Media24Media.com: शारदीय नवरात्र आज से शुरू, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मां दुर्गा के मंत्र

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शारदीय नवरात्र आज से शुरू, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मां दुर्गा के मंत्र

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नवरात्र के पहले दिन होगी मां शैलपुत्री की पूजा, सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक घटस्थापना का मुहूर्त; जानें पूजन सामग्री, राहुकाल और नौ दिनों की आराधना से जुड़ी खास बातें


शक्ति की उपासना, भक्ति और साधना का महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। अगले नौ दिनों तक देशभर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना के साथ कलश स्थापना की जाती है। श्रद्धालु घरों और मंदिरों में घटस्थापना कर अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं और नौ दिनों तक व्रत रखकर माता की पूजा का संकल्प लेते हैं।

हिंदू पंचांग में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्र का आरंभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में मां दुर्गा की उपासना करने से सुख-समृद्धि, शांति और आरोग्य की कामना की जाती है। ऐसे में नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना से पहले शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और आवश्यक नियमों की जानकारी होना जरूरी है।

शारदीय नवरात्र 2026: प्रतिपदा तिथि और घटस्थापना का समय

पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर शारदीय नवरात्र का आरंभ 11 अक्टूबर से माना जा रहा है।

दिल्ली के पंचांग के अनुसार, नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के लिए सुबह का प्रमुख शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक बताया गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है।

कलश स्थापना के प्रमुख मुहूर्त

  • सुबह का शुभ मुहूर्त: सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक

ध्यान दें कि ये समय दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं। छत्तीसगढ़ सहित अन्य शहरों में स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है। पूजा शुरू करने से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि जरूर करें।

नवरात्र के पहले दिन शुभ चौघड़िया मुहूर्त

पंचांग में शुभ चौघड़िया के अंतर्गत कुछ समय इस प्रकार बताए गए हैं:

  • चर: सुबह 7:33 बजे से 9:00 बजे तक
  • लाभ: सुबह 9:00 बजे से 10:28 बजे तक
  • अमृत: सुबह 10:28 बजे से 11:56 बजे तक
  • शुभ: दोपहर 1:24 बजे से 2:51 बजे तक

चौघड़िया के समय भी स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। घटस्थापना के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए विशेष मुहूर्त को प्राथमिकता दें।

नवरात्र के पहले दिन राहुकाल का समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल में शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से परहेज किया जाता है। दिए गए पंचांग के मुताबिक, 11 अक्टूबर को राहुकाल शाम 4 बजकर 34 मिनट से 6 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। इस समय में कलश स्थापना करने के बजाय शुभ मुहूर्त में पूजा करना बेहतर माना जाता है।

कलश स्थापना की पूजा विधि: इन चरणों में करें घटस्थापना

नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ देवी आराधना का संकल्प लिया जाता है। पूजा के लिए सबसे पहले घर के पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

इसके बाद इन विधियों का पालन करें:

  1. जौ बोएं: मिट्टी के साफ पात्र में मिट्टी डालकर जौ बो दें। नवरात्र के नौ दिनों तक जौ की देखभाल करें।

  2. कलश तैयार करें: कलश में स्वच्छ जल भरें। परंपरा के अनुसार इसमें अक्षत, सुपारी, सिक्का और गंगाजल डाल सकते हैं।

  3. कलश सजाएं: कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं और उसके ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें।

  4. कलश स्थापित करें: तैयार कलश को जौ वाले पात्र के पास पूजा स्थल पर रखें।

  5. मां दुर्गा का पूजन करें: मां शैलपुत्री का ध्यान करते हुए फूल, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

  6. आरती और संकल्प: पूजा के अंत में मां दुर्गा की आरती करें और नौ दिनों तक श्रद्धापूर्वक पूजा करने का संकल्प लें।

पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुरूप पूजा करना उचित रहेगा।

कलश स्थापना के लिए जरूरी पूजा सामग्री

घटस्थापना से पहले सभी पूजन सामग्री एक जगह तैयार कर लें। इसके लिए मिट्टी का पात्र, साफ मिट्टी, जौ, कलश, स्वच्छ जल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत, सुपारी, सिक्का और गंगाजल की आवश्यकता होती है। इसके अलावा फूल, माला, धूप, दीपक, घी, फल, मिठाई और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर भी रख सकते हैं।

यदि अखंड ज्योति जला रहे हैं, तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखें और आग से संबंधित सावधानियों का पालन करें।

नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व

मां शैलपुत्री को देवी दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। इसी कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। नवरात्र के पहले दिन इनकी पूजा से नौ दिवसीय देवी आराधना की शुरुआत होती है।

मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ यानी बैल है। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल सुशोभित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री को गाय के घी का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु आरोग्य, सुख और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की कामना के साथ उनकी पूजा करते हैं।

मां दुर्गा की आराधना के लिए पढ़ें ये मंत्र

नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप किया जाता है। पूजा के समय इन प्रचलित मंत्रों का पाठ कर सकते हैं।

1. मां दुर्गा का सर्वमंगल मंत्र

ॐ सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥

2. विजय और यश की कामना का मंत्र

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

3. देवी चंडिका की स्तुति

स्तुवद्भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि।

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

4. रोगों से मुक्ति की कामना का मंत्र

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा, रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां, त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

5. मां जगदंबा से कृपा की प्रार्थना

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य।

प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥

मंत्रों के पाठ में शुद्ध उच्चारण का ध्यान रखें। श्रद्धालु अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं।

नवरात्र के नौ दिन क्यों हैं खास?

शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की क्रमशः पूजा की जाती है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार उपवास रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और सात्विक आहार अपनाते हैं। अष्टमी और नवमी के अवसर पर विशेष पूजन, हवन और कन्या पूजन की परंपरा है। नवरात्र के समापन पर विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाता है।

नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि संयम, आत्मशुद्धि, सेवा और सकारात्मक जीवन का संदेश भी देता है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

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