Media24Media.com: तूता में पुरानी पेंशन सत्याग्रह, आरंग के सैकड़ों शिक्षक हुए शामिल; प्रथम सेवा गणना की उठी मांग

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तूता में पुरानी पेंशन सत्याग्रह, आरंग के सैकड़ों शिक्षक हुए शामिल; प्रथम सेवा गणना की उठी मांग

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आरंग- गांधी जयंती के अवसर पर प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ के बैनर तले राजधानी रायपुर के तूता स्थित धरना स्थल पर एक दिवसीय पुरानी पेंशन सत्याग्रह का आयोजन किया गया। सत्याग्रह में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। इसी क्रम में विकासखंड आरंग से भी सैकड़ों शिक्षकों ने धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।

शिक्षकों ने प्रथम सेवा की गणना कर पुरानी पेंशन का लाभ देने तथा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की बाध्यता से मुक्ति सहित विभिन्न मांगों को लेकर गांधीवादी तरीके से सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

आरंग से बड़ी संख्या में शिक्षक हुए शामिल

सत्याग्रह में आरंग विकासखंड के प्रवक्ता पं. छत्रधर दीवान, अध्यक्ष जग्गुराम साहू, हरीश दीवान, जितेंद्र शुक्ला, शिक्षक कल्याण संघ के जिलाध्यक्ष कुंभज सोनवानी, टीकाराम साहू, युवराम साहू, मनीराम साहू, नरेश कोसले, हेमलाल वर्मा, श्रवण डहरिया, गंगा प्रसाद सेन, आत्माराम निषाद, दिलीप चंद्राकर, खेदूराम चंद्राकर, लीलाधर साहू, ठाकुर राम साहू और हेमंत साहू सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।

शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को शासन तक पहुंचाने और सेवा अवधि की गणना से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।

पूर्व सेवा की गणना नहीं होने से पेंशन को लेकर चिंता

संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए बुढ़ापे की लाठी के समान होती है। उनका आरोप है कि संविलियन के बाद पेंशन निर्धारण में पूर्व सेवा अवधि को शून्य मानकर 1 जुलाई 2018 को आधार बनाया जा रहा है।

शिक्षक संघ का कहना है कि इससे कई सेवानिवृत्त शिक्षकों को मिलने वाली पेंशन काफी कम रह गई है। संघ के अनुसार कुछ सेवानिवृत्त शिक्षकों को करीब 2,500 से 2,700 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिल रही है, जिसे वर्तमान महंगाई के दौर में परिवार के भरण-पोषण और सम्मानजनक जीवन के लिए अपर्याप्त बताया गया है।

महंगाई और इलाज के खर्च का भी उठाया मुद्दा

सत्याग्रह के दौरान शिक्षकों ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति और बढ़ती महंगाई को लेकर भी चिंता जताई। संघ का कहना है कि वृद्धावस्था में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं और महंगे इलाज का खर्च उठाना कठिन हो जाता है।

शिक्षकों के अनुसार, सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर अपने परिवार के साथ सामाजिक जिम्मेदारियां भी होती हैं। ऐसे में पर्याप्त पेंशन नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं।

तहसीलदार के माध्यम से शासन को सौंपा ज्ञापन

प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ ने अपनी मांगों को लेकर तहसीलदार के माध्यम से राज्य शासन के नाम ज्ञापन सौंपा। संघ ने कहा कि वह गांधीजी के विचारों के अनुरूप संवाद और शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से अपनी मांगें सरकार के सामने रख रहा है।

संघ की प्रमुख मांगों में प्रथम सेवा अवधि की गणना कर पुरानी पेंशन का लाभ, पेंशन संबंधी विसंगतियों का निराकरण तथा TET की बाध्यता से मुक्ति शामिल है।

मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

शिक्षक कल्याण संघ ने कहा कि वर्तमान में संगठन ने गांधीवादी तरीके से अपनी बात शासन तक पहुंचाई है। संघ ने सरकार से मांगों पर सकारात्मक एवं शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।

संघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन आगे आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी, ऐसा संघ की ओर से कहा गया।

गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित इस सत्याग्रह के जरिए शिक्षकों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया और पुरानी पेंशन सहित सेवा संबंधी मुद्दों के समाधान की मांग रखी।



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