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आरंग में हर्षोल्लास से मनाया जाएगा हनुमान जन्मोत्सव, जगह-जगह होगा भोग भंडारे का आयोजन

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आरंग- मंदिरों की नगरी आरंग के हर गली मोहल्ले में स्थापित है पवन पुत्र हनुमान। जहां प्रतिदिन श्रद्धालु आते जाते मत्था टेककर कामना करते हैं। खासकर शनिवार और मंगलवार को भक्तगण यहां पहुंचकर सुंदर काण्ड और हनुमान चालीसा का जाप करते हैं। वहीं आज हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर नगर सहित अंचल के गांव-गांव में जगह-जगह भोग भंडारा, हनुमान चालीसा, सुंदर काण्ड पाठ, भजन कीर्तन किया जा रहा है। प्रातः से ही साधक हनुमान मंदिरो में पहुंचकर पूजा आराधना में जुट जाएंगे।

यह नगर में सबसे अधिक हनुमान जी का मंदिर है। जिनमें महामाया पारा में विराजमान उत्तरमुखी नारायणबन हनुमान, जगन्नाथ मंदिर में स्थापित दक्षिणमुखी हनुमान, गुप्ता पारा में स्थापित हनुमान, बागेश्वर मंदिर के सामने स्थापित हनुमान, पुराने सब्जी बाजार में स्थित रेणुक देव हनुमान, बरगुडी पारा का हनुमान, बस स्टैण्ड में स्थापित प्राचीन हनुमान मंदिर व प्रतिमाएं प्रमुख हैं। यही कारण है इस नगर में प्रतिवर्ष हनुमान जन्मोत्सव को बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है।भक्त इस दिन प्रायः सभी हनुमान जी की प्रतिमाओ में सिंदूर का लेप कर विशेष रूप से पूजा अर्चना करते हैं। सुंदर काण्ड और हनुमान चालीसा का पाठ और भजन कीर्तन करते हैं। बहुत हर्षोल्लास से हनुमान जन्मोत्सव को मनाते है।


नववर्ष, नव ऊर्जा और नव संकल्प का संदेश: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी चैत्र नवरात्रि, नव संवत्सर और गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्रि, हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) एवं गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है। उन्होंने इस मंगल अवसर पर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति की कामना की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चैत्र मास के प्रथम दिन से प्रारंभ होने वाला हिंदू नववर्ष नव ऊर्जा, नव संकल्प और नव चेतना का प्रतीक है। इसी पावन अवसर से शक्ति उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है, जो श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक आस्था के साथ पूरे देश में मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि गुड़ी पड़वा विशेष रूप से महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में नववर्ष के स्वागत का उत्सव है, जो आशा, उत्साह और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। यह पर्व समाज में सकारात्मक ऊर्जा, नव शुरुआत और उत्सवधर्मिता का संदेश देता है।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध देवी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मां शीतला, मां दंतेश्वरी, महामाया, बम्लेश्वरी, कंकाली, बिलईमाता और चंद्रहासिनी देवी जैसे विविध स्वरूपों में प्रदेश की आस्था और संस्कृति गहराई से रची-बसी है। यह आध्यात्मिक विरासत प्रदेश की पहचान को सशक्त बनाती है।

उन्होंने कहा कि नवरात्रि के इन पावन दिनों में छत्तीसगढ़ की धरती भक्ति, साधना और शक्ति आराधना से आलोकित हो उठती है। देवी उपासना केवल आध्यात्मिक ऊर्जा ही नहीं देती, बल्कि सामाजिक समरसता, सकारात्मक सोच और आंतरिक चेतना का भी संचार करती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन सरकार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास और विश्वास के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने मां भगवती से प्रार्थना करते हुए कहा कि उनकी कृपा से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर रहे और प्रदेश के प्रत्येक परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास बना रहे।

प्रेम और सद्भाव के रंगों से सराबोर हो होली : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएँ

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कामना की है कि यह उल्लास, उमंग और आत्मीयता का महापर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और नई ऊर्जा का संचार करे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि यह आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे को सशक्त बनाने का अवसर है। यह पर्व समाज में समरसता, सद्भाव और एकता की भावना को प्रगाढ़ करता है तथा हमें सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में होली का विशेष महत्व है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय, अहंकार पर विनम्रता की जीत और वैमनस्य पर प्रेम की प्रधानता का संदेश देता है। होली के रंग हमें स्मरण कराते हैं कि विविधताओं से परिपूर्ण हमारे समाज की वास्तविक शक्ति परस्पर विश्वास, अपनत्व और सामूहिक सहयोग में निहित है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस पर्व को हर्षोल्लास, संयम और पारंपरिक मर्यादाओं के साथ मनाएँ। प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें तथा समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों के साथ भी इस उत्सव की खुशियाँ साझा करें।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के रंगों से सजी यह होली छत्तीसगढ़ की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

शिक्षको ने बच्चों को बताया होली का महत्व ,कहा सावधानी पूर्वक खेले होली

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आरंग- अंचल में होली की तैयारियां जोरों पर है। गांव गांव में होलिका दहन की तैयारियां की जा रही है।होली को लेकर लोगों में खासा उत्साह है,खासकर बच्चों में। वहीं सोमवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक एवं नवीन प्राथमिक शाला चरौदा में शिक्षकों ने बच्चों को होली का महत्व बताते हुए सावधानी बरतते हुए होली खेलने को कहा। वहीं शिक्षको ने बच्चों को होलिका दहन की कथा सतयुग से तथा रंग गुलाल खेलने की परंपरा द्वापर युग से जुड़े होने की जानकारी देते हुए होली का महत्व बताया। कल चंद्रग्रहण होने के कारण बच्चों ने एक दिन पहले ही एक दूसरे पर गुलाल लगाकर जमकर होली खेले।


श्रद्धा, संस्कृति और संगीत के संगम के साथ सिरपुर महोत्सव का भव्य समापन

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सिरपुर महोत्सव हमारी गौरवशाली परंपराओं, सभ्यता और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम- सांसद रूपकुमारी चौधरी

सिरपुर हमारी आस्था,संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक- विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा

महासमुंद- सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक नगरी सिरपुर में आयोजित तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव का आज भव्य एवं गरिमामयी समापन समारोह सम्पन्न हुआ। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सांसद रूपकुमारी चौधरी शामिल हुए। इस अवसर पर विधायक महासमुंद श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष चन्द्रहास चन्द्राकर, भारत स्काउट एवं गाइड संघ के अध्यक्ष येतराम साहू, सिरपुर सरपंच पुष्पा के माली, डीलेश्वरी चंद्राकर, जितेंद्र सिंह, ओमप्रकाश चौधरी, महेंद्र सिक्का, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक मौजूद रहे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सांसद  रूपकुमारी चौधरी ने विभागीय स्टॉल का अवलोकन किया। साथ ही अतिथियों द्वारा कॉफी टेबल बुक एवं महासमुंद जिले की दो वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित कैलेंडर का विमोचन किया गया। 

मुख्य अतिथि सांसद रूपकुमारी चौधरी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सिरपुर छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर है। सिरपुर की प्राचीन विरासत, बौद्ध विहारों, मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों ने इसे विश्व पटल पर विशेष स्थान दिलाया है। यहां आयोजित सिरपुर महोत्सव हमारी गौरवशाली परंपराओं, सभ्यता और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। जो युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा संस्कृति, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा एक भारत-श्रेष्ठ भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास को नई दिशा दी जा रही है। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण एवं आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सांसद चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत योजना, जल जीवन मिशन एवं ग्रामीण सड़क योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं से आमजन के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य एवं केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से सिरपुर को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को गति मिलेगी। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए जिला प्रशासन, आयोजन समिति एवं सभी सहयोगी संस्थाओं की सराहना की।

विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने अपने उद्बोधन में कहा कि सिरपुर हमारी आस्था, संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक है। यह भूमि हमें हमारी गौरवशाली विरासत से जोड़ती है। सिरपुर महोत्सव के माध्यम से हमारी लोक कला, लोक संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सिरपुर के विकास एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। आने वाले समय में सिरपुर को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने कहा कि सिरपुर महोत्सव से क्षेत्र के पर्यटन, रोजगार एवं स्थानीय कला को नई पहचान मिली है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।

स्काउट एवं गाइड संघ के जिलाध्यक्ष येतराम साहू ने कहा कि सिरपुर केवल एक ऐतिहासिक नगरी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सिरपुर महोत्सव के माध्यम से इस गौरवशाली धरोहर को जन-जन तक पहुँचाने का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है। यह महोत्सव हमारी संस्कृति, परंपरा, कला और इतिहास को नई पीढ़ी से जोड़ने का माध्यम बन चुका है।

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव के सफल आयोजन पर शासन, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक टीम, कलाकारों एवं आमजन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव हमारी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास है। सभी के सहयोग, अनुशासन एवं उत्साह से यह आयोजन सफल एवं यादगार बना।

समापन अवसर पर महोत्सव में आकर्षक प्रस्तुतिया देने वाले कलाकारों, सांस्कृतिक दलों एवं आयोजन से जुड़े प्रमुख आयोजकों को मंच पर सम्मानित किया गया। अतिथियों द्वारा उन्हें स्मृति चिन्ह, शॉल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, लोकनृत्य, शास्त्रीय संगीत, भजन-कीर्तन एवं आधुनिक संगीत कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही विभागीय प्रदर्शनी एवं एलईडी छायाचित्र प्रदर्शनी लोगों के लिए आकर्षण बना रहा। देश-प्रदेश से आए पर्यटकों ने सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहरों, मंदिरों एवं विहारों का अवलोकन कर इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की।

छठ पूजा: सूर्य उपासना का पवित्र पर्व, आस्था, पर्यावरण और संस्कृति का संगम

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नई दिल्ली-चार दिनों तक चलने वाला लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य देव और छठी मैया की उपासना को समर्पित यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक एकता, पर्यावरण संरक्षण और अनुशासन का प्रतीक भी है।

 पर्व की पौराणिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि

छठ पूजा की परंपरा वैदिक काल से जुड़ी मानी जाती है। कहा जाता है कि सूर्य उपासना के माध्यम से प्रकृति और पंचतत्वों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम और माता सीता ने भी अयोध्या लौटने के बाद छठ व्रत किया था। वहीं महाभारत काल में द्रौपदी और पांडवों ने भी राज्य की समृद्धि के लिए इस व्रत का पालन किया था।

चार दिवसीय अनुष्ठान और उसका महत्व

छठ पूजा चार दिनों तक अत्यंत नियम, संयम और शुद्धता के साथ मनाई जाती है—

  1. नहाय-खाय (पहला दिन): व्रत की शुरुआत पवित्र स्नान और सात्विक भोजन से होती है। इस दिन घर की सफाई और शुद्ध भोजन का विशेष महत्व होता है।

  2. खरना (दूसरा दिन): व्रती पूरे दिन निर्जल उपवास रखकर सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर, रोटी और केला प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

  3. संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): अस्ताचलगामी सूर्य को नदी, तालाब या घाट पर खड़े होकर अर्घ्य दिया जाता है। लाखों श्रद्धालु पारंपरिक गीतों और लोकसंगीत के साथ यह पूजा संपन्न करते हैं।

  4. उषा अर्घ्य (चौथा दिन): अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन किया जाता है। इसे छठ व्रत का सबसे पवित्र क्षण माना जाता है।

आस्था और अनुशासन का अनूठा उदाहरण

छठ पूजा का सबसे बड़ा आकर्षण इसका सामूहिक स्वरूप है। यह पर्व न केवल बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में, बल्कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, छत्तीसगढ़ और देश के कई अन्य हिस्सों में भी पूरे उत्साह से मनाया जाता है। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय भी इसे बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं।

व्रती महिलाएँ (और कई पुरुष भी) बिना किसी भोग-विलास के, कठिन तप और आत्मसंयम के साथ व्रत रखते हैं। पूजा में इस्तेमाल होने वाले सभी प्रसाद — जैसे ठेकुआ, केला, नारियल, और गुड़ की खीर — पूरी तरह प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल होते हैं।

पर्यावरण और सामाजिक संदेश

छठ पूजा पर्यावरण के प्रति जागरूकता का भी प्रतीक है। यह पर्व जलाशयों की स्वच्छता, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के सम्मान की भावना को बढ़ाता है। कई राज्यों में प्रशासन और स्थानीय समुदाय मिलकर नदी घाटों की सफाई और प्लास्टिक-मुक्त पूजा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं।

लोक संस्कृति और संगीत की आत्मा

छठ के अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत — जैसे “केलवा जरा जरा हो रा…”, “उग हो सूरज देव…” — श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और उल्लास का वातावरण बना देते हैं। पारंपरिक वेशभूषा, गीत-संगीत, और घाटों की सजावट इस पर्व को एक लोकसांस्कृतिक उत्सव का रूप देते हैं।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित कई राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों ने देशवासियों को छठ पूजा की शुभकामनाएँ दी हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि “छठी मैया की कृपा से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य आए।”

निष्कर्ष

छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, अनुशासन और सामूहिकता का उत्सव है। यह पर्व हमें सिखाता है कि मनुष्य और प्रकृति का संबंध परस्पर सम्मान और संतुलन पर आधारित होना चाहिए। इस वर्ष भी देशभर के घाटों पर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्धालुओं की आस्था यह संदेश दे रही है कि भारत की परंपराएँ आज भी जीवंत हैं — आधुनिकता के साथ संतुलन बनाते हुए।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दीपावली और गोवर्धन पूजा की दी हार्दिक शुभकामनाएं

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को दीपावली और गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीपावली का पर्व प्रकाश, सत्य और सद्भाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दीपावली का यह पावन पर्व अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दीपों का यह उत्सव हमारे जीवन में नई ऊर्जा, नई चेतना और आशा का संचार करता है। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे दीपावली को स्वदेशी भावना के साथ, पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए मनाएं और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनकर समाज में प्रेम और सौहार्द का संदेश फैलाएं।

मुख्यमंत्री साय ने गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति, पशुधन और पर्यावरण के प्रति हमारी श्रद्धा और आभार का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा हमें यह सिखाती है कि प्रकृति का संरक्षण ही समृद्धि का आधार है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि दीपावली और गोवर्धन पूजा का यह पावन अवसर छत्तीसगढ़ राज्य में खुशहाली, समृद्धि और विकास की नई रोशनी लेकर आएगा तथा हर घर में आनंद, शांति और उजाला फैलाएगा।

उत्साह, उमंग और सद्भावना बढ़ाने का पर्व है नवरात्रि : मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री साय रायपुर शहर के विभिन्न गरबा महोत्सव में हुए शामिल, मातारानी का दर्शन कर लिया आशीर्वाद

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नवरात्रि के पावन पर्व पर विगत रात्रि राजधानी रायपुर स्थित विभिन्न गरबा समारोहों में शामिल हुए। उन्होंने मातारानी का दर्शन कर प्रदेश की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर रायपुर शहर गरबा के रंग में सराबोर दिखाई दिया और हर तरफ़ उत्सव का उल्लास वातावरण में व्याप्त था।

मुख्यमंत्री साय भानपुरी स्थित कच्छ कड़वा पाटीदार समाज, आशीर्वाद भवन में गुजराती लोहाणा महाजन समाज द्वारा आयोजित "झणकारो 2025", इनडोर स्टेडियम में "रंगीलो रास 2025" तथा ओमाया पार्क में "रास गरबा उत्सव" में सम्मिलित हुए। इन आयोजनों में समाजजनों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक कच्छ पगड़ी पहनाकर और तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया। गरबा की धुनों और रंगारंग माहौल में मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने जनसमूह में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया।

प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्र की शुभकामनाएँ देते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नवरात्रि उत्साह, उमंग और सद्भावना बढ़ाने का पर्व है। यह पर्व सामाजिक समरसता को और मजबूत करता है तथा जन-जन में ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ में देवी को विभिन्न स्वरूपों में पूजा जाता है और मातृशक्ति के आशीर्वाद से प्रदेश निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी, धमतरी में मां अंगारमोती एवं बिलईमाता, सरगुजा और रतनपुर में मां महामाया, डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी जैसे अनेक स्वरूपों में माता प्रदेश में विराजमान हैं। इन सभी शक्तिपीठों का आध्यात्मिक महत्व न केवल प्रदेश की आस्था को मजबूत करता है बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि नवरात्र के प्रथम दिन ही यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जीएसटी रिफॉर्म लागू कर देश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान की है। यह सुधार न केवल व्यापार को सुगम बनाएगा बल्कि उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष लाभ भी देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ‘बचत उत्सव’ के माध्यम से आम नागरिकों की जेब में पैसों की उल्लेखनीय बचत हो रही है और यह अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने लोगों से आह्वान किया कि जब भी बाजार जाएँ तो स्वदेशी वस्तुओं की खरीदी को प्राथमिकता दें। स्वदेशी से न केवल देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है बल्कि स्थानीय स्तर पर उत्पादन और स्वरोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी को अपनाना आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम है और यही देश की समृद्धि का आधार बनेगा।

इस अवसर पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक मोतीलाल साहू,पुरंदर मिश्रा,सुनील सोनी,  विधायक अनुज शर्मा, पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल, स्थानीय जनप्रतिनिधि, मंडल आयोग के अध्यक्ष सहित कच्छ कड़वा पाटीदार समाज और गुजराती लोहाणा महाजन समाज के वरिष्ठजन एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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