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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की, ‘प्रादेशिक सेना’ की भूमिका पर हुआ मंथन

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ‘प्रादेशिक सेना (Territorial Army)’ के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को प्रादेशिक सेना के उद्देश्य, भूमिका और प्रमुख उपलब्धियों पर विस्तृत जानकारी दी। समिति के सदस्यों ने सेना को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रादेशिक सेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि जहाँ सशस्त्र बलों की मुख्य भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी होती है, वहीं प्रादेशिक सेना पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों में भी उल्लेखनीय योगदान देती है।

उन्होंने कहा, “प्रादेशिक सेना ‘नागरिक-सैनिक’ (Citizen-Soldier) की अवधारणा का जीवंत उदाहरण है। इसके सदस्य अपने नागरिक व्यवसायों के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर वर्दी पहनकर सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व निभाते हैं।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रादेशिक सेना सशस्त्र बलों के लिए अतिरिक्त सैन्य क्षमता (Surge Capacity) तैयार करती है। यह प्रशिक्षित सैनिकों का ऐसा रिजर्व बल है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सेवा अवधि पूरी करने के बाद जब ये सैनिक पुनः नागरिक जीवन में लौटते हैं, तो वे समाज और सेना के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं तथा विशेषकर युवाओं को रक्षा सेवाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं।

वर्तमान में प्रादेशिक सेना में लगभग 44,400 कर्मी और 59 विभिन्न इकाइयाँ हैं। रक्षा मंत्री ने इसे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पहला प्रतिक्रिया बल (First Responders) बताते हुए कहा कि यह राहत एवं बचाव कार्यों तथा चिकित्सा सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने केरल की बाढ़, ओडिशा के चक्रवात तथा हाल ही में असम की बाढ़ के दौरान प्रादेशिक सेना द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की।

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के क्षेत्र में प्रादेशिक सेना के योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्होंने बताया कि इसकी इकोलॉजिकल टास्क फोर्स (Ecological Task Forces) अब तक लगभग 10 करोड़ पौधे लगा चुकी है, जिनकी 80–85 प्रतिशत तक जीवित रहने की दर है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के ‘मिशन LiFE’ और ‘पंचामृत’ लक्ष्यों को धरातल पर साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

रक्षा मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में तैनात प्रादेशिक सेना की ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में निभाई गई भूमिका की भी सराहना की।

बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, रक्षा वित्त सचिव विश्वजीत सहाय तथा रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्चुअली दिखाई PBG सोल्जराथॉन को हरी झंडी, सैनिकों के सम्मान में दौड़े हजारों प्रतिभागी

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (2 अगस्त 2026) राष्ट्रपति भवन के प्रांगण से आयोजित समारोह में प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड (PBG) सोल्जराथॉन को वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम की स्मृति में विशेष डाक आवरण (स्पेशल पोस्टल कवर) का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में मिजोरम के राज्यपाल एवं पहल के संरक्षक जनरल (डॉ.) वी.के. सिंह (सेवानिवृत्त) भी उपस्थित रहे। दौड़ का आयोजन करियप्पा परेड ग्राउंड, दिल्ली कैंट में किया गया।

'Run for Soldiers, Run with Soldiers' की थीम पर आयोजित सोल्जराथॉन का उद्देश्य आम नागरिकों और भारतीय सशस्त्र बलों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाना है। इस वर्ष कार्यक्रम का मुख्य विषय "Supporting Real Heroes – the Armed Forces of India" रखा गया, जिसके माध्यम से देश के वीर सैनिकों के साहस, समर्पण और बलिदान को सम्मान दिया गया तथा नागरिकों से उनके प्रति एकजुटता व्यक्त करने का आह्वान किया गया।

सोल्जराथॉन में प्रतिभागियों के लिए 3 किलोमीटर, 5 किलोमीटर और 10 किलोमीटर की दौड़ आयोजित की गई। बड़ी संख्या में नागरिकों, पूर्व सैनिकों और सैन्य कर्मियों ने इसमें भाग लेकर सैनिकों के प्रति अपना सम्मान और समर्थन व्यक्त किया।

सोल्जराथॉन से प्राप्त आय का उपयोग सशस्त्र बलों के पैराप्लेजिक पुनर्वास केंद्र (Paraplegic Rehabilitation Centre), युद्ध में घायल एवं शहीद सैनिकों के परिवारों और उनके आश्रितों के कल्याण सहित विभिन्न सामाजिक एवं कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जाएगा। वहीं PBG सोल्जराथॉन से प्राप्त सहयोग का उपयोग प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड के घोड़ों और जवानों के कल्याण के लिए किया जाएगा।

यह आयोजन सैनिकों के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और नागरिक-सैन्य सहयोग की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में देश के पहले सैन्य चिकित्सा विभाग का किया उद्घाटन, युद्धक्षेत्र चिकित्सा क्षमता को मिलेगी नई मजबूती

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नई दिल्ली/लखनऊ- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कमांड अस्पताल (मध्य कमान) में सैन्य चिकित्सा विभाग (Department of Military Medicine) का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह देश का पहला समर्पित शैक्षणिक और परिचालन विभाग है, जो विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा पर केंद्रित होगा। यह पहल युद्धक्षेत्र में चिकित्सा तैयारियों को सुदृढ़ करने, अनुसंधान को बढ़ावा देने, स्वदेशी सिद्धांत विकसित करने तथा भविष्य के युद्धक्षेत्रों और मानवीय आपदाओं से निपटने के लिए विशेषज्ञता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सेना चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (DGMS-आर्मी) के अधीन स्थापित यह विभाग सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) की परिचालन चिकित्सा तैयारियों को और मजबूत करेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ उसकी संप्रभुता और प्रगति का मूल आधार उसकी सेना की शक्ति और मनोबल होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नया विभाग सैनिकों को अत्याधुनिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करेगा तथा उनमें यह भरोसा पैदा करेगा कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सर्वोत्तम उपचार और सहयोग मिलेगा।

इन क्षेत्रों पर होगा विशेष फोकस

नया विभाग निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान करेगा:

  • सैन्य आघात (Military Trauma) एवं डैमेज कंट्रोल

  • कॉम्बैट मनोचिकित्सा एवं मानसिक दृढ़ता

  • पर्यावरण एवं परिचालन चिकित्सा

  • सैन्य चिकित्सा लॉजिस्टिक्स

  • रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक (CBRNe) चिकित्सा प्रतिक्रिया

  • आपातकालीन चिकित्सा एवं क्रिटिकल केयर

  • आपदा चिकित्सा

  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)

  • अनुसंधान, ऑडिट एवं डेटा विश्लेषण

इसके साथ ही विभाग तकनीक आधारित युद्धक्षेत्र चिकित्सा, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण, टेलीमेडिसिन, फील्ड केयर और चिकित्सा निर्णय सहायता प्रणाली में नवाचार को भी बढ़ावा देगा।

चरणबद्ध तरीके से होगा विकास

विभाग का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके बाद HADR और CBRNe चिकित्सा के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित किए जाएंगे। भविष्य में इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य चिकित्सा के अग्रणी संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।

सैनिकों के लिए विशेष चिकित्सा प्रोटोकॉल

रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार एयरोस्पेस मेडिसिन अंतरिक्ष यात्रियों और पायलटों की चुनौतियों का अध्ययन करती है, उसी प्रकार सैन्य चिकित्सा युद्ध और युद्ध जैसी परिस्थितियों में मानव शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करती है।

उन्होंने कहा, "हमारे सैनिक दुनिया के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में तैनात रहते हैं। यह विभाग ऐसे परिचालन वातावरण के अनुरूप चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा।"

नई चुनौतियों से निपटने में मददगार

राजनाथ सिंह ने कहा कि पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ व्यापक विनाश के हथियारों (Weapons of Mass Destruction) का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में यह विभाग अनुसंधान एवं विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरती तकनीकी चुनौतियों से निपटने में देश की क्षमता को मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह विभाग आपदा प्रबंधन, फील्ड अस्पताल संचालन, बड़े पैमाने पर हताहतों के प्रबंधन तथा महामारी नियंत्रण में विशेषज्ञता विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

युवाओं के लिए नए अवसर

रक्षा मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह विभाग आर्मी मेडिकल कॉर्प्स के युवा डॉक्टरों को युद्धक्षेत्र नर्सिंग और एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण देगा।

उन्होंने कहा, "अब छात्र सैन्य चिकित्सा में सुपर स्पेशलाइजेशन कर सकेंगे। इससे सेना की बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा भी मजबूत होगी।"

निवारक स्वास्थ्य सेवा पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' यानी निवारक स्वास्थ्य सेवा को उपचार से पहले रक्षा की पहली पंक्ति माना जाना चाहिए।

उन्होंने रोग निगरानी, टीकाकरण, स्वच्छता, पोषण, शारीरिक फिटनेस, व्यावसायिक स्वास्थ्य और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वेयरेबल डिवाइस, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों का उपयोग कर सैनिकों के स्वास्थ्य की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकती है और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान की जा सकती है।

विश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्र बनाने का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सैन्य चिकित्सा विभाग देश की सैन्य सोच में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, "हमें मिलकर इस विभाग को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ 'बैटलफील्ड मेडिसिन रिसर्च सेंटर' बनाना है।"

सरकार के विजन को मिलेगा बल

यह विभाग रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने के सरकार के विजन के अनुरूप है। साथ ही यह रक्षा रणनीति विजन 2026-30 के तहत प्रस्तावित ग्लोबल मिलिट्री मेडिसिन सेंटर की अवधारणा को भी आगे बढ़ाएगा।

इस पहल के साथ सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) को आधुनिक, प्रौद्योगिकी-सक्षम, परिचालन रूप से प्रभावी और रोगी-केंद्रित सैन्य स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है। यह भविष्य की रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की तैयारियों को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का किया शुभारंभ

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का शुभारंभ किया। इनका उद्देश्य अधिकारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना तथा ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले कर्मियों के परिजनों को अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) प्रदान करने की प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना है।

28 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने पिछले पांच दशकों में भारतीय तटरक्षक बल की उत्कृष्ट सेवाओं की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि ये दूरदर्शी नीतियां वर्ष 2027 में बल के स्वर्ण जयंती वर्ष की ओर बढ़ते समय उसके मनोबल और परिचालन क्षमता को और मजबूत करेंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की आधुनिक, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार समुद्री सुरक्षा बल के रूप में भारतीय तटरक्षक बल को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भर्ती और करियर में लैंगिक समानता

पहली नीति के तहत भारतीय तटरक्षक बल में अधिकारियों की भर्ती के लिए लैंगिक-तटस्थ (जेंडर-न्यूट्रल) व्यवस्था लागू की गई है। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं—

  • महिला उम्मीदवारों को पुरुष उम्मीदवारों के समान शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट (SSA) और परमानेंट अपॉइंटमेंट (PA) दोनों में भर्ती का अवसर मिलेगा।

  • पुरुष उम्मीदवारों के लिए भी अब SSA का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

  • प्रशिक्षण के प्रारंभिक चरण से ही महिलाओं और पुरुषों को करियर में समान अवसर प्रदान किए जाएंगे।

  • वर्तमान में कार्यरत PA महिला अधिकारियों को पात्रता की शर्तें पूरी करने पर उच्च पदों पर पदोन्नति का अवसर मिलेगा।

  • SSA पर कार्यरत महिला अधिकारियों को निर्धारित शर्तें पूरी करने पर अपनी सेवा को PA में परिवर्तित करने का विकल्प भी दिया जाएगा।

सरकार ने इस कदम को 'नारी शक्ति' और देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

समुद्र में लापता कर्मियों के परिजनों को त्वरित राहत

दूसरी नीति ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले तटरक्षक कर्मियों के निकटतम परिजनों (Next of Kin - NoK) को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लाई गई है।

इस नीति के तहत ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता हुए तटरक्षक कर्मियों को एक्स-ग्रेशिया के उद्देश्य से 'मृत मान लिया गया' (Presumed Dead) घोषित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।

इस सुधार से अनुग्रह राशि और सेवा-समापन लाभ (टर्मिनल बेनिफिट्स) प्रदान करने की प्रक्रिया तेज और सरल होगी। इससे शोकग्रस्त परिवारों को लंबे समय तक प्रशासनिक प्रक्रियाओं का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें कठिन समय में शीघ्र आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

विश्व रक्तदाता दिवस विशेष-37 अधिकारियों व सैनिकों ने किया रक्तदान

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विश्व रक्तदाता दिवस पर हुआ रक्तदान शिविर का आयोजन 

आरंग- रविवार को विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर कंपोजिट हास्पीटल भिलाई में डीआईजी मेडीकल डाक्टर मनोज कुमार सिन्हा के नेतृत्व में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें सीआरपीएफ कैंप भिलाई के डाक्टरों,अधिकारियों व सैनिकों ने रक्तदान कर लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया।इस अवसर पर डीआईजी मेडीकल डॉक्टर मनीषा गर्ग ने रक्तदाता दिवस मनाये जाने के बारे में जानकारी दी। और कहा रक्तदान- महादान है। इससे अनेकों जरूरतमंदों की जान बचती है। स्वस्थ व्यक्ति द्वारा रक्तदान करने से शरीर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। लोगो में रक्तदान को लेकर तरह तरह के भ्रम है।जिसे हमें दूर करने की आवश्यकता है। शिविर में 37 लोगों ने रक्तदान किया‌।शिविर के आयोजन संयोजन में विशेष सहयोग बालाजी हास्पीटल रायपुर का रहा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सीआरपीएफ के अधिकारी,कर्मचारी व मेडीकल स्टाफ मौजूद रहे।


लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि बने भारत के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ

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भारत सरकार ने एनएस राजा सुब्रमणि , पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किया है। वे भारत सरकार के रक्षा मामलों के विभाग (Department of Military Affairs) में सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे। उनकी नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी। वर्तमान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ  अनिल चौहान, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, एसएम, वीएसएम 30 मई 2026 को अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।

एनएस राजा सुब्रमणि वर्तमान में 01 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे 01 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक उप सेना प्रमुख (Vice Chief of the Army Staff) रहे तथा मार्च 2023 से जून 2024 तक केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर नियुक्त थे।

जनरल अधिकारी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी  के स्नातक हैं। उन्हें 14 दिसंबर 1985 को  गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे यूनाइटेड किंगडम के जॉइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज, ब्रैकनेल तथा राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन से कला में स्नातकोत्तर तथा मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एमफिल की उपाधि प्राप्त की है।

चार दशकों से अधिक लंबे अपने गौरवशाली सैन्य करियर में लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में सेवा दी है तथा अनेक कमांड, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने ऑपरेशन राइनो के तहत असम में आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली, जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड तथा केंद्रीय सेक्टर में 17 माउंटेन डिवीजन का नेतृत्व किया। उन्हें भारतीय सेना की पश्चिमी मोर्चे की प्रमुख स्ट्राइक कोर ‘2 कोर’ की कमान संभालने का गौरव भी प्राप्त है।

जनरल अधिकारी के स्टाफ एवं प्रशिक्षण संबंधी दायित्वों में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में डिविजनल ऑफिसर, माउंटेन ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, कजाकिस्तान में रक्षा अताशे, सैन्य सचिव शाखा में सहायक सैन्य सचिव, पूर्वी कमान मुख्यालय में कर्नल जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस), जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर के डिप्टी कमांडर, रक्षा मंत्रालय (सेना) के एकीकृत मुख्यालय में उप महानिदेशक सैन्य खुफिया, पूर्वी कमान में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस), वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में मुख्य प्रशिक्षक (सेना) तथा उत्तरी कमान मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ जैसे पद शामिल हैं। उन्हें पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं की ऑपरेशनल परिस्थितियों का गहन ज्ञान और व्यापक अनुभव प्राप्त है।

उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जनरल अधिकारी को परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल तथा विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है।

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने त्रिवेंद्रम सैन्य स्टेशन का दौरा कर ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की

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संजय सेठ ने 08 मई 2026 को भारतीय सेना की भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के अंतर्गत आने वाले  त्रिवेंद्रम सैन्य स्टेशन का दौरा किया और वहां की ऑपरेशनल तैयारियों तथा चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा की।

अपने दौरे के दौरान रक्षा राज्य मंत्री ने सैनिकों से संवाद किया और स्टेशन पर लागू की जा रही ऑपरेशनल तैयारियों एवं कल्याणकारी उपायों की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त की। उन्हें युद्धक क्षमता बढ़ाने और संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित प्रमुख ऑपरेशनल, प्रशासनिक तथा आधारभूत संरचना संबंधी पहलों की जानकारी दी गई।

संजय सेठ ने स्टेशन पर तैनात सभी अधिकारियों एवं जवानों द्वारा प्रदर्शित पेशेवर दक्षता, समर्पण और अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने उच्च स्तर की ऑपरेशनल तैयारियों को बनाए रखने के साथ-साथ सशस्त्र बलों के कर्मियों एवं उनके परिवारों के कल्याण और सुख-समृद्धि सुनिश्चित करने के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

रक्षा राज्य मंत्री ने सरकार की उस निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसके तहत आधुनिकीकरण, आधारभूत संरचना विकास तथा सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए सतत कल्याणकारी पहलों के माध्यम से रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है। यह प्रयास तकनीकी रूप से सक्षम और भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना के निर्माण की राष्ट्रीय दृष्टि के अनुरूप है।

भारतीय नौसेना कमांडर्स सम्मेलन 2026 शुरू, भविष्य की रणनीति और सुरक्षा पर मंथन

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नई दिल्ली- Indian Navy का बहुप्रतीक्षित कमांडर्स सम्मेलन 01/2026 नौ सेना भवन में शुरू हो गया। सम्मेलन का उद्घाटन एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी (नौसेना प्रमुख) द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, ऑपरेशनल एवं क्षेत्रीय कमांडर तथा मुख्यालय के अधिकारी शामिल हुए।

नौसेना प्रमुख का संबोधन

अपने उद्घाटन भाषण में नौसेना प्रमुख ने भारत के समुद्री हितों की रक्षा में नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, ऑपरेशनों की बढ़ती गति और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल को बड़ी उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए नौसेना को हर समय युद्ध के लिए तैयार (Combat Ready) रहना चाहिए। साथ ही, आधुनिक तकनीकों को अपनाकर एक “Future Ready Force” तैयार करना समय की आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक दृष्टिकोण

नौसेना प्रमुख ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका को दोहराया। उन्होंने मित्र देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों और सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि एक मजबूत, समन्वित और विश्वसनीय रणनीति विकसित की जा सके।

 सम्मेलन में प्रमुख चर्चाएं

सम्मेलन के दौरान कई अहम विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया—

  • संयुक्त सैन्य संचालन (Joint Operations)

  • समुद्री और तटीय क्षमता में वृद्धि

  • जहाजों की मरम्मत और रखरखाव

  • बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा उपाय

  • प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

  • मानव संसाधन विकास

  • नवाचार और आत्मनिर्भरता (Indigenisation)

 सीडीएस का महत्वपूर्ण संदेश

जनरल अनिल चौहान (Chief of Defence Staff) ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।
उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य और युद्ध के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए नौसेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक और तकनीकी पहलुओं का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है।

निष्कर्ष

भारतीय नौसेना कमांडर्स सम्मेलन 2026 देश की समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक योजना और भविष्य की तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।
इस सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्ष आने वाले समय में भारत की रक्षा रणनीति को और मजबूत बनाएंगे।


भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक-7’ के लिए भारतीय दल रवाना

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भारतीय सेना का दल आज भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ (Exercise DUSTLIK) के 7वें संस्करण में भाग लेने के लिए रवाना हुआ। यह अभ्यास 12 से 25 अप्रैल 2026 तक उज़्बेकिस्तान के नामंगन स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में आयोजित किया जाएगा।

यह अभ्यास हर वर्ष भारत और उज़्बेकिस्तान में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। पिछला संस्करण अप्रैल 2025 में पुणे (औंध) में हुआ था।

दल की भागीदारी

  • भारतीय दल में कुल 60 सैनिक शामिल हैं

    • 45 सैनिक भारतीय सेना (मुख्यतः महार रेजिमेंट से)

    • 15 कर्मी भारतीय वायुसेना

  • उज़्बेकिस्तान की ओर से भी लगभग 60 सैनिक भाग ले रहे हैं

अभ्यास का उद्देश्य

  • दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करना

  • संयुक्त अभियानों में क्षमता और समन्वय बढ़ाना

  • अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में ऑपरेशन की तैयारी

प्रमुख गतिविधियां

  • भूमि नेविगेशन और स्ट्राइक मिशन

  • दुश्मन के ठिकानों पर कार्रवाई

  • विशेष हथियारों के उपयोग का प्रशिक्षण

  • संयुक्त योजना और टैक्टिकल ड्रिल्स

  • 48 घंटे का अंतिम संयुक्त अभ्यास

महत्व

यह अभ्यास दोनों देशों के बीच सैन्य तालमेल, ऑपरेशनल क्षमता और आपसी विश्वास को बढ़ाएगा। साथ ही सैनिकों के बीच सौहार्द और सहयोग को भी मजबूत करेगा, जिससे द्विपक्षीय संबंध और बेहतर होंगे।


लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन ने पूर्वी कमान के जीओसी-इन-सी का संभाला पदभार

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लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन ने पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार संभाल लिया है। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी का स्थान लिया, जो 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

11 जून 1988 को भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल कृष्णन लगभग चार दशकों के समृद्ध और विविध सैन्य अनुभव के साथ इस महत्वपूर्ण कमान की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके करियर में देश के सबसे चुनौतीपूर्ण परिचालन क्षेत्रों में विभिन्न कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी नियुक्तियां शामिल रही हैं।

वे प्रमुख सैन्य संस्थानों के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने सियाचिन जैसे अत्यंत दुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्र में एक इन्फैंट्री बटालियन और इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली है। इसके अलावा, उन्होंने एक इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी कार्य किया और बाद में प्रतिष्ठित ब्रह्मास्त्र कोर की कमान संभाली।

रणनीतिक और संस्थागत स्तर पर उन्होंने रक्षा मंत्रालय (सेना) के एकीकृत मुख्यालय में महानिदेशक सूचना प्रौद्योगिकी के रूप में कार्य किया तथा लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में रक्षा सलाहकार के रूप में भी सेवाएं दीं। वर्तमान पदभार संभालने से पहले वे सेना मुख्यालय में क्वार्टर मास्टर जनरल के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार करते हुए परिचालन क्षमता और युद्धक तैयारियों को सुदृढ़ किया।

लेफ्टिनेंट जनरल कृष्णन ‘डोगरा रेजिमेंट’ और ‘डोगरा स्काउट्स’ के कर्नल के प्रतिष्ठित पद भी संभाल रहे हैं। काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल के कमांडेंट के रूप में उनके कार्यकाल ने विशेष प्रशिक्षण और सैन्य सिद्धांतों के विकास में उच्च मानक स्थापित किए।

पदभार ग्रहण करते हुए उन्होंने शहीद वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की और पूर्वी कमान के सभी रैंकों से उच्चतम स्तर की परिचालन तत्परता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने संयुक्तता को मजबूत करने, तकनीकी एकीकरण को गति देने और सभी हितधारकों के साथ समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि पूर्वी क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह ने पश्चिमी कमान के जीओसी-इन-सी का संभाला पदभार

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लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह, जो पहले सेना के उप प्रमुख (VCOAS) रह चुके हैं, ने 01 अप्रैल 2026 को पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार का स्थान लिया, जो 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेस) के अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह को दिसंबर 1987 में 4वीं बटालियन, पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेस) में कमीशन मिला था। वे भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून और लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं।

लगभग चार दशकों के करियर में उन्होंने विभिन्न कमान और स्टाफ पदों पर सेवाएं दी हैं। उन्होंने उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर उच्च ऊंचाई वाले और संवेदनशील क्षेत्रों में सैन्य इकाइयों का नेतृत्व किया है। उनके परिचालन अनुभव में ऑपरेशन पवन में भागीदारी के साथ-साथ नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई बार आतंकवाद-रोधी अभियानों का संचालन शामिल है।

VCOAS बनने से पहले उन्होंने सेना मुख्यालय में महानिदेशक परिचालन लॉजिस्टिक्स (DGOL) के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने परिचालन गतिशीलता, लॉजिस्टिक्स एकीकरण और स्थायित्व क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। VCOAS के रूप में उन्होंने सेना की संरचना, क्षमता विकास और समग्र परिचालन तैयारी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट, सिकंदराबाद से डिफेंस मैनेजमेंट कोर्स तथा भारतीय लोक प्रशासन संस्थान से एडवांस्ड प्रोफेशनल प्रोग्राम इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन किया है। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में मास्टर डिग्री भी प्राप्त की है। उनके उत्कृष्ट सेवा और वीरता के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और दो सेना मेडल से सम्मानित किया गया है।

पदभार ग्रहण करते हुए उन्होंने उच्च परिचालन तत्परता बनाए रखने, नवाचार को बढ़ावा देने तथा सभी रैंकों के कल्याण और मनोबल को सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह नेतृत्व परिवर्तन भारतीय सेना की निरंतरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उनके नेतृत्व में पश्चिमी कमान बहु-क्षेत्रीय अभियानों, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग, खुफिया-आधारित अभियानों तथा बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान देती रहेगी, साथ ही नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय भी बनाए रखेगी।

एनसीसी आरडीसी में सीडीएस का संबोधन, युवाओं से सशस्त्र बलों में करियर अपनाने की अपील

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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने 13 जनवरी 2026 को दिल्ली कैंट में आयोजित राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) गणतंत्र दिवस शिविर (RDC) का दौरा किया। एनसीसी कैडेट्स और अधिकारियों को संबोधित करते हुए CDS ने लगातार चौथी बार आरडीसी शिविर में शामिल होने पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कैडेट्स के उच्च मानकों और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि हर वर्ष उनमें नई ऊर्जा और देशभक्ति का भाव देखने को मिलता है।

युवाओं के लिए दृष्टि और इच्छाशक्ति के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा,

“यदि आप सही मार्ग चुनते हैं, तो सही मंज़िल तक पहुँचते हैं; आज सही मार्ग चुनना अत्यंत आवश्यक है।”
अपने जीवन और करियर के अनुभव साझा करते हुए CDS ने कैडेट्स को सशस्त्र बलों में करियर अपनाने के लिए प्रेरित किया और 2047 तक समृद्ध, सशक्त और सुरक्षित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा,
“आप ही विकसित भारत के भविष्य के नेता हैं।”

जनवरी माह के महत्व को रेखांकित करते हुए CDS ने इसे राष्ट्रीय गौरव से जुड़े महत्वपूर्ण आयोजनों का महीना बताया। उन्होंने कहा कि जनवरी में

  • 12 जनवरी – राष्ट्रीय युवा दिवस (स्वामी विवेकानंद जयंती),

  • 14 जनवरी – वेटरन्स डे,

  • 15 जनवरी – सेना दिवस,

  • 23 जनवरी – पराक्रम दिवस (नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती),

  • 26 जनवरी – गणतंत्र दिवस (संविधान अंगीकरण दिवस),

  • 30 जनवरी – शहीद दिवस
    मनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी अवसर भारत की स्वतंत्रता, गणतांत्रिक मूल्यों और सच्ची राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रतीक हैं।

CDS ने सेना, नौसेना और वायु सेना विंग के कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत गार्ड ऑफ ऑनर और सैनिक स्कूल घोड़ाखाल, उत्तराखंड के कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत मधुर बैंड प्रदर्शन की प्रशंसा की। युवा कैडेट्स के जोश और ऊर्जा से प्रभावित होकर उन्होंने विविध और जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा ‘फ्लैग एरिया’ के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाने के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने एयरो और नेवल मॉडल्स की ब्रीफिंग, ड्रोन प्रदर्शन में भाग लेने वाले कैडेट्स की भी प्रशंसा की और कहा कि यह उनकी अनुशासनबद्धता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।

अपने संबोधन के समापन में जनरल चौहान ने कैडेट्स से कहा कि वे अपने लक्ष्यों के लिए आज ही कार्य करना शुरू करें, कल का इंतजार न करें, और जीवन में सकारात्मक व आशावादी दृष्टिकोण बनाए रखें।

गोवा में विजय दिवस पर आयोजित हुआ फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल का 53वां संस्करण, सशस्त्र बलों के विशेष साझेदार के रूप में भागीदारी

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आज गोवा के कोंकण तट पर फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल का 53वां संस्करण आयोजित किया गया, जिसमें सशस्त्र बलों ने विशेष साझेदार के रूप में भाग लिया। यह कार्यक्रम विजय दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया।

इस भव्य साइकिलिंग कार्यक्रम ने फिट इंडिया मूवमेंट के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया, क्योंकि इसने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से परे देश के विभिन्न क्षेत्रों में इस फिटनेस पहल के विस्तार का संकेत दिया।

कार्यक्रम ने फिट इंडिया मूवमेंट की बढ़ती गति को प्रदर्शित किया और इसके उद्देश्य को फिर से रेखांकित किया कि फिटनेस को जन आंदोलन के रूप में बढ़ावा देना है।

साइकिल रैली मिरामार बीच सर्किल से शुरू हुई और डोना पौला तक का मनोरम मार्ग तय किया, जिसमें नागरिकों, रक्षा कर्मियों, एनसीसी कैडेटों, एथलीटों, कलाकारों और फिटनेस उत्साही लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

सुबह के कार्यक्रम में योग प्रदर्शन, ज़ुम्बा सत्र, लाइव गोवा संगीत और बड़े पैमाने पर जन सहभागिता शामिल थी, जिसने यह संदेश दिया कि फिटनेस समावेशी, आनंददायक और सतत हो सकती है।

कार्यक्रम में डॉ. रमेश तवाडकर, माननीय खेल मंत्री, गोवा सरकार, संतोश गुनवनत्राव सुखदेव, IAS, सचिव (खेल), गोवा सरकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही।

कई प्रतिष्ठित हस्तियों, जिनमें अभिनेता, खेलकर्मी, रक्षा कर्मी और फिट इंडिया एंबेसडर शामिल थे, ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।

डॉ. रमेश तवाडकर ने सभा को संबोधित करते हुए अपनी दो दशकों से अधिक की शारीरिक शिक्षा शिक्षक और साइकिलिंग उत्साही के रूप में यात्रा साझा की। उन्होंने खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और फिटनेस की संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कई यूरोपीय देशों में साइकिलिंग दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है और भारत में भी इसी तरह की संस्कृति विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब बड़ी संख्या में लोग फिटनेस को जीवनशैली के रूप में अपनाते हैं, तो स्थायी व्यवहारिक परिवर्तन संभव है।

उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि और माननीय केंद्रीय युवा मामलों और खेल मंत्री के नेतृत्व में राज्यों में नियमित संडे ऑन साइकिल को बढ़ावा देने के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में प्रमुख हस्तियों ने भी भाग लिया, जिनमें तेलुगु फिल्म अभिनेता मन्चु मनोज कुमार, अभिनेता मोहम्मद अली, सुभेदार मनीष कौशिक, अर्जुन पुरस्कार विजेता ब्रूनो कौतिन्हो, पद्म और अर्जुन पुरस्कार विजेता ब्रह्मानंद सांखवालकर, और पूर्व भारतीय महिला फुटबॉल टीम की मुख्य कोच मेमोल रॉकी शामिल थे।

अभिनेता मोहम्मद अली ने इस अवसर पर सभी पृष्ठभूमियों के लोगों को फिटनेस के लिए एक साथ आते देखकर खुशी व्यक्त की और नागरिकों को स्वस्थ राष्ट्र की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करने की पहल की सराहना की।

अभिनेता मन्चु मनोज कुमार ने फिटनेस बनाए रखने के लिए अनुशासन और निरंतरता के महत्व पर विचार साझा किए और फिट इंडिया मूवमेंट की सराहना की, जिसने युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने देशभर में फिटनेस-प्रधान पहलों को बढ़ावा देने के लिए माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व की भी प्रशंसा की।

एनसीसी इकाइयों, सशस्त्र बलों के प्रतिनिधियों, फिट इंडिया एंबेसडर और फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स की सक्रिय भागीदारी के साथ, गोवा में फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल का 53वां संस्करण सामुदायिक-चालित फिटनेस पहलों के प्रभाव को प्रदर्शित करता है, जिसे नेतृत्व और सामूहिक भागीदारी द्वारा समर्थित किया गया।

यह पहल योगासना भारत और माय भारत के नियमित साझेदारों के साथ आयोजित की जाती है, जो देशव्यापी फिटनेस और कल्याण को बढ़ावा देने के प्रयासों को और मजबूत करती है।

आर्मी हॉस्पिटल (R&R) में आठवें बैच की 29 सैन्य नर्सिंग कैडेट्स का कमीशनिंग समारोह आयोजित

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आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रिफरल) की कॉलेज ऑफ नर्सिंग ने 04 नवंबर, 2025 को अपने आठवें बैच के 29 सैन्य नर्सिंग कैडेट्स के कमीशनिंग समारोह का आयोजन किया। यह समारोह आर्मी हॉस्पिटल (R&R) में आयोजित हुआ। चार वर्षों की कठोर शिक्षा और प्रशिक्षण की परिणति के रूप में, नव-नियुक्त नर्सिंग अधिकारियों को प्रिंसिपल मैट्रन द्वारा शपथ दिलाई गई कि वे स्वयं को दयालु और समर्पित सेवक के रूप में राष्ट्र की सेवा में समर्पित करेंगी।

इस अवसर पर समारोह की समीक्षा लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास, कमांडेंट, आर्मी हॉस्पिटल (R&R) ने की। अपने संबोधन में उन्होंने मिलिटरी नर्सिंग सर्विस की 100 वर्षों की गौरवशाली परंपरा और विरासत को बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और शांतिपूर्ण सैन्य स्टेशनों पर सैनिकों और उनके परिवारों को दी जा रही नर्सिंग सेवाओं की सराहना की।

लेफ्टिनेंट जनरल दास ने कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसिपल और उनके दल के अथक प्रयासों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने उच्च गुणवत्ता वाली नर्सिंग शिक्षा और प्रशिक्षण सुनिश्चित किया।

इस अवसर पर अनेक अधिकारी, नर्सिंग अधिकारी और नव-नियुक्त नर्सिंग अधिकारियों के अभिभावक उपस्थित रहे।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भूतपूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए वित्तीय सहायता में 100% वृद्धि को मंजूरी दी

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भूतपूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen – ESM) और उनके आश्रितों के लिए केंद्रीय सैनिक बोर्ड (Kendriya Sainik Board) के माध्यम से भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग (Department of Ex-Servicemen Welfare) द्वारा संचालित योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता में 100 प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दी है।

मंजूर की गई संशोधित सहायता दरें इस प्रकार हैं —

  • दरिद्रता अनुदान (Penury Grant): ₹4,000 प्रति माह से बढ़ाकर ₹8,000 प्रति माह कर दिया गया है। यह सहायता 65 वर्ष से अधिक आयु के गैर-पेंशनधारी भूतपूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं को आजीवन प्रदान की जाएगी, जिनकी कोई नियमित आय नहीं है।

  • शिक्षा अनुदान (Education Grant): ₹1,000 प्रति माह प्रति छात्र से बढ़ाकर ₹2,000 प्रति माह कर दिया गया है। यह सहायता अधिकतम दो आश्रित बच्चों (कक्षा 1 से स्नातक स्तर तक) या दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम कर रही विधवाओं के लिए लागू होगी।

  • विवाह अनुदान (Marriage Grant): ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 प्रति लाभार्थी कर दिया गया है। यह सहायता अधिकतम दो पुत्रियों के विवाह या विधवा पुनर्विवाह के लिए लागू होगी, बशर्ते विवाह इस आदेश के जारी होने के बाद संपन्न हुआ हो।

संशोधित दरें 1 नवंबर 2025 से जमा किए जाने वाले आवेदनों पर लागू होंगी। इन संशोधनों से प्रतिवर्ष लगभग ₹257 करोड़ का वित्तीय व्यय अनुमानित है, जो Armed Forces Flag Day Fund (AFFDF) से वहन किया जाएगा।

ये सभी योजनाएँ रक्षा मंत्री भूतपूर्व सैनिक कल्याण कोष (Raksha Mantri Ex-Servicemen Welfare Fund) के अंतर्गत वित्तपोषित हैं, जो AFFDF का ही एक भाग है।

यह निर्णय गैर-पेंशनधारी भूतपूर्व सैनिकों, विधवाओं और निम्न-आय वर्ग के आश्रितों के लिए सामाजिक सुरक्षा जाल को और मजबूत करता है तथा यह सरकार की पूर्व सैनिकों की सेवा और त्याग का सम्मान करने की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ करता है।


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