Media24Media.com: जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द; अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमाल

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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द; अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमाल

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नई दिल्ली- जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच छात्र प्रदर्शन से संबंधित दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह राहत दी।

क्या था पूरा मामला?

दरअसल, कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी थी। इसके बाद दिल्ली समेत अन्य राज्यों में प्रदर्शन से जुड़े कई मामले दर्ज किए गए थे।

दिल्ली पुलिस ने पहले प्रदर्शन से संबंधित 13 FIR वापस लेने की इच्छा सुप्रीम कोर्ट के सामने जताई थी। साथ ही पुलिस ने 2,873 ऐसे लोगों की भूमिका की जांच के लिए अलग FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी थी, जिन्हें पुलिस ने गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बताया था।

अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया। यह प्रावधान शीर्ष अदालत को किसी मामले में “पूर्ण न्याय” (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश देने की विशेष शक्ति देता है।

अदालत ने कहा कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए संबंधित छात्र प्रदर्शनों को लेकर देश के किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में दर्ज मामलों को आगे नहीं बढ़ाया जाए और उन्हें बंद माना जाए। साथ ही इसी अवधि की उन्हीं घटनाओं को लेकर नई FIR दर्ज करने पर भी रोक लगाई गई है।

2,873 लोगों को लेकर क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में एक महत्वपूर्ण अपवाद भी है। 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दी गई है, जिनके बारे में दिल्ली पुलिस ने गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि होने का दावा किया है। पुलिस का कहना था कि इन लोगों की मौजूदगी और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा या संपत्ति के नुकसान में उनकी संभावित भूमिका की अलग से जांच जरूरी है।

इसलिए यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि हर व्यक्ति के खिलाफ हर तरह की कार्रवाई हमेशा के लिए खत्म कर दी गई है। छात्रों और सामान्य प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों को बड़ी राहत मिली है, जबकि गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों के मामले में अलग जांच की गुंजाइश रखी गई है।

5 सितंबर का प्रस्तावित प्रदर्शन भी वापस

सुप्रीम कोर्ट के फैसले और केंद्र की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन वापस लेने का फैसला किया। यह प्रदर्शन FIR वापस लेने और सरकार की ओर से किए गए अन्य आश्वासनों को लेकर किया जाना था।

परिवारों को मुआवजे का भी मुद्दा

सुनवाई के दौरान परीक्षा विवाद से जुड़े उन छात्रों के परिवारों को मुआवजे का मुद्दा भी सामने आया, जिनकी आत्महत्या से मौत हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र ने इस संबंध में नीति और मुआवजे की प्रक्रिया तय करने के लिए समय मांगा और अदालत ने प्रक्रिया पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब

इस फैसले से जंतर-मंतर के छात्र प्रदर्शन से जुड़े कई छात्रों और प्रदर्शनकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण या सामान्य प्रदर्शन में शामिल छात्रों का भविष्य पुराने FIR के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए, जबकि गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के मामले को अलग रखा गया है। 

यानी कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े छात्रों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।




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