Media24Media.com: पति को छुड़ाने थाने पहुंची महिला से सरकारी आवास में गैंगरेप, 11 साल बाद दो पुलिसकर्मियों को 20-20 साल की जेल

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पति को छुड़ाने थाने पहुंची महिला से सरकारी आवास में गैंगरेप, 11 साल बाद दो पुलिसकर्मियों को 20-20 साल की जेल

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 सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद थाने से जुड़े 11 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की गुहार लेकर थाने पहुंची महिला के साथ तत्कालीन थाना प्रभारी के सरकारी आवास में गैंगरेप करने के मामले में कोर्ट ने दो पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के न्यायाधीश प्रबोध कुमार वर्मा ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों पर जुर्माना भी लगाया और उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया।


इस मामले में दोषी ठहराए गए तत्कालीन थाना प्रभारी बृजमोहन यादव अब सीओ के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि तत्कालीन एसएसआई वेदपाल सिंह उर्फ वेगपाल सिंह वर्तमान में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी तैनाती फिरोजाबाद में बताई गई है।

थानेदार के सरकारी आवास में महिला से हुआ था सामूहिक दुष्कर्म

मामला 6 अगस्त 2015 का है। पीड़िता अपने पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की उम्मीद लेकर देवबंद थाने पहुंची थी। आरोप था कि तत्कालीन थाना प्रभारी बृजमोहन यादव के सरकारी आवास में महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। विरोध करने और घटना की जानकारी किसी को देने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।

इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी बृजमोहन यादव और एसएसआई वेदपाल सिंह को अदालत ने दोषी करार दिया है।

गैंगरेप में 20 साल की सजा, दोनों पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के अपराध में भारतीय दंड संहिता की धारा 376डी के तहत दोनों दोषियों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

वहीं, जान से मारने की धमकी देने के मामले में धारा 506 के तहत पांच-पांच साल के साधारण कारावास और 20-20 हजार रुपये के अतिरिक्त जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों धाराओं की सजाएं एक साथ चलेंगी।

कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 के तहत आदेश दिया है कि गैंगरेप के मामले में वसूले जाने वाले जुर्माने की पूरी रकम पीड़िता को मुआवजे के रूप में दी जाएगी। धमकी देने के मामले में लगाए गए जुर्माने की 75 प्रतिशत राशि भी पीड़िता को मिलेगी। शेष रकम सरकारी खजाने में जमा होगी। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

थाने से एसएसपी तक लगाई गुहार, हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR

पीड़िता के लिए न्याय की लड़ाई आसान नहीं रही। पीड़िता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता राजीव तोमर और जपनीत सिंह छाबड़ा के मुताबिक, घटना के बाद महिला ने स्थानीय पुलिस से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत की, लेकिन आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

30 नवंबर 2015 को तत्कालीन एसएसपी को रजिस्टर्ड डाक के जरिए शिकायत भेजी गई, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़िता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। करीब दो साल की कानूनी लड़ाई के बाद 7 नवंबर 2017 को हाईकोर्ट के आदेश पर चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई।

जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद भी पीड़िता ने हार नहीं मानी। उसने प्रोटेस्ट पिटीशन और परिवाद के जरिए अदालत में अपनी लड़ाई जारी रखी।

500 से ज्यादा तारीखें, परिवार पर 10 बार हमले का आरोप

करीब 11 साल तीन महीने तक चले इस मुकदमे में 500 से अधिक तारीखें पड़ीं और आठ गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अधिवक्ताओं के अनुसार, इस दौरान पीड़ित परिवार को लगातार दबाव और परेशानियों का सामना करना पड़ा।

परिवार का आरोप है कि मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से उसके सदस्यों पर करीब 10 बार हमले और मारपीट की गई। इसके अलावा पीड़ित परिवार के खिलाफ पांच से अधिक मुकदमे भी दर्ज कराए गए। तमाम मुश्किलों के बावजूद महिला अपनी गवाही पर कायम रही।

फैसले के दिन भी परिवार को सता रहा था हमले का डर

मुकदमे के दौरान हुए कथित हमलों के कारण पीड़ित परिवार शुक्रवार को फैसले के दिन भी दहशत में था। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि सुरक्षा की मांग को लेकर पुलिस अधिकारियों को फोन किया गया, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं की।

परिवार के मुताबिक, शुक्रवार सुबह 8 बजकर 53 मिनट पर देवबंद कोतवाली के सीयूजी नंबर पर तीन बार फोन किया गया। शुरुआत में कॉल रिसीव नहीं हुई और बाद में नंबर ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद परिवार ने रास्ता बदलकर सहारनपुर कचहरी पहुंचने का फैसला किया।

आखिरकार अदालत के फैसले के साथ महिला की 11 साल से अधिक लंबी कानूनी लड़ाई का अहम पड़ाव पूरा हुआ और दोनों दोषियों को जेल भेज दिया गया।

2015 से 2026 तक ऐसे चली इंसाफ की लड़ाई

  • 6 अगस्त 2015: देवबंद थाने में पति को छुड़ाने पहुंची महिला के साथ सरकारी आवास में सामूहिक दुष्कर्म की घटना।

  • 30 नवंबर 2015: तत्कालीन एसएसपी को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी गई।

  • 7 नवंबर 2017: इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।

  • 2017 से 2026: सीबीसीआईडी जांच, प्रोटेस्ट पिटीशन और अदालत में लंबी सुनवाई चली। 500 से अधिक तारीखें पड़ीं और आठ गवाहों के बयान दर्ज हुए।

  • 6 नवंबर 2026: फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने बृजमोहन यादव और वेदपाल सिंह को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

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