Media24Media.com: #CrudeOil

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #CrudeOil. Show all posts
Showing posts with label #CrudeOil. Show all posts

ट्रंप के फैसले से कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट, Brent और WTI क्रूड 6% तक टूटे

No comments Document Thumbnail

 अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर अस्थायी विराम लगने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी राहत देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमलों को फिलहाल रोकने के फैसले के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 6 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।


इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाड़ी देशों का मानक 'ब्रेंट क्रूड' (Brent Crude) गिरकर $91.42 प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी क्रूड 'डब्ल्यूटीआई' (WTI) $84.15 प्रति बैरल की रेंज में कारोबार करता दिखाई दिया।

कूटनीतिक रास्ते तलाशने की कोशिश

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीतिक समाधान को एक मौका देने के लिए आगे की सैन्य कार्रवाइयों पर रोक लगाई है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज़ (Mike Waltz) ने मीडिया से बातचीत में पुष्टि की कि बातचीत का माहौल बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे वैश्विक बाजारों में उम्मीद जगी है कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष कम हो सकता है और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक शिपिंग फिर से सामान्य हो सकेगी।

सोमवार को बाजार खुलते ही:

  • अमेरिकी क्रूड (WTI): $5.16 (5.78%) की गिरावट के साथ $84.15 प्रति बैरल पर पहुंचा।
  • ब्रेंट क्रूड (Brent): $5.36 (5.54%) टूटकर $91.42 प्रति बैरल पर आ गया।

फाइनेंशियल एनालिस्ट्स के मुताबिक, 14-सूत्रीय समझौते (MOU) पर बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षा स्थिति स्पष्ट होने से बाजारों को स्थिरता मिलेगी। हालाँकि, शिपिंग डेटा (Kpler) के अनुसार कंपनियां अभी भी पूरी सुरक्षा का आश्वासन मिलने तक सतर्क रुख अपना रही हैं, जिससे जहाजों की आवाजाही में सुधार धीमा रहने की संभावना है।

न्यू मैंगलोर पोर्ट के बर्थ-9 के पुनर्विकास को मंजूरी, ₹438 करोड़ की परियोजना

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत के बंदरगाह अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने न्यू मैंगलोर पोर्ट अथॉरिटी (NMPA) के बर्थ नंबर 9 के पुनर्विकास के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना PPP मॉडल (DBFOT आधार) पर लागू की जाएगी। इसकी स्वीकृति 25 मार्च 2026 को प्रदान की गई।

परियोजना की मुख्य बातें

यह परियोजना पुराने ढांचे को हटाकर आधुनिक सुविधाओं के साथ बर्थ नंबर 9 का पुनर्निर्माण करेगी, जिससे क्रूड ऑयल, पेट्रोलियम उत्पाद (POL) और LPG जैसे तरल कार्गो का संचालन किया जा सकेगा।

  • ड्राफ्ट गहराई: 10.5 मीटर से बढ़ाकर 14 मीटर (भविष्य में 19.8 मीटर तक)

  • जहाज क्षमता: 2 लाख DWT तक, जिसमें VLGC जहाज शामिल

लागत और समयसीमा

  • कुल लागत: ₹438.29 करोड़

  • निर्माण अवधि: 2 वर्ष

  • कुल कंसेशन अवधि: 30 वर्ष

क्षमता

  • कुल क्षमता: 10.90 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA)

  • न्यूनतम गारंटीकृत कार्गो (MGC): 7.63 MTPA (5वें वर्ष तक)

प्रमुख लाभ

  • लगभग 50 साल पुराने ढांचे का आधुनिकीकरण

  • बड़े जहाजों के संचालन से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी

  • ऑटोमेशन और आधुनिक मशीनरी से कार्यक्षमता में वृद्धि

  • उन्नत सुरक्षा और अग्निशमन प्रणाली

रणनीतिक महत्व

यह परियोजना कर्नाटक और केरल के क्षेत्रों में व्यापार को बढ़ावा देगी, ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करेगी और न्यू मैंगलोर पोर्ट को एक महत्वपूर्ण समुद्री हब के रूप में स्थापित करेगी।

मंत्री का बयान

मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समुद्री क्षेत्र के आधुनिकीकरण का हिस्सा है और इससे भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत स्थिति बनाएगा।


यूरोप और मध्य पूर्व में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार में एक बार फिर उथल-पुथल देखने को मिल रही है। यूरोप और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें सोमवार को तेज़ी के साथ चढ़ गईं। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हालात लंबे समय तक बने रहे तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता है।

📈 बाज़ार की स्थिति

ब्रेंट क्रूड के दाम में शुरुआती कारोबार के दौरान लगभग 2% की बढ़ोतरी हुई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड में भी तेजी देखी गई। तेल व्यापारियों का मानना है कि तनावपूर्ण माहौल में सप्लाई बाधित होने का जोखिम सबसे बड़ा कारण है।

🌍 भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि

  • यूरोप में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, खासकर गैस और तेल की आपूर्ति को प्रभावित करने वाली राजनीतिक खींचतान की वजह से।

  • मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और बढ़ते सुरक्षा संकट ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। क्षेत्र में स्थिरता की कमी से तेल उत्पादन और निर्यात मार्गों पर खतरा मंडरा रहा है।

🏦 आर्थिक असर

तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती हैं।

  • ऊर्जा आयातक देशों के लिए महंगाई और चालू खाते का घाटा बढ़ने का खतरा है।

  • परिवहन, लॉजिस्टिक्स और रोज़मर्रा की ज़रूरतों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है।

  • भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि आयात बिल और भी भारी हो जाएगा।

🔎 विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि फिलहाल बाज़ार में अस्थिरता बनी रहेगी। अगर हालात और बिगड़े तो तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक भी पहुंच सकता है। ऐसे में तेल उत्पादक देशों पर दबाव है कि वे उत्पादन और आपूर्ति को संतुलित बनाए रखें।

🔮 आगे का परिदृश्य

तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक महंगाई को और भड़का सकती हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यूरोप और मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर गंभीर असर पड़ सकता है।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.