Media24Media.com: शरद पूर्णिमा आज: रात में क्यों की जाती है मां लक्ष्मी की पूजा? जानें धार्मिक मान्यता

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शरद पूर्णिमा आज: रात में क्यों की जाती है मां लक्ष्मी की पूजा? जानें धार्मिक मान्यता

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Sharad Purnima 2026 Puja Vidhi: शरद पूर्णिमा का पर्व आज, 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने, मंत्र जाप करने और दीपदान करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस अवसर पर घरों में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के साथ खीर का भोग लगाने की परंपरा भी है।

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने और मां लक्ष्मी का स्मरण करने से परिवार में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है। ऐसे में अगर आप भी इस दिन पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री, पूजा की विधि और मां लक्ष्मी के प्रभावशाली मंत्र।

शरद पूर्णिमा 2026 का शुभ मुहूर्त

पंचांग में शरद पूर्णिमा की तिथि और चंद्रोदय के समय का विशेष महत्व माना जाता है। दिए गए विवरण के अनुसार पूजा के प्रमुख समय इस प्रकार हैं:

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 25 अक्टूबर 2026, सुबह 11:55 बजे

  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 अक्टूबर 2026, सुबह 9:41 बजे

  • चंद्रोदय का समय: शाम करीब 5 बजे

  • निशीथ काल में पूजा: रात 11:40 बजे से मध्यरात्रि के बाद तक

पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग में समय की पुष्टि कर लें।

मां लक्ष्मी की पूजा के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए?

शरद पूर्णिमा पर पूजा करने के लिए कुछ आवश्यक सामग्री पहले से तैयार रखनी चाहिए। इसमें मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर, लाल या पीला कपड़ा, चौकी, रोली, अक्षत, मौली, सुपारी, पान, लौंग, इलायची, फूल, घी का दीपक, धूप, कपूर, शंख और पूजा के लिए जल शामिल हैं।

इसके अलावा भोग के लिए खीर, मखाने, बताशे या अन्य मिठाई रख सकते हैं। मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी को कमल का फूल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा कैसे करें?

1. स्नान कर पूजा का संकल्प लें: सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद श्रद्धानुसार व्रत रखने और मां लक्ष्मी की पूजा करने का संकल्प लें।

2. चौकी पर स्थापित करें मां लक्ष्मी की प्रतिमा: शाम को पूजा स्थल की सफाई करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

3. विधि-विधान से करें पूजन: मां लक्ष्मी को रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर धूप दिखाएं और श्रद्धापूर्वक पूजा करें।

4. खीर का भोग लगाएं: शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने और उसका भोग लगाने की परंपरा है। कई परिवार खीर को कुछ समय के लिए चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं। इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

5. करें मंत्र जाप और आरती: पूजा के दौरान मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें। अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण भी कर सकते हैं।

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी के कौन से मंत्र का जाप करें?

शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की आराधना के लिए इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है।

मां लक्ष्मी का मंत्र

ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः।

महालक्ष्मी बीज मंत्र

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

चंद्र देव का मंत्र

ॐ सों सोमाय नमः।

श्रद्धालु इनमें से किसी एक मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं। मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखें और श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी का स्मरण करें।

शरद पूर्णिमा की रात क्यों मानी जाती है खास?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की आराधना और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। इसे कोजागरी पूर्णिमा इसलिए भी कहा जाता है, क्योंकि इससे जुड़ी परंपरा में रात के समय जागकर मां लक्ष्मी का स्मरण किया जाता है।

इस दिन भक्त पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य के माध्यम से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। हालांकि, ये धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं पर आधारित मान्यताएं हैं। पूजा का उद्देश्य श्रद्धा, मानसिक शांति और परिवार की खुशहाली की कामना करना है।

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