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हर बेटी को मिले सुरक्षित और स्वच्छ माहौल- राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

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डीएमएफ मद से तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में 3.50 करोड़ से बनेंगे आधुनिक बालिका शौचालय

​रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण अंचल की बेटियों को स्वच्छता, सम्मान और सुविधायुक्त शैक्षणिक माहौल प्रदान करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया है। राजस्व  मंत्री टंक राम वर्मा के विशेष प्रयासों के फलस्वरूप तिल्दा विकासखंड के 50 ग्राम पंचायतों के शासकीय विद्यालयों में बालिका शौचालयों के निर्माण के लिए 3 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि की वित्तीय एवं प्रशासकीय मंजूरी प्रदान की गई है। जिला खनिज संस्थान न्यास मद से स्वीकृत यह सौगात क्षेत्र में बालिका शिक्षा को नए आयाम देने के साथ ही स्वच्छता अभियान को धरातल पर और अधिक सशक्त बनाएगी।

डी एम एफ मद से स्वीकृत 7 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से बनेगी आधुनिक बालिका शौचालय

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि हमारी सरकार बेटियों के स्वाभिमान, बेहतर स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव अक्सर बेटियों की पढ़ाई में रुकावट बनता था। तिल्दा ब्लॉक के 50 स्कूलों में डी एम एफ मद से स्वीकृत 7 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से बनने वाले ये आधुनिक बालिका शौचालय केवल एक निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि यह हमारी बेटियों के सम्मान और उनकी उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। विकास का यह प्रवाह अनवरत जारी रहेगा।

तिल्दा ब्लॉक की इन 50 गांवों को बनेगा शौचालय

प्रशासनिक स्वीकृति के अनुसार सभी 50 ग्राम पंचायतों के विद्यालयों में 01-01 बालिका शौचालय का निर्माण किया जाएगा। ​इस योजना के तहत तिल्दा जनपद क्षेत्र के जिन 50 गांवों के विद्यालयों का चयन किया गया है, उनमें छपोरा, कोहका, मोहरेंगा, खौना, आलेसुर, कोटा, बोईरझीटी, अल्दा, मानपुर, इल्दा, सतभावा, सरोरा, भिंभौरी के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। इसी प्रकार मोतिमपुर कला, सगुनी, खपरीडीह खुर्द (चिंगरिया), ओटगन, सरफोंगा, छतौद, जंजगीरा, रजिया, भड़हा, बुडेरा, खमरिया (कोनारी), चांपा, सिनोधा,भरुवाडीह कला, खैरखूट(बलोदीखुर्द), जलसो के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। सरारीडीह, छच्छानपैरी, किरना, तुलसी(अ), मुड़पार, नहरडीह, कुम्हारी, लखना खपरीकला, मूरा, ताराशिव, असौंदा, केशला, बुड़गहन(सुंदरा), भिलौनी, कठिया, बिठिया, घिवरा, धनसुली, तुलसी मानपुर और कुंदरू के शासकीय विद्यालय में आधुनिक बालिका शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।

क्षेत्र में उत्साह की लहर

​एक साथ 50 गांवों के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में 3.50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की मंजूरी से पूरे तिल्दा क्षेत्र के ग्रामीणों, स्कूली छात्राओं और अभिभावकों में भारी उत्साह है। जनप्रतिनिधियों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा का आभार जताया है।मंत्री वर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना इन्हें निर्धारित समयावधि के भीतर पूर्ण किया जाए।

ग्रामीण अंचल की बेटी बनी प्रेरणा: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सराहा उत्कृष्ट प्रदर्शन

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सुशासन तिहार में मेधावी छात्रा कुसुम लता बिप्रे का सम्मान, टैबलेट देकर बढ़ाया उत्साह

रायपुर- धमतरी जिले के छोटे से ग्राम कंडेल की बेटी कुमारी कुसुम लता बिप्रे ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प से पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षा में 97.40 प्रतिशत अंक अर्जित कर प्रदेश की प्रावीण्य सूची में पांचवां स्थान प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल धमतरी जिले का गौरव बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण अंचल की बेटियों के लिए प्रेरणा की नई मिसाल भी प्रस्तुत की है।

सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत धमतरी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुसुम लता को मंच पर सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने उन्हें शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा आगे की पढ़ाई और तकनीकी शिक्षा में सहयोग के उद्देश्य से टैबलेट प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की बेटियां आज शिक्षा, खेल, विज्ञान और प्रशासन सहित हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और राज्य सरकार उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से निकल रही ऐसी प्रतिभाएं विकसित छत्तीसगढ़ की नई पहचान हैं और सरकार प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कुसुम लता की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि यह ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था, परिवार के संस्कार और विद्यार्थियों की मेहनत का सकारात्मक परिणाम है। साधारण परिवार से आने वाली कुसुम लता ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में आगे बढ़ने का संकल्प हो, तो परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं।

कुसुम लता ने बताया कि उन्होंने नियमित अध्ययन, अनुशासन और परिवार के सहयोग के बल पर यह सफलता हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि से जिले के अन्य विद्यार्थियों में भी शिक्षा के प्रति नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार हुआ है। ग्रामीण अंचल की अनेक बेटियां अब उन्हें अपनी प्रेरणा के रूप में देख रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मेधावी छात्र-छात्राएं राज्य की अमूल्य पूंजी हैं। शासन उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल संसाधन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुसुम लता की उपलब्धि हजारों विद्यार्थियों को यह संदेश देती है कि सपनों की उड़ान गांवों से भी शुरू होकर नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है और प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती।

इस अवसर पर सांसद महासमुंद रूपकुमारी चौधरी, विधायक कुरूद अजय चन्द्राकर, विधायक धमतरी ओंकार साहू, महापौर रामू रोहरा, जिला पंचायत अध्यक्ष अरूण सार्वा सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए डबल इंजन सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में  संकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान, समग्र विकास और सशक्तिकरण के लिए संसद और सभी विधानसभाओं में उनके लिए एक तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को सुदृढ़ करेगी, बल्कि समाज में समान अवसर और संतुलित प्रतिनिधित्व की दिशा में भी एक नई ऊर्जा प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रयासों से देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में सशक्त भूमिका मिलेगी और विकास अधिक समावेशी एवं प्रभावी बनेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की यह पावन धरती माता शबरी, मां दंतेश्वरी और मां महामाया की भूमि है, जहां नारी को सदैव शक्ति के रूप में सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी केवल सम्मान की पात्र नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति की आधारशिला है। नवरात्रि में जिस शक्ति की हम पूजा करते हैं, वही शक्ति समाज में मातृरूप में विद्यमान है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे शास्त्रों में वर्णित “या देवी सर्वभूतेषु मातृ-रूपेण संस्थिता…” केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन का मूल तत्व है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर भक्त माता कर्मा, तीजन बाई, उषा बारले जैसी विभूतियों ने अपनी प्रतिभा और समर्पण से प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया है। साथ ही, रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती और अवंती बाई जैसी वीरांगनाओं के योगदान को भी उन्होंने प्रेरणास्रोत बताया। आधुनिक युग में कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसी महिलाओं ने देश का गौरव वैश्विक स्तर पर बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व का विस्तार समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के कार्यक्षेत्र के विस्तार और जनसंख्या वृद्धि को देखते हुए समय-समय पर व्यवस्थागत सुधार और संतुलन पर विचार करना महत्वपूर्ण है, जिससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और जनसरोकारों के अनुरूप बन सके।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश में महिलाओं के सम्मान, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। स्वच्छता, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन, शिक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। इन प्रयासों ने महिलाओं की गरिमा और आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देना और उनके सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता, स्वरोजगार के अवसर और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है, बल्कि वे समाज की मुख्यधारा से भी अधिक मजबूती से जुड़ रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आवास, पेयजल, आजीविका और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं आज स्व-सहायता समूहों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।

उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाने का एक सशक्त उदाहरण है। बड़ी संख्या में महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में नेतृत्व कर रही हैं और स्थानीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को परिवार और समाज में सशक्त बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक पहल की जा रही हैं, जिससे वे निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मातृशक्ति का सशक्तिकरण केवल एक नीति का विषय नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास का आधार है। उन्होंने सभी वर्गों से इस दिशा में सहयोग और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया, ताकि एक समतामूलक, सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सके।

सुकन्या समृद्धि योजना के 11 वर्ष: करोड़ों बेटियों के सपनों को मिली आर्थिक उड़ान

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8.2% ब्याज दर, 4.53 करोड़ से अधिक खाते और ₹3.33 लाख करोड़ से ज्यादा जमा—बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की सशक्त मिसाल

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) ने 22 जनवरी 2026 को अपने 11 वर्ष पूरे कर लिए। वर्ष 2015 में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत शुरू की गई यह योजना आज देशभर में बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला बन चुकी है। सरकार द्वारा अधिसूचित इस लघु बचत योजना के तहत वर्तमान में 8.2 प्रतिशत की आकर्षक ब्याज दर दी जा रही है, जो बेटियों के लिए समर्पित बचत योजनाओं में सबसे ऊंची दरों में शामिल है।

योजना की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2025 तक इसके अंतर्गत 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं और कुल जमा राशि ₹3.33 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। हर खाता एक परिवार के उस विश्वास का प्रतीक है, जो अपनी बेटी की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सुरक्षित भविष्य के लिए निवेश कर रहा है।

सुकन्या समृद्धि योजना केवल एक वित्तीय योजना नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम है। यह योजना माता-पिता और अभिभावकों को बेटी की शिक्षा और विवाह जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों के लिए समय से बचत करने को प्रेरित करती है। न्यूनतम ₹250 से खाता खोलने की सुविधा, ₹1.5 लाख तक की वार्षिक जमा सीमा, आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत कर लाभ और शिक्षा के लिए आंशिक निकासी जैसी सुविधाएं इसे अत्यंत व्यावहारिक और भरोसेमंद बनाती हैं।

योजना के अंतर्गत खाता बेटी के जन्म से 10 वर्ष की आयु तक खोला जा सकता है और 21 वर्षों में परिपक्व होता है। 18 वर्ष की आयु के बाद उच्च शिक्षा के लिए 50 प्रतिशत तक की राशि निकाली जा सकती है, जिससे बेटियों को अपने सपनों को साकार करने में आर्थिक सहारा मिलता है।

सरकार की यह पहल महिला सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। सुकन्या समृद्धि योजना यह संदेश देती है कि जब एक बेटी सशक्त होती है, तो पूरा परिवार, समाज और देश मजबूत होता है। 11 वर्षों की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि SSY केवल एक योजना नहीं, बल्कि बेटियों के भविष्य में किया गया भरोसेमंद निवेश है।

महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार की व्यापक योजनाएँ: सुरक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय स्वावलंबन पर जोर

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सरकार ने महिलाओं के वित्तीय और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई प्रमुख योजनाएँ लागू की हैं, जिनमें विधवाएँ, एकल माताएँ और कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करने वाली महिलाएँ शामिल हैं। प्रमुख पहल और योजनाएँ इस प्रकार हैं:

1. महिला और बाल विकास मंत्रालय की योजनाएँ (15वीं वित्त आयोग अवधि, 2022-23 से):

  • मिशन शक्ति: महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए।

    • संबल: वन स्टॉप सेंटर (OSC), महिला हेल्पलाइन (WHL-181) जैसी सेवाओं के माध्यम से तत्काल सहायता।

    • समर्थ्य: प्रजनन लाभ (PMMVY), शाक्ति सदन (महिला आश्रय), कृष्णा कुटीर (विधवाओं के लिए घर), सखी निवास (कार्यरत महिलाओं के लिए होस्टल), पालना (डे-केयर), और SANKALP: महिला सशक्तिकरण हब।

  • सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0: बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों (14-18 वर्ष) के लिए पोषण और स्वास्थ्य कार्यक्रम।

  • मिशन वत्सल्य: कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के संरक्षण और कल्याण के लिए।

2. गृह मंत्रालय:

  • एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTU) की स्थापना और सशक्तिकरण।

  • 14,658 महिला हेल्प डेस्क स्थापित, जिनमें 13,743 महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा संचालन।

  • आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली (ERSS-112) और महिला हेल्पलाइन (WHL-181)।

3. आयुष्मान भारत:

  • 55 करोड़ नागरिकों के लिए 1,200+ मुफ्त चिकित्सा पैकेज, जिनमें 141 पैकेज विशेष रूप से महिलाओं के लिए।

  • 1,50,000+ स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र।

  • PMBJK (16,000+) के माध्यम से किफायती दवाइयाँ और स्वास्थ्य सुरक्षा।

4. अन्य सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय सशक्तिकरण पहल:

  • PAN और पासपोर्ट नियमों में संशोधन: एकल माताओं के लिए आसान आवेदन।

  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मुफ्त LPG कनेक्शन।

  • महिलाओं के स्वामित्व वाली सूक्ष्म और लघु उद्यमों से कम से कम 3% केंद्रीय खरीद अनिवार्य।

  • MSME द्वारा कौशल विकास और महिलाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।

  • MUDRA, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, PM SVANidhi, PMEGP और MGNREGS जैसी योजनाओं के माध्यम से रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर।

इन सभी पहलों का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्तीय स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना है।

यह जानकारी महिला और बाल विकास राज्य मंत्री ठाकुर ने आज राज्यसभा में दी।

लड़कियों और महिलाओं के लिए सुरक्षित मासिक धर्म: सरकार की व्यापक स्वच्छता और जागरूकता पहल

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केंद्रीय सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की योजनाओं और पहलों के माध्यम से मासिक धर्म स्वच्छता प्रथाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय किशोर लड़कियों (10–19 वर्ष) में मासिक धर्म स्वच्छता (MH) को बढ़ावा देने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता संवर्धन योजना लागू करता है। इस योजना का उद्देश्य मासिक धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाना, सस्ते और सुरक्षित सैनिटरी नैपकिन तक पहुंच सुनिश्चित करना और पर्यावरण के अनुकूल डिस्पोजल प्रथाओं को प्रोत्साहित करना है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए MH नीति बनाई है, जो विभिन्न मंत्रालयों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई। यह नीति सस्ते MH उत्पादों, लिंग-विशिष्ट शौचालय और सुरक्षित डिस्पोजल सुविधाओं तक पहुंच को सुव्यवस्थित करती है, स्कूल पाठ्यक्रम में MH शिक्षा को शामिल करती है और सभी स्कूलों में संवेदनशीलता और जागरूकता को प्राथमिकता देती है। इसके अलावा, शिक्षक और फ्रंटलाइन वर्कर्स—सहायक नर्स मिडवाइफ (FLW-ANMs), अक्रीडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट (ASHA) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWWs)—को योजना के अंतर्गत उपयुक्त प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके लिए राशि राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के तहत प्रदान की जाती है।

इसके अतिरिक्त, ‘मिशन शक्ति’ के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ (BBBP) घटक का उद्देश्य भी मासिक धर्म और सैनिटरी नैपकिन के उपयोग के प्रति जागरूकता पैदा करना है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार, 15-24 वर्ष की महिलाओं में हाइजेनिक तरीकों का उपयोग करने वाली प्रतिशत संख्या NFHS-4 में 57.6% से बढ़कर NFHS-5 में 77.3% हो गई है।

जल शक्ति मंत्रालय ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म प्रबंधन (MHM) पर जागरूकता पैदा करने के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश विकसित किए हैं। स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ‘समग्र शिक्षा’ योजना के तहत विभिन्न राज्य-विशिष्ट परियोजनाओं के माध्यम से मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार के लिए पहल करता है, जिसमें सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनों और इनसिनरेटर की स्थापना शामिल है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय किशोर लड़कियों की स्वास्थ्य और पोषण स्थिति सुधारने तथा उन्हें स्कूल में लौटने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए किशोरियों की योजना (SAG) लागू करता है।

शिक्षा मंत्रालय ने 07.06.2024 को सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और स्वायत्त निकायों को दिशा-निर्देश जारी किए, जबकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 18.03.2025 को सभी उच्च शिक्षा संस्थानों से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि उनके संस्थानों में सैनिटरी सुविधाओं की उपलब्धता हो।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (MoHFW) नए मासिक धर्म प्रबंधन तरीकों और सैनिटरी नैपकिन के वैकल्पिक सतत विकल्पों पर शोध करता है, ताकि उनकी सुरक्षा, स्वीकार्यता, किफायतीपन और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।

साथ ही, 2015-16 से मासिक धर्म स्वच्छता योजना को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत राज्य कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (PIP) के माध्यम से समर्थन दिया जा रहा है। 2021-22 में लगभग 34.92 लाख किशोर लड़कियों को हर महीने सैनिटरी नैपकिन पैक प्रदान किए गए।

दूसरी ओर, रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत फार्मास्यूटिकल विभाग ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के तहत देशभर में 16,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र स्थापित किए हैं, जो पर्यावरण अनुकूल ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन ‘सुविधा’ प्रति पैड केवल ₹1 में प्रदान करते हैं। ये पैड ASTM D-6954 मानकों के अनुरूप बायोडिग्रेडेबल हैं। 30.11.2025 तक सुविधा नैपकिन की कुल बिक्री 96.30 करोड़ पहुंच चुकी है।

यह जानकारी राज्य मंत्री, महिला एवं बाल विकास सावित्री ठाकुर ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

महिला मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा: भारत सरकार की बहुआयामी पहल

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“जन स्वास्थ्य और स्वच्छता; अस्पताल और डिस्पेंसरी’’ भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में शामिल है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य भी आता है। इसलिए, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों, सामुदायिक देखभाल और पुनर्वास की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।

फिर भी, भारत सरकार राज्य सरकारों का समर्थन करती है और एक व्यापक, बहु-आयामी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाती है, जो अधिकार आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, टेली-मेंटल हेल्थ सेवा, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, कार्यस्थल सुरक्षा उपाय, लिंग-संवेदनशील कानून प्रवर्तन इंटरफेस और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण कार्यक्रमों को जोड़ती है। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं में तनाव को रोकना, कम करना और प्रबंधित करना है।

मुख्य पहल और कार्यक्रम:

  1. केन्द्रीय मार्गदर्शन और प्रशिक्षण:

    • केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के तहत यौन उत्पीड़न रोकथाम, लिंग-संवेदनशीलता, लचीले कार्य समय और आंतरिक शिकायत तंत्र के दिशा-निर्देश।

  2. आपातकालीन सहायता और सुरक्षा:

    • महिला हेल्पलाइन (181), बाल हेल्पलाइन (1098), और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली ERSS-112।

    • ज़ीरो FIR और ई-FIR जैसी सुविधा।

  3. कानूनी और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा:

    • मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017: आत्महत्या के प्रयास को अपराधमुक्त करना, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीकरण और निगरानी।

    • राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) और जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP) के तहत 767 जिलों में सेवाएँ।

    • 1.81 लाख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में अपग्रेड किया गया।

    • टेली-मेंटल हेल्थ कार्यक्रम Tele-MANAS: 53 सेल्स, 20 भाषाओं में सेवा, 29.82 लाख कॉल्स।

  4. महिला सुरक्षा और सहायता:

    • मिशन शक्ति के तहत One Stop Centres (OSC): 864 OSCs, 12.67 लाख महिलाओं को सहायता।

    • महिला हेल्प डेस्क: 14,649 पुलिस स्टेशनों में, महिला अधिकारियों द्वारा संचालित।

    • SHe-Box पोर्टल: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए केंद्रीय मंच।

  5. सुरक्षित कार्यस्थल और रोजगार:

    • चार श्रम संहिता (वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल सुरक्षा और स्वास्थ्य) लागू।

    • समान कार्य के लिए समान वेतन, रात की शिफ्ट और खतरनाक काम में महिलाओं की अनुमति सुरक्षित वातावरण के तहत।

    • कार्यदिवस 8 घंटे और 48 घंटे प्रति सप्ताह, ओवरटाइम स्वीकृति और दोगुना वेतन।

    • निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच।

  6. सामाजिक-सामर्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण:

    • कौशल भारत, उद्यमिता और जीविका कार्यक्रम।

    • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वित्तीय समावेशन, माइक्रोक्रेडिट और स्वयं-सहायता समूह।

इन सभी पहलों को राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर लागू किया जाता है, जो स्वास्थ्य सेवा वितरण के मुख्य एजेंट हैं। केंद्र सरकार नीति मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण, तकनीकी दिशा-निर्देश, वित्तीय सहायता, अंतर-मंत्रालय समन्वय और निगरानी के माध्यम से समर्थन देती है।

इन उपायों का उद्देश्य महिलाओं में तनाव को रोकना और कम करना, समय पर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करना, हिंसा और उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करना और महिलाओं की गरिमा, लचीलापन और कल्याण को बढ़ावा देना है।

सूचना स्रोत: मंत्री राज्य महिला एवं बाल विकास, सवित्री ठाकुर, लोकसभा में आज दिए गए उत्तर के अनुसार।

भारतीय महिलाओं की ब्लाइंड क्रिकेट टीम का ऐतिहासिक कारनामा: पहली T20 वर्ल्ड कप विजेता बनी भारत की शेरनियाँ

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आज एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया, जिसमें भारतीय महिला नेत्रहीन क्रिकेट टीम को नवंबर 2025 में आयोजित प्रथम T20 विश्व कप जीतने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर सम्मानित किया गया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने खिलाड़ियों को सम्मानित किया और उनकी ऐतिहासिक जीत तथा प्रेरणादायी यात्राओं के लिए बधाई दी।

इस अवसर पर मीनाक्षी लेखी, पूर्व विदेश राज्य मंत्री और एसबीआई प्रथम महिला T20 विश्व कप क्रिकेट फॉर द ब्लाइंड की विश्व आयोजन समिति की अध्यक्ष, भी उपस्थित रहीं।

भारतीय महिला नेत्रहीन क्रिकेट टीम, जिसकी कप्तान दीपिका टी.सी. (कर्नाटक) और उप-कप्तान गंगा एस. कदम (महाराष्ट्र) थीं, ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए अजेय रहने का गौरव हासिल किया। टीम ने बेहतरीन सामंजस्य, धैर्य और उत्कृष्टता प्रदर्शित की।

23 नवंबर 2025 (रविवार) को कोलंबो में खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में भारत ने नेपाल को सात विकेट से हराकर खिताब अपने नाम किया। भारत ने नेपाल को 114/5 पर रोका और लक्ष्य को सिर्फ 12.1 ओवर में हासिल कर लिया। इस जीत में टीम की सामूहिक शानदार प्रदर्शन अहम रहा।

  • फूला सरेन ने 27 गेंदों पर 44 रनों की निर्णायक पारी खेलकर प्लेयर ऑफ द मैच पुरस्कार हासिल किया।

  • कप्तान दीपिका टी.सी. ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन ऑल-राउंड प्रदर्शन किया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी यादगार 91 (58 गेंद) की पारी शामिल है।

  • करुणा पांगी कुमारी, जो विशाखापट्टनम की कक्षा 10 की छात्रा हैं, ने फाइनल में संयमित 42 रन बनाकर सबका ध्यान आकर्षित किया।

  • दुर्गा येवले (जन्म 2003), जो एक छोटे शहर से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचीं, ने अपनी मेहनत और लगन से सभी को प्रेरित किया।

टीम को संबोधित करते हुए,अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि यह उपलब्धि “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की भावना को साकार करती है और ऐसे भारत की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करती है जो हर बेटी को सपने देखने, आगे बढ़ने और सफल होने का अवसर देता है।”
उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक क्षण भारत की बेटियों की क्षमता को दर्शाते हैं, जो देश को विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं, जहाँ अवसर समावेशी और सभी के लिए सुलभ हों।

मीनाक्षी लेखी ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि खिलाड़ियों ने बाधाओं को तोड़ते हुए नए मानदंड स्थापित किए हैं। यह जीत दृढ़ निश्चय, प्रतिभा और राष्ट्रीय गौरव का प्रेरणादायी उदाहरण है।

मंत्रालय ने टीम की ऐतिहासिक सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि न केवल महिला नेत्रहीन क्रिकेट के इतिहास में महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की लैंगिक समानता और समावेशी विकास की यात्रा में भी एक अहम मील का पत्थर है।


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