Media24Media.com: दीये से शिक्षा की मशाल तक महेन्द्र पटेल

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दीये से शिक्षा की मशाल तक महेन्द्र पटेल

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शिक्षा, नवाचार, पर्यावरण और जनजागरण में योगदान; 5 सितंबर को राज्यपाल शिक्षक सम्मान

आरंग- कभी गांव में बिजली और सड़क के अभाव में दीये की रोशनी में पढ़ने वाले शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने संघर्षों को संकल्प में बदलकर शिक्षा, पर्यावरण, जनजागरूकता, सामाजिक सेवा और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके बहुआयामी योगदान के लिए 5 सितंबर को राज्यपाल शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।

9 जुलाई 1976 को महासमुंद जिले के ग्राम लाफिन कला के किसान परिवार में जन्मे पटेल ने मिडिल की पढ़ाई के लिए तीन किलोमीटर पैदल चलकर शिक्षा हासिल की। नवमी से बारहवीं तक बहन के घर रहकर पढ़ाई की। स्व-अध्ययन के बल पर डी.एड., स्नातक तथा हिन्दी, राजनीति और संस्कृत में स्नातकोत्तर शिक्षा पूरी की।

पत्थर की बेंच से पक्का भवन तक 

11 दिसंबर 1998 को बेलसोंडा के स्टेशनपारा स्थित शासकीय नवीन प्राथमिक शाला से शिक्षकीय जीवन शुरू किया। संसाधनों के अभाव में पत्थरों को बेंच बनाकर पढ़ाने से शुरू हुआ सफर जनसहयोग से पक्के भवन और आधा एकड़ भूमि तक पहुंचा। पारधी समुदाय के घर-घर जाकर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयास से विद्यालय की दर्ज संख्या बढ़ी। पांचवीं बोर्ड परीक्षा में सभी 11 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए।

वर्ष 2005 से शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में कार्यरत पटेल ने जनसहभागिता से करीब 70 लाख रुपये के विकास कार्य, पांच एकड़ मैदान का समतलीकरण, 81 फीट ऊंचे स्तंभ पर ध्वजारोहण, प्रार्थना शेड, सांस्कृतिक मंच, पुस्तकालय, किचन शेड और अहाता सहित अनेक सुविधाओं के विकास में योगदान दिया। स्वव्यय से कंप्यूटर, संगीत सामग्री और स्मार्ट टीवी उपलब्ध कराने के साथ जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में भी सहयोग किया।

नवाचार के लिए मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण 

शिक्षण में हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेजी पद्यों का लयबद्ध पठन तथा तकनीक और संगीत का प्रयोग उनका प्रमुख नवाचार रहा। अंग्रेजी के टेंस स्ट्रक्चर को गीत के माध्यम से सिखाने की पद्धति को शिक्षा विभाग के दिशा कार्यक्रम में भी अपनाया गया।

शिक्षादान और कैरियर मार्गदर्शन 

पिछले चार वर्षों से ‘शिक्षा दान केंद्र’ के माध्यम से कक्षा 9वीं-10वीं के सैकड़ों विद्यार्थियों को निःशुल्क कोचिंग और कैरियर मार्गदर्शन दे रहे हैं। स्वच्छता, पर्यावरण, मतदाता व यातायात जागरूकता जैसे अभियानों के लिए करीब 30 गीत और छह लघु फिल्मों का निर्माण-निर्देशन किया। उनके लगाए करीब 300 पौधे आज वृक्ष बन चुके हैं।

राजा मोरध्वज महोत्सव  आयोजन में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका 

आरंग की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत के संरक्षण में भी उनका योगदान रहा है। शोध, लेखन, राष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभागिता, ऐतिहासिक पत्रिका के संकलन तथा राजा मोरध्वज महोत्सव की शुरुआत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण सहित राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर 30 से अधिक सम्मान प्राप्त कर चुके महेन्द्र पटेल की यात्रा बताती है कि मजबूत संकल्प अभावों को भी अवसर में बदल सकता है। दीये की रोशनी में शुरू हुआ सफर आज हजारों बच्चों के भविष्य की मशाल बन चुका है।


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