Media24Media.com: भाजी से रेशा, रेशे से कपड़ा: किसान स्कूल के नवाचारी कृषक रामाधार देवांगन का कृषि मंत्री ने किया सम्मान

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भाजी से रेशा, रेशे से कपड़ा: किसान स्कूल के नवाचारी कृषक रामाधार देवांगन का कृषि मंत्री ने किया सम्मान

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 किसान स्कूल के रामाधार देवांगन का कृषि मंत्री ने किया सम्मान

अलसी और केला, भिंडी, अमारी के अलावा चेच के रेशे से बनाते हैं कपड़ा

प्रधानमंत्री सहित कई केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और राज्यमंत्रियों को भेंट कर चुके हैं प्राकृतिक रेशे से बनी जैकेट 

जांजगीर-चाम्पा- खेती को केवल अनाज और सब्जी उत्पादन तक सीमित न रखते हुए कृषि उपज और स्थानीय संसाधनों से नए उत्पाद तैयार कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह से जुड़े रामाधार देवांगन का छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर में इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम द्वारा सम्मान किया गया.

उल्लेखनीय है कि कृषि के क्षेत्र में किए गए उनके विभिन्न नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल चुकी है और उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. 

रामाधार देवांगन ने कृषि और ग्रामीण जीवन से जुड़े संसाधनों में रोजगार और उद्यमिता की संभावनाएं तलाशते हुए प्राकृतिक रेशों पर विशेष प्रयोग किया. उन्होंने अपनी टीम के साथ अलसी, केला, भिंडी, अमारी और चेच भाजी के रेशे निकालकर उनसे कपड़ा तैयार करने का नवाचार अपने सहयोगी टीम के साथ किया. इन रेशों से तैयार कपड़े से जैकेट सहित अन्य उपयोगी उत्पाद भी बनाए गए हैं. 

भाजी के रेशे से कपड़ा बनाने का अनूठा प्रयोग

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वनस्पतियों और स्थानीय फसलों को केवल भोजन तक सीमित न रखते हुए उनके दूसरे उपयोग तलाशने की दिशा में यह प्रयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अमारी और चेच जैसी स्थानीय भाजियों के तने से रेशा निकालकर उसे उपयोगी कपड़े में बदलने की प्रक्रिया में टीम ने लगातार प्रयोग और मेहनत की. इसी तरह केला, भिंडी और अलसी से भी रेशा प्राप्त कर कपड़ा बनाने का प्रयास किया गया.

बलौदा ब्लॉक के सिवनी गांव के प्रगतिशील व नवाचारी कृषक रामाधार देवांगन का कहना है कि गांव में उपलब्ध फसलों और वनस्पतियों में केवल खाद्य उपयोग ही नहीं, बल्कि मूल्यवर्धन और रोजगार की भी बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं. किसानों को इन संभावनाओं से जोड़कर खेती को उद्यमिता से जोड़ना उनके प्रयास का प्रमुख उद्देश्य है. 

प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों तक पहुंची जैकेट 

रामाधार देवांगन और किसान स्कूल की टीम द्वारा प्राकृतिक रेशों से तैयार की गई जैकेट देश के प्रधानमंत्री सहित कई केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और राज्यमंत्रियों को भेंट की जा चुकी है. स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ यह प्रयोग जब राष्ट्रीय स्तर के विशिष्ट लोगों तक पहुंचा तो इससे किसान स्कूल के नवाचारों को भी व्यापक पहचान मिली। उनका यह प्रयास इस बात का उदाहरण है कि गांव में उपलब्ध संसाधनों और किसानों की मेहनत को तकनीक, कौशल एवं नवाचार से जोड़कर नए उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं. 

राष्ट्रीय पुरस्कार से भी हो चुके हैं सम्मानित

कृषि क्षेत्र में विभिन्न नवाचारों के लिए रामाधार देवांगन को पूर्व में कृषि विज्ञान केंद्र व कृषि विभाग के सहयोग से राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है. कृषि के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय उत्पादों के मूल्यवर्धन और ग्रामीण लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं विकसित करने की दिशा में वे लगातार प्रयोग करते रहे हैं.

किसान स्कूल बना नवाचार का केंद्र

बहेराडीह गांव में स्थित देश का पहला किसान स्कूल वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल में किसानों, ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को खेती के कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़ने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाती हैं यहां पारंपरिक कृषि ज्ञान के साथ नए प्रयोगों और स्थानीय संसाधनों के मूल्यवर्धन को भी प्रोत्साहित किया जाता है.

रामाधार देवांगन के रेशे से कपड़ा बनाने के प्रयोग ने यह संदेश दिया है कि किसान की फसल खेत से बाजार तक पहुंचने के बीच कई नए रोजगार और व्यवसाय के अवसर पैदा कर सकती है. स्थानीय फसलों से रेशा, रेशे से कपड़ा और कपड़े से उपयोगी उत्पाद तैयार करने की पूरी प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्र में मूल्यवर्धन का उदाहरण बन रही है. 

कृषि मंत्री रामविचार नेताम, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ गिरीश चंदेल द्वारा रामाधार देवांगन का सम्मान किए जाने पर किसान स्कूल परिवार, किसानों, बिहान, ग्रामीण महिलाओं, आरसेटी, केवीके के अलावा जांजगीर-चाम्पा और सक्ती जिले के नवाचार से जुड़े लोगों ने हर्ष व्यक्त किया. किसान स्कूल परिवार का कहना है कि ऐसे नवाचार, ग्रामीण युवाओं और किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नए कृषि उद्यम शुरू करने की प्रेरणा देते हैं.\

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