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महाराष्ट्र को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की दूसरी किस्त मिलेगी, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की समीक्षा बैठक

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नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत जारी धनराशि के उपयोग की समीक्षा के लिए एक वर्चुअल बैठक की। बैठक में महाराष्ट्र सरकार को योजना की दूसरी किस्त (Second Installment) जारी करने पर भी विचार किया गया।

बैठक में महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा महाराष्ट्र सरकार के अधिकारी शामिल हुए।

समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने पहले चरण में महाराष्ट्र को ₹335 करोड़ की राशि जारी की थी। राज्य सरकार ने इस राशि में से लगभग ₹260 करोड़ का उपयोग कर लिया है, जो निर्धारित 75 प्रतिशत उपयोग के मानक से अधिक है। इसके आधार पर महाराष्ट्र दूसरी किस्त प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने बताया कि ₹335 करोड़ की दूसरी किस्त जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र सरकार को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि तय समय के भीतर 75 प्रतिशत से अधिक धनराशि का प्रभावी उपयोग राज्य की कृषि विकास योजनाओं के प्रति गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि सरकारी धन का समय पर खर्च होने के साथ-साथ उसकी निरंतर निगरानी भी आवश्यक है, ताकि राशि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जाए। केंद्रीय मंत्री ने फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाने में महाराष्ट्र के प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित किसानों को करीब ₹14,000 करोड़ की सहायता राशि मात्र पांच दिनों में सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित करने की राज्य सरकार की पहल की प्रशंसा की।

बैठक में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। वहीं डिजिटल कृषि, कृषि विस्तार, राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM), बीज, तिलहन तथा एग्रोफॉरेस्ट्री जैसे क्षेत्रों में खर्च की गति बढ़ाने और लंबित देनदारियों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए गए।

समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फसल बीमा के लिए आवेदन करते समय किसानों द्वारा सही जानकारी देना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) धारक और गैर-केसीसी दोनों प्रकार के किसान योजना का लाभ लेने के पात्र हैं, लेकिन आवेदन के दौरान किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर प्रस्तावित घोषणा का उद्देश्य केवल पारदर्शिता और सही जानकारी सुनिश्चित करना है, न कि किसी पात्र किसान को योजना से वंचित करना।

बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि महाराष्ट्र सरकार राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्य घटकों में भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश के कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती रहेगी।

राष्ट्रीय मंच पर चमकी धमतरी की अभिनव पहल, सीएससी स्थापना दिवस पर PACS ड्रोन मॉडल को मिली विशेष पहचान

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कोलकाता में आयोजित 17वें सीएससी स्थापना दिवस समारोह में धमतरी के कृषि नवाचार की सराहना, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कृषि सेवाओं के विस्तार का बना मॉडल

रायपुर- कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के 17वें स्थापना दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित धोनो धान्यो ऑडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की अभिनव पहल PACS ड्रोन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली। कार्यक्रम में जिले द्वारा प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के माध्यम से संचालित ड्रोन सेवाओं, डिजिटल क्रॉप सर्वे तथा किसान पंजीयन (फार्मर रजिस्ट्री) जैसे नवाचारों की सराहना की गई। समारोह के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष थे।


 कार्यक्रम के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत धमतरी जयंत नाहटा ने PACS के माध्यम से कृषि उन्नयन“ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भाग लेते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सेवाओं के विस्तार तथा PACS को ’वन स्टॉप रूरल सर्विस सेंटर’ के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले की 10 प्राथमिक कृषि साख समितियों के माध्यम से ड्रोन द्वारा तरल उर्वरकों का छिड़काव किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले की एक अभिनव पहल है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में PACS के माध्यम से किसानों को कृषि यंत्रीकरण, डिजिटल सेवाएं, फसल सर्वेक्षण, किसान पंजीयन, वित्तीय एवं बैंकिंग सेवाओं सहित विभिन्न सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक कृषि सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी तथा किसानों को तकनीक आधारित सुविधाओं का लाभ सहजता से प्राप्त होगा।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सीएससी-व्हीएलई को सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल शासन के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अपर मुख्य सचिव, भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिव तथा सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी अखिल कुमार सहित देशभर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं सीएससी प्रतिनिधि उपस्थित थे।

NE-RACE पोर्टल से सिक्किम सहित उत्तर-पूर्व के किसानों को राष्ट्रीय बाजार से सीधा लाभ

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 उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के किसानों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया नॉर्थ ईस्टर्न रीजन एग्री-कमोडिटी ई-कनेक्ट (NE-RACE) पोर्टल पूरी तरह से क्रियाशील है और किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), स्वयं सहायता समूहों (SHGs) एवं सहकारी संस्थाओं को देशभर के खरीदारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है।

23 जनवरी 2026 तक इस पोर्टल पर 6,807 विक्रेता/किसान/किसान उत्पादक कंपनियां और 735 खरीदार पंजीकृत हो चुके हैं, जबकि 1,797 कृषि-उत्पाद सूचीबद्ध किए गए हैं। पोर्टल के माध्यम से अब तक कुल ₹895.56 लाख का कारोबार संभव हुआ है।

NE-RACE प्लेटफॉर्म से सिक्किम सहित उत्तर-पूर्वी राज्यों के किसानों को विशेष लाभ मिला है। इस पोर्टल के जरिए सिक्किम के किसानों ने सीधे राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाते हुए 130 मीट्रिक टन कृषि-उत्पाद, जिसकी कीमत ₹54.40 लाख है, की बिक्री की है।

सिक्किम में किसानों को जोड़ने और उन्हें संचालन संबंधी सहायता देने के लिए NE-RACE के अंतर्गत बहुभाषी हेल्पडेस्क और हेल्पलाइन सेवाओं का उपयोग किया जा रहा है। 23 जनवरी 2026 तक 251 किसान सिक्किम से इस पोर्टल पर पंजीकृत किए जा चुके हैं।

राज्य में अब तक पांच आउटरीच एवं ऑनबोर्डिंग कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा, किसानों और खरीदारों के बीच संपर्क को और मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय खरीदार-विक्रेता बैठकों जैसे उपाय भी अपनाए जा रहे हैं।

NE-RACE प्लेटफॉर्म खरीदार-विक्रेता मिलान (मैचमेकिंग) के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराता है। इसके लिए बहुभाषी हेल्पडेस्क, फील्ड-स्तरीय सहयोग और राज्य समन्वयकों की व्यवस्था की गई है, जो किसानों को पंजीकरण, समस्याओं के समाधान और संवाद में सहायता प्रदान करते हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य सिक्किम के किसानों की डिजिटल बाजार तक पहुंच को मजबूत करना और उनकी बाजार तैयारी को बेहतर बनाना है।

यह जानकारी केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

सहकारिता के माध्यम से किसानों की समृद्धि: केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पैनचकूला में KRIBHCO सम्मेलन को संबोधित किया

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केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज पैनचकूला, हरियाणा में कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (KRIBHCO) द्वारा ‘सतत कृषि में सहकारिता की भूमिका’ विषय पर आयोजित सहकारी सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी, केंद्रीय राज्य मंत्री, सहकारिता कृष्ण पाल गुरजर, सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. अशिष कुमार भुतानी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

सहकारिता से किसान समृद्धि:

अमित शाह ने कहा कि हरियाणा, जो इतिहास, धर्म, आध्यात्म और परंपराओं से जुड़ा हुआ है, आज सहकारिता और कृषि के सहयोग से किसानों की समृद्धि के नए आयाम रच रहा है। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अवसर पर सम्मेलन में दूध शीतलन केंद्र, HAFED फ्लोर मिल, RuPay Platinum कार्ड और मॉडल PACS के पंजीकरण प्रमाण पत्र, और अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष पोर्टल का भी उद्घाटन किया गया।

कृषि और पशुपालन में रोजगार और समृद्धि:

मंत्री ने कहा कि देश की लगभग 70% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और बड़ी संख्या में लोग सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि और पशुपालन पर निर्भर हैं। जब कृषि और पशुपालन को सहकारिता के माध्यम से जोड़ा जाता है, तो यह न केवल 125 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है, बल्कि उन्हें समृद्ध भी बनाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गुजरात में अमूल हर साल लगभग ₹90,000 करोड़ 36 लाख महिला दूध उत्पादकों को वितरित करता है, जबकि बाजार मूल्य पर यही राशि केवल ₹12,000 करोड़ होती।

सहकारिता के माध्यम से समृद्धि:

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय स्तर पर सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर ‘Prosperity through Cooperation’ का नया मंत्र दिया। अब सहकारिता केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि के लिए भी जुड़ी हुई है।

कृषि और ग्रामीण विकास में सरकार की पहल:

  • 2014 में प्रधानमंत्री बनने के समय कृषि बजट ₹22,000 करोड़ था, जिसे अब ₹1,27,000 करोड़ किया गया।

  • ग्रामीण विकास बजट ₹80,000 करोड़ से बढ़कर ₹1,87,000 करोड़।

  • किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत सालाना ₹6,000।

  • कृषि अवसंरचना निधि के तहत ₹1 लाख करोड़ का प्रावधान।

  • e-NAM, श्री अन्ना मिशन, दाल और तेलहन मिशन, डेयरी क्षेत्र की परिपत्र प्रणाली जैसी योजनाओं को लागू किया गया।

PACS और सहकारी संस्थाओं का सशक्तिकरण:

शाह ने बताया कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के लिए मॉडल उपनियम तैयार किए गए और मल्टीपर्पज PACS प्रमाण पत्र जारी किए गए। 30 से अधिक क्षेत्रों को PACS से जोड़ा गया, जैसे उर्वरक वितरण, कृषि उत्पाद की सफाई, ग्रेडिंग, विपणन, दवा दुकानें, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसियां और जल वितरण।

राष्ट्रीय स्तर पर सहकारी संस्थाएं:

  • National Cooperative Exports Limited (NCEL) – किसानों के उत्पाद के निर्यात के लिए

  • National Cooperative Organics Limited (NCOL) – ऑर्गेनिक उत्पादों के विपणन और प्रमाणन के लिए

  • Bharatiya Beej Sahkari Samiti Limited (BBSSL) – बीज उत्पादन, खरीद और वितरण के लिए

अमूल का उदाहरण और भविष्य की योजना:

अमूल आज लगभग 3 करोड़ लीटर दूध प्रतिदिन एकत्र करता है और ₹1,23,000 करोड़ का टर्नओवर है। शाह ने कहा कि अगले 15 वर्षों में देश में कम से कम 20 ऐसे संस्थान होंगे जो किसानों के लिए मजबूत सहकारी संस्थाएं बनेंगी।

सहकारिता के अन्य पहल:

  • ‘भारत टैक्सी’ योजना जल्द लॉन्च की जाएगी, जिसमें पूरी आय ड्राइवरों को मिलेगी।

  • हरियाणा के किसानों को गन्ने के उच्चतम मूल्य और समृद्धि उपलब्ध कराई गई।

हरियाणा का योगदान:

शाह ने कहा कि हरियाणा ने देश की खाद्य सुरक्षा, दूध उत्पादन और खेलों में सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह राज्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और तीनों सशस्त्र सेनाओं में सबसे अधिक प्रतिशत में योगदान देता है और इसके खिलाड़ियों ने देश को हर खेल में शीर्ष पदक सूची में पहुँचाया है।

इस प्रकार, सहकारिता, कृषि और ग्रामीण समृद्धि के क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल किसानों की आय, रोजगार और सतत विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

कृषि में AI और ड्रोन तकनीक को बढ़ावा: किसानों की उत्पादकता, स्थिरता और आय में सुधार

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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW) राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से प्रिसिजन फार्मिंग, ड्रोन तकनीक, क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकों को अपनाने को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। AI और ड्रोन का उपयोग फसल उत्पादकता, सतत कृषि और किसानों की आजीविका में सुधार तथा कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए किया जा रहा है। प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं—

किसान ई-मित्र

यह एक वॉयस-आधारित AI-संचालित चैटबॉट है, जो पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े किसानों के प्रश्नों का समाधान करता है। यह 11 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है, प्रतिदिन 8,000 से अधिक प्रश्नों का निपटारा करता है और अब तक 93 लाख से अधिक प्रश्नों के उत्तर दिए जा चुके हैं।

राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS)

जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले फसल नुकसान से निपटने के लिए यह प्रणाली AI और मशीन लर्निंग का उपयोग कर कीट प्रकोप का पता लगाती है, जिससे समय पर हस्तक्षेप संभव होता है। वर्तमान में 10,000 से अधिक विस्तार कर्मी इसका उपयोग कर रहे हैं। यह 66 फसलों और 432 से अधिक कीटों को सपोर्ट करती है।

AI आधारित मानसून पूर्वानुमान पायलट

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और डेवलपमेंट इनोवेशन लैब इंडिया के सहयोग से खरीफ 2025 के लिए 13 राज्यों के हिस्सों में स्थानीय स्तर पर मानसून आगमन का पूर्वानुमान तैयार किया गया। एम-किसान पोर्टल के माध्यम से 13 राज्यों के 3,88,45,214 किसानों को पाँच क्षेत्रीय भाषाओं में एसएमएस भेजे गए। मध्य प्रदेश और बिहार में किए गए फीडबैक सर्वे में 31–52% किसानों ने बुवाई से जुड़े निर्णयों (भूमि तैयारी, बुवाई समय, फसल/इनपुट चयन) में बदलाव किया।

कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM)

छोटे एवं सीमांत किसानों तथा महिला किसानों को ड्रोन खरीद पर 50% अनुदान (अधिकतम ₹5.00 लाख) दिया जा रहा है। साथ ही कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है, जहां ड्रोन सहित आधुनिक कृषि मशीनरी किराए पर उपलब्ध होती है। 2023-24 से 2025-26 (30 नवंबर 2025 तक) इस अवधि में 2,122 ड्रोन किसानों और CHC को स्वीकृत किए गए।

नमो ड्रोन दीदी योजना

महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन उपलब्ध कराकर टिकाऊ व्यवसाय और आजीविका समर्थन देने हेतु यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना स्वीकृत की गई। 2023-24 में प्रमुख उर्वरक कंपनियों द्वारा 1,094 ड्रोन SHGs को वितरित किए गए, जिनमें से 500 ड्रोन नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत हैं। एडीआरटीसी, बेंगलुरु के अध्ययन के अनुसार, ड्रोन से SHGs की गतिविधियां आधुनिक कृषि पद्धतियों तक विस्तृत हुईं, दक्षता-उत्पादकता बढ़ी और ग्रामीण महिलाओं की आय के अवसर बढ़े।

आईसीएआर द्वारा ड्रोन प्रसार

2023-24 से 2025-26 (30 नवंबर 2025 तक) आईसीएआर, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAUs) और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के माध्यम से किसानों के खेतों में 41,010 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रोन प्रदर्शन किए गए, जिससे 4,52,291 किसान लाभान्वित हुए।

यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

धान खरीदी को आसान बनाने की दिशा में राज्य सरकार का निर्णायक कदम: धान विक्रय प्रक्रिया हुई सरल, अब दिन-रात कभी भी मिलेगा तूहर टोकन

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सरकार किसानों के साथ: टोकन सिस्टम में समय की बंदिश खत्म

किसानों के लिए बड़ी सहूलियत: तूहर टोकन ऐप अब 24 घंटे उपलब्ध

किसानों की सुविधा सर्वोपरि, टोकन व्यवस्था को बनाया गया सहज

रायपुर- प्रदेश के किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तूहर टोकन ऐप को अब 24×7 खोल दिया गया है। अब मोबाइल एप से टोकन काटने के लिए किसी निर्धारित समय की बाध्यता नहीं रहेगी। किसान दिन-रात किसी भी समय अपनी सुविधा के अनुसार टोकन बुक कर सकेंगे।

अब किसान 13 जनवरी तक अगले 20 दिनों तक के लिए टोकन ले सकते हैं।इससे किसानों को धान विक्रय की योजना बनाने और टोकन प्राप्त करने में पर्याप्त समय मिलेगा तथा भीड़ और तकनीकी दबाव की समस्या से राहत मिलेगी।

इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा 2 एकड़ एवं 2 एकड़ से कम रकबा वाले किसान अब 31 जनवरी तक तूहर टोकन ऐप से टोकन ले सकेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर लघु किसनों के लिए यह सुविधा मुहैया कराई गई है l

उल्लेखनीय है कि टोकन प्रत्येक सहकारी समिति को आबंटित सीमा के भीतर ही जारी किए जाएंगे। किसानों से आग्रह है कि वे समय रहते तूहर टोकन ऐप के माध्यम से टोकन प्राप्त करें और किसी भी असुविधा से बचें।

"किसानों की सुविधा और पारदर्शी व्यवस्था हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। तूहर टोकन ऐप को 24×7 खोलने और समय की बाध्यता समाप्त करने का निर्णय इसी सोच का परिणाम है। अब किसान बिना किसी दबाव के, अपनी सुविधा अनुसार टोकन बुक कर सकेंगे। 2 एकड़ एवं 2 एकड़ से कम रकबा वाले किसानों के लिये टोकन की अतिरिक्त समय सीमा और अवधि का विस्तार किसानों को वास्तविक राहत देगा। राज्य सरकार किसान हित में हर संभव कदम उठाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।"- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

6वां अंतर्राष्ट्रीय एग्रोनॉमी कांग्रेस (IAC–2025) का उद्घाटन: कृषि में स्मार्ट, सतत और लाभप्रद समाधान पर जोर

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6वें अंतर्राष्ट्रीय एग्रोनॉमी कांग्रेस (IAC–2025) का भव्य उद्घाटन आज एनपीएल ऑडिटोरियम, पुरसा कैंपस, नई दिल्ली में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, शिवराज सिंह चौहान की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह तीन दिवसीय वैश्विक कार्यक्रम (24–26 नवम्बर 2025) भारतीय एग्रोनॉमी सोसाइटी (ISA) द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) और ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

कांग्रेस में भारत और विदेशों से 1,000 से अधिक वैज्ञानिक, नीति निर्माता, छात्र, विकास साझेदार और उद्योग विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इसके अलावा, FAO, CIMMYT, ICRISAT, IRRI, ICARDA और IFDC जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के वैज्ञानिक भी इसमें उपस्थित हैं।

उद्घाटन सत्र में, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “Viksit Bharat @2047 की नींव स्मार्ट, सतत और लाभप्रद कृषि में है। कृषि को कम संसाधनों में अधिक उत्पादन करने और भविष्य के लिए संरक्षण करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। एग्रोनॉमी वह पुल है जो वैज्ञानिक अनुसंधान को किसान के खेत से जोड़ता है।” उन्होंने मिट्टी की सेहत, जल उपयोग दक्षता, जैव विविधता, इको-न्यूट्रिशन और डिजिटल कृषि पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने IAC–2025 घोषणापत्र जारी किया, जिसमें प्रमुख सिफारिशें शामिल हैं:

  • मिट्टी में कार्बन संचयन और जल-दक्ष खेती को बढ़ावा देना

  • AI आधारित डिजिटल कृषि समाधान और Agri-Stack फ्रेमवर्क को बढ़ाना

  • प्राकृतिक और पुनर्योजी कृषि मॉडलों को मुख्यधारा में लाना

  • युवा और महिला किसानों के लिए लक्षित नवाचार कार्यक्रम

  • स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर अगली पीढ़ी की एग्रोनॉमी शिक्षा

  • One-Health, LiFE मिशन और Net-Zero 2070 के अनुरूप कृषि रणनीतियाँ

  • भारतीय जलवायु-स्मार्ट कृषि मॉडलों का वैश्विक प्रचार

कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा, “एग्रोनॉमी को किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान बनाना होगा। इसका अंतिम उद्देश्य किसान की आय, पर्यावरण सुरक्षा और पोषण गुणवत्ता बढ़ाना है।” उन्होंने वर्षा पर निर्भर कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, महिला सहभागिता, युवा-नेतृत्व वाले नवाचार और ग्रामीण माइक्रो-उद्यमों को सशक्त करने पर बल दिया।

कांग्रेस में 10 प्रमुख थीमैटिक सिम्पोजिया आयोजित किए जाएंगे, जिनमें वैज्ञानिक प्रस्तुतियाँ शामिल होंगी:

  • जलवायु-प्रतिरोधी और कार्बन-न्यूट्रल कृषि

  • प्राकृतिक समाधान और One-Health

  • सटीक इनपुट प्रबंधन और संसाधन दक्षता

  • आनुवंशिक क्षमता का उपयोग

  • ऊर्जा-कुशल मशीनरी, डिजिटल समाधान और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन

  • पोषण-संवेदनशील कृषि और इको-न्यूट्रिशन

  • लिंग सशक्तिकरण और आजीविका विविधीकरण

  • Agriculture 5.0, अगली पीढ़ी की शिक्षा और Viksit Bharat 2047

  • युवा वैज्ञानिक और छात्र सम्मेलन

ICAR के सचिव और DARE के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जात ने कहा, “भारत की एग्रोनॉमी अनुसंधान विश्व स्तरीय जलवायु-स्मार्ट कृषि का नेतृत्व कर रही है। IAC–2025 के परिणाम ICAR Vision–2050 में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।”

यह मंच G20, FAO, CGIAR और साउथ–साउथ कोऑपरेशन के साथ साझेदारी को और मजबूत करेगा और वैश्विक कृषि नवाचार एवं स्थिरता के नए मार्ग खोलेगा।

अम्बागढ़ चौकी के कलकसा के किसान धनेश राम ने स्वयं के मोबाइल से कटा टोकन, जताई खुशी

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डिजिटल नवाचार से किसानों का धान विक्रय हुआ आसान

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 3,100 रुपए प्रति क्विंटल तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का निर्णय किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर आया है। इसका सकारात्मक प्रभाव जिलेभर के किसानों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा है।

अंबागढ़ चौकी विकासखण्ड के ग्राम कलकसा के किसान धनेश राम आज कौड़ीकसा उपार्जन केंद्र में 52 क्विंटल धान विक्रय के लिए पहुंचे थे। उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि इस वर्ष उन्होंने धान विक्रय टोकन स्वयं मोबाइल ऐप के माध्यम से प्राप्त किया, जिससे प्रक्रिया आसान और सुविधाजनक हो गई। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार लागू किए गए इस डिजिटल नवाचार ने किसानों के लिए धान विक्रय की पारंपरिक जटिलताओं को काफी कम कर दिया है। अब किसान अपने मोबाइल फोन पर कुछ ही मिनटों में धान विक्रय के लिए टोकन काट सकते हैं और निर्धारित समय पर उपार्जन केंद्र पहुंचकर बिना किसी बाधा के अपना धान बेच सकते हैं।

कृषक धनेश राम ने बताया कि उपार्जन केंद्र में कर्मचारियों का व्यवहार सहयोगपूर्ण था, तौल-कांटे सही थे, बारदाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध था तथा साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर थी। इसके कारण किसान निश्चिंत होकर अपनी उपज बेच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष उनकी फसल की पैदावार भी अच्छी हुई है, जिससे परिवार की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने धान का उचित मूल्य उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

घर बैठे धान विक्रय का नया दौर: तुंहर टोकन ऐप से किसानों को मिली बड़ी राहत

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मोबाइल से काट रहे टोकन, धान खरीदी प्रक्रिया हुई पारदर्शी और तेज

रायपुर- खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धान उपार्जन को सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए शुरू किया गया तुंहर टोकन मोबाइल ऐप किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। धान खरीदी तिहार के बीच इस डिजिटल नवाचार ने उपार्जन केंद्रों में लगने वाली भीड़, समय की बर्बादी और पारंपरिक जटिलताओं को काफी हद तक कम कर दिया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेशभर में लागू की गई इस व्यवस्था से किसान अब अपने मोबाइल से कुछ ही मिनटों में धान विक्रय हेतु टोकन निकाल पा रहे हैं और निर्धारित समय पर आसानी से केंद्र पहुंचकर धान बेच रहे हैं।

शुक्रवार को 52 किसानों ने मोबाइल से काटा टोकन

अम्बिकापुर जिले के उपार्जन केंद्रों में शुक्रवार को 52 किसानों ने तुंहर टोकन ऐप का उपयोग कर घर बैठे धान का टोकन काटा। बढ़ती लोकप्रियता यह दर्शाती है कि डिजिटल सुविधा ने किसानों का विश्वास तेजी से जीता है।

अम्बिकापुर विकासखंड के आदिमजाति सेवा सहकारी समिति मेड्राकला में पहुंचने वाले ग्राम भिट्ठीकला के कृषक श्याम राजवाड़े और मिलन राम ने बताया कि मोबाइल ऐप से टोकन काटने के बाद केंद्र में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।

श्याम राजवाड़े ने कहा कि उन्होंने 26 क्विंटल धान का टोकन कुछ ही मिनटों में घर बैठे निकाल लिया। पूर्व में केंद्र में जाकर टोकन लेने में समय और श्रम दोनों लगते थे, पर अब आते ही बारदाना मिला और धान की तौल भी तत्काल हो गई। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य देने के निर्णय की सराहना की।

इसी तरह किसान मिलन राम ने बताया कि उन्होंने 62 क्विंटल धान का टोकन मोबाइल ऐप से काटा। बार-बार केंद्र नहीं आना पड़ा और पहुंचते ही बारदाना व तौल की प्रक्रिया बिना किसी बाधा पूरी हुई। उन्होंने कहा कि इस बार की खरीदी व्यवस्था पूरी तरह किसान-मित्र साबित हो रही है।

डिजिटल नवाचार से बढ़ी पारदर्शिता और सुविधा

तुंहर टोकन ऐप के जरिए किसानों को अब लंबी लाइनों से मुक्ति,समय और श्रम की बचत,टोकन प्रक्रिया में पारदर्शिता,भीड़-भाड़ और अव्यवस्था में कमी

जैसे सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। किसानों की संतुष्टि यह साबित करती है कि राज्य सरकार की यह डिजिटल पहल सफल रही है और धान विक्रय को अधिक सरल, तेज और भरोसेमंद बनाकर किसानों को बड़ी राहत दी है।

भारत में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास के माध्यम से “एक राष्ट्र – एक कृषि – एक टीम” के विजन को साकार करने की दिशा में प्रगति

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कृषि: भारत की अर्थव्यवस्था और विकास का आधार

भारत की लगभग आधी आबादी की आजीविका का मुख्य स्रोत कृषि है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 18 प्रतिशत का योगदान देती है। उत्पादकता बढ़ाने, लागत घटाने और राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उच्च शिक्षा, अनुसंधान और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से मानव क्षमता का निर्माण अत्यंत आवश्यक है।

कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार को इस क्षेत्र के तीन प्रमुख स्तंभ माना गया है। ये तीनों स्तंभ मिलकर उस संस्थागत और वैज्ञानिक ढांचे को बनाते हैं जो 5 प्रतिशत कृषि विकास दर को बनाए रखने और “विकसित कृषि एवं समृद्ध किसान” — अर्थात “विकसित भारत” की मूल अवधारणा — को साकार करने के लिए आवश्यक है। इस दृष्टि को प्राप्त करने के लिए इन तीनों स्तंभों को “वन नेशन – वन एग्रीकल्चर – वन टीम” की भावना के तहत समन्वयित रूप से कार्य करना होगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)

स्थापना और भूमिका:

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की स्थापना वर्ष 1929 में की गई थी। यह कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक शीर्ष संस्था है, जो भारत में कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य और पशु विज्ञान के अनुसंधान और उच्च शिक्षा का समन्वय करती है।

विस्तृत नेटवर्क:

ICAR का नेटवर्क विश्व के सबसे बड़े कृषि अनुसंधान नेटवर्क में से एक है, जिसमें 113 राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान और 74 कृषि विश्वविद्यालय शामिल हैं। इसने हरित क्रांति में अहम भूमिका निभाई और अब जलवायु-सहिष्णु, उच्च उत्पादक किस्मों एवं तकनीकों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

प्रसार और गुणवत्ता:

ICAR देशभर में 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) संचालित करता है, जो किसानों तक नवीन तकनीक पहुंचाने का कार्य करते हैं। यह संस्थान ICAR मॉडल एक्ट (संशोधित 2023) और कृषि महाविद्यालयों की स्थापना हेतु न्यूनतम आवश्यकताओं के मानक जारी करता है तथा राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड के माध्यम से संस्थानों का मान्यता प्रदान करता है।

कृषि शिक्षा संस्थान

सरकारी संस्थान:

भारत में वर्तमान में 63 राज्य कृषि विश्वविद्यालय (SAUs), 3 केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAUs) — (पूस, इंफाल, झांसी), 4 डीम्ड विश्वविद्यालय (IARI-नई दिल्ली, NDRI-कर्नाल, IVRI-इज़तनगर, CIFE-मुंबई), और 4 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं जिनमें कृषि संकाय शामिल हैं। इसके अलावा, 11 एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एप्लिकेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट्स (ATARI) केंद्र भी ICAR नेटवर्क का हिस्सा हैं।

निजी क्षेत्र की भूमिका:

राज्य सरकारों की अपनी नीतियों के तहत निजी कृषि संस्थानों की स्थापना और प्रोत्साहन किया जाता है। ICAR इन संस्थानों को मान्यता प्रदान करता है। पिछले पाँच वर्षों में ICAR द्वारा मान्यता प्राप्त निजी कृषि कॉलेजों की संख्या 2020–21 में 5 से बढ़कर 2024–25 में 22 हो गई है।

केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAUs)

  1. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (बिहार):

    • अक्टूबर 2016 में राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय (1970 में स्थापित) को CAU में परिवर्तित किया गया।

    • इसमें 8 घटक कॉलेज हैं — कृषि, कृषि अभियांत्रिकी, सामुदायिक विज्ञान, मत्स्य, उद्यानिकी, वानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, और खाद्य प्रौद्योगिकी।

    • विश्वविद्यालय के तीन परिसर पूसा (समस्तीपुर), ढोली (मुजफ्फरपुर) और पिपराकोठी (पूर्वी चंपारण) में हैं।

    • यह 18 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) संचालित करता है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप लघु अवधि के प्रमाणपत्र एवं डिप्लोमा कार्यक्रम चलाता है।

  2. केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल (मणिपुर):

    • 1993 में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1992 के तहत स्थापित।

    • यह पूर्वोत्तर भारत के 7 राज्यों — अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, नागालैंड और त्रिपुरा — को सेवाएं प्रदान करता है।

    • इसके 13 घटक कॉलेज हैं और यह कृषि एवं संबद्ध विषयों में 10 स्नातक, 48 परास्नातक और 34 पीएच.डी. कार्यक्रम संचालित करता है।

  3. रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी (उत्तर प्रदेश):

    • कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE) के अधीन संसद के अधिनियम (संख्या 10, 2014) द्वारा स्थापित।

    • विश्वविद्यालय कृषि, उद्यानिकी, पशु विज्ञान और कृषि अभियांत्रिकी में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में कार्य करता है।

    • इसके कॉलेज झांसी (UP) और दतिया (MP) में स्थित हैं।

कृषि में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

तकनीकी नवाचार:

सरकार IoT और AI तकनीकों को अपनाकर कृषि के आधुनिकीकरण को बढ़ावा दे रही है। इनका उपयोग सटीक कृषि (precision farming), ड्रोन तकनीक, जलवायु-स्मार्ट ग्रीनहाउस, कीट निगरानी, और रिमोट सेंसिंग में किया जा रहा है।

इनोवेशन हब्स:

डीएसटी के राष्ट्रीय मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (NM-ICPS) के तहत 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब्स (TIHs) स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 3 कृषि में IoT और AI अनुप्रयोगों पर केंद्रित हैं।
उदाहरण के लिए —

  • IIT रोपड़ का एग्री/वॉटर TIH केसर उत्पादन हेतु IoT सेंसर पर कार्य कर रहा है।

  • IIT मुंबई “Internet of Everything” TIH चला रहा है।

  • IIT खड़गपुर का AI4ICPS हब AI/ML समाधानों पर केंद्रित है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर:

इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय ने IoT उत्कृष्टता केंद्र बेंगलुरु, गुरुग्राम, गांधीनगर और विशाखापट्टनम में स्थापित किए हैं। विशाखापट्टनम का CoE कृषि-तकनीक को बढ़ावा देने के लिए उद्योग, निवेशक और अकादमिक जगत को जोड़ता है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम:

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत “इनोवेशन एंड एग्री-एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम” के माध्यम से कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप्स को आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये स्टार्टअप AI, IoT, ब्लॉकचेन, फूड टेक्नोलॉजी, और वैल्यू एडिशन जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

किसानों का कौशल विकास और प्रशिक्षण

सरकार ने किसानों को नई तकनीकों और बाजार की मांगों के अनुरूप ढालने के लिए कौशल विकास को प्राथमिकता दी है।

मुख्य कार्यक्रम:

  • स्किल ट्रेनिंग ऑफ रूरल यूथ (STRY) — 2021–24 के बीच 51,000 से अधिक ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया गया।

  • कृषि यांत्रिकीकरण उप-मिशन (SMAM) — 2021–25 के दौरान 57,000 किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी के उपयोग में प्रशिक्षित किया गया।

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (Soil Health Card) — जुलाई 2025 तक 25.17 करोड़ कार्ड जारी किए गए, 93,000+ प्रशिक्षण और 6.8 लाख प्रदर्शन आयोजित हुए।

  • कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) — 2021–25 के बीच 76 लाख से अधिक किसानों को प्रशिक्षित किया गया।

  • कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (ATMA) — 2021–25 के दौरान 1.27 करोड़ किसानों को प्रशिक्षण मिला।

  • किसान उत्पादक संगठन (FPOs) — 10,000 से अधिक पंजीकृत, जो किसानों को व्यवसाय और विपणन कौशल में प्रशिक्षित कर रहे हैं।

निष्कर्ष

भारत का कृषि शिक्षा और प्रशिक्षण तंत्र आज शिक्षा, अनुसंधान, तकनीक और कौशल विकास को एकीकृत रूप में जोड़ता है। ICAR, केंद्रीय और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों तथा कृषि विज्ञान केंद्रों ने एक मजबूत आधार बनाया है जिससे खेती अधिक उत्पादक, टिकाऊ और ज्ञान-आधारित बन रही है।

IoT, AI, और सटीक कृषि तकनीकों के उपयोग ने कृषि को आधुनिक और डेटा-आधारित दिशा में अग्रसर किया है। ATMA, STRY, और SMAM जैसी योजनाओं ने किसानों और ग्रामीण युवाओं को तकनीकी एवं उद्यमशीलता कौशल से सशक्त बनाया है।

इन पहलों के माध्यम से भारत न केवल आत्मनिर्भर खाद्य उत्पादन की दिशा में अग्रसर है, बल्कि एक मजबूत, समृद्ध और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण की ओर भी बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ: खरीफ 2025 में संतोषजनक बुवाई, ₹38,000 करोड़ की उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी

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केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सभी किसानों की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ₹38,000 करोड़ की उर्वरक सब्सिडी को मंजूरी दी गई है।

शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि खरीफ 2025 सीजन में बुवाई का कार्य अत्यंत संतोषजनक रहा है। धान की कुल बुवाई का क्षेत्रफल 441.58 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। इसी प्रकार, तेलहन फसलों का कुल क्षेत्रफल 190.13 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जिसमें सोयाबीन और मूंगफली प्रमुख फसलें हैं। दालों की बुवाई 120.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है, जो देश की पोषण सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं गन्ने का क्षेत्रफल 59.07 लाख हेक्टेयर है, जिससे गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

इस वर्ष भारत के कृषि क्षेत्र को अनुकूल मानसून, पर्याप्त वर्षा और जलाशयों में बेहतर जल भंडारण का बड़ा लाभ मिला है। साप्ताहिक कृषि प्रगति समीक्षा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अधिकांश प्रमुख जलाशयों में जलस्तर सामान्य या उससे अधिक है, जिससे सिंचाई की आवश्यकताएँ पूरी तरह पूरी हो रही हैं और खरीफ फसलों की समय पर बुवाई संभव हो सकी है। पर्याप्त मिट्टी की नमी ने फसल वृद्धि को बढ़ावा दिया है और रबी फसलों के क्षेत्र में विस्तार की संभावना को बल दिया है।

कृषि आयुक्त डॉ. पी.के. सिंह द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि सिंचाई परियोजनाओं और जलाशयों में जल की उपलब्धता में सुधार हुआ है, जिससे सिंचित क्षेत्रों में कृषि विकास को प्रोत्साहन मिला है। देशभर के 161 जलाशयों में कुल जीवित जल भंडारण 165.58 बिलियन घन मीटर (BCM) है, जो पिछले वर्ष के स्तर का 104.30% और दस वर्ष के औसत का 115.95% है।

बैठक में यह भी बताया गया कि खरीफ फसलों की कटाई कुछ क्षेत्रों में प्रारंभ हो चुकी है, जो कुल खरीफ क्षेत्र के लगभग 27% हिस्से को कवर करती है, जबकि रबी फसलों की बुवाई प्रारंभिक चरण में है। प्याज, आलू और टमाटर फसलों की स्थिति देशभर में संतोषजनक है और चावल व गेहूं का वर्तमान भंडार बफर मानकों से अधिक है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश का कृषि क्षेत्र समय पर और अनुकूल मानसून, पर्याप्त जल संसाधनों, कुशल योजना और डिजिटल नवाचारों के कारण ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की किसान हितैषी नीतियाँ किसानों की आय बढ़ाने और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने में सहायक हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार, राज्यों के सहयोग से, आगामी रबी सीजन में दालों और तेलहनों की अधिक बुवाई और रिकॉर्ड उत्पादकता को प्रोत्साहित करने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूसा परिसर में राष्ट्रीय बीज निगम की अत्याधुनिक बीज प्रसंस्करण इकाई का किया उद्घाटन, ‘सीड मैनेजमेंट 2.0’ और ऑनलाइन बीज बुकिंग प्लेटफॉर्म भी किया लॉन्च

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) की अत्याधुनिक सब्जी एवं पुष्प बीज प्रसंस्करण और पैकेजिंग इकाई का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने बरेली, धारवाड़, हासन, सूरतगढ़ और रायचूर में स्थित पांच NSC बीज प्रसंस्करण संयंत्रों का भी वर्चुअल उद्घाटन किया।

पूसा, नई दिल्ली स्थित बीज भवन में स्थापित सब्जी बीज प्रसंस्करण इकाई की क्षमता 1 टन प्रति घंटा है, जबकि अन्य पांच संयंत्रों की क्षमता 4 टन प्रति घंटा प्रत्येक है। ये सभी संयंत्र उन्नत तकनीक से सुसज्जित हैं, जिससे देशभर के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी और बीज उत्पादन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

कार्यक्रम के दौरान शिवराज चौहान ने “सीड मैनेजमेंट 2.0” प्रणाली और किसानों के लिए एक ऑनलाइन बीज बुकिंग प्लेटफॉर्म का भी शुभारंभ किया। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब किसान अपनी बीज आवश्यकताओं की बुकिंग ऑनलाइन कर सकेंगे, जिससे पारदर्शिता और सुगमता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।

शिवराज चौहान ने कहा कि नई सुविधाओं के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज आसानी से उपलब्ध होंगे, जिससे कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि हाल ही में आयोजित “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के दौरान सबसे अधिक शिकायतें नकली और निम्न गुणवत्ता वाले बीजों को लेकर प्राप्त हुईं। इसलिए गुणवत्तापूर्ण बीजों की आपूर्ति सुनिश्चित करना अनिवार्य है और इसमें NSC की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार इस दिशा में कड़े कदम उठा रही है।

केंद्रीय मंत्री ने NSC टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल आत्मनिर्भर कृषि प्रणाली की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय बीज निगम का कार्य केवल आजीविका कमाना नहीं, बल्कि देश के अन्न भंडार को समृद्ध करना भी है।”

उन्होंने निगम से आग्रह किया कि वह क्षेत्रीय भाषाओं में नवाचारों को बढ़ावा दे ताकि किसानों तक सेवाएं अधिक सुलभ हो सकें और निजी कंपनियों की मनमानी पर अंकुश लगाया जा सके। उन्होंने कहा, “निजी क्षेत्र की अपनी भूमिका है, लेकिन सार्वजनिक निगमों का भी विशेष महत्व है। राज्य बीज विकास निगमों के कामकाज में भी सुधार की आवश्यकता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए NSC को स्पष्ट रोडमैप के साथ काम करना चाहिए।”

कार्यक्रम में कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, NSC की CMD और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी, संयुक्त सचिव अजीत कुमार साहू, तथा कृषि मंत्रालय और NSC के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय बीज निगम लिमिटेड एक शेड्यूल ‘बी’ – मिनी रत्न श्रेणी-I कंपनी है, जो भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व में है। वर्ष 1963 में स्थापना के बाद से NSC देशभर के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।


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