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गांधी जयंती पर आयुष मंत्रालय ने ‘स्वच्छोत्सव’ के साथ स्वच्छता ही सेवा 2025 अभियान का समापन किया

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नई दिल्ली – आयुष मंत्रालय ने गांधी जयंती के अवसर पर विशेष ‘स्वच्छोत्सव’ शोभायात्रा आयोजित कर स्वच्छता ही सेवा 2025 अभियान का समापन किया। यह यात्रा आयुष भवन से शुरू होकर आईएनए मेट्रो स्टेशन पर समाप्त हुई। इस दौरान महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की गई और सफाईमित्रों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

अभियान के तहत कार्यालय परिसर, पार्किंग क्षेत्र और लॉन की सफाई, 25 सितंबर को ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ अभियान, 27 सितंबर को सफाईमित्रों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं तक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

आयुष मंत्रालय ने इस अवसर पर पुनः यह संकल्प लिया कि वह गांधीजी की स्वच्छता और सेवा की परिकल्पना को आगे बढ़ाता रहेगा और इसे समग्र स्वास्थ्य और कल्याण से जोड़ेगा।


मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर किया नमन

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग से देश की आज़ादी के आंदोलन को नई दिशा दी। गांधी जी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि दृढ़ निष्ठा और सत्याग्रह के मार्ग से कठिन परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज भी गांधी जी के विचार समाज को एक बेहतर दिशा देने में उपयोगी हैं और हम सबको उनसे प्रेरणा मिलती है।

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शास्त्री ने अपने सार्वजनिक जीवन में सादगी और सेवा को सर्वोपरि रखा। उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा देकर जनता का मनोबल बढ़ाया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शास्त्री की निष्ठा और ईमानदारी हमेशा नागरिकों को प्रेरित करती रहेगी।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव उपस्थित थे।


गांधी जयंती पर एनआईएन, पुणे में विशेष कार्यक्रम

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आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने दी श्रद्धांजलि, किया पुस्तक विमोचन और वृक्षारोपण

राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान (एनआईएन), पुणे ने केन्द्रीय संचार ब्यूरो (सीबीसी) के सहयोग से गांधी जयंती मनाई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव शामिल हुए।

प्रतापराव जाधव ने संस्थान परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और गांधी संग्रहालय का अवलोकन किया। सीबीसी की टीम ने गांधी भजनों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर एनआईएन की निदेशक डॉ. के. सत्यलक्ष्मी ने संस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं, शोध कार्यों और जनजागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी।

मुख्य संबोधन में  प्रतापराव जाधव ने कहा कि महात्मा गांधी जीवनभर प्राकृतिक चिकित्सा के समर्थक रहे। उन्होंने नागरिकों से प्राकृतिक चिकित्सा और योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की और कहा कि यही राष्ट्रपिता को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

समारोह में महात्मा गांधी के विचारों पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया तथा येवलेवाड़ी परिसर में वृक्षारोपण भी हुआ।


गांधी का सत्य और अहिंसा दर्शन: भारत से विश्व तक की यात्रा

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परिचय

2 अक्टूबर को विश्व महात्मा गांधी की जयंती मनाता है। भारत में इस दिन को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है, जबकि पूरी दुनिया में इसे अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह परंपरा 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित उस प्रस्ताव से शुरू हुई थी, जिसे 140 से अधिक देशों का समर्थन मिला था। इस प्रकार यह दिन राष्ट्रीय स्मृति और वैश्विक संदेश — दोनों का प्रतीक बन गया है।

महात्मा गांधी, गांधी मैदान में प्रार्थना सभा में सम्मिलित होते हुए, 1946

संयुक्त राष्ट्र में इस दिन महासचिव के संदेश और विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जो गांधी की विचारधारा को आज की वास्तविकताओं से जोड़ते हैं। हाल के वर्षों में ये संदेश दुनियाभर में जारी संघर्षों की ओर संकेत करते हुए यह याद दिलाते हैं कि गांधी का सत्य और अहिंसा का विश्वास “किसी भी हथियार से कहीं अधिक शक्तिशाली” है।

भारत में इस दिन को राजघाट पर श्रद्धांजलि, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों, और गांधी के आदर्शों को प्रचारित करने वाले अभियानों के रूप में मनाया जाता है। समय के साथ ये आयोजन केवल औपचारिक न रहकर राष्ट्रीय आंदोलनों को प्रेरित करने लगे — जैसे स्वच्छ भारत अभियान, जिसने स्वच्छता को राष्ट्रव्यापी जनांदोलन बना दिया, या खादी और ग्रामोद्योगों का पुनरुद्धार, जो आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

सत्याग्रह का जन्म

मोहनदास करमचंद गांधी, पेशे से वकील, 1893 में एक कानूनी मामले के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए। प्रिटोरिया जाने वाली ट्रेन में, जब वे प्रथम श्रेणी डिब्बे में यात्रा कर रहे थे, तो एक यात्री ने उनकी शक्ल-सूरत देखकर यह मान लिया कि वे ‘रंगभेद’ के कारण वहाँ बैठने योग्य नहीं हैं। गांधी को डिब्बा बदलने का आदेश दिया गया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। नतीजतन उन्हें रातभर ठंड में पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन पर बितानी पड़ी।

गांधी (बाएँ से तीसरे) अपने सहयोगियों के साथ, जोहांसबर्ग स्थित अपने कार्यालय के बाहर, 1905


गांधी ने अपने आत्मकथन "सत्य के साथ मेरे प्रयोगों की कहानी" (1926) में लिखा:

“जिस कष्ट का मुझे सामना करना पड़ा, वह सतही था — असली बीमारी तो रंगभेद की गहरी जड़ थी। मुझे चाहिए कि मैं इस बीमारी को मिटाने की कोशिश करूँ और इसके लिए कष्ट सहूँ।”

इसके बाद की यात्राओं में उन्हें और भी भेदभाव का सामना करना पड़ा। इन अनुभवों और अन्य भारतीयों की व्यथा देखकर गांधी ने निर्णय लिया कि वे संगठित होकर विरोध करेंगे। इसी दौर में उन्होंने “सत्याग्रह” शब्द गढ़ा — सत्य (Truth) और आग्रह (Insistence) से बना — जो उनके राजनीतिक दर्शन का आधार बना।

दक्षिण अफ्रीका में "सत्याग्रही" के रूप में गांधी

गांधी ने बाद में भारत में भी इसे लागू किया। चाहे दांडी मार्च (1930) हो या भारत छोड़ो आंदोलन (1942), उन्होंने दिखाया कि नैतिक शक्ति लाखों लोगों को बिना हथियार उठाए प्रेरित कर सकती है। उनकी इस विचारधारा से प्रेरित होकर मार्टिन लूथर किंग जूनियर (अमेरिका) और नेल्सन मंडेला (दक्षिण अफ्रीका) ने भी नस्लवाद और रंगभेद के खिलाफ संघर्ष किया।

संयुक्त राष्ट्र में गांधी: पाँचवाँ अहिंसा व्याख्यान

सितंबर 2022 में यूनेस्को के महात्मा गांधी शांति और सतत विकास शिक्षा संस्थान (MGIEP) और भारत के स्थायी मिशन द्वारा संयुक्त राष्ट्र में पाँचवाँ “अहिंसा व्याख्यान” आयोजित किया गया। विषय था — “मानव उत्थान के लिए शिक्षा”। इसमें शिक्षा को केवल आर्थिक साधन नहीं, बल्कि करुणा, सहानुभूति और नैतिक कल्पना विकसित करने का माध्यम बताया गया।

इस व्याख्यान की विशेषता थी गांधी का लाइफ-साइज़ होलोग्राम, जिसने उनके विचारों को आधुनिक तकनीक के साथ जीवंत कर दिया। इसमें वैश्विक नेताओं, शिक्षाविदों और युवाओं ने भाग लिया, जिनमें बर्निस किंग (मार्टिन लूथर किंग जूनियर की पुत्री) भी शामिल थीं।

गांधीवादी विचारों पर आधारित सरकारी पहलें

भारत ने गांधी के आदर्शों को राष्ट्रीय कार्यक्रमों का रूप दिया है। कुछ प्रमुख पहलें:

  • स्वच्छ भारत मिशन- 2014,गांधी जयंती पर, “स्वच्छता ईश्वर के समीप है”, 2019 में भारत ODF घोषित, 12 करोड़ से अधिक शौचालय बने 

  • मनरेगा- गरिमामय श्रम का अधिकार, 3.83 करोड़ परिवारों को रोजगार (2025-26) 
  • स्वामित्व योजना- ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भरता, 65 लाख संपत्ति कार्ड वितरित

  • महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs)- DAY-NRLM के अंतर्गत, 10 करोड़ महिलाएँ संगठित, ₹11 लाख करोड़ से अधिक ऋण वितरित

  • खादी एवं ग्रामोद्योग- स्वदेशी और ग्रामीण उत्पादन, उत्पादन 4 गुना, बिक्री 5 गुना, रोज़गार 49% बढ़ा

  • PM जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान- ₹79,156 करोड़ का प्रावधान, 5 करोड़ से अधिक लाभार्थी

समकालीन वैश्विक महत्व

आज के दौर में आतंकवाद, असमानता, जलवायु संकट और संघर्षों से निपटने में गांधी का अहिंसा दर्शन और भी प्रासंगिक है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि गांधी का दृष्टिकोण सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से पहले ही उसकी नींव रख चुका था — स्वच्छता, मातृ स्वास्थ्य, शिक्षा, लैंगिक समानता और भूख मिटाने पर उनका जोर आज भी मार्गदर्शक है।

अंतर्राष्ट्रीय मान्यता

2023 में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान सभी विश्व नेता राजघाट गए और गांधी को श्रद्धांजलि दी। यह केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि वैश्विक कूटनीति में भी गांधी का अहिंसा दर्शन जीवित है।

दुनियाभर में उनके स्मारक और प्रतिमाएँ स्थापित हैं — बेल्जियम, अमेरिका, स्पेन, सर्बिया, स्विट्ज़रलैंड, थाईलैंड, कज़ाख़स्तान और नीदरलैंड तक। हेग (नीदरलैंड) में 2017 में अब तक का सबसे बड़ा गांधी मार्च हुआ जिसमें 800 से अधिक लोग शामिल हुए।

रेल कोच प्रदर्शनी

11 सितम्बर 2024 को नई दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी दर्शन में एक विशेष रेल कोच प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। यह गांधी की उन रेल यात्राओं को स्मरण करता है, जिन्होंने उन्हें भारत की विविधता समझने और राष्ट्र को एकजुट करने की प्रेरणा दी।

निष्कर्ष

अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस गांधी की उस सार्वभौमिक दृष्टि का प्रतीक है, जिसमें सत्य, अहिंसा और सामाजिक न्याय निहित है। भारत ही नहीं, पूरा विश्व आज भी उनके विचारों से प्रेरणा लेता है ताकि समाज अधिक शांतिपूर्ण, न्यायसंगत और करुणामय बन सके।

ब्रुसेल्स के मोलनबीक कम्यूने में स्थित पार्क मैरी जोस यूरोप की सबसे पुरानी महात्मा गांधी की प्रतिमाओं में से एक है। यह प्रतिमा प्रसिद्ध बेल्जियाई कलाकार रेने क्लिक्वेट द्वारा निर्मित की गई थी और 1969 में गांधी की 100वीं जयंती के अवसर पर स्थापित की गई।


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