Media24Media.com: छत्तीसगढ़ में अब सैटेलाइट से होगा धान के रकबे का सटीक आकलन, खाद्य विभाग और CGCOST के बीच हुआ MoU

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छत्तीसगढ़ में अब सैटेलाइट से होगा धान के रकबे का सटीक आकलन, खाद्य विभाग और CGCOST के बीच हुआ MoU

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में धान की खेती के वास्तविक रकबे का अब सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और GIS तकनीक के जरिए सटीक आकलन और सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय और छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CGCOST) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

सैटेलाइट से होगी खेतों की निगरानी

नई व्यवस्था के तहत भू-अभिलेख, डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों को आपस में मिलाकर यह सत्यापित किया जाएगा कि संबंधित खेत में वास्तव में धान की फसल मौजूद है या नहीं। जियो-रेफरेंस्ड कृषि भूमि के अक्षांश-देशांतर (Latitude-Longitude) का सैटेलाइट इमेजरी से मिलान किया जाएगा। इससे धान के वास्तविक रकबे का अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित आकलन करने में मदद मिलेगी।

FRA और डुबान क्षेत्रों की भी होगी डिजिटल मैपिंग

इस पहल में वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत आने वाली तथा डुबान क्षेत्रों की ऐसी कृषि भूमि पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिनका जियो-रेफरेंस्ड रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इन क्षेत्रों की GIS आधारित डिजिटल मैपिंग कर पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी। इसके बाद सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से वहां धान की खेती वाले क्षेत्रफल का आकलन किया जाएगा। 

किसानों को क्या फायदा होगा?

सटीक और प्रमाणिक फसल डेटा तैयार होने से धान उपार्जन व्यवस्था में डेटा की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। खासकर दूरस्थ और ऐसे क्षेत्रों में जहां पारंपरिक रिकॉर्ड के आधार पर फसल सत्यापन में कठिनाई होती है, वहां तकनीक अतिरिक्त आधार उपलब्ध कराएगी। 

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में होगा उपयोग

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तैयार की जाने वाली डिजिटल मैपिंग और भू-स्थानिक डेटा का उपयोग खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान की फसल के वास्तविक रकबे के आकलन में किया जाएगा। इसका उद्देश्य धान उपार्जन से जुड़े निर्णयों के लिए अधिक सटीक और तकनीक आधारित आंकड़े उपलब्ध कराना है। 

अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ समझौता

MoU के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, खाद्य संचालनालय की संचालक डॉ. फरिहा आलम और CGCOST के संचालक कवीश्वर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। 

सार: अब धान के रकबे के आकलन में सिर्फ पारंपरिक रिकॉर्ड पर निर्भरता के बजाय सैटेलाइट, GIS और डिजिटल क्रॉप सर्वे का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे फसल क्षेत्रफल की पहचान और सत्यापन के लिए एक अतिरिक्त तकनीकी आधार तैयार होगा।

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