Media24Media.com: रुपये को संभालने में RBI सक्रिय, डॉलर की बिक्री से बढ़ा समर्थन; तेल कीमतों और वैश्विक तनाव के बीच मुद्रा बाजार पर नजर

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रुपये को संभालने में RBI सक्रिय, डॉलर की बिक्री से बढ़ा समर्थन; तेल कीमतों और वैश्विक तनाव के बीच मुद्रा बाजार पर नजर

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मुंबई- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को तेज गिरावट से बचाने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में अपना हस्तक्षेप बढ़ा दिया है। बाजार सूत्रों के मुताबिक, RBI डॉलर की बिक्री के जरिए रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।

बुधवार को रुपया 94.89 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान सीमित दायरे में रहा। अंत में यह 94.97 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि मंगलवार को रुपया 94.95 के स्तर पर बंद हुआ था। बाजार में RBI के हस्तक्षेप के कारण रुपये को 95 प्रति डॉलर के स्तर के नीचे जाने से सहारा मिला।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 95-97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है।

महंगे तेल का असर भारत के आयात बिल, व्यापार घाटे और महंगाई पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि विदेशी मुद्रा बाजार में RBI की भूमिका इस समय काफी महत्वपूर्ण हो गई है।

RBI की डॉलर बिक्री से रुपये को मिला सहारा

बाजार विशेषज्ञों और कारोबारियों के मुताबिक, RBI पिछले कई कारोबारी सत्रों से रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए डॉलर की बिक्री कर रहा है। बुधवार को भी केंद्रीय बैंक के बाजार खुलने से पहले और कारोबार के दौरान हस्तक्षेप करने की संभावना जताई गई। इसका उद्देश्य रुपये को किसी एक स्तर पर स्थायी रूप से रोकना नहीं, बल्कि बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करना है।

RBI के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होने से वह जरूरत पड़ने पर बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाकर रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकता है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 729 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।

NRI जमा से भी मजबूत हुई RBI की स्थिति

रुपये को समर्थन देने में विदेशी मुद्रा प्रवाह भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गैर-निवासी भारतीयों (NRI) की विदेशी मुद्रा जमा में हाल के दिनों में तेज वृद्धि हुई है। इससे देश के विदेशी मुद्रा संसाधनों को मजबूती मिली है और RBI की बाजार में हस्तक्षेप करने की क्षमता बढ़ी है।

आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के तनाव, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अमेरिकी ब्याज दरों और विदेशी निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगी। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन RBI का हस्तक्षेप तेज गिरावट और अत्यधिक अस्थिरता को सीमित कर सकता है।

फिलहाल RBI की सक्रियता ने रुपये को कुछ राहत दी है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

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