Media24Media.com: छत्तीसगढ़ में हाथियों का तांडव! कोरबा में 53 हाथियों ने तोड़ी स्कूल की बाउंड्री, धान की फसल बर्बाद; जशपुर में अस्पताल और चर्च परिसर तक पहुंचा दंतैल

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छत्तीसगढ़ में हाथियों का तांडव! कोरबा में 53 हाथियों ने तोड़ी स्कूल की बाउंड्री, धान की फसल बर्बाद; जशपुर में अस्पताल और चर्च परिसर तक पहुंचा दंतैल

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छत्तीसगढ़ में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। कोरबा और जशपुर जिले में जंगली हाथियों की आवाजाही से ग्रामीणों और रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच दहशत का माहौल है। कोरबा में 53 हाथियों के बड़े झुंड ने स्कूल के हॉस्टल की बाउंड्रीवाल तोड़ दी और खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। वहीं, जशपुर जिले के कुनकुरी में झुंड से अलग हुआ एक दंतैल हाथी अस्पताल, कॉलेज और चर्च परिसर तक पहुंच गया। वन विभाग की टीमें दोनों क्षेत्रों में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। 

कोरबा: 53 हाथियों के झुंड ने मचाया उत्पात

कोरबा जिले के कटघोरा वन मंडल के अंतर्गत पसान वन परिक्षेत्र के तेलियामार गांव में हाथियों के बड़े झुंड की मौजूदगी से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, हाथियों का झुंड गांव के पास स्थित दीपक मिशन स्कूल के हॉस्टल परिसर तक पहुंच गया और वहां की बाउंड्रीवाल तोड़ दी।

हॉस्टल में करीब 160 बच्चे रह रहे थे। हाथियों की चिंघाड़ और दीवार टूटने की आवाज से बच्चों में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हाथियों ने हॉस्टल परिसर के बगीचे को भी नुकसान पहुंचाया। राहत की बात यह रही कि उपलब्ध रिपोर्टों में हॉस्टल भवन के भीतर बच्चों पर हाथियों के हमले की पुष्टि नहीं है।

किसानों की धान की फसल को नुकसान

तेलियामार गांव के आसपास हाथियों के झुंड ने खेतों में खड़ी धान की फसल को रौंद दिया। रिपोर्टों के अनुसार, एक किसान के मकान को भी नुकसान पहुंचा है।

धान की फसल तैयार होने के समय हाथियों का खेतों तक पहुंचना किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। फसल को हुए नुकसान से उनकी मेहनत और आमदनी प्रभावित हो सकती है। प्रभावित किसानों को नुकसान का आकलन कराने के लिए वन विभाग और संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।

जशपुर के कुनकुरी में दंतैल हाथी की दस्तक

दूसरी घटना जशपुर जिले के कुनकुरी क्षेत्र की है। यहां झुंड से अलग हुआ एक दंतैल हाथी रिहायशी इलाके में पहुंच गया। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, हाथी होली क्रॉस अस्पताल परिसर में घुसा और बाउंड्रीवाल को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा कॉलेज और चर्च परिसर तक भी उसकी आवाजाही की खबर सामने आई।

हाथी के आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचने से स्थानीय लोगों में भय का माहौल बन गया। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी की गतिविधियों पर निगरानी शुरू की। अधिकारियों ने लोगों से हाथी के पास जाने, उसे उकसाने और वीडियो बनाने के लिए नजदीक पहुंचने से बचने की अपील की है। 

वन विभाग की निगरानी, आसपास के गांवों में सतर्कता

कोरबा क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग की टीमों की तैनाती और निगरानी बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, आसपास के लगभग 10 गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क किया गया है। हाथियों की मौजूदगी की सूचना लोगों तक पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर अलर्ट व्यवस्था भी इस्तेमाल की जा रही है। 

वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हाथियों को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर जाने दिया जाए और इस दौरान ग्रामीणों, बच्चों, किसानों तथा स्वयं वन्यजीवों को किसी तरह का नुकसान न हो।

ग्रामीणों के लिए जरूरी सावधानियां

  • हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर खेतों और जंगल के रास्तों पर जाने से बचें।

  • हाथियों को देखने के लिए भीड़ न लगाएं और उनके पास जाकर फोटो या वीडियो न बनाएं।

  • हाथियों को भगाने के लिए पटाखे, आग या शोर का इस्तेमाल न करें।

  • रात के समय अकेले खेतों या जंगल से लगे रास्तों पर जाने से बचें।

  • बच्चों को हाथियों के संभावित रास्तों और प्रभावित क्षेत्रों से दूर रखें।

  • हाथियों की सूचना मिलने पर स्थानीय वन विभाग या वनकर्मियों को तुरंत सूचित करें।

 बड़ा सवाल: जंगल से आबादी की ओर क्यों आ रहे हैं हाथी?

धान की फसल पकने के समय खेत हाथियों को आकर्षित कर सकते हैं। जंगल और गांवों के बीच हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों पर मानवीय गतिविधियां बढ़ने से भी टकराव की आशंका रहती है। हालांकि, इन दोनों घटनाओं के पीछे का सटीक कारण निर्धारित करने के लिए वन विभाग के विस्तृत आकलन की जरूरत होगी।

निष्कर्ष: कोरबा में 53 हाथियों के झुंड द्वारा स्कूल की बाउंड्री और फसलों को नुकसान पहुंचाने तथा जशपुर के कुनकुरी में दंतैल हाथी के रिहायशी परिसरों तक पहुंचने की घटनाएं मानव-हाथी संघर्ष की गंभीरता को दिखाती हैं। ऐसे में समय पर चेतावनी, सुरक्षित दूरी और वन विभाग के साथ समन्वय बेहद जरूरी है।


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