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भाटापारा में गौरव का दिन-विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया छत्तीसगढ़ महतारी और शहीद खोण्डे की प्रतिमा का अनावरण

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रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के अपने एक दिवसीय प्रवास पर भाटापारा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने शहर को एक बड़ी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सौगात देते हुए छत्तीसगढ़ महतारी और देश के वीर सपूत शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया। शहीद को नमन करते हुए डॉ. रमन सिंह ने कहा कि शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों और युवाओं के लिए राष्ट्रसेवा की प्रेरणा बनेगी। देश उनके सर्वाेच्च बलिदान को कभी नहीं भूल सकता।

इस गरिमामय समारोह में राज्य के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस संवेदनशील अवसर पर विधानसभाध्यक्ष डॉ. सिंह ने शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट के परिजनों (पुत्री प्रिया खोण्डे और भाई प्रभाकर खोण्डे) से बेहद आत्मीयता के साथ मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना।

छत्तीसगढ़ महतारी चौक पर नमन

अपने प्रवास के दौरान डॉ. रमन सिंह सबसे पहले छत्तीसगढ़ महतारी चौक पहुंचे, जहां उन्होंने नवनिर्मित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का अनावरण किया। विधानसभा अध्यक्ष ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एवं पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की।

1971 के युद्ध के नायक शहीद खोण्डे को दी श्रद्धांजलि

इसके पश्चात विधानसभा अध्यक्ष भाटापारा स्थित शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे परिसर पहुंचे। वहां उन्होंने वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर फ्लाइट लेफ्टिनेंट शहीद श्रीकृष्ण गजानन खोण्डे की प्रतिमा का अनावरण किया।

समारोह में कई दिग्गज रहे मौजूद

इस ऐतिहासिक गरिमामय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष केदारनाथ गुप्ता, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा और डॉ. सनम जांगड़े उपस्थित थे। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों में जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा, जनप्रतिनिधिगणों के साथ-साथ बलौदाबाजार कलेक्टर कुलदीप शर्मा, पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा और भारी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।

शहीद वीर नारायण सिंह शहादत दिवस पर विशेष

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सोनाखान के मोर ललहु माटी,,सुरता आथे हम ला,,,

वीर नारायण ला कहां लुका देस,वापिस कर दे हम ला,,,,

 सोनाखान से _पोषण कुमार साहू

रायपुर //सोनाखान की वीरभूमि से आज फिर वही गर्जना सुनाई दे रही है— “वीर नारायण सिंह अमर रहें… अमर रहें…”। ललहु माटी से उठती यह हुंकार केवल नारा नहीं, बल्कि उस आत्मबल की गूंज है, जो छत्तीसगढ़ के पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह ने जन-जन के हृदय में प्रवाहित किया था। उनकी शहादत की गाथा गाते हुए लोग भावुक हैं, आँखें नम हैं और मन गर्व से भरा हुआ।

वीर नारायण सिंह केवल एक नाम नहीं, वे अन्याय के विरुद्ध खड़े आदिवासी चेतना के प्रतीक हैं। 19वीं सदी में अंग्रेजी हुकूमत और जमींदारी शोषण के दौर में, जब अकाल से जनता त्रस्त थी, तब वीर नारायण सिंह ने मानवता का झंडा बुलंद किया। उन्होंने सोनाखान के अनाज भंडार को भूखे लोगों के लिए खोल दिया—यह कदम शोषण के विरुद्ध खुली चुनौती था। अंग्रेजी सत्ता को यह स्वीकार्य नहीं हुआ। परिणामस्वरूप उन पर मुकदमे थोपे गए, उन्हें गिरफ्तार किया गया और अंततः 10 दिसंबर 1857 को रायपुर  के जय स्तम्भ चौक में फांसी दे दी गई। परंतु शरीर को फांसी मिली, विचारों को नहीं—वे अमर हो गए।

आज उनकी कहानियाँ जन-जन की जुबान पर हैं। ग्राम कोसम सरा से आए समारु बैगा भावुक होकर कहते हैं कि वीर नारायण सिंह ने हमारी पीढ़ियों को मान और गौरव से भर दिया। अंचल में उनके लिए असीम श्रद्धा और सम्मान है। वे लोगों की रग-रग में बसते हैं—साहस बनकर, स्वाभिमान बनकर।

यहाँ उनकी स्मृति में प्रतिवर्ष तीन दिवसीय वीर मड़ई मेला (शहादत दिवस) का आयोजन होता है, जहाँ सोनाखान के 18 टोलों सहित सर्व समाज के लोग बड़ी संख्या में जुटकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ग्राम जोराडबरी रोहासी से आए प्रेम सिंह ध्रुव बताते हैं कि वे अपने परिवार के साथ हर वर्ष यहाँ आते हैं—श्रद्धा के साथ-साथ गौरव की अनुभूति करने।

सोनाखान आज भी अपने वीर सपूत के नाम से गर्व और सम्मान से विभूषित है। सरकार इस शहीद स्थल के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। यहाँ वीर नारायण सिंह के नाम से स्मारक और संग्रहालय का निर्माण किया गया है, जो आने वाली पीढ़ियों को उनके संघर्ष और बलिदान से परिचित कराता है। शहादत दिवस के अवसर पर  आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा 101 करोड़ रुपये के 119 विकास कार्यों का लोकार्पण इस बात का प्रमाण है कि यह पवित्र भूमि केवल स्मृति की नहीं, बल्कि विकास और सम्मान की भी धरोहर है।

ललहु माटी आज फिर जीवंत है। हवा में गूंजते नारे, आँखों में सम्मान और दिलों में संकल्प—वीर नारायण सिंह यहां हर जगह मौजूद  हैं। वे सोनाखान की मिट्टी में, उसकी सांसों में, और छत्तीसगढ़ की चेतना में सदा जीवित हैं।

छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने पर मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य जगत के प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने पर बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य की उस विराट परंपरा के प्रतिनिधि हैं, जिसने अपनी सादगी, संवेदना और अद्भुत लेखन-शक्ति से साहित्य की दुनिया में एक विशिष्ट स्थान बनाया है। उनकी लेखनी ने न केवल हिंदी भाषा को समृद्ध किया है, बल्कि पाठकों की अनेक पीढ़ियों को गहराई से प्रभावित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी प्रदेशवासियों के लिए गर्व का क्षण है कि विनोद कुमार शुक्ल को यह सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान साहित्य जगत में उनके अद्वितीय योगदान को प्रदर्शित करता है।

मुख्यमंत्री  साय ने  विनोद कुमार शुक्ल के सुदीर्घ, स्वस्थ और सक्रिय जीवन की कामना करते हुए कहा कि उनका रचनात्मक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

मुख्यमंत्री ने किया शंकर पांडे की पुस्तक ’’छत्तीसगढ़ अतीत से अब तक’’ का विमोचन

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में वरिष्ठ पत्रकार  शंकर पांडे की पुस्तक छत्तीसगढ़ अतीत से अब तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ के अतीत को समेटने के प्रयास की सराहना करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री साय को पांडे ने बताया कि छत्तीसगढ़ पर केंद्रित यह उनकी 6वीं पुस्तक है जिसमें छत्तीसगढ़ के महापुरुषों, पर्यटन स्थल, प्राचीन इतिहास, राज-परिवार, मंदिरों के इतिहास से सम्बंधित जानकारियां संकलित की गयी हैं। उन्होंने बताया कि पुस्तक में छत्तीसगढ़ के कई अनछुए पहलुओं सहित राज्य के सभी मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रमुख राजनीतिक घटनाओं, राजनेताओं व साहित्यकारों का भी उल्लेख है। इस अवसर पर प्रियंका कौशल,विशाल यादव सहित स्नेहा पांडे तथा मास्टर अंश पांडे भी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ रजत महोत्सव-2025~उप राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के 34 अलंकरण से 37 विभूतियों एवं 4 संस्थाओं को किया सम्मानित

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रायपुर-उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के राज्य अलंकरण समारोह में छत्तीसगढ़ के 34 अलंकरण से विभिन्न क्षेत्रों से उत्कृष्ट योगदान देने वाले 37 विभूतियों एवं 4 संस्थाओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अलंकरण समारोह के अति विशिष्ट अतिथि तथा विशिष्टि अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण उपस्थित थे। 

राज्य अलंकरण समारोह में उप राष्ट्रपति राधाकृष्णन एवं मुख्यमंत्री साय ने शहीद वीरनारायण सिंह पुरस्कार हिरेश सिन्हा जिला कांकेर को प्रदान किया। यति यतनलाल सम्मान भारतीय कुष्ठ निवारक संघ, कात्रे नगर सोठी जिला जांजगीर-चांपा, गुण्डाधूर सम्मान ज्ञानेश्वरी यादव राजनांदगांव, मिनीमाता सम्मान ललेश्वरी साहू दुर्ग, गुरूघासीदास सम्मान संयुक्त रूप से भुवनदास जांगड़े बेमेतरा एवं शशि गायकवाड़ बलौदाबाजार-भाटापारा,  ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति डोमा जिला धमतरी, हबीब तनवीर सम्मान डॉ. कुंज बिहारी शर्मा जिला रायपुर, महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान चांदनी साहू जिला बिलासपुर को प्रदान किया गया। 

इसी प्रकार पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान राजेश अग्रवाल जिला रायपुर, पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान डॉ. चिंतरंजन कर जिला रायपुर, चक्रधर सम्मान पंडित कीर्ति माधव लाल व्यास जिला दुर्ग, दाऊ मंदराजी सम्मान रिखी क्षत्रिय जिला दुर्ग, डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार संयुक्त रूप से थनेन्द्र कुमार साहू जिला धमतरी एवं वामन कुमार टिकरिहा जिला बलौदाबाजार, महाराजा अग्रसेन सम्मान राजेन्द्र अग्रवाल राजू जिला बिलासपुर, चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार प्रिंट मीडिया हिन्दी डॉ. संदीप कुमार तिवारी रायपुर एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हिन्दी का पुरस्कार संयुक्त रूप से डॉ. सोमेश कुमार पटेल एवं अभिषेक शुक्ला रायपुर, मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार प्रिंट मीडिया अंग्रेजी भावना पाण्डेय जिला दुर्ग, दानवीर भामाशाह सम्मान नीरज कुमार बाजपेयी जिला राजनांदगांव, धन्वन्तरि सम्मान डॉ. अजय कृष्ण कुलश्रेष्ठ, बिलासादेवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार सुखदेव दास जिला रायपुर को प्रदान किया गया।

इसी तरह डॉ. भंवरसिंह पोर्ते आदिवासी सेवा सम्मान जंगो रायतार विद्या केतुल शिक्षण संस्था ग्राम दमकसा जिला कांकेर, रामानुज प्रताप सिंहदेव स्मृति श्रम यशस्वी पुरस्कार संयुक्त रूप से मिथलेश कुमार आदिल एवं अग्रसर टीम जिला दुर्ग तथा एनटीपीसी लिमि. लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट पुसौर जिला रायगढ़ , पंडित लखनलाल मिश्र सम्मान योगेश कुमार साहू जिला कांकेर, छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान मनीष तिवारी जिला रायपुर, देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार रोहित कुमार कोसरिया जिला महासमुंद, किशोर साहू सम्मान सुनील सोनी जिला रायपुर, लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान राकेश तिवारी जिला रायपुर, लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार डॉ. विनोद कुमार वर्मा जिला बिलासपुर, किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण  अनुराग बसु मुम्बई को प्रदान किया गया। 

बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान संयुक्त रूप से खेमचंद जैन राजनांदगांव, डॉ. सुरेश मणि त्रिपाठी, डॉ. भूपेन्द्र करवंदे एवं भरतलाल सोनी रायपुर को, वीरांगन अवंतिबाई लोधी स्मृति पुरस्कार प्रेमशीला बघेल महासमुंद को, माता बहादुर कलारिन सम्मान शिल्पा पाण्डेय सृष्टि जिला सरगुजा को, पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान अवधेश कुमार नई दिल्ली तथा संस्कृत भाषा सम्मान डॉ. दादू भाई त्रिपाठी जिला रायपुर को प्रदान किया गया।




                              



उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के समापन समारोह में किया राज्य की प्रगति और विकास का गौरवपूर्ण उल्लेख

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रायपुर-उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। यह महोत्सव राज्य के गठन की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रगति को प्रदर्शित किया गया।

समारोह में उपराष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ की उल्लेखनीय प्रगति और समावेशी विकास पर प्रकाश डालते हुए इसे एक विकसित भारत की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता बताया। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ में विकास और विश्वास ने भय और हिंसा का स्थान लिया है।”

उन्होंने जनजातीय समुदायों को राज्य की वन, संस्कृति और विरासत का संरक्षक बताते हुए उनकी बुद्धिमत्ता और सतत जीवन शैली की सराहना की। साथ ही, राज्य की सामूहिक इच्छाशक्ति और विकास के माध्यम से नक्सलवाद को समाप्त करने की सफलता की भी उन्होंने प्रशंसा की।

उपराष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के नागरिकों—किसानों, युवाओं, उद्यमियों और शिक्षकों—की भागीदारी को राज्य की सफलता की नींव बताया और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के योगदान की भी सराहना की।

उन्होंने राज्य में विकास किए गए बुनियादी ढांचे, जैसे सड़क, रेल, हवाई कनेक्टिविटी और नवा रायपुर को भारत का पहला ग्रीनफील्ड शहर बनाने के प्रयासों की विशेष रूप से तारीफ की। उपराष्ट्रपति ने "अंजोर विज़न @2047" के तहत छत्तीसगढ़ द्वारा अपनाई जा रही उभरती प्रौद्योगिकियों—सेमीकंडक्टर निर्माण और डिजिटल शासन सुधारों—को भी रेखांकित किया।

सांस्कृतिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने राज्य के पारंपरिक नृत्यों जैसे पंथी और कर्मा, आदिवासी कला और शिल्प को भी सराहा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विविधता में एकता का प्रतीक है, जहाँ सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिकीकरण संतुलन में हैं।

समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उपराष्ट्रपति ने युवाओं से आह्वान किया कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित प्रौद्योगिकियों और वैश्विक अवसरों का लाभ उठाते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

उपराष्ट्रपति ने महोत्सव को केवल अतीत के उत्सव के रूप में नहीं बल्कि भविष्य के लिए एक प्रतिज्ञा के रूप में देखा—एक विकसित छत्तीसगढ़ के माध्यम से एक विकसित भारत का निर्माण, लोकतंत्र को मजबूत करना और संस्कृति का सम्मान करना।


छत्तीसगढ़ की बेटी आकांक्षा सत्यवंशी ने विश्व स्तर पर बढ़ाया प्रदेश का गौरव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक विश्व कप विजय पर राज्य सरकार द्वारा आकांक्षा सत्यवंशी को ₹10 लाख की सम्मान राशि प्रदान करने की घोषणा

रायपुर-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक विश्व कप विजय पर देशवासियों को बधाई और शुभ कामनाएँ देते हुए कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम की यह अभूतपूर्व उपलब्धि हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है, जिसने विश्व पटल पर देश का मान बढ़ाया है।

आकांक्षा सत्यवंशी 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस गौरवपूर्ण सफलता में छत्तीसगढ़ की बेटी आकांक्षा सत्यवंशी ने फिजियोथैरेपिस्ट एवं स्पोर्ट्स साइंस विशेषज्ञ के रूप में खिलाड़ियों की फिटनेस और रिकवरी में अतुलनीय योगदान देकर न केवल भारतीय टीम को सशक्त बनाया है, बल्कि देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर उज्ज्वल किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आकांक्षा सत्यवंशी ने अपने समर्पण, सेवा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह सिद्ध किया है कि छत्तीसगढ़ की बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में देश का गौरव बन सकती हैं। उनके उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करते हुए राज्य सरकार द्वारा ₹10 लाख की सम्मान राशि प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आकांक्षा सत्यवंशी  की यह सफलता छत्तीसगढ़ की सभी बेटियों और खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। यह उनकी मेहनत, निष्ठा और संकल्प का परिणाम है, जिसने पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है। 

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खेल के क्षेत्र में नई पीढ़ी को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि छत्तीसगढ़ से और भी ऐसी प्रतिभाएँ निकलें जो देश का नाम विश्व में रोशन करें।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विश्वविजेता बनने की उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

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गौरवपूर्ण उपलब्धि में छत्तीसगढ़ की प्रतिभाशाली बेटी आकांक्षा सत्यवंशी का योगदान राज्य के लिए गर्व की बात - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम को विश्वविजेता बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह विजय न केवल पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि छत्तीसगढ़ के लिए भी अत्यंत विशेष महत्व रखती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस गौरवपूर्ण उपलब्धि में छत्तीसगढ़ की प्रतिभाशाली बेटी आकांक्षा सत्यवंशी का योगदान राज्य के लिए गर्व की बात है। कवर्धा जिले की आकांक्षा सत्यवंशी ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम में बतौर फिजियोथैरेपिस्ट और स्पोर्ट्स साइंस एक्सपर्ट खिलाड़ियों की फिटनेस, रिकवरी और प्रदर्शन को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि आकांक्षा सत्यवंशी इससे पहले छत्तीसगढ़ महिला क्रिकेट टीम और अंडर-19 भारतीय महिला क्रिकेट टीम से भी जुड़ी रही हैं। खिलाड़ियों की फिटनेस के प्रति उनका समर्पण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उत्कृष्ट पेशेवर दक्षता इस ऐतिहासिक जीत में उनके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आकांक्षा सत्यवंशी जैसी प्रतिभाशाली बेटियाँ आज छत्तीसगढ़ का नाम पूरे देश और दुनिया में रोशन कर रही हैं। उन्होंने आकांक्षा को राज्य की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि प्रदेश की युवतियों को अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा — “यह जीत नारी शक्ति, परिश्रम और आत्मविश्वास की जीत है। हमें गर्व है कि इस गौरवमयी पल में छत्तीसगढ़ की बेटी ने भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।”

मुख्यमंत्री साय ने आकांक्षा सत्यवंशी को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि उनकी सफलता नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस: संस्कृति, संघर्ष और समृद्धि की गाथा

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“जय जोहार छत्तीसगढ़” — यह सिर्फ़ एक अभिवादन नहीं, बल्कि इस माटी की आत्मा की पहचान है।

1 नवम्बर 2000 — यह वह ऐतिहासिक दिन था जब भारत के नक्शे पर देश का 26वां राज्य छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया। मध्यप्रदेश से अलग होकर बना यह राज्य अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, लोककला, और मेहनतकश जनता के लिए जाना जाता है। आज जब छत्तीसगढ़ अपना 25वां स्थापना दिवस मना रहा है, तो यह दिन न केवल उत्सव का, बल्कि आत्ममंथन और गर्व का भी प्रतीक है।

इतिहास और पहचान

“छत्तीसगढ़” नाम का उद्गम प्राचीन काल के 36 गढ़ों से माना जाता है। यह भूमि प्राचीन काल से ही जनजातीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और लोकजीवन की जीवंत मिसाल रही है। यहाँ की धरती ने संत गुरु घासीदास जी, पंडित सुन्दर लाल शर्मा, वीर नारायण सिंह, माता कर्मा जैसे संतों और स्वतंत्रता सेनानियों को जन्म दिया, जिन्होंने समाज को समानता, अहिंसा और न्याय का संदेश दिया।

प्राचीन काल में यह क्षेत्र दक्षिण कोशल के नाम से जाना जाता था और रामायण काल में भगवान श्रीराम के वनवास का अधिकांश समय इसी क्षेत्र में बीता। इसीलिए छत्तीसगढ़ की माटी को “श्रीराम की मातृभूमि” भी कहा जाता है।

संघर्ष से सृजन तक की यात्रा

लंबे समय तक इस क्षेत्र के लोगों की यह आकांक्षा रही कि यहाँ की विशिष्ट पहचान और समस्याओं को समझने वाला एक अलग राज्य हो। इस जनभावना को सम्मान देते हुए 1 नवम्बर 2000 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ।

प्रारंभ में 16 जिलों से बना यह राज्य आज 33 जिलों तक विस्तारित हो चुका है। राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर, सरगुजा, कोरिया और जशपुर तक विकास की नई किरणें पहुँच चुकी हैं।

विकास की दिशा में अग्रसर

पिछले दो दशकों में छत्तीसगढ़ ने कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
राज्य आज देश के अग्रणी खनिज उत्पादक प्रदेशों में शामिल है और यहाँ की गोधन न्याय योजना, धान खरीदी नीति, जनकल्याणकारी योजनाएँ, तथा नवाचार आधारित शासन प्रणाली देशभर में मॉडल के रूप में सराही जा रही हैं।

वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा —

“छत्तीसगढ़ केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि संस्कृति, सरलता और संकल्प का संगम है। हमारी प्राथमिकता है कि हर नागरिक को विकास का समान अवसर मिले और हमारा राज्य ‘शांति, समृद्धि और संस्कार’ का केंद्र बने।”

संस्कृति और लोकजीवन की आत्मा

छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोकसंस्कृति से है। पंथी, सुआ, राऊत नाचा, करमा, डंडारी जैसे लोकनृत्य और खमरा, ढोलक, मृदंग, मांदर की थाप यहाँ के जीवन का हिस्सा हैं।
यहाँ की छत्तीसगढ़ी बोली, लोकगीत, और चित्रकूट, बारनवापारा, कांगेर घाटी जैसे प्राकृतिक स्थल पर्यटन को नई दिशा दे रहे हैं।

भविष्य की ओर – गढ़बो नवा छत्तीसगढ़

आज का छत्तीसगढ़ युवा, प्रगतिशील और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है।
“गढ़बो नवा छत्तीसगढ़” का अर्थ है — ऐसा राज्य जहाँ हर व्यक्ति सम्मान, अवसर और सुरक्षा के साथ जी सके।
पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, जनजातीय उत्थान और डिजिटल शासन इस नए युग की पहचान बन रहे हैं।

जय जोहार छत्तीसगढ़!

यह भूमि केवल खनिजों से नहीं, संस्कारों और शौर्य से समृद्ध है। स्थापना दिवस के इस अवसर पर हर छत्तीसगढ़िया अपने अंदर यह संकल्प दोहराए — “हम मिलकर गढ़ेंगे नवा छत्तीसगढ़।”


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