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पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती पर पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली- नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस वर्ष चंद्रशेखर जी की 100वीं जयंती वर्ष की शुरुआत हो रही है, जिसे प्रधानमंत्री ने उनके सपनों के समृद्ध और न्यायपूर्ण भारत को साकार करने के संकल्प को दोहराने का अवसर बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चंद्रशेखर जी एक जननेता थे, जो साहस, दृढ़ विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। वे भारत की मिट्टी से जुड़े हुए थे और आम लोगों की आकांक्षाओं को भली-भांति समझते थे।

उन्होंने यह भी कहा कि चंद्रशेखर जी ने सार्वजनिक जीवन में सादगी और स्पष्टता का उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री ने उनके साथ हुई मुलाकातों को याद करते हुए बताया कि उन्हें देश के विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा करने का अवसर मिला था।

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं से अपील की कि वे चंद्रशेखर जी के विचारों और भारत के विकास में उनके योगदान के बारे में अधिक से अधिक पढ़ें और उनसे प्रेरणा लें।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबू जगजीवन राम की जयंती पर दी श्रद्धांजलि

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बाबू जगजीवन राम ने अपना पूरा जीवन समानता और सामाजिक न्याय के आदर्शों के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने देश के लिए उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए कहा कि राष्ट्र हमेशा उनके योगदान को स्मरण करता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा,

“पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। उन्होंने समानता और सामाजिक न्याय के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। देश के लिए उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर दी श्रद्धांजलि, शिक्षा और राष्ट्रजागरण में उनके योगदान को किया नमन

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि महामना मालवीय जी ने अपना संपूर्ण जीवन मातृभूमि की सेवा, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय चेतना के जागरण को समर्पित कर दिया। उनका जीवन भारत की स्वतंत्रता संग्राम और शैक्षिक पुनर्जागरण का उज्ज्वल अध्याय है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए समाज सुधार के साथ-साथ देशवासियों में राष्ट्रप्रेम और आत्मसम्मान की भावना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेताओं में से एक थे और उन्होंने भारतीय समाज को संगठित करने के लिए शिक्षा को सबसे प्रभावी माध्यम माना।

महामना मालवीय जी का सबसे अविस्मरणीय योगदान देश के शिक्षा जगत में रहा। उन्होंने 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की स्थापना कर भारत में आधुनिक और राष्ट्रीय शिक्षा की मजबूत नींव रखी। बीएचयू आज भी देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में गिना जाता है और उनके दूरदर्शी विचारों का जीवंत उदाहरण है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महामना मालवीय जी न केवल महान शिक्षाविद और समाज सुधारक थे, बल्कि वे एक प्रभावशाली वक्ता, लेखक और निर्भीक पत्रकार भी थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति, मूल्यों और स्वदेशी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनका आदर्श जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर अपने संदेश में कहा:

“मातृभूमि की सेवा में आजीवन समर्पित रहे भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए समाज सुधार के साथ राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश के शिक्षा जगत में उनका अतुलनीय योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि महामना मालवीय जी के विचार और कार्य आज भी आत्मनिर्भर, शिक्षित और सशक्त भारत के निर्माण के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर दी श्रद्धांजलि, कहा—सुशासन और राष्ट्रनिर्माण के प्रतीक थे अटल जी

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपना संपूर्ण जीवन सुशासन, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण को समर्पित कर दिया। उनका व्यक्तित्व और विचार आज भी देश को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर अपने संदेश में कहा कि अटल जी न केवल एक प्रखर वक्ता और दूरदर्शी नेता थे, बल्कि वे एक ओजस्वी कवि भी थे, जिनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, संवेदना और मानवीय मूल्यों की गहरी झलक मिलती है। उनका नेतृत्व देश के चहुंमुखी विकास के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

अटल बिहारी वाजपेयी जी भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में से थे, जिन्हें पक्ष और विपक्ष—दोनों में समान सम्मान प्राप्त था। वे तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे और उनके कार्यकाल में भारत ने सुशासन, आर्थिक सुधार, बुनियादी ढांचे के विकास और वैश्विक मंच पर सशक्त पहचान की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति की। पोखरण परमाणु परीक्षण, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और ग्राम सड़क योजना जैसे निर्णय उनके दूरदर्शी नेतृत्व के उदाहरण हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अटल जी का जीवन और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे और उनका योगदान भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।

प्रधानमंत्री का संदेश:

“देशवासियों के हृदय में बसे पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सुशासन और राष्ट्र निर्माण को समर्पित कर दिया। वे एक प्रखर वक्ता के साथ-साथ ओजस्वी कवि के रूप में भी सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनका व्यक्तित्व, कृतित्व और नेतृत्व देश के चहुंमुखी विकास के लिए पथ-प्रदर्शक बना रहेगा।”


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चौधरी चरण सिंह को उनके जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित

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केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री, महान किसान नेता और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह को उनके जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

‘X’ पर साझा किए गए संदेश में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री, महान किसान नेता और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी को उनके जन्मदिवस पर नमन। उन्होंने बताया कि चौधरी चरण सिंह का जीवन कृषि प्रणाली के उत्थान, किसानों की भलाई और सामाजिक सेवा को समर्पित था।  शाह ने कहा कि उन्होंने साहसपूर्वक किसानों और कृषि को शासन की केंद्र में रखा और आपातकाल और तानाशाही शासन को उखाड़ फेंकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री ने सी. राजगोपालाचारी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सी. राजगोपालाचारी की जन्मजयन्ती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्हें स्वतंत्रता सेनानी, विचारक, विद्वान और राजनेता के रूप में याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राजाजी 20वीं सदी के सबसे तेजस्वी मस्तिष्कों में से एक थे, जिन्होंने मूल्य सृजन और मानवीय गरिमा को बनाए रखने में विश्वास रखा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र उनके स्वतंत्रता संग्राम और सार्वजनिक जीवन में किए गए स्थायी योगदान को कृतज्ञता के साथ याद करता है।

X (पूर्व में ट्विटर) पर अपने पोस्ट में मोदी ने लिखा:

“स्वतंत्रता सेनानी, विचारक, विद्वान, राजनेता… ये कुछ शब्द हैं जो सी. राजगोपालाचारी को याद करते समय मन में आते हैं। उनकी जन्मजयन्ती पर उन्हें श्रद्धांजलि। वे 20वीं सदी के सबसे तेजस्वी मस्तिष्कों में से एक रहे, जिन्होंने मूल्य सृजन और मानवीय गरिमा को बनाए रखने में विश्वास रखा। हमारा राष्ट्र उनके स्थायी योगदान को कृतज्ञता के साथ याद करता है।

राजाजी की जन्मजयन्ती पर, कुछ रोचक सामग्री साझा कर रहा हूँ, जिसमें युवा राजाजी की तस्वीर, उनके कैबिनेट मंत्री बनने की अधिसूचना, 1920 के दशक में स्वयंसेवकों के साथ उनकी तस्वीर और 1922 में एडिट की गई यंग इंडिया की एक संस्करण शामिल है, क्योंकि गांधी जी जेल में थे।”



अमर शहीद खुदीराम बोस की जयंती पर गृह मंत्री अमित शाह की श्रद्धांजलि

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केंद्रीय गृह मंत्री और सहयोग मंत्री अमित शाह ने महान देशभक्त और अमर शहीद खुदीराम बोस जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

‘एक्स’ प्लेटफ़ॉर्म पर एक पोस्ट में अमित शाह ने कहा कि मां भारती की स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र क्रांति हेतु युवाओं को संगठित करने वाले और स्वदेशी के लिए देशवासियों को जागृत करने वाले, वीरता, साहस और त्याग के प्रतीक खुदीराम बोस जी सदैव स्मरणीय रहेंगे।

उन्होंने कहा कि अनगिनत क्रांतिकारियों से प्रेरित खुदीराम जी ब्रिटिश सरकार के अत्याचारों से कभी भयभीत नहीं हुए और उन्होंने मां भारती के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

शाह ने कहा कि खुदीराम बोस जी की वीर गाथा हर युवा के लिए राष्ट्र को सर्वोपरी रखने की अनमोल प्रेरणा है।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी ने किया राष्ट्रनिर्माता के योगदान का स्मरण

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नई दिल्ली- भारत के प्रथम राष्ट्रपति और संविधान निर्माण के महानायक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए कहा कि डॉ. प्रसाद का जीवन सत्यनिष्ठा, सादगी और राष्ट्र सेवा का अद्वितीय उदाहरण है, जिसकी प्रेरणा आज भी देश की नई पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा:

“डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने से लेकर संविधान सभा की अध्यक्षता करने और हमारे पहले राष्ट्रपति बनने तक, उन्होंने अतुलनीय गरिमा, समर्पण और स्पष्ट उद्देश्य के साथ देश की सेवा की। लोक जीवन के उनके लंबे वर्षों में सादगी, साहस और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण की छाप रही। उनकी अनुकरणीय सेवा और दृष्टि पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है।”

प्रधानमंत्री के इस संदेश ने एक बार फिर उस महान नेता के प्रति देश की सामूहिक स्मृतियों को जागृत किया, जिसने अपनी संपूर्ण ऊर्जा राष्ट्रउत्थान के लिए समर्पित की।

बचपन से लेकर राष्ट्र नेतृत्व तक—डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की अद्वितीय यात्रा

3 दिसंबर 1884 को बिहार के जीरादेई में जन्मे डॉ. राजेन्द्र प्रसाद असाधारण प्रतिभा और गहन नैतिक मूल्यों से संपन्न थे। बचपन से ही मेधावी, विनम्र और अनुशासित—वे छात्रों के बीच "राजेन्द्र बाबू" के नाम से प्रसिद्ध थे।

उनकी शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय में हुई, जहाँ उन्होंने कानून की पढ़ाई में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। बाद में वे देश के सर्वश्रेष्ठ वकीलों में गिने जाने लगे, लेकिन राष्ट्र की पुकार पर उन्होंने अपना कानूनी करियर छोड़ दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में पूर्णकालिक रूप से सक्रिय हो गए।

स्वतंत्रता आंदोलन में अद्वितीय नेतृत्व

डॉ. प्रसाद ने महात्मा गांधी के साथ कई ऐतिहासिक आंदोलनों में भाग लिया।
उनके प्रमुख योगदानों में शामिल हैं:

  • चंपारण सत्याग्रह में किसानों के अधिकारों के लिए अग्रणी भूमिका

  • असहयोग आंदोलन और नमक सत्याग्रह में सक्रिय सहभागिता

  • ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध संघर्ष

  • जेल में कई बार कारावास, लेकिन संकल्प एक क्षण भी कमजोर नहीं

उनकी शांत, संतुलित और प्रभावी नेतृत्व क्षमता ने उन्हें राष्ट्र के सबसे विश्वसनीय नेताओं में स्थापित किया।

संविधान सभा के अध्यक्ष—भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के निर्माता

1946 में, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को संविधान सभा का अध्यक्ष चुना गया।
उनके नेतृत्व में:

  • विविध विचारधाराओं के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर संविधान तैयार किया

  • कठिन बहसों को धैर्य और सरल भाषा में समझाते हुए संतुलन बनाया

  • गांधीवादी मूल्यों, लोकतंत्र, न्याय और समानता को संविधान में मजबूत आधार मिला

भारत का संविधान आज विश्व के सर्वोत्तम संविधान मॉडलों में से एक माना जाता है—जिसे अंतिम रूप देने में डॉ. प्रसाद की भूमिका केंद्रीय रही।

12 वर्षों तक भारत के राष्ट्रपति—सादगी और नैतिकता का आदर्श

26 जनवरी 1950 को जब भारत गणतंत्र बना, तो डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सर्वसम्मति से देश के पहले राष्ट्रपति चुने गए।
कुल 12 वर्षों तक उन्होंने इस उच्चतम संवैधानिक पद को अद्वितीय गरिमा और पवित्रता के साथ निभाया—जो आज तक किसी और राष्ट्रपति के कार्यकाल से अधिक है।

उनकी कार्यशैली में:

  • निर्णयों में निष्पक्षता और नैतिक दृढ़ता

  • सरकार के कामकाज पर सजग, लेकिन संवैधानिक मर्यादा का कठोर पालन

  • आम जनता के बीच लगातार संपर्क

  • सादगी की ऐसी मिसाल कि राष्ट्रपति भवन में भी सामान्य जीवनशैली बनाए रखी

राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और समाजसेवा में लगे रहे।

भारत रत्न और अमर विरासत

1962 में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया।
वे न केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रपति थे, बल्कि:

  • लेखक

  • सामाजिक सुधारक

  • शिक्षाविद

  • किसान और गरीबों के सच्चे हितैषी

उनकी पुस्तकें, भाषण और जीवन मूल्य आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

प्रधानमंत्री का संदेश—नए भारत के लिए प्रेरक संकल्प

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती पर प्रधानमंत्री के श्रद्धांजलि संदेश ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि राष्ट्र निर्माण की यात्रा में मूल्यों, त्याग और देशभक्ति का महत्व आज भी उतना ही है जितना स्वतंत्रता के समय था।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आग्रह किया कि वे डॉ. प्रसाद के आदर्शों से प्रेरणा लें और राष्ट्र की एकता, विकास और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने में योगदान दें।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में सक्रिय भागीदारी से लेकर संविधान सभा की अध्यक्षता करने और हमारे पहले राष्ट्रपति बनने तक, उन्होंने अद्वितीय गरिमा, समर्पण और स्पष्ट उद्देश्य के साथ देश की सेवा की।

उन्होंने कहा, “लोक जीवन के उनके लम्बे वर्षों में सादगी, साहस और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण की छाप रही। उनकी अनुकरणीय सेवा और दूरदृष्टि पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है।”

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

“डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने से लेकर संविधान सभा की अध्यक्षता करने और हमारे पहले राष्ट्रपति बनने तक, उन्होंने अतुलनीय गरिमा, समर्पण और स्पष्ट उद्देश्य के साथ देश की सेवा की। लोक जीवन के उनके लंबे वर्षों में सादगी, साहस और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण की छाप रही। उनकी अनुकरणीय सेवा और दृष्टि पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है।”


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर दी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रपति मुर्मु ने डॉ. कलाम के राष्ट्र निर्माण में दिए गए अद्वितीय योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन, समर्पण और विचार आज भी देशवासियों को प्रेरित करते हैं।


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