Media24Media.com: असम में ऑयल इंडिया की फैक्ट्री में भीषण आग: चार अधिकारियों पर गिरी गाज, हादसे में मौतों का आंकड़ा बढ़कर 4 हुआ

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असम में ऑयल इंडिया की फैक्ट्री में भीषण आग: चार अधिकारियों पर गिरी गाज, हादसे में मौतों का आंकड़ा बढ़कर 4 हुआ

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असम से एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई है। यहां ऑयल इंडिया लिमिटेड के औद्योगिक परिसर में हुए भीषण विस्फोट और आग की घटना ने चार कर्मचारियों की जान ले ली है। इस हादसे के बाद अब कंपनी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।

निलंबित किए गए लोगों में तीन अधिकारी और एक कर्मचारी शामिल हैं। कंपनी ने इनके खिलाफ आधिकारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में कथित लापरवाही का आरोप लगाया है।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऑयल इंडिया के परिसर में इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ? क्या रखरखाव के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया था? और इस घटना के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी? फिलहाल मामले की जांच जारी है।

6 नवंबर की सुबह हुआ था भीषण हादसा

दरअसल, यह घटना 6 नवंबर 2026, शुक्रवार की सुबह करीब 9 बजकर 5 मिनट पर असम के डिब्रूगढ़ जिले के तेंगाखाट स्थित ऑयल इंडिया लिमिटेड के इंटरमीडिएट टैंक फार्म यानी ITF परिसर में हुई।

जानकारी के मुताबिक, परिसर में स्थित इंडायरेक्ट बाथ हीटर यानी IBH यूनिट में रखरखाव का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक विस्फोट हुआ और देखते ही देखते वहां आग फैल गई।

बताया गया है कि संबंधित IBH क्षेत्र को 4 नवंबर से ही रखरखाव कार्य के लिए अलग किया गया था।

हादसे के समय वहां ऑपरेशन और मेंटेनेंस का काम करने वाली ठेका कंपनी के कर्मचारी मौजूद थे।

सात कर्मचारी झुलसे, अब तक चार की मौत

इस भीषण आग की चपेट में आने से कुल सात कर्मचारी झुलस गए थे। इनमें से एक कर्मचारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

शुरुआत में घायलों को डिब्रूगढ़ के असम मेडिकल कॉलेज अस्पताल और ऑयल इंडिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गंभीर स्थिति को देखते हुए कुछ घायलों को बाद में दूसरे अस्पतालों में भी स्थानांतरित किया गया।

हादसे के बाद एक-एक कर घायलों की मौत की खबर सामने आती रही।

मृतकों में राजू दत्ता, तपस ज्योति गोगोई, रूपम गोहाई और सैलेन गोगोई के नाम सामने आए हैं।

रूपम गोहाई को गंभीर हालत में डुलियाजान से गुवाहाटी के नेमकेयर अस्पताल में शिफ्ट किया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई।

रविवार को सैलेन गोहाई के निधन के बाद इस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई।

वहीं, तीन अन्य घायल कर्मचारियों की हालत भी गंभीर बताई गई है।

तीन अधिकारी और एक कर्मचारी निलंबित

हादसे के बाद ऑयल इंडिया लिमिटेड ने चार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।

कंपनी के प्रवक्ता प्रंकुश मल्ला बुजरबरुआ के मुताबिक, निलंबित किए गए चार लोगों में तीन अधिकारी और एक कर्मचारी शामिल हैं।

इन पर आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में कथित लापरवाही का आरोप है।

हालांकि, कंपनी की इस कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि जांच में इन सभी की जिम्मेदारी अंतिम रूप से साबित हो चुकी है। हादसे के वास्तविक कारण और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच जारी है।

आग बुझाने के लिए लगानी पड़ीं 11 दमकल गाड़ियां

घटना के बाद ऑयल इंडिया के अग्निशमन विभाग ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।

कंपनी के फिक्स्ड फायर फाइटिंग सिस्टम को सक्रिय किया गया। इसके अलावा दमकल वाहनों और ड्राई केमिकल पाउडर टेंडर की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, आग पर काबू पाने के लिए कुल 11 दमकल गाड़ियों को लगाया गया। दोपहर करीब 12 बजकर 30 मिनट तक आग बुझा दी गई और स्थिति नियंत्रण में आ गई।

कंपनी ने किया मुआवजे का ऐलान

इस हादसे के बाद ऑयल इंडिया लिमिटेड ने मृतकों के परिवारों के लिए 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायल कर्मचारियों के लिए 5-5 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है।

कंपनी की ओर से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की गई है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना। उन्होंने ऑयल इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत कर घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने और मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की बात कही।

उन्होंने हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय जांच कराने की जरूरत भी बताई।

जांच के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव प्रक्रिया

इस हादसे के बाद औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

ऑयल इंडिया ने घटना की जांच के लिए एक आंतरिक जांच समिति गठित की है। समिति को विस्फोट और आग के तत्काल तथा मूल कारणों का पता लगाने, नुकसान का आकलन करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई है।

वहीं, राज्यसभा सांसद तेराश गोवाला ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रखरखाव के दौरान आखिर ऐसा क्या हुआ, जिसके कारण विस्फोट और आग की इतनी बड़ी घटना हुई? क्या सुरक्षा मानकों में कोई कमी थी या फिर किसी तकनीकी खराबी के कारण यह हादसा हुआ?

इन सभी सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।


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