Media24Media.com: ज्वालामुखी का कहर! 15 किमी ऊंचाई तक पहुंची राख, सैकड़ों उड़ानें प्रभावित

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ज्वालामुखी का कहर! 15 किमी ऊंचाई तक पहुंची राख, सैकड़ों उड़ानें प्रभावित

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 जकार्ता। इंडोनेशिया में अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में रविवार तड़के जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट के बाद निकली राख के विशाल गुबार हवा के साथ पश्चिमी इंडोनेशिया के कई हिस्सों तक फैल गए। राख के कारण राजधानी जकार्ता के सुकर्णो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन प्रभावित हुआ। कुल 209 उड़ानें प्रभावित होने से करीब 22,800 यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।


अनाक क्राकाटोआ जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित है। शनिवार से ही ज्वालामुखी की गतिविधियों में तेजी देखी जा रही थी। रविवार सुबह करीब 3:53 बजे लगभग 30 सेकंड तक विस्फोट हुआ। इसके बाद राख के दो बड़े गुबार बने।

50 हजार फीट तक पहुंचा राख का गुबार

विस्फोट के बाद बने पहले राख के गुबार की ऊंचाई करीब 20 हजार फीट यानी 6 किलोमीटर तक पहुंची। यह उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ा, जिससे जकार्ता, बैंटन और पश्चिमी जावा के इलाके प्रभावित हुए।

वहीं, दूसरा राख का गुबार करीब 50 हजार फीट यानी 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया। यह पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा। इसके चलते बैंटन, लामपुंग, बेंगकुलु, दक्षिणी सुंडा जलडमरूमध्य और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में राख फैलने की जानकारी सामने आई।

एयरपोर्ट पर कई उड़ानें रद्द और री-शेड्यूल

राख के कारण सुकर्णो-हट्टा एयरपोर्ट पर उड़ानें पहले सुबह 5:30 बजे तक रोकने की घोषणा की गई थी। बाद में स्थिति को देखते हुए उड़ान संचालन पर रोक सुबह 9:30 बजे तक बढ़ा दी गई। एयरपोर्ट पर रात के समय खड़े करीब 170 विमान वहीं रुके रहे।

कई यात्रियों ने टिकट का पैसा वापस मांगा और चेक-इन किया हुआ सामान भी वापस लिया। सिंगापुर जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सबसे ज्यादा प्रभावित रहीं। इसके अलावा हांगकांग, सिडनी, एम्स्टर्डम, सियोल, दोहा और कुआलालंपुर की उड़ानों को रद्द, विलंबित या री-शेड्यूल किया गया। लामपुंग, बाली, सुराबाया और मकासर की कुछ घरेलू उड़ानें भी प्रभावित हुईं।

लोगों और पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह

अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश भी जारी नहीं किया गया है। हालांकि, प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी है।

राख प्रभावित इलाकों में लोगों को मास्क पहनने, आंखों की सुरक्षा करने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है। पानी के स्रोतों को ढककर रखने और वाहन चलाते समय सावधानी बरतने को कहा गया है। राख के कारण कुछ लोगों को आंखों में जलन की शिकायत भी हुई है। कई स्कूलों ने गतिविधियां रद्द कर दीं, जबकि मछुआरों ने समुद्र में जाना रोक दिया।

2018 की सुनामी की यादें ताजा

अधिकारियों ने फिलहाल तत्काल सुनामी का खतरा नहीं बताया है। हालांकि, अनाक क्राकाटोआ का इतिहास बेहद गंभीर रहा है। 2018 में इसी ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद आई सुनामी में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी।

फिलहाल इंडोनेशिया की ज्वालामुखी, आपदा प्रबंधन और मौसम एजेंसियां ज्वालामुखी की गतिविधियों तथा राख के फैलाव पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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