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Pitru Paksha 2026: प्रतिपदा श्राद्ध आज, जानें कुतुप, रौहिण और अपराह्न मुहूर्त का समय

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 Pitru Paksha 2026 :  हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और तर्पण अर्पित करने का विशेष समय माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान परिवार के दिवंगत सदस्यों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में 26 सितंबर, शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष का आरंभ हुआ। इसके बाद 27 सितंबर, रविवार को प्रतिपदा श्राद्ध किया जा रहा है।


श्राद्ध कर्म में समय का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, पितृ पक्ष के पार्वण श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल को महत्वपूर्ण माना गया है।

प्रतिपदा श्राद्ध पर कुतुप, रौहिण और अपराह्न मुहूर्त

27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध के दिन श्राद्ध कर्म के लिए तीन प्रमुख समय बताए गए हैं।

कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। इसकी अवधि 48 मिनट है। इस दौरान श्राद्ध से जुड़े प्रमुख कर्म करना शुभ माना जाता है।

रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:36 बजे से 1:24 बजे तक रहेगा। इसकी अवधि भी 48 मिनट है। पितृ कर्म के लिए इस समय को महत्वपूर्ण माना जाता है।

अपराह्न काल: दोपहर 1:24 बजे से 3:48 बजे तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 2 घंटे 24 मिनट है। धार्मिक परंपरा के अनुसार कुतुप और रौहिण मुहूर्त के अलावा अपराह्न काल में भी श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।

क्या है कुतुप मुहूर्त?

कुतुप मुहूर्त को पितृ कर्म के लिए विशेष समय माना जाता है। यह सामान्यतः दोपहर के आसपास पड़ता है और करीब 48 मिनट का होता है। पितृ पक्ष के पार्वण श्राद्ध में इस अवधि में श्राद्ध से जुड़े प्रमुख कर्म किए जाते हैं।

रौहिण मुहूर्त का महत्व

कुतुप मुहूर्त के बाद रौहिण मुहूर्त आता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में किए जाने वाले पार्वण श्राद्ध में कुतुप और रौहिण मुहूर्त का विशेष महत्व है। इसके बाद अपराह्न काल में भी श्राद्ध कर्म संपन्न किया जा सकता है।

अपराह्न काल में किया जाता है श्राद्ध कर्म

अपराह्न यानी दोपहर के बाद का समय भी श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग परंपरा के अनुसार, कुतुप और रौहिण मुहूर्त के साथ अपराह्न काल की समाप्ति तक पार्वण श्राद्ध की प्रक्रिया पूरी की जाती है। श्राद्ध कर्म के अंत में पितरों के निमित्त तर्पण किया जाता है।

प्रतिपदा श्राद्ध किसके लिए किया जाता है?

प्रतिपदा श्राद्ध उन दिवंगत परिजनों के लिए किया जाता है, जिनका निधन प्रतिपदा तिथि को हुआ हो। यह नियम शुक्ल और कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के लिए माना जाता है।

कुछ धार्मिक परंपराओं में प्रतिपदा तिथि को नाना-नानी के श्राद्ध के लिए भी उपयुक्त माना गया है, विशेषकर ऐसी स्थिति में जब उनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो। इस दिन पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है।

पितृ पक्ष 2026 की अगली प्रमुख तिथियां

  • 27 सितंबर: प्रतिपदा श्राद्ध
  • 28 सितंबर: द्वितीया श्राद्ध
  • 29 सितंबर: तृतीया श्राद्ध एवं महाभरणी श्राद्ध
  • 30 सितंबर: चतुर्थी एवं पंचमी श्राद्ध
  • 1 अक्टूबर: षष्ठी श्राद्ध
  • 2 अक्टूबर: सप्तमी श्राद्ध
  • 3 अक्टूबर: अष्टमी श्राद्ध
  • 4 अक्टूबर: नवमी/मातृ नवमी
  • 10 अक्टूबर: सर्वपितृ अमावस्या

नोट: मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और पंचांग गणना के आधार पर स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। धार्मिक कर्मकांड के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित है।

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