Media24Media.com: दशहरा: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक

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दशहरा: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक

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दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व हमें सच्चाई, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। हर साल यह त्योहार बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जा रहा है।

भगवान श्रीराम के विजय का पर्व

दशहरे का संबंध रामायण से है। मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध करके माता सीता को उसके बंधन से मुक्त कराया था। रावण दहन इसी विजय की याद दिलाता है। देश के अनेक हिस्सों में रामलीला का आयोजन किया जाता है और शाम को रावण, कुंभकर्ण तथा मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं।

यह परंपरा केवल एक पौराणिक घटना का स्मरण नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि अन्याय और अहंकार चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की जीत होती है।

मां दुर्गा की शक्ति और विजय का प्रतीक

दशहरे का एक अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक पक्ष मां दुर्गा से जुड़ा है। मान्यता है कि मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर बुराई पर विजय प्राप्त की थी। इसी कारण देश के कई हिस्सों में यह पर्व नवरात्रि और दुर्गा पूजा के समापन के रूप में मनाया जाता है। यह नारी शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक भी है।

छत्तीसगढ़ का अनोखा बस्तर दशहरा

छत्तीसगढ़ का बस्तर दशहरा अपनी अनूठी परंपराओं के कारण पूरे देश में विशेष पहचान रखता है। यहां दशहरे का मुख्य केंद्र मां दंतेश्वरी की आराधना, आदिवासी संस्कृति और सदियों पुरानी सामुदायिक परंपराएं हैं। यह उत्सव लगभग 75 दिनों तक चलने के लिए प्रसिद्ध है।

बस्तर दशहरे की सबसे खास बात यह है कि यहां परंपरागत रूप से रावण दहन नहीं किया जाता। इसके बजाय देवी की पूजा, विभिन्न देवी-देवताओं का आगमन, पारंपरिक रथ यात्रा और स्थानीय रीति-रिवाजों के माध्यम से उत्सव मनाया जाता है। यह पर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

दशहरा हमें क्या सिखाता है?

दशहरे का वास्तविक अर्थ केवल रावण के पुतले का दहन करना नहीं है। इसका सबसे बड़ा संदेश है अपने भीतर मौजूद बुराइयों को पहचानकर उन्हें दूर करना। क्रोध, लालच, अहंकार, ईर्ष्या, झूठ और अन्याय ऐसी कमजोरियां हैं, जो व्यक्ति और समाज दोनों को नुकसान पहुंचाती हैं।

यदि हम इस दिन अपने व्यवहार में सुधार करने, दूसरों का सम्मान करने, सच्चाई का साथ देने और जरूरतमंदों की सहायता करने का संकल्प लें, तो त्योहार का उद्देश्य और भी सार्थक हो सकता है।

आज के समय में दशहरे का संदेश और भी महत्वपूर्ण है। समाज में बढ़ती नफरत, भ्रष्टाचार और आपसी मतभेदों के बीच हमें प्रेम, सद्भाव, ईमानदारी और जिम्मेदारी को अपनाने की जरूरत है।

उत्सव के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

दशहरा खुशियों, मेल-मिलाप और उत्सव का अवसर है। इस दौरान हमें बच्चों, बुजुर्गों और आसपास के लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। रावण दहन के कार्यक्रमों में सुरक्षित दूरी बनाए रखना, प्रशासन के निर्देशों का पालन करना और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाले तरीकों को अपनाना भी हमारी जिम्मेदारी है।

निष्कर्ष

दशहरा हमें याद दिलाता है कि जीवन में जीत उसी की होती है, जो कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और न्याय का साथ नहीं छोड़ता। भगवान श्रीराम का आदर्श, मां दुर्गा की शक्ति और बस्तर की सांस्कृतिक परंपराएं हमें साहस, संयम और एकता की प्रेरणा देती हैं।

आइए, इस दशहरे पर हम केवल रावण के पुतले का दहन न करें, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को भी समाप्त करने का संकल्प लें। यही इस पर्व की सच्ची भावना और सबसे बड़ी सीख है।

आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं!


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