसका लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों को दिलाने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगी और सभी प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की अपील की।राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि हमारी डबल इंजन की सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मंशा के अनुरूप अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को पंचायत दिवस की बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त करते हुए विकास कार्यों की लगातार स्वीकृति प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी के साथ-साथ पंचायत प्रतिनिधियों पर सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है, जिसका वे बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।

सम्मेलन को सांसदबृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने भी संबोधित किया।

मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का किया अवलोकन, मेगा स्वास्थ्य शिविर की विशेष पहल की सराहना

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन के दौरान जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट छांव के अंतर्गत आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर और विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से चर्चा की और आजीविका संवर्धन के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन रायपुर द्वारा नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान के लिए प्रोजेक्ट धड़कन, देहदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट दधीचि, किसानों को नवाचार से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट नैनो, प्रोजेक्ट रचना, प्रोजेक्ट स्मृति पुस्तकालय, प्रोजेक्ट पाई-पाई, ग्लोबल गांव, ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट सिग्नल, मेरा गांव मेरी पहचान, प्रोजेक्ट अजा, प्रोजेक्ट बिजनेस दीदी समेत विभिन्न प्रोजेक्ट के स्टालों का अवलोकन किया और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र एवं राशि का वितरण किया।

इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट आरोग्यम के कटआउट और प्रोजेक्ट हैंडी के तहत शासन की योजनाओं की संक्षिप्त पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित इन गतिविधियों से आमजनों को हो रहे व्यापक लाभ के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, विधायक इंद्र कुमार साहू, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन समेत त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

विकसित भारत की कल्पना हो रहा है साकार,मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से राह हुई आसान

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रायपुर- गाँव में कभी बस की पहुँच नहीं थी, आज वहाँ बस के आते ही बच्चों के चेहरे खिल उठते हैं। सड़क पर बस दिखते ही बच्चे हाथ हिलाकर खुशी जाहिर करते हैं और हॉर्न की आवाज़ सुनते ही लोग घरों से बाहर निकल आते हैं—एक नई उम्मीद के साथ। यह उम्मीद अब शहर मुख्यालय, नगर मुख्यालय और विकासखंड मुख्यालय तक आसान पहुँच की है।

यात्री बस में बैठकर लोग उन दिनों को याद करते हैं, जब उन्हें पैदल या किसी निजी वाहन के सहारे दूसरे स्थानों तक जाना पड़ता था। अब हालात बदल चुके हैं। स्कूल के बच्चे समय पर स्कूल पहुँच रहे हैं, वहीं अधिकारी-कर्मचारी भी समय पर अपनी ड्यूटी पर पहुँच पा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ़ सुविधा का नहीं, बल्कि उन ग्रामीण परिवारों के सपनों का है जो विकसित भारत की कल्पना को अपने जीवन में साकार होते देख रहे हैं।

यह परिवर्तन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से संभव हो पाया है। इस योजना के तहत आज बसें उन गाँवों तक पहुँच रही हैं, जहाँ पहले कभी बस नहीं पहुँची थी।

पहाड़ी अंचल की महिलाओं को मिली राहत

जशपुर जिला के बगीचा विकासखंड के सन्ना निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुनीता निकुंज बताती हैं कि पहले उन्हें पास के गाँव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुँचने के लिए किसी से लिफ्ट लेनी पड़ती थी, निजी वाहन या पैदल जाना पड़ता था। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यह बहुत कठिन था। अब ग्रामीण बस से उनकी यह समस्या दूर हो गई है। वे कहती हैं, “यह बस मेरे लिए बहुत बढ़िया साधन बन गई है।”

ग्रामीणों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

बस में सफर कर रहे ग्राम मरंगी निवासी दशरथ भगत हँसते हुए बताते हैं कि पहले इस सड़क पर बस नहीं चलती थी, इसलिए पैदल ही आना-जाना करना पड़ता था। बस का नाम लेते ही उसका चेहरा खिल गया l उन्होंने बताया कि “अब मुख्यमंत्री जी की पहल से बस शुरू हो गई है। हम आसानी से बगीचा जाते हैं और समय पर वापस भी लौट आते हैं।”

यात्री मंगलराम बताते हैं कि पहले वे छिछली और चंपा जैसे बाजारों तक पैदल जाया करते थे। “अब बस आने से बहुत सुविधा हो गई है। हम सब बहुत खुश हैं।”

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से न केवल यात्रा सुगम हुई है, बल्कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए शहर तक पहुँचने में भी बड़ी सुविधा मिली है। यह योजना ग्रामीण जीवन को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है और जशपुर जैसे पहाड़ी व दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की नई राह खोल रही है।

किसानों की समृद्धि और खुशहाली से ही विकसित भारत का सपना होगा साकार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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होली से पहले किसानों को मिलेगी 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की धान के अंतर की राशि

मुख्यमंत्री को धान से तौलकर प्रदेश के अन्नदाताओं ने जताया आभार 

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 28 फरवरी को बिलासपुर जिले में आयोजित होगा राज्य स्तरीय राशि अंतरण कार्यक्रम

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अन्नदाता देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ है और किसानों की समृद्धि और खुशहाली से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा। मुख्यमंत्री से आज उनके निवास कार्यालय में प्रदेश के किसानों ने सौजन्य मुलाकात की और कृषक उन्नति योजना के माध्यम से धान के अंतर की 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि होली से पूर्व किसानों के खातों में अंतरित करने की घोषणा पर आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर किसानों ने मुख्यमंत्री को धान से तौलकर प्रदेश के अन्नदाताओं की ओर से अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदैव किसानों की चिंता करते हैं और उनकी आय बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसानों की उन्नति ही राष्ट्र की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि अटल जी के समय किसानों को सशक्त बनाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू की गई, जिससे किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होने लगा। इससे पहले किसानों को महाजनों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता था, जिससे वे आर्थिक शोषण का शिकार होते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसानों को ब्याज मुक्त पूंजी की सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के माध्यम से किसानों के खेतों तक पानी पहुंच रहा है और प्रदेश में सिंचाई का रकबा लगातार बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीद रही है, जो देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार ने निर्णय लिया है कि धान के अंतर की लगभग 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि होली से पूर्व किसानों के खातों में अंतरित की जाएगी। 28 फरवरी को बिलासपुर जिले से इस राशि का अंतरण किया जाएगा और पूरे प्रदेश के विकासखंडों में इसे उत्सव की तरह मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष 25 लाख 24 हजार किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार आगे भी किसानों के हित में प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बीज विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर सहित प्रदेश भर से आए किसान उपस्थित थे।

दिल्ली विश्वविद्यालय में ड्रग फ्री कैंपस अभियान का शुभारंभ, नशा मुक्त युवा से बनेगा विकसित भारत: उपराष्ट्रपति

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय में ड्रग फ्री कैंपस अभियान का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को नशे की लत से बचाने और विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सतत एवं सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

मजबूत राष्ट्र के लिए मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान के केंद्र नहीं होते, बल्कि ऐसे संस्थान होते हैं जहाँ मूल्यों का निर्माण होता है, नेतृत्व को दिशा मिलती है और राष्ट्र का भविष्य गढ़ा जाता है। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय जैसा प्रतिष्ठित संस्थान नशे के विरुद्ध सख्त रुख अपनाता है, तो यह पूरे समाज को एक सशक्त संदेश देता है।

उपराष्ट्रपति ने नशा मुक्त परिसर अभियान के अंतर्गत एक समर्पित ई-प्रतिज्ञा मंच (https://pledge.du.ac.in/home) और मोबाइल एप्लिकेशन का भी शुभारंभ किया तथा देशभर के विश्वविद्यालयों के छात्रों से इसमें सक्रिय भागीदारी करने और नशा मुक्त परिसर की प्रतिज्ञा लेने का आह्वान किया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से आग्रह किया कि ड्रग फ्री कैंपस अभियान को सभी केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।

भारत को एक युवा राष्ट्र बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नशीले पदार्थों का दुरुपयोग केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती, सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा और देश की जनसांख्यिकीय क्षमता के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि नशे की लत शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक प्रदर्शन, पारिवारिक सौहार्द, उत्पादकता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करती है, साथ ही इसके संबंध नार्को-आतंकवाद से भी जुड़े हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार हो सकता है जब युवा स्वस्थ, नशामुक्त और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीएँ। नशामुक्त युवा कौशल अर्जन, उद्यमिता को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास व राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान देने में अधिक सक्षम होते हैं।

शिक्षा और संस्कृति की भूमिका पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की प्राचीन परंपराएँ आत्मअनुशासन, मानसिक संतुलन और मन व शरीर की शुद्धता को अत्यधिक महत्व देती हैं। उन्होंने कहा कि यह भाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ध्यान और योग को बढ़ावा देने के प्रयासों में भी परिलक्षित होता है। उन्होंने MY भारत पोर्टल और प्रधानमंत्री अनुसंधान योजना (PM Anusandhan Yojana) जैसी पहलों का भी उल्लेख किया, जो युवाओं की ऊर्जा को अनुसंधान, नवाचार, स्वयंसेवा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रवाहित करती हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल और छात्र कल्याण पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ड्रग फ्री कैंपस अभियान जैसे प्रयास नीति की भावना के अनुरूप सुरक्षित, समावेशी और पोषक शैक्षणिक वातावरण बनाने में सहायक हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जागरूकता कार्यक्रमों, परामर्श तंत्र, छात्र-नेतृत्व वाली पहलों और विभिन्न हितधारकों के सहयोग को सराहते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जब छात्र परिवर्तन के दूत बनते हैं, तो उसका प्रभाव परिसरों से आगे परिवारों और समाज तक फैलता है। उन्होंने छात्रों से सतर्क रहने, संकट में फंसे साथियों का सहयोग करने, नशे के विरुद्ध आवाज उठाने और स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करने का आग्रह किया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के एक आदर्श नशा मुक्त परिसर के रूप में उभरने पर विश्वास व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नशा मुक्त भारत एक स्वस्थ, सशक्त और विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।


अमित शाह ने अहमदाबाद में IMA NATCON 2025 को किया संबोधित, कहा— विकसित भारत के निर्माण में डॉक्टरों की भूमिका निर्णायक

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज गुजरात के अहमदाबाद में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन IMA NATCON 2025 को संबोधित किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


अमित शाह ने कहा कि जब कोई संस्था अपने 100 वर्ष पूरे करती है, तो वह अपने पीछे एक लंबा और गौरवशाली इतिहास छोड़ जाती है। उन्होंने कहा कि IMA के शताब्दी वर्ष में देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में संगठन द्वारा किए गए योगदान को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि सेवा भावना, कर्तव्यबोध और उपलब्धियों की प्रेरणा जनमानस में और मजबूत हो। साथ ही यह समय स्वास्थ्य क्षेत्र में आए परिवर्तनों—RMP से लेकर विशेषज्ञता तक—के अनुरूप स्वयं को ढालने का भी है।

गृह मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र मूलतः सेवा का क्षेत्र है। जब कोई गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति डॉक्टर के पास जाता है, तो वह डॉक्टर में भगवान का स्वरूप देखता है। उन्होंने कहा कि 100 वर्ष पहले तय किए गए नैतिक मानदंड आज के समय में प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। अब समय आ गया है कि स्वास्थ्य क्षेत्र की नैतिकता (Ethics) को पुनः परिभाषित किया जाए। उन्होंने IMA से आग्रह किया कि वह एक समिति बनाकर आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप नैतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करे और इन्हें चिकित्सा शिक्षा का हिस्सा बनाने के लिए भारत सरकार को सुझाव दे।

अमित शाह ने कहा कि केवल मेडिकल डिग्री प्राप्त कर लेना ही एक अच्छे डॉक्टर की पहचान नहीं है, बल्कि नैतिकता, सेवा भाव और संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है। नैतिकता को कानून से थोपा नहीं जा सकता, यह एक नैतिक विषय है, जिसे आत्मसात करना होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि देश को विश्व में हर क्षेत्र में प्रथम स्थान पर लाने के लिए मानसिक, शारीरिक और ऊर्जावान रूप से स्वस्थ जनसंख्या आवश्यक है, जिसमें डॉक्टरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 2014 से 2025 के बीच सरकार ने समग्र दृष्टिकोण से मजबूत स्वास्थ्य इकोसिस्टम विकसित किया है।

उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन, फिट इंडिया, खेलो इंडिया और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे अभियानों से स्वास्थ्य के प्रति जनजागरूकता बढ़ी है और योग अपनाने वालों की संख्या में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आयुष्मान भारत योजना के तहत देशभर में गरीबों को ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया गया है, जबकि कई राज्यों में यह सीमा ₹15 लाख तक पहुंच चुकी है।

गृह मंत्री ने कहा कि मिशन इंद्रधनुष, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य केंद्रों, जेनेरिक दवा दुकानों, AIIMS के विस्तार और टेलीमेडिसिन जैसी पहलों से स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि 2013-14 में जहां स्वास्थ्य बजट ₹37 हजार करोड़ था, वहीं आज यह बढ़कर ₹1.28 लाख करोड़ हो गया है।

उन्होंने कहा कि मलेरिया में 97 प्रतिशत की कमी, कालाजार में 90 प्रतिशत से अधिक सुधार, डेंगू मृत्यु दर में भारी गिरावट, मातृ मृत्यु दर में 25 प्रतिशत कमी और शिशु मृत्यु दर में 50 प्रतिशत कमी इन योजनाओं की सफलता का प्रमाण है।

कोविड-19 महामारी के दौरान डॉक्टरों की भूमिका की सराहना करते हुए अमित शाह ने कहा कि उस कठिन समय में देश के डॉक्टरों ने अपने जीवन की परवाह किए बिना सेवा की और पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल कायम की। उन्होंने कहा कि IMA का योगदान टीकाकरण, रक्तदान शिविरों और हेल्पलाइनों के माध्यम से अभूतपूर्व रहा।

गृह मंत्री ने IMA से आग्रह किया कि वह बीमारी से वेलनेस की ओर फोकस करे, शोध में लगे डॉक्टरों को प्रोत्साहित करने की योजना बनाए और टेलीमेडिसिन के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करे।

उन्होंने कहा कि 27 राज्यों से आए 5,000 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी इस सम्मेलन की व्यापकता को दर्शाती है और नए अध्यक्ष के नेतृत्व में IMA देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगी।

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