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द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन में आयुष एक्सपो होगा प्रमुख आकर्षण, भारत मंडपम में 17–19 दिसंबर को आयोजन

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भारत सरकार का आयुष मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन (Global Traditional Medicine Summit) के अंतर्गत आयुष एक्सपो का आयोजन करेगा। यह शिखर सम्मेलन 17 से 19 दिसंबर 2024 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

आयुष एक्सपो इस शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख और केंद्रीय मंच होगा, जिसमें भारत की आयुष प्रणालियों के साथ-साथ दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को एक साथ प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक संवाद, नीति विमर्श और नवाचार को बढ़ावा देना है, ताकि पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में सुरक्षित, समावेशी और प्रमाण-आधारित तरीके से एकीकृत किया जा सके।

आयुष की समग्र और वैज्ञानिक प्रस्तुति

आयुष एक्सपो में आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी का व्यापक और क्यूरेटेड प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शनी में इमर्सिव अनुभव, वैज्ञानिक व्याख्याएं और डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को वैश्विक संदर्भ में प्रस्तुत किया जाएगा, जो आधुनिक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं से जुड़ा होगा।

प्रो. (डॉ.) तनुजा मनोज नेसरी, निदेशक, आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (ITRA) ने कहा कि यह एक्सपो भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैज्ञानिक आधार और वैश्विक प्रासंगिकता के साथ प्रस्तुत करने के लिए डिजाइन किया गया है। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय ज्ञान, प्रमाण-आधारित अभ्यास और उभरती तकनीकों को एक मंच पर लाकर यह एक्सपो शोध सहयोग को मजबूत करेगा और पारंपरिक चिकित्सा के जिम्मेदार एकीकरण को बढ़ावा देगा।

प्रमुख आकर्षण

आयुष एक्सपो के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं:

  • औषधीय पौधे एवं बीज मंडप, जिसमें लगभग 40 जीवित औषधीय पौधों और दुर्लभ बीजों का प्रदर्शन किया जाएगा, जो भारत की वनस्पति विरासत और पारंपरिक चिकित्सा की पारिस्थितिक नींव को दर्शाएगा।

  • स्पाइसेज़ ऑफ इंडिया पवेलियन, जिसमें आमतौर पर उपयोग होने वाले मसालों के वैज्ञानिक गुणों और निवारक स्वास्थ्य में उनकी भूमिका को प्रदर्शित किया जाएगा।

  • मेटालोथेरेप्यूटिक्स ज़ोन, जहां शोधन प्रक्रियाओं, भस्म निर्माण और सुरक्षा मानकों की वैज्ञानिक जानकारी दी जाएगी।

  • दिनचर्या, ऋतुचर्या और पंचकर्म से जुड़े अनुभाग, जो निवारक स्वास्थ्य देखभाल और उपचारात्मक पद्धतियों को पारंपरिक उपकरणों और व्याख्यात्मक प्रारूपों के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।

  • पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL), जिसे जैव-चोरी रोकने और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त पहल के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।

परंपरा और तकनीक का संगम

एक्सपो में आयुष नेक्स्टजेन स्टार्ट-अप्स पवेलियन भी होगा, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेडिक्टिव डायग्नोस्टिक्स, वेलनेस डिवाइसेज़ और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म्स से जुड़े नवाचार प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही, होलोग्राफिक डिस्प्ले, वर्चुअल रियलिटी आधारित योग और पंचकर्म अनुभव तथा आयुष ग्रिड का प्रदर्शन किया जाएगा, जो शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारत की डिजिटल संरचना को दर्शाता है।

आगंतुक सहभागिता और वैश्विक सहभाग

आगंतुकों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण (स्वास्थ्य परीक्षा), प्रकृति परीक्षण, ध्यान एवं योग सत्र, पोषण आधारित प्रदर्शन और बच्चों के लिए वेलनेस लर्निंग ज़ोन जैसी सहभागितापूर्ण गतिविधियां भी होंगी।

इसके अतिरिक्त, एक्सपो में एक विशेष WHO ज़ोन भी होगा, जहां WHO सदस्य देशों की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों, सामुदायिक स्वास्थ्य मॉडल और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को प्रदर्शित किया जाएगा। ये वैश्विक प्रदर्शन स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र, सामाजिक नवाचार और प्रकृति-आधारित स्वास्थ्य समाधानों पर केंद्रित होंगे।

वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा लाइब्रेरी का शुभारंभ

आयुष एक्सपो का एक प्रमुख आकर्षण WHO द्वारा वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा लाइब्रेरी (GTML) का शुभारंभ होगा। यह डिजिटल रिपॉजिटरी दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित ज्ञान, डेटा और शोध साक्ष्यों को एक मंच पर लाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रमाण-आधारित नीति निर्माण और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की वैश्विक पहचान को बढ़ावा मिलेगा।

वैश्विक स्वास्थ्य में भारत की भूमिका

अधिकारियों के अनुसार, आयुष एक्सपो अपनी वैश्विक रूपरेखा, वैज्ञानिक क्यूरेशन, उन्नत डिजिटल तकनीकों और नवाचार व जवाबदेही पर जोर के कारण विशिष्ट है। यह प्रदर्शनी दर्शाएगी कि कैसे पारंपरिक ज्ञान, जब प्रमाण, नैतिकता और जिम्मेदार शासन से समर्थित हो, तो आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

आयुष मंत्रालय ने द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के अंतर्गत आयुष एक्सपो में भाग लेने के लिए प्रतिनिधियों, वैश्विक भागीदारों और मीडिया को आमंत्रित किया है, जिससे भारत और WHO की साझेदारी में पारंपरिक चिकित्सा को समान, सतत और जन-केंद्रित वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों का हिस्सा बनाने की प्रतिबद्धता को और सशक्त किया जा सके।

UPSC के शताब्दी वर्ष पर दो दिवसीय ‘शताब्दी सम्मेलन’ का आयोजन

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केंद्रीय लोक सेवा आयोग (UPSC) अपनी शताब्दी वर्ष समारोह के अंतर्गत दो दिवसीय ‘शताब्दी सम्मेलन’ का आयोजन कर रहा है। यह सम्मेलन 26 और 27 नवंबर 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा। लोकसभा अध्यक्ष माननीय ओम बिड़ला मुख्य अतिथि के रूप में और माननीय डॉ. जितेंद्र सिंह, राज्य मंत्री (कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन) विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे। भारत सरकार के अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

इस कार्यक्रम में UPSC तथा विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों के वर्तमान और पूर्व अध्यक्ष एवं सदस्य, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी तथा देश के प्रमुख व्यक्तित्व एक ही मंच पर एकत्रित होंगे। दो दिवसीय शताब्दी सम्मेलन के अंतर्गत 26 नवंबर 2025, संविधान दिवस के अवसर पर ‘चिंतन’ शीर्षक से एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य देश में लोक सेवा आयोगों की संवैधानिक विरासत का सम्मान करना है।

उद्घाटन पूर्णाधिवेशन में कई विशिष्ट अतिथि संबोधित करेंगे, जिनमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला का मुख्य भाषण, डॉ. जितेंद्र सिंह का मंत्रिस्तरीय संबोधन, तथा UPSC के माननीय अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार के विचार शामिल होंगे।

यह आयोजन UPSC और राज्य लोक सेवा आयोगों की राष्ट्र-निर्माण में भूमिका पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। इसके माध्यम से भर्ती प्रणाली में सुधार, समावेशिता और तकनीकी परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद को बढ़ावा मिलेगा।

IITF 2025: भारत मंडपम में भारत की आर्थिक विविधता और जमीनी उद्यमिता का भव्य प्रदर्शन

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भारत मंडपम परिसर भारत की आर्थिक विविधता का एक जीवंत प्रदर्शन बन गया है, जहाँ पारंपरिक शिल्प, कृषि उद्यम, स्टार्टअप नवाचार और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय विशेषताएँ एक साथ प्रदर्शित हो रही हैं।

44वां भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) 2025, जिसकी थीम एक भारत, श्रेष्ठ भारत है, में 3,500 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए—हर कोई अपने श्रम, विरासत और आकांक्षा की अपनी-अपनी कहानी लेकर।

14 नवंबर 2025 को उद्घाटन किया गया यह चौदह-दिवसीय आयोजन सिर्फ एक व्यापारिक मेला नहीं है, बल्कि एक ऐसा अवसर मंच है जहाँ प्रथम-पीढ़ी के उद्यमी, ग्रामीण कारीगर और घरेलू ब्रांड अपनी मांग परखते हैं, खरीदारों से जुड़ते हैं, साथियों से सीखते हैं और राज्य-स्तरीय सहायता तंत्र तक पहुँचते हैं। कई प्रदर्शकों के लिए IITF राष्ट्रीय बाज़ार में प्रवेश का पहला बड़ा कदम है—एक ऐसा बाज़ार जो आत्मविश्वासी, निरंतर बढ़ता हुआ और आत्मनिर्भर भारत का प्रतिबिंब है।

क्या आप जानते हैं?

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF), जो 1980 से हर वर्ष इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (ITPO) द्वारा आयोजित किया जाता है, MSME, कारीगरों, स्टार्टअप्स और उद्योगों के लिए देश के सबसे महत्वपूर्ण मंचों में से एक है। वर्षों में यह भारत की विनिर्माण क्षमता, नवाचार और विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक शिल्प का प्रमुख प्रदर्शन स्थल बन गया है।

2024 में, इस मेले में दस लाख से अधिक आगंतुक आए, जिससे यह देश के सबसे लोकप्रिय व्यापार आयोजनों में अपनी स्थिति को और मजबूत करता है।

IITF का आयोजन भारत मंडपम में होता है, जो प्रगति मैदान परिसर में निर्मित आधुनिक सम्मेलन एवं प्रदर्शनी केंद्र है, जिसका उद्घाटन 2023 में किया गया। यह 123 एकड़ में फैला है तथा इसमें 7,000-सीट वाला कन्वेंशन हॉल, सात प्रदर्शनी हॉल और 100,000 वर्ग मीटर से अधिक प्रदर्शनी क्षेत्र शामिल है। ITPO प्रति वर्ष लगभग 90 कार्यक्रम आयोजित करता है, जिससे नई दिल्ली एक प्रमुख वैश्विक प्रदर्शनी गंतव्य बनती जा रही है।

बिहार: एक कारीगर का राष्ट्रीय मंच पर पदार्पण

बिहार मंडप में 45 वर्षीय सृद्धि कुमारी अपने सामने सजी भागलपुरी रेशम और ज़री के काम को संभालती हैं—एक कला जिसे उन्होंने 12 वर्षों में निखारा है। IITF में पहली बार भाग लेते हुए वे महिला-उद्यमिता की यात्रा का प्रतीक बनती हैं। वे गर्व से कहती हैं, “मैं अधिकृत विक्रेता हूँ।”

बिहार सरकार ने महिला-उद्यमिता योजनाओं के तहत उन्हें सहायता दी। उनके अनुसार, “सभी सरकारी औपचारिकताओं में सचिव ने मेरा मार्गदर्शन किया।”
उनका शिल्प बिहार और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों के कौशल का संगम है।

एक अन्य कारीगर ने उन्हें IITF में आने के लिए प्रेरित किया था। मार्च 2025 के GI-महोत्सव में उन्होंने दो–तीन महीने की आय के बराबर कमाया था, जिससे इस बार उनकी भागीदारी का आत्मविश्वास बढ़ा।

नालंदा से दिल्ली तक: हर साल लौटने वाला बुनकर

कुछ दूरी पर 49 वर्षीय तरुण पांडे बेहद नाजुक बावनबु्टी साड़ियों को सजाते नज़र आते हैं। यह उनका आठवाँ IITF है।

वे बताते हैं, “IITF से मुझे दो से ढाई महीने की आय के बराबर कमाई होती है। हम अन्य मेलों में भाग नहीं लेते, IITF हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है।”

उनके नियमित ग्राहक उन्हें “नालंदा के बुनकर” के रूप में पहचानते हैं।

किसान से उद्यमी: अवसरों का विस्तार

51 वर्षीय प्रहलाद रामराव बोर्गड और उनकी पत्नी कावेरी, महाराष्ट्र के हिंगोली से आए हैं। वे जैविक दालें, हल्दी, अदरक, अचार और मसाले बेचते हैं।

2012 से जैविक खेती अपनाने के बाद उन्होंने 2015 में ‘सूर्या फार्मर्स’ शुरू किया।

IITF के बारे में उन्होंने ऑनलाइन जाना और महाराष्ट्र सरकार ने आवेदन प्रक्रिया में सहायता की।

उनके अनुसार,

“ऐसे मंच केवल उत्पाद बेचने के लिए नहीं, बल्कि संपर्क बनाने, उपभोक्ता अपेक्षाएँ समझने और पेशेवर तरीके सीखने में मदद करते हैं।”
IITF में उन्हें चार से पाँच महीने की आय के बराबर कमाई होती है।

लातूर की परंपरा: गोधड़ी कला का संरक्षण

महाराष्ट्र मंडप में रुक्मणी गणेशपट सालगे अपनी 15 वर्षीय बेटी के साथ पारंपरिक गोधड़ी क्विल्ट प्रदर्शित करती हैं।

वे बताती हैं, “प्रत्येक गोधड़ी को हाथ से बनाने में चार–पाँच दिन लगते हैं।”
IITF उनके लिए सिर्फ बिक्री का मंच नहीं, बल्कि उस कला को बचाने का अवसर है जो सस्ती मशीन-निर्मित वस्तुओं के कारण जोखिम में है।

झारखंड: 400 आदिवासी महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती लाख की चूड़ियाँ

झारखंड—जो 2025 में अपनी स्थापना के 25 वर्ष मना रहा है—इस वर्ष थीम स्टेट है।
यहाँ 49 वर्षीय झबर माल पारंपरिक तकनीकों से बनी लाख की चूड़ियाँ बेचते हैं।
वे कहते हैं,
“मेरे स्थायी ग्राहक हर साल मेरा इंतज़ार करते हैं। मेले के बाद मिलने वाले ऑर्डर ही मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।”
उनकी कमाई झारखंड की लगभग 400 आदिवासी महिलाओं के आजीविका समूह का समर्थन करती है।

व्यापार मेले: आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र

IITF जैसे मेले सिर्फ तत्काल बिक्री नहीं बढ़ाते—वे छोटे उद्यमियों को दृश्यता देते हैं, दीर्घकालिक खरीदार जोड़ते हैं और बाज़ार के व्यवहार को समझने में मदद करते हैं।
2025 का यह संस्करण विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को दर्शाता है, जहाँ आर्थिक मजबूती, राजनीतिक स्थिरता और वैश्विक व्यापार साझेदारियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

जैसे ही शाम को पवेलियन रोशन होते हैं, प्रत्येक स्टॉल के पीछे की कहानी भारत के उद्यमशीलता परिदृश्य की विविधता को उजागर करती है।
सृद्धि, तरुण, प्रहलाद, रुक्मणी और झबर जैसे कारीगरों के लिए IITF वह स्थान है जहाँ परंपरा उद्यम से मिलती है, स्थानीय कौशल राष्ट्रीय पहचान पाता है, और छोटे व्यवसाय आगे बढ़ने के लिए आवश्यक गति पाते हैं।

IITF का 44वां संस्करण साबित करता है कि भारत की आर्थिक प्रगति केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि छोटे उद्यमियों की मेहनत, रचनात्मकता और संकल्प से भी आकार लेती है।


IITF 2025: केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने किया कोल इंडिया पवेलियन का उद्घाटन, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ कोयला तकनीक पर केंद्रित प्रदर्शनी

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केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री, जी. किशन रेड्डी ने आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के मंडप का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं चेयरमैन, CIL,सनोस कुमार झा, संयुक्त सचिव संजीव कुमार कासी, संयुक्त सचिव लखपत सिंह चौधरी तथा मंत्रालय और CIL के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

CIL का मंडप ऊर्जा सुरक्षा, विविधीकरण परियोजनाओं और सतत विकास की दिशा में भारत की प्रगति को प्रदर्शित करता है, जो आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित कर रहा है। मंडप में ओपनकास्ट माइनिंग तकनीक, कोयला खनन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग, तथा CIL की सहायक कंपनियों के मुख्यालयों में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) के कार्यों को प्रस्तुत किया गया है। AI के उपयोग से परिचालन क्षमता और सुरक्षा अनुपालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

मंडप में वर्चुअल रियलिटी (VR) तकनीक का लाइव प्रदर्शन भी किया जा रहा है, जो मुख्य रूप से सुरक्षा एवं परिचालन प्रशिक्षण के लिए उपयोग की जाती है। खतरनाक वातावरण में पारंपरिक प्रशिक्षण की तुलना में VR एक सुरक्षित, किफायती और अत्यधिक प्रभावी विकल्प प्रदान करता है।

मंडप का एक महत्वपूर्ण भाग कोयला गैसीकरण पहल को दर्शाता है, जिसे कोयला मंत्रालय ने स्वच्छ कोयला उपयोग की दिशा में देश के संक्रमण को तेज करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। इसके साथ ही मंडप में CSR गतिविधियों और खनन क्षेत्रों में पारिस्थितिक पुनर्स्थापना को बढ़ावा देने वाली ईको-टूरिज्म परियोजनाओं को भी प्रदर्शित किया गया है।

CIL की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिथियम तथा कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के अधिग्रहण की रणनीतिक पहलों को भी प्रमुखता से दर्शाया गया है। यह दृष्टिकोण इन महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने और इससे जुड़े उद्योगों के विकास को समर्थन देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

IITF, CIL के लिए हितधारकों, उद्योग साझेदारों और आम जनता से संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है, जो राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका के प्रति पारदर्शिता और जागरूकता को बढ़ावा देता है। कोयला मंत्रालय और CIL ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारत की सतत, आत्मनिर्भर विकास यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।


एक भारत श्रेष्ठ भारत: IITF में संस्कृति, कारोबार और कारीगरों का अनोखा मिलन

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परिचय

दशकों से ट्रेड फेयर यह दिखाते आए हैं कि जब लोग, उत्पाद और विचार एक साथ आते हैं, तो बाजार कैसे विकसित होते हैं। इस वर्ष का इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए “एक भारत श्रेष्ठ भारत” थीम के साथ आयोजित हो रहा है। अपने 44वें संस्करण में यह मेला 3,500 से अधिक प्रतिभागियों, 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा 11 देशों के प्रदर्शकों को एक साथ लाकर भारत मंडपम को संस्कृतियों और वाणिज्य का संगम बना देता है।

बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे पार्टनर स्टेट्स, तथा झारखंड बतौर फोकस स्टेट, सिर्फ वस्तुएं ही नहीं, बल्कि अपने राज्यों की आर्थिक आकांक्षाओं को भी प्रस्तुत कर रहे हैं।

सरकारी विभागों, पीएसयू, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शकों और शिल्पकार समूहों को एक ही छत के नीचे लाकर यह मेला छोटे उत्पादकों, पारंपरिक कारीगरों और नई पीढ़ी के उद्यमियों के लिए भारत का सबसे प्रभावी मंच बन चुका है।

“मैंने इतना बड़ा ट्रेड फेयर कभी नहीं देखा”

एक गलियारे में मिस्र (Egypt) के इस्लाम कमाल अपने मार्बल शिल्प पर रुकने वाले आगंतुकों को देखते हैं। उनका परिवार पिछले 25 वर्षों से यहां आता रहा है—इतना लंबा समय कि उनका व्यापार इस मेले के बदलावों का प्रतिरूप बन गया है।

वे कहते हैं,

“इस क्षेत्र में लगातार वृद्धि हुई है। हमें हमेशा अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है, और अब मांग पहले से कहीं ज्यादा है।”

इस्लाम के अनुसार, भारत मंडपम “दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड फेयर” है, जहां उन्हें हर साल अधिक समर्थन और अधिक ग्राहक मिलते हैं। उनका अनुभव उन कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों से मेल खाता है जो इसलिए लौटते हैं क्योंकि भारत अब खुद एक भरोसेमंद बाजार बन गया है।

एक बाजार जो दूसरा घर बन गया

तुर्की के उलास की कहानी इससे भी गहरी है।
“हम लगभग 24–25 साल से भारत आ रहे हैं,” वे बताते हैं।
“पहले हम दूसरे देशों में भी मेलों में जाते थे, लेकिन अब हम सिर्फ भारत में ही प्रदर्शनी लगाते हैं।”

वे हर साल लगभग छह महीने भारत में बिताते हैं, ऐसे रिश्ते बनाते हुए जो मेले की अवधि से कहीं आगे तक चलते हैं।

“हमारे ग्राहक हर साल वापस आते हैं,” वे मुस्कुराते हुए कहते हैं।
“यही हमें प्रेरित करता है।”

जब परंपरा बन जाती है रोज़गार

एक अन्य मंडप में कोल्हापुरी चप्पलों का स्टॉल लोगों से भरा है।

सचिन सातपुते के लिए, यह मेला सिर्फ बाज़ार नहीं है; यह एक ऐसा मंच है, जहां परंपरा को सम्मान और खरीदार दोनों मिलते हैं।

वे कहते हैं,
“ऐसे आयोजन हमारे मार्केटिंग और ब्रांडिंग में बहुत मदद करते हैं।”

उनके लिए यह 15 दिनों का आयोजन छह महीनों की कमाई लेकर आता है।

जब स्टॉक मेले के खत्म होने से पहले ही बिक जाए

कुछ कहानियां पैमाने की होती हैं—तेजी से बिकते स्टॉक और खाली शेल्फ की।

महाराष्ट्र की शोभा कहती हैं,
“यह हमारा दूसरा मौका है ट्रेड फेयर में। पिछले साल हमने 2–3 क्विंटल माल बेचा था, और हमारा स्टॉक मेले के खत्म होने से 2–3 दिन पहले ही खत्म हो गया था।”

उनका अनुभव छोटे उत्पादकों के लिए भरोसा देता है, जो पहचान और पहुंच की तलाश में रहते हैं।

एक्सपोर्ट करने वाले भी ढूंढते हैं घरेलू बाजार

मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) के मोहम्मद फाज़िल सामान्यतः अपने मेटल हैंडीक्राफ्ट्स यूरोप और अमेरिका में निर्यात करते हैं।

लेकिन इस बार वे भारत मंडपम में एक नए उद्देश्य से आए हैं:
“हम घरेलू बाजार में ज्यादा एक्सपोजर चाहते हैं।”

उनके लिए यह मेला ब्रांडिंग, पैठ और नए खरीदारों का परीक्षण स्थल है।

जब मेला कारीगरों के सपनों को सहारा देता है

उत्त्तर प्रदेश के नेशनल अवॉर्डी इकराम हुसैन कहते हैं,
“यह मेरा दूसरा मौका है मेले में, और यह मेरे लिए बेहद लाभदायक रहा है।”

उनके लिए यह आयोजन 15 दिनों में तीन महीने के बराबर बिक्री लेकर आता है।

वे कहते हैं,
“यहां मिली संभावनाओं ने मुझे अपना व्यवसाय बढ़ाने में बहुत मदद की है।”

उनकी कहानी बताती है कि ऐसे प्लेटफ़ॉर्म कारीगरों के सपनों को नई उड़ान देते हैं।

रिश्ते जो मेले के बाद भी चलते रहते हैं

थाईलैंड की किम पिछले 12 वर्षों से यहां आ रही हैं।
“मैं जिन ग्राहकों से यहां मिलती हूं, वे आमतौर पर अगले साल फिर लौटते हैं,” वे कहती हैं।

उन्हें मेले के बाद भी कई थोक के ऑर्डर मिलते हैं—जिससे साबित होता है कि यहां बने रिश्ते लंबे समय तक टिकते हैं।

जब व्यापार एक समुदाय बन जाता है

मेले में थोड़ा अधिक समय बिताएं और एक पैटर्न स्पष्ट दिखने लगता है—चाहे वह मिस्र का मार्बल हो, थाईलैंड के आभूषण, महाराष्ट्र का चमड़ा या उत्तर प्रदेश की धातु कारीगरी—हर प्रदर्शक विकास, पहचान, जुड़ाव और बढ़ती आय की बात करता है, जो 14-दिन के इस आयोजन से कहीं आगे तक असर छोड़ती है।

ऐसे ट्रेड फेयर केवल बिक्री नहीं बढ़ाते—
वे इकोसिस्टम बनाते हैं, जहां:

  • कारीगरों को पहचान मिलती है

  • निर्यातक घरेलू बाजार खोजते हैं

  • छोटे उत्पादक अपने ग्राहकों को बार-बार लौटते हुए देखते हैं

भारत मंडपम जैसे मंच यह दिखाते हैं कि जब परंपरा, उद्यमिता और वैश्विक जुड़ाव एक साथ आते हैं, तो व्यापार एक उत्सव बन जाता है।


IITF 2025 में EPFO का भव्य पदार्पण: डिजिटल सोशल सिक्योरिटी का नया युग शुरू

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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पहली बार भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) 2025 में अपने अत्याधुनिक पैवेलियन का आयोजन किया, जिसका स्थान भारत मंडपम, नई दिल्ली रहा। इस पैवेलियन का औपचारिक उद्घाटन केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने किया। इस अवसर पर श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री रमेश कृष्णमूर्ति तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, EPFO तथा अन्य प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

डॉ. मंडाविया ने EPFO पैवेलियन के उद्घाटन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि IITF सदैव भारत की विकास यात्रा को दर्शाने का एक महत्वपूर्ण मंच रहा है। इस वर्ष EPFO पहली बार IITF में अपने नए, आधुनिक और सशक्त स्वरूप के साथ उपस्थित हुआ है, जो पारदर्शिता, दक्षता और व्यापक सेवा प्रदायन का प्रतीक है। उन्होंने EPFO की भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में निरंतर प्रगति की सराहना की और इसे देश के कार्यबल की वित्तीय गरिमा सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण संस्था बताया।

उन्होंने बताया कि EPFO वर्षों से देश के करोड़ों श्रमिकों के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार स्तंभ रहा है। संगठन ने मैनुअल प्रक्रियाओं से डिजिटल प्लेटफॉर्म तक एक लंबी यात्रा तय की है, जिसके परिणामस्वरूप संगठित, असंगठित, शहरी और ग्रामीण – हर श्रमिक तक भविष्य निधि सेवाएँ सम्मानपूर्वक और तेजी से पहुँच रही हैं।

पिछले वर्ष में EPFO ने अपने डिजिटल इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं—उन्नत यूनिफाइड पोर्टल, पुनर्निर्मित वेबसाइट, सरलित दावा प्रक्रियाएँ, रियल-टाइम शिकायत निवारण, पेपरलेस ऑनबोर्डिंग और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट के माध्यम से पेंशनर्स को दरवाज़े पर सहायता उपलब्ध कराना—इन सभी ने नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाया है।

डॉ. मंडाविया ने कहा कि यह पैवेलियन केवल सेवाओं का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि EPFO के “भविष्य-उन्मुख, सदस्य-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-संचालित” संगठन बनने के संकल्प को दर्शाता है। यह दिखाता है कि किस प्रकार डिजिटल सार्वजनिक सेवाएँ नागरिकों को सशक्त करती हैं, उद्यमों को सहयोग देती हैं और संस्थाओं व नागरिकों के बीच विश्वास को मजबूत करती हैं।

उन्होंने आगंतुकों, नियोक्ताओं और युवाओं को पैवेलियन का अवलोकन करने, इसकी सेवाओं को समझने और सामाजिक सुरक्षा के महत्व को जानने के लिए आमंत्रित किया। साथ ही, EPFO टीम को एक सूचनाप्रद, इंटरैक्टिव और भविष्य-दृष्टि वाले पैवेलियन के निर्माण के लिए बधाई दी, जो सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की राष्ट्रीय दृष्टि से मेल खाता है।

शोभा करंदलाजे ने भी EPFO को अपनी शुभकामनाएँ दीं और आग्रह किया कि संगठन आगंतुकों को ऑन-द-स्पॉट सेवाएँ उपलब्ध कराते हुए अधिकतम जागरूकता फैलाने का कार्य करे।

EPFO पैवेलियन, भारत सरकार की ‘जीवन की सुगमता’ और ‘सभी के लिए डिजिटल सार्वजनिक सेवाएँ’ की दृष्टि के अनुरूप एक भविष्य-तैयार, नागरिक-केंद्रीय डिजिटल अनुभव प्रदान करता है। आगंतुक यहाँ पेंशन सुविधा ज़ोन, नियोक्ता सहायता केंद्र, ई-सेवा डेमो तथा EPF, EPS, EDLI, PM-VBRY और नवनिर्घारित Employees Enrolment Scheme 2025 जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर जागरूकता स्टॉलों का अवलोकन कर सकते हैं।

हर डेस्क पर EPFO के विशेषज्ञ मौजूद हैं, जो लाइव सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। आगंतुक पैवेलियन में अपना दावा दाखिल कर सकते हैं, संयुक्त घोषणा कर सकते हैं, UAN जनरेट कर सकते हैं और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं।

पैवेलियन में इंटरैक्टिव टचस्क्रीन किओस्क भी लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से उपयोगकर्ता प्रक्रिया-शिक्षण वीडियो देख सकते हैं, प्रकाशन पढ़ सकते हैं और क्विज़ के माध्यम से सेवाओं को बेहतर समझ सकते हैं। बड़े डिस्प्ले स्क्रीन निरंतर शिक्षाप्रद सामग्री प्रदर्शित कर जागरूकता बढ़ाते हैं।

सभी आयु वर्गों के लिए अनुभव को मनोरंजक बनाने हेतु पैवेलियन में किड्स प्ले ज़ोन, नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो और सेल्फी बूथ की व्यवस्था की गई है। आगंतुक सोशल मीडिया सेल्फी गतिविधियों में भाग ले सकते हैं और बच्चे पेंटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं। इन सभी गतिविधियों में भाग लेने वालों के लिए विशेष उपहार भी रखे गए हैं, जिससे पैवेलियन शिक्षा और मनोरंजन दोनों का संगम बन जाता है।

मेन्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) पवेलियन का उद्घाटन

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जितिन प्रसाद, राज्य मंत्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार ने 44वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में भारत मंडपम में MeitY पवेलियन का उद्घाटन किया।

इस पवेलियन में तीन प्रमुख थीमैटिक ज़ोन शामिल हैं – डिजिटल इंडिया, इंडियाAI और MyGov, जो आगंतुकों को भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, सामाजिक भलाई के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), और सहभागी शासन की दृष्टि का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करते हैं।

इंडियाAI ज़ोन और समिट की तैयारी

India-AI Impact Summit 2026 की तैयारी में, पवेलियन में IndiaAI Zone प्रमुख पहल के रूप में प्रदर्शित किया गया है। यह ज़ोन सुरक्षित, भरोसेमंद और समावेशी AI इकोसिस्टम बनाने में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। “Action to Impact” की यात्रा को दर्शाते हुए, यह ज़ोन जिम्मेदार AI में भारत की प्रगति को प्रदर्शित करता है और समिट का एक पूर्वावलोकन प्रदान करता है।

IndiaAI मिशन के सात रणनीतिक स्तंभ

सम्मानित मंत्री ने IndiaAI पवेलियन के विशेष अनुभव क्षेत्र का भी दौरा किया, जहां IndiaAI मिशन के सात रणनीतिक स्तंभ प्रदर्शित किए गए हैं:

  1. AI Kosh

  2. Applications (AI अनुप्रयोग)

  3. Future Skills (भविष्य के कौशल)

  4. Startups

  5. Compute

  6. Foundational Models

  7. Safe & Trusted AI

उन्होंने इंटरैक्टिव स्क्रीन के माध्यम से AI Kosh, वास्तविक AI अनुप्रयोग, भविष्य कौशल पहल, और मिशन के अंतर्गत बन रहे व्यापक इकोसिस्टम को देखा। मंत्री ने पवेलियन और IndiaAI टीम के आगंतुकों के साथ बातचीत की और उन्हें भारत की AI यात्रा को तेज करने के लिए प्रेरित किया।

India-AI Impact Summit 2026 की प्रमुख पहल

पवेलियन में निम्नलिखित प्रमुख पहल भी प्रदर्शित की गईं:

  • Global Impact Challenges: समिट के तीन प्रमुख ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज, कुल पुरस्कार राशि ₹6 करोड़ तक, मेंटरशिप, निवेशक एक्सेस और क्लाउड क्रेडिट प्रदान करते हैं।

  • AI for All: प्रमुख क्षेत्रों में उच्च प्रभाव वाले समावेशी AI समाधानों को आमंत्रित करता है।

  • AI by HER: महिला नेतृत्व वाली AI नवाचारों को विशेष दृश्यता और संसाधन प्रदान करता है।

  • YUVAi: 13–21 वर्ष की उम्र के युवा नवाचारकों को AI-for-good परियोजनाओं के निर्माण और वैश्विक मंच पर विचार प्रस्तुत करने का अवसर।

  • Research Symposium on AI and its Impact: भारत और ग्लोबल साउथ के प्रमुख शोधकर्ताओं को एकत्र करता है, जो नीति-संबंधी और अग्रणी AI शोध प्रस्तुत करते हैं।

  • IndiaAI–IEA International Call for Abstracts: ऊर्जा क्षेत्र में AI के वास्तविक प्रभाव पर केसबुक के लिए कॉल प्रस्तुत करता है, जिसे India-AI Impact Summit 2026 में जारी किया जाएगा।

  • AI Expo Showcase: समिट के वैश्विक स्तर के AI एक्सपो का प्रारंभिक पूर्वावलोकन, जिसमें उद्योग और समाज को बदलने वाले अनुप्रयोग प्रदर्शित किए गए।

  • IndiaAI Tinkerpreneur: कक्षा 6–12 के छात्रों के लिए राष्ट्रीय बूटकैम्प, जो AI के मौलिक कौशल विकसित करता है और सामाजिक प्रभाव वाले नवाचार को बढ़ावा देता है।

निष्कर्ष

IITF 2025 में MeitY पवेलियन भारत की समानता, नवाचार और वैश्विक सहयोग के लिए तकनीक का उपयोग करने की यात्रा को दर्शाता है। आगंतुक यहाँ इमर्सिव प्रदर्शनी, वास्तविक उपयोग मामलों की खोज, और यह अनुभव कर सकते हैं कि भारत नागरिक-केंद्रित और भविष्य-तैयार डिजिटल अर्थव्यवस्था को कैसे आकार दे रहा है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे “उभरते विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार सम्मेलन (ESTIC) 2025” का उद्घाटन एवं ₹1 लाख करोड़ RDI योजना कोष का शुभारंभ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 नवंबर 2025 को सुबह लगभग 9:30 बजे नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित “उभरते विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार सम्मेलन (Emerging Science & Technology Innovation Conclave – ESTIC) 2025” का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री सम्मेलन को संबोधित भी करेंगे।

देश के अनुसंधान एवं विकास (R&D) पारिस्थितिकी तंत्र को एक बड़ा प्रोत्साहन देते हुए प्रधानमंत्री ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) योजना कोष का शुभारंभ करेंगे। इस योजना का उद्देश्य देश में निजी क्षेत्र–प्रधान अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है।

ESTIC 2025 का आयोजन 3 से 5 नवंबर 2025 तक किया जाएगा। इस सम्मेलन में 3,000 से अधिक प्रतिभागी — शिक्षाविद्, अनुसंधान संस्थान, उद्योग और सरकारी प्रतिनिधि — सहित नोबेल पुरस्कार विजेता, प्रख्यात वैज्ञानिक, नवोन्मेषक और नीति-निर्माता भाग लेंगे। चर्चाएँ 11 प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर केंद्रित रहेंगी, जिनमें शामिल हैं —

  • उन्नत पदार्थ एवं विनिर्माण (Advanced Materials & Manufacturing)

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence)

  • बायो-मैन्युफैक्चरिंग (Bio-Manufacturing)

  • ब्लू इकॉनॉमी (Blue Economy)

  • डिजिटल कम्युनिकेशन (Digital Communications)

  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर विनिर्माण (Electronics & Semiconductor Manufacturing)

  • उभरती कृषि तकनीकें (Emerging Agriculture Technologies)

  • ऊर्जा, पर्यावरण एवं जलवायु (Energy, Environment & Climate)

  • स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकियाँ (Health & Medical Technologies)

  • क्वांटम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Quantum Science & Technology)

  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Technologies)

ESTIC 2025 में प्रमुख वैज्ञानिकों के व्याख्यान, पैनल चर्चाएँ, प्रस्तुतियाँ और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी आयोजित की जाएंगी। यह सम्मेलन शोधकर्ताओं, उद्योगों और युवा नवोन्मेषकों को सहयोग और साझेदारी का मंच प्रदान करेगा, जिससे भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को और सशक्त बनाया जा सके।

भारत अंतर्राष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC) 2025: भारत मंडपम में 30-31 अक्टूबर को होगा आयोजन, वाणिज्य विभाग और एपीडा देंगे गैर-वित्तीय सहयोग

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भारत सरकार प्रत्येक आर्थिक क्षेत्र में सहभागी निर्णय लेने और व्यापार संवर्धन सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से सभी हितधारकों के साथ संवाद करती है। चावल भारत का प्रमुख कृषि निर्यात उत्पाद है — वर्ष 2024-25 में भारत का चावल निर्यात लगभग 12.95 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है, और भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बनने की दिशा में अग्रसर है। इस क्षेत्र के महत्व को ध्यान में रखते हुए, वाणिज्य विभाग अन्य संबंधित मंत्रालयों/विभागों के साथ मिलकर भारत अंतर्राष्ट्रीय चावल सम्मेलन (Bharat International Rice Conference - BIRC) 2025 को गैर-वित्तीय सहयोग प्रदान कर रहा है।

BIRC 2025 का आयोजन 30–31 अक्टूबर 2025 को भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में किया जाएगा। इस सम्मेलन का आयोजन इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) द्वारा किया जा रहा है, जो चावल क्षेत्र से संबंधित एक निजी व्यापारिक संस्था है। इसके सदस्य चावल निर्यातक एवं चावल पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े अन्य हितधारक हैं। वाणिज्य विभाग का IREF के अध्यक्ष या सदस्यों की नियुक्ति में कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।

IREF के अलावा, भारत के अन्य प्रमुख चावल निर्यातक संगठन — द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ (TREA-CG) और द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TREA), काकीनाडा — भी इस कार्यक्रम में सह-भागीदार हैं।

एपीडा (APEDA), जो कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात संवर्धन की जिम्मेदारी निभाती है, इस कार्यक्रम को सहयोग दे रही है। इसका उद्देश्य संबंधित मंत्रालयों/विभागों को एक मंच पर लाकर चावल निर्यात के विस्तार और संवर्धन के लिए समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

सम्मेलन के आयोजन में लगने वाले सभी व्यय — जैसे स्थल किराया, लॉजिस्टिक व्यवस्था, खरीदारों की मेजबानी (यात्रा, आवास आदि), प्रदर्शनी, खरीदार-विक्रेता बैठक, तकनीकी सत्र, वीडियो, बैनर, पोस्टर, प्रदर्शन सामग्री आदि — पूरी तरह IREF और उसके सह-भागीदारों द्वारा अपनी निधियों या निजी प्रायोजन से वहन किए जा रहे हैं।

जहां तक IREF के राष्ट्रीय अध्यक्ष या संस्थान के संचालन से संबंधित प्रेस में प्रकाशित विशिष्ट आरोपों का प्रश्न है, वाणिज्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह एक निजी संस्था का आंतरिक मामला है और इस पर टिप्पणी करना विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

FCI ने वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 में OMSS (D) योजना के माध्यम से बनाई मजबूत उपस्थिति

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नई दिल्ली-फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने वर्ल्ड फूड इंडिया 2025, भारत मंडपम, नई दिल्ली में अपने प्रमुख बाज़ार हस्तक्षेप कार्यक्रम ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक), OMSS (D) को प्रदर्शित करके मजबूत और केंद्रित प्रभाव डाला। इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज मंत्रालय द्वारा किया गया, जिसमें खाद्य और कृषि व्यवसाय क्षेत्रों के वैश्विक हितधारकों ने भाग लिया। इस मंच ने FCI को OMSS (D) के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भागीदारी को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान किया।

FCI के इस कार्यक्रम में भाग लेने का मुख्य उद्देश्य यह दर्शाना था कि OMSS (D) खाद्यान्न की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने, कीमतों को नियंत्रित करने और छोटे/बड़े उपभोक्ताओं और विक्रेताओं को सीधे पहुंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। FCI ने अपने विशेष और जानकारीपूर्ण स्टॉल के माध्यम से योजना की संरचना, प्रभाव और लाभ को सरल और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया। आगंतुकों को पंजीकरण प्रक्रिया, ई-नीलामी तंत्र और योजना की पूरी प्रक्रिया के बारे में लाइव डेमो, प्रिंटेड सामग्री और व्यक्तिगत मार्गदर्शन के माध्यम से समझाया गया।

इस स्टॉल ने व्यापक जनसंपर्क आकर्षित किया और कार्यक्रम में प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गया। विक्रेता, फूड प्रोसेसर, थोक व्यापारी, छात्र और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि FCI टीम के साथ उत्साहपूर्वक जुड़े, जिन्होंने सभी प्रश्नों का उत्तर दिया और योजना की राष्ट्रीय महत्वता समझाई।

एक महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, चिराग पासवान ने FCI स्टॉल का दौरा किया और OMSS पर इसके थीमेटिक फोकस की सराहना की। उन्होंने FCI के सार्वजनिक पहुँच प्रयासों और खाद्यान्न मूल्य स्थिरीकरण में योगदान की प्रशंसा की। मंत्री ने FCI द्वारा प्रस्तुत “Food for All, Life for All” विषय को भी सराहा, जो संगठन की खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

FCI स्टॉल की सफलता FCI दिल्ली क्षेत्र की समर्पित टीम के प्रयासों से संभव हुई, जिसका नेतृत्व Smt. K. P. Asha, जनरल मैनेजर (क्षेत्र) ने किया। टीम ने सुनिश्चित किया कि प्रस्तुति पेशेवर, सुगम और FCI के उद्देश्यों के अनुरूप हो।

स्टॉल का महत्व और बढ़ाने के लिए FCI के वरिष्ठ नेतृत्व ने भी भाग लिया। इसमें प्रमुख विभागों के कार्यकारी निदेशक, जैसे पर्सनल/सेल्स, स्टोरेज & कॉन्ट्रैक्ट/सिक्योरिटी, क्वालिटी कंट्रोल और नॉर्थ जोन, तथा चीफ जनरल मैनेजर और जनरल मैनेजर शामिल थे। उनकी भागीदारी ने संगठन की एकीकृत दृष्टि और सार्वजनिक संपर्क में उच्च स्तर की प्रतिबद्धता को दर्शाया।

OMSS के अलावा, स्टॉल ने FCI की व्यापक गतिविधियों जैसे MSP पर खरीद, वैज्ञानिक वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और TPDS वितरण की झलक भी प्रस्तुत की। लाइव प्रदर्शन और डिजिटल टूल्स ने FCI की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और तकनीकी एकीकरण, जैसे AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और Depot Online System (DOS), को प्रदर्शित किया।

FCI की वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 में भागीदारी न केवल जानकारीपूर्ण थी, बल्कि प्रभावशाली भी रही। इसने रचनात्मक संवाद, नए संपर्क और सार्वजनिक समझ को बढ़ाया कि कैसे FCI राष्ट्र की खाद्य अर्थव्यवस्था का समर्थन करता है। OMSS (D) पर ध्यान केंद्रित करना मूल्य संवेदनशीलता और बाजार स्थिरीकरण के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक संदेश था।

इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति के माध्यम से FCI ने पारदर्शिता, दक्षता और नवाचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और राष्ट्र की सेवा अपने स्थायी आदर्श वाक्य “Food for All, Life for All” के साथ जारी रखी।

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