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बिजली दर वृद्धि और स्मार्ट मीटर के विरोध में कांग्रेस का दो माह का राज्यव्यापी आंदोलन

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रायपुर- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने बिजली दरों में वृद्धि, स्मार्ट मीटर की स्थापना और बिजली सब्सिडी से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्यभर में दो महीने तक चलने वाले चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है।

कांग्रेस का आरोप है कि बिजली दरों में बढ़ोतरी और स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पार्टी ने मांग की है कि राज्य सरकार बिजली दर वृद्धि पर पुनर्विचार करे, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करे तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए।

प्रदेश कांग्रेस के अनुसार, आंदोलन के दौरान जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर जनसभाएं, प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपने और जनजागरण अभियान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि वह बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को व्यापक रूप से उठाएगी।

वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि बिजली क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों का उद्देश्य वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और दक्ष बनाना है। सरकार का दावा है कि स्मार्ट मीटर से बिजली की वास्तविक खपत का सटीक आकलन होगा और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस इसे राज्यव्यापी जनआंदोलन के रूप में चलाने की तैयारी कर रही है।

डिफॉल्ट सर्विस चार्ज वसूलने पर सीसीपीए का बड़ा एक्शन, देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर की कार्रवाई

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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन तथा अनुचित व्यापारिक गतिविधियों के तहत ग्राहकों के बिल में डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज जोड़ने के मामले में देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए कार्रवाई शुरू की है।

यह कार्रवाई राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline-NCH) पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई। शिकायतों के साथ प्रस्तुत बिलों से यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित रेस्तरां उपभोक्ताओं की स्पष्ट सहमति के बिना उनके बिल में स्वतः सर्विस चार्ज जोड़ रहे थे।

जांच के दौरान सीसीपीए ने पाया कि यह प्रथा 4 जुलाई 2022 को जारी होटलों एवं रेस्तरां में सर्विस चार्ज वसूली संबंधी अनुचित व्यापारिक गतिविधियों की रोकथाम और उपभोक्ता हित संरक्षण दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। साथ ही यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(47) के तहत अनुचित व्यापारिक गतिविधि (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आती है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखी गाइडलाइन की वैधता

28 मार्च 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ मामले में सीसीपीए की सर्विस चार्ज संबंधी गाइडलाइन को वैध ठहराते हुए कहा कि अनिवार्य रूप से सर्विस चार्ज वसूलना कानून के विरुद्ध है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी होटल एवं रेस्तरां इन दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं तथा सीसीपीए कानून के अनुसार इनके अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

सीसीपीए की गाइडलाइन के प्रमुख प्रावधान

  • कोई भी होटल या रेस्तरां भोजन के बिल में स्वतः या डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता।

  • किसी अन्य नाम से भी सर्विस चार्ज की वसूली नहीं की जा सकती।

  • उपभोक्ता को सर्विस चार्ज देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह पूरी तरह स्वैच्छिक एवं वैकल्पिक है।

  • सर्विस चार्ज नहीं देने पर किसी भी उपभोक्ता को सेवा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • भोजन के बिल में सर्विस चार्ज जोड़कर उस पर जीएसटी नहीं लगाया जा सकता।

सीसीपीए की कार्रवाई

एक मामले में चायोस (Sunshine Teahouse Pvt. Ltd.) पर उपभोक्ता के बिल में डिफॉल्ट सर्विस चार्ज जोड़ने के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही कंपनी को उपभोक्ता से वसूला गया सर्विस चार्ज वापस करने का निर्देश दिया गया है।

प्राधिकरण ने कंपनी को अपने सभी आउटलेट्स के सॉफ्टवेयर आधारित बिलिंग सिस्टम में संशोधन करने का भी निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में किसी भी उपभोक्ता के बिल में स्वतः सर्विस चार्ज या इसी प्रकार का कोई शुल्क न जोड़ा जाए।

सीसीपीए ने निम्नलिखित रेस्तरां के खिलाफ भी अंतिम आदेश जारी किए हैं—

  • कैफे ब्लू बॉटल, पटना

  • चाइना गेट रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड

  • फिएस्टा बारबेक्यू नेशन

  • फू अहमदाबाद रेस्टोरेंट

  • एल'ओपेरा फ्रेंच बेकरी प्राइवेट लिमिटेड

  • ज़ोरो – द लग्जरी नाइट क्लब

  • चायोस (Sunshine Teahouse Pvt. Ltd.)

अन्य रेस्तरां के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच एवं कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

उपभोक्ता कहां करें शिकायत?

यदि किसी रेस्तरां द्वारा आपकी सहमति के बिना बिल में सर्विस चार्ज जोड़ा जाता है, तो इसकी शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर टोल-फ्री नंबर 1915 या एनसीएच प्लेटफॉर्म के माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है।

सीसीपीए ने कहा है कि वह सर्विस चार्ज से संबंधित शिकायतों पर लगातार नजर रखे हुए है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 तथा संबंधित दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्राधिकरण का उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना तथा आतिथ्य क्षेत्र में पारदर्शी, निष्पक्ष और उपभोक्ता हितैषी व्यावसायिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

ग्राम पंचायतों के लिए उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू

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नई दिल्ली:- उपभोक्ता मामलों के विभाग (DoCA) ने वर्ष 2024 और 2025 में आयोजित वर्चुअल क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की सफलता के बाद, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ग्राम पंचायतों के लिए अपने राष्ट्रीय वर्चुअल क्षमता निर्माण कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू किया है। यह श्रृंखला 13 फरवरी 2026 को पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई, जिसका उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाना और संरक्षण तंत्र को मजबूत करना है।

इस पहल के तहत पहली बैठक बिहार, झारखंड और ओडिशा राज्यों के साथ आयोजित की गई, जिसमें 1,011 ऑनलाइन लिंक के माध्यम से हजारों पंचायत स्तर के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सत्र के दौरान प्रतिभागियों को उपभोक्ता अधिकारों, उभरते उपभोक्ता मुद्दों और शिकायत निवारण की संस्थागत व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई। पंचायत प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की समस्याओं पर सीधे सवाल पूछने और स्पष्टीकरण प्राप्त करने का अवसर भी मिला।

पंचायतों की अहम भूमिका पर जोर

सत्र में पंचायतों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया, ताकि वे उपभोक्ता अधिकारों को बढ़ावा दें, अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक लगाएं और नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) और ई-जागृति पोर्टल जैसे शिकायत मंचों तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित कर सकें।

इससे पहले विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत पंचायत प्रतिनिधियों के लिए उपभोक्ता अधिकारों, कर्तव्यों और शिकायत निवारण प्रणाली पर व्यापक जागरूकता सत्र आयोजित किए थे। यह अभियान 20 दिसंबर 2024 को शुरू होकर 22 अगस्त 2025 को समाप्त हुआ था और दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पंचायतों को कवर किया गया था।

क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजन

इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता क्षेत्रीय भाषाओं में सत्रों का आयोजन रहा, जिससे प्रभावी संवाद, व्यापक भागीदारी और बेहतर समझ सुनिश्चित हुई। संबंधित राज्यों की भाषाओं में दक्ष अधिकारियों ने सत्रों की अध्यक्षता की, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद संभव हुआ।

ग्रामीण उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने की पहल

इस पहल से पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता मजबूत हुई है, जिससे वे अपने समुदायों में उपभोक्ता संरक्षण के संवाहक बन सकें। स्थानीय संस्थाओं को उपभोक्ता अधिकारों और शिकायत निवारण प्रणाली की व्यावहारिक जानकारी देकर ग्रामीण उपभोक्ताओं को जागरूक और सशक्त बनाने में मदद मिली है।

वर्चुअल कार्यक्रम के फायदे

वर्चुअल प्रारूप ने कम लागत, व्यापक पहुंच और तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर संपर्क स्थापित करने के लाभ दिखाए हैं। सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद विभाग ने पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को जारी रखने और विस्तार करने का निर्णय लिया है।

निष्कर्ष

इस सतत प्रयास के माध्यम से उपभोक्ता मामलों का विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उपभोक्ता जागरूकता शासन के हर स्तर तक पहुंचे और विशेष रूप से ग्रामीण नागरिकों को जागरूक निर्णय लेने और समय पर शिकायत निवारण तक पहुंचने में सशक्त बनाया जा सके।


राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन ने 8 महीनों में ₹45 करोड़ के रिफंड दिलाकर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी

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उपभोक्ता मामलों के विभाग, भारत सरकार की प्रमुख पहल राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) देशभर में उपभोक्ता शिकायतों के त्वरित, प्रभावी और पूर्व-विवाद समाधान (Pre-Litigation Redressal) में अहम भूमिका निभा रही है।

25 अप्रैल से 26 दिसंबर 2025 के बीच मात्र आठ महीनों में NCH ने 31 क्षेत्रों से जुड़ी 67,265 उपभोक्ता शिकायतों का समाधान करते हुए ₹45 करोड़ से अधिक की रिफंड राशि दिलाने में सफलता प्राप्त की है। यह प्रक्रिया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत पूर्व-विवाद स्तर पर संचालित होती है, जिससे उपभोक्ता आयोगों पर भार कम होता है और उपभोक्ताओं को शीघ्र न्याय मिलता है।

क्षेत्रवार प्रदर्शन

  • ई-कॉमर्स सेक्टर में सर्वाधिक 39,965 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें ₹32 करोड़ का रिफंड दिलाया गया।

  • यात्रा एवं पर्यटन क्षेत्र में 4,050 शिकायतों के माध्यम से ₹3.5 करोड़ का रिफंड हुआ।

देश के महानगरों से लेकर दूर-दराज़ क्षेत्रों तक से शिकायतें प्राप्त होना, NCH की राष्ट्रीय पहुँच और प्रभावशीलता को दर्शाता है।

शीर्ष 5 क्षेत्र (85% से अधिक रिफंड योगदान):

  1. ई-कॉमर्स – ₹32.06 करोड़

  2. यात्रा एवं पर्यटन – ₹3.52 करोड़

  3. एजेंसी सेवाएँ – ₹1.35 करोड़

  4. इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद – ₹1.17 करोड़

  5. एयरलाइंस – ₹0.95 करोड़

कन्वर्जेंस पार्टनर्स की भूमिका

कन्वर्जेंस पार्टनर्स की बढ़ती संख्या ने शिकायत निवारण की क्षमता को सशक्त किया है। इससे उपभोक्ता हितों की रक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने में उल्लेखनीय मदद मिली है।

उपभोक्ता अनुभव – कुछ उदाहरण

  • जोधपुर (राजस्थान) के एक उपभोक्ता को दोषपूर्ण कुर्सियों का रिफंड NCH के हस्तक्षेप से मिला।

  • बेंगलुरु (कर्नाटक) में इंटरनेट कनेक्शन न मिलने पर 4 महीने से अटके रिफंड को NCH ने दिलाया।

  • चेन्नई (तमिलनाडु) में फ्लाइट टिकट रद्द होने के बावजूद लंबित रिफंड NCH की त्वरित कार्रवाई से प्राप्त हुआ।

ये उदाहरण NCH की पूर्व-विवाद समाधान प्रणाली की प्रभावशीलता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से कैसे जुड़ें

उपभोक्ता 17 भाषाओं में अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं:

उपभोक्ता मामलों का विभाग उपभोक्ताओं से अपील करता है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा हेतु राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन का अधिकतम उपयोग करें।


खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने राज्य शासन की निर्णायक पहल:अनियमितता करने वाली उचित मूल्य दुकानों के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

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राशन वितरण में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं – दो दुकानों का संचालन समाप्त, एक पर अर्थदंड

ई-पॉस आधारित वितरण में अनियमितता पाए जाने पर की गई सख्त कार्यवाही

रायपुर- सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत वर्तमान में ई-पॉस मशीन के माध्यम से आधार आधारित प्रमाणीकरण कर राशनकार्डधारियों को खाद्यान्न का वितरण किया जा रहा है। हितग्राही अपने राशन प्राप्त करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन कर सामग्री का उठाव करते हैं, जिससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होती है। इस व्यवस्था के माध्यम से वास्तविक पात्रों तक ही खाद्यान्न की आपूर्ति पहुँचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय द्वारा उचित मूल्य दुकानों की नियमित मॉनिटरिंग के लिए अधिकारियों की टीम गठित की गई है। इन टीमों द्वारा विभिन्न उचित मूल्य दुकानों का निरीक्षण एवं जांच कार्य किया गया। निरीक्षण के दौरान वितरण प्रक्रिया, रिकॉर्ड संधारण तथा आधार प्रमाणीकरण की स्थिति का विशेष रूप से परीक्षण किया गया।

जांच के दौरान कुछ उचित मूल्य दुकानों में अनियमितताएँ पाई गईं। अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दुकान संचालकों के विरुद्ध नियंत्रक प्रावधानों के अनुसार सख्त कार्रवाई की गई है। शासन की मंशा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त न करने की है।

खाद्य नियंत्रक, जिला रायपुर ने आईडी क्रमांक 441001314 “मां भगवती खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सहकारी समिति, बैरन बाजार” तथा आईडी क्रमांक 441001256 “श्री जय शीतला काली खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सेवा सहकारी समिति, बढ़ईपारा” से दुकान संचालन का अधिकार समाप्त कर उन्हें अन्य उचित मूल्य दुकानों में संलग्न किया गया है। इसके अतिरिक्त आईडी क्रमांक 441001148 “दूधाधारी महिला प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भंडार, महामाया मंदिर वार्ड क्रमांक-62” को अनियमितता पाए जाने पर ₹7000 का अर्थदंड अधिरोपित कर कड़ी चेतावनी दी गई है।

खाद्य सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राज्य की किसी भी उचित मूल्य दुकान में खाद्यान्न वितरण में अनियमितता पाए जाने पर छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2016 के प्रावधानों के अंतर्गत कड़ी एवं आवश्यक कार्रवाई की जाती है। राज्य सरकार पारदर्शी, जवाबदेह एवं लाभार्थी-केंद्रित खाद्यान्न वितरण प्रणाली के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025: डिजिटल न्याय के माध्यम से कुशल और त्वरित निपटान

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परिचय

भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस प्रतिवर्ष 24 दिसंबर को मनाया जाता है, ताकि उपभोक्ता अधिकारों और उपभोक्ता संरक्षण के व्यापक ढांचे के महत्व को उजागर किया जा सके। इसी दिन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त हुई थी, जिसने उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा, जानकारी, सुनवाई, शिकायत निवारण और जागरूकता सहित कई अधिकार सुनिश्चित किए। 2025 का विषय है: “डिजिटल न्याय के माध्यम से कुशल और त्वरित निपटान”, जो उपभोक्ता शिकायत निवारण में प्रौद्योगिकी-समर्थित, सुलभ और त्वरित समाधान पर केंद्रित है।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर कई लॉन्च, सम्मान और घोषणाएँ की जाएँगी, जो उपभोक्ता संरक्षण, जागरूकता और संस्थागत क्षमता को मजबूत करेंगी। कार्यक्रम डिजिटल शिकायत निवारण, गुणवत्ता आश्वासन, कानूनी मापदंड और उपभोक्ता जागरूकता में प्रगति को उजागर करेगा।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019

20 जुलाई 2020 को लागू यह अधिनियम 1986 के अधिनियम की जगह लेता है और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए आधुनिक ढांचा प्रस्तुत करता है। यह अधिनियम उपभोक्ताओं को जानकारीपूर्ण निर्णय लेने, निष्पक्ष लेन-देन सुनिश्चित करने और त्वरित शिकायत निवारण प्रदान करता है।

शिकायत निवारण के लिए तीन-स्तरीय ढांचा है:

  1. जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम – 50 लाख रुपये तक के दावे।

  2. राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग – 50 लाख से 2 करोड़ रुपये तक।

  3. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) – 2 करोड़ रुपये से अधिक के मामले।

जुलाई 2025 में 10 राज्यों और NCDRC ने 100% से अधिक निपटान दर दर्ज की, जो तेजी से शिकायत निवारण और दक्षता में सुधार को दर्शाता है।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA)

CCPA उपभोक्ताओं के सामूहिक हितों की रक्षा के लिए कार्य करता है। इसके कार्य:

  • उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और प्रवर्तन

  • अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकना

  • विज्ञापनों की निगरानी और गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई

  • असुरक्षित वस्तुओं और सेवाओं को वापस मंगवाना

उपभोक्ता कल्याण निधि

यह निधि उपभोक्ता हितों की सुरक्षा और आंदोलन को मजबूत करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता देती है। 2024-25 में 38.68 करोड़ रुपये जारी किए गए।

e-Jagriti – डिजिटल उपभोक्ता न्याय

1 जनवरी 2025 को लॉन्च, यह प्लेटफॉर्म शिकायत दायर करने, भुगतान करने, वर्चुअल सुनवाई में भाग लेने और मामले की प्रगति देखने की सुविधा देता है।

  • 1.35 लाख से अधिक केस दायर

  • 1.31 लाख से अधिक निपटान

  • NRI सहित 2.81 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ता

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 2.0 (NCH 2.0)

  • AI-सक्षम, बहुभाषी सहायता

  • वार्षिक 12 लाख से अधिक शिकायतें निवारण

  • WhatsApp चैनल से 20% शिकायतें

Jago Grahak Jago पोर्टल और ऐप

  • धोखाधड़ी वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की निगरानी

  • संदिग्ध URL रिपोर्टिंग

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)

  • 22,300 से अधिक भारतीय मानक लागू

  • BIS Care ऐप से सोने-चाँदी के आभूषण की हॉलमार्किंग जांच

नेशनल टेस्ट हाउस (NTH)

  • परीक्षण, प्रमाणन और गुणवत्ता नियंत्रण

  • डिजिटल समाधान और मोबाइल ऐप के माध्यम से संचालन में सुधार

  • 2024-25 में 45,926 नमूनों का परीक्षण, राजस्व 44.45 करोड़ रुपये

कानूनी मापदंड (Legal Metrology) 2025

  • मेडिकल उपकरण और पैक्ड सामान के लेबलिंग नियमों में संशोधन

  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ‘Country of Origin’ फिल्टर अनिवार्य

  • पान मसाला पैकेज पर खुदरा मूल्य दिखाना अनिवार्य

निष्कर्ष

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 भारत की उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और बाजार में विश्वास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे e-Jagriti और NCH 2.0 ने शिकायत निवारण की पहुँच, पारदर्शिता और दक्षता में सुधार किया है। BIS, NTH और कानूनी मापदंड सुधारों ने गुणवत्ता और मानकीकरण को मजबूत किया। ये सभी पहल उपभोक्ता-केंद्रित पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती हैं।

e-Jagriti प्लेटफ़ॉर्म से बदला उपभोक्ता न्याय का स्वरूप, 2 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े

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उपभोक्ता अधिकारों को बड़ा बढ़ावा देते हुए उपभोक्ता मामलों के विभाग के e-Jagriti प्लेटफ़ॉर्म ने एक अत्याधुनिक डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली के रूप में बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। 1 जनवरी 2025 को लॉन्च होने के बाद से इस प्लेटफ़ॉर्म पर दो लाख से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं। यह प्लेटफ़ॉर्म कागज़ी कार्यवाही कम करके, यात्राओं को समाप्त कर, और भौतिक दस्तावेज़ों की आवश्यकता घटाकर प्रक्रियाओं को सरल बनाता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। यह NRI उपभोक्ताओं के लिए भी एक बड़ी राहत है, क्योंकि वे भौगोलिक दूरी की बाधाओं से मुक्त होकर विदेश से ही अपने उपभोक्ता अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं।

13 नवंबर 2025 तक, इस एकीकृत पोर्टल के माध्यम से 1,30,550 केस दाखिल हुए और 1,27,058 मामलों का निस्तारण किया गया—जो उपभोक्ता संरक्षण प्रणाली की मजबूती और कुशलता को दर्शाता है।

सरल OTP आधारित पंजीकरण के साथ e-Jagriti NRIs को शिकायत दर्ज करने, डिजिटल/ऑफ़लाइन शुल्क भुगतान करने, वर्चुअल सुनवाई में भाग लेने, ऑनलाइन दस्तावेज़ आदान-प्रदान करने और मामलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा देता है—वह भी बिना भारत आए।

2.75 लाख से अधिक उपयोगकर्ता, जिनमें 1388 NRI—वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता न्याय तक आसान पहुँच

प्लेटफ़ॉर्म की AI-सक्षम, बहुभाषी और सुलभ इंटरफ़ेस में Voice-to-Text, चैटबॉट और इंटीग्रेटेड डैशबोर्ड शामिल हैं, जो वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग उपभोक्ताओं के लिए उपयोग को आसान बनाते हैं।

इस वर्ष 466 NRI शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें प्रमुख देश शामिल हैं:

  • अमेरिका – 146

  • ब्रिटेन – 52

  • यूएई – 47

  • कनाडा – 39

  • ऑस्ट्रेलिया – 26

  • जर्मनी – 18

भारत में एकीकृत प्रणाली: पारदर्शिता और तेजी में बड़ा सुधार

e-Jagriti ने OCMS, e-Daakhil, NCDRC CMS और CONFONET जैसी पुरानी प्रणालियों को एक प्लेटफ़ॉर्म में जोड़ दिया है।
13 नवंबर 2025 तक भारत में 1,30,550 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। शीर्ष राज्य:

  • गुजरात – 14,758

  • उत्तर प्रदेश – 14,050

  • महाराष्ट्र – 12,484

प्लेटफ़ॉर्म पर भूमिका-आधारित डैशबोर्ड के माध्यम से

  • वकील दस्तावेज़ अपलोड और केस ट्रैक कर सकते हैं,

  • जज डिजिटल फाइलें, एनालिटिक्स और वर्चुअल कोर्टरूम का उपयोग कर कुशल सुनवाई कर सकते हैं।

मुख्य लाभ

1. वैश्विक पहुंच: दुनिया में कहीं से भी केस दाखिल और प्रबंधन।
2. तेज़ निस्तारण: एसएमएस/ईमेल रियल-टाइम अलर्ट, वर्चुअल सुनवाई। 10 राज्यों और NCDRC में 100% से अधिक निस्तारण दर।
3. समावेशिता: बहुभाषी इंटरफ़ेस, दिव्यांग-सुलभ फीचर।
4. सुरक्षित भुगतान: Bharat Kosh और PayGov से जुड़ा डिजिटल भुगतान।

2 लाख SMS और 12 लाख ईमेल अलर्ट—समय पर अपडेट की गारंटी

पंजीकरण OTP, केस फाइलिंग, निस्तारण, नोटिस जारी होने से जुड़े सभी महत्वपूर्ण अलर्ट तुरंत भेजे जाते हैं। इससे NRI उपयोगकर्ता भी समय-सीमा नहीं मिस करते।

2025 में केस निस्तारण में उल्लेखनीय सुधार

  • जुलाई–अगस्त: 27,545 निस्तारित, 27,080 दाखिल

  • सितंबर–अक्टूबर: 24,504 निस्तारित, 21,592 दाखिल

ये आँकड़े 2024 से बेहतर प्रदर्शन दर्शाते हैं।

सफलता की कहानियाँ

1. ऑनलाइन कोर्स ठगी—25 दिन में ₹3.05 लाख का निर्णय (असम)

  • केस: DC/296/CC/3/2025

  • शिकायत: घटिया ऑनलाइन क्लास रोकने पर ₹54,987 की अनधिकृत कटौती

  • निर्णय: पूर्ण रिफंड + ₹2.5 लाख क्षतिपूर्ति

  • प्रभाव: नॉर्थ-ईस्ट में डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के खिलाफ मिसाल।

2. 8 साल पुराना खराब LG फ्रिज—त्रिपुरा में ₹1.67 लाख+ मुआवजा

  • केस: DC/272/CC/33/2025

  • समस्या: 2017 से लगातार खराब फ्रिज, बार-बार मरम्मत

  • निर्णय: ₹85,000 रिफंड + ब्याज, ₹12,000 रिपेयर, ₹50,000 मानसिक पीड़ा, ₹20,000 वाद-व्यय

  • प्रभाव: e-Jagriti से पुरानी खरीद पर भी न्याय सुनिश्चित।

निष्कर्ष

उपभोक्ता मामलों का विभाग सभी नागरिकों और NRIs से e-Jagriti का उपयोग कर सशक्त उपभोक्ता बनने का आग्रह करता है। यह प्लेटफ़ॉर्म डिजिटल इंडिया की दिशा में मजबूत कदम है, जो तेज़, पारदर्शी और सुलभ उपभोक्ता न्याय सुनिश्चित करता है।


CCPA की सख्त कार्रवाई — Dikshant IAS और Abhimanu IAS पर ₹8 लाख का जुर्माना, भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ बड़ा कदम

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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने Dikshant IAS और Abhimanu IAS को भ्रामक विज्ञापन, अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के लिए दोषी पाया है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत दोनों संस्थानों पर ₹8,00,000-₹8,00,000 का जुर्माना लगाया गया है।


यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया कि किसी भी वस्तु या सेवा के संबंध में गलत या भ्रामक विज्ञापन जारी न किए जाएँ, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उल्लंघन करते हों।

Dikshant IAS का मामला

CCPA को मिनी शुक्ला (AIR 96, UPSC CSE 2021) की शिकायत प्राप्त हुई थी, जिन्होंने बताया कि उनके नाम और फोटो का उपयोग संस्था ने उनकी सहमति के बिना अपने विज्ञापनों में किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे Dikshant IAS से कभी जुड़ी नहीं थीं और केवल एक मॉक इंटरव्यू में शामिल हुई थीं, जो बाद में उन्हें पता चला कि Chahal Academy के साथ संयुक्त रूप से आयोजित हुआ था।

जाँच में पाया गया कि Dikshant IAS ने “200+ Results in UPSC CSE 2021” का दावा किया था, परंतु संस्था इसे प्रमाणित करने में असमर्थ रही। केवल 116 नामांकन फॉर्म प्रस्तुत किए जा सके। साथ ही, चहल एकेडमी के साथ किसी औपचारिक समझौते या विद्यार्थियों की जानकारी साझा करने के प्रमाण नहीं मिले।
प्राधिकरण ने पाया कि संस्था ने संभावित छात्रों को भ्रमित करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ मानो सभी सफल उम्मीदवार उनकी पूर्ण तैयारी का हिस्सा थे।

Abhimanu IAS का मामला

नताशा गोयल (AIR 175, UPSC CSE 2022) ने शिकायत की कि उनके नाम और फोटो का उपयोग Abhimanu IAS ने बिना अनुमति के किया। संस्थान ने झूठा दावा किया कि वे उसकी छात्रा थीं, जबकि उन्होंने केवल एक प्रश्न बैंक साझा किया था और मॉक इंटरव्यू कभी हुआ ही नहीं।

CCPA की जांच में पाया गया कि संस्था ने “2200+ Selections since Inception”, “10+ Selections in IAS Top 10” और “1st Rank in HCS/PCS/HAS” जैसे दावे किए, परंतु इन दावों को साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
कई चयन 2001–2012 के बीच हुए थे, परंतु विज्ञापनों में इस अवधि का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे यह झूठा प्रभाव उत्पन्न हुआ कि संस्था हाल ही में भी शीर्ष परिणाम दे रही है।

CCPA का रुख

CCPA ने पाया कि इन दोनों संस्थानों ने धारा 2(28) और धारा 2(47) का उल्लंघन किया है — यानी भ्रामक विज्ञापन जारी करना और उपभोक्ताओं से महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना।
शिक्षा क्षेत्र में इस प्रकार की गलत जानकारी छात्रों को भ्रमित करती है, जो अपनी मेहनत, समय और धन निवेश करते हैं।

अब तक CCPA ने 57 कोचिंग संस्थानों को ऐसे भ्रामक विज्ञापनों के लिए नोटिस जारी किए हैं और 27 संस्थानों पर ₹98.6 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया है।
CCPA ने सभी सफल उम्मीदवारों से आग्रह किया है कि यदि किसी कोचिंग संस्थान ने उनके नाम या फोटो का गलत उपयोग किया हो तो वे तत्काल शिकायत दर्ज कराएं।


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