Media24Media.com: Muchukunda temple Dhamtari: सुर-असुर संग्राम की धरती अब बनेगी पर्यटन का नया ठिकाना, मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली का होगा कायाकल्प

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Muchukunda temple Dhamtari: सुर-असुर संग्राम की धरती अब बनेगी पर्यटन का नया ठिकाना, मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली का होगा कायाकल्प

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 Muchukunda temple Dhamtari: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी (सिहावा) क्षेत्र में स्थित मांदागिरी पर्वत जल्द ही राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। मेचका गांव के पास मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित मुचुकुंद ऋषि की पौराणिक तपोस्थली धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता और ट्रेकिंग के लिए भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। जिला प्रशासन अब इस स्थल को विकसित करने की दिशा में योजना तैयार कर रहा है।


आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का संगम

मांदागिरी पर्वत को सिहावा-नगरी अंचल की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली श्रद्धा, अध्यात्म और प्रकृति के अनूठे संगम के रूप में प्रसिद्ध है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मुचुकुंद महाराज इक्ष्वाकु वंश के राजा मांधाता के पुत्र थे। मान्यता है कि सुर-असुर संग्राम के बाद उन्होंने इसी क्षेत्र में तपस्या की थी। यह स्थल सिहावा क्षेत्र की सप्तऋषि तपोभूमि से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को भी समृद्ध करता है।

पहाड़ से दिखता है सोंढूर जलाशय का विहंगम दृश्य

मांदागिरी पर्वत पर सुंदर तालाब, प्राचीन प्रतिमाएं और माता सीता सहित विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद हैं। पहाड़ी की ऊंचाई से सोंढूर जलाशय और आसपास के वनांचल का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।

प्राकृतिक वातावरण और पहाड़ी रास्तों के कारण यह क्षेत्र ट्रेकिंग और एडवेंचर गतिविधियों के शौकीनों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

पर्यटन विकास पर प्रशासन का फोकस

धमतरी कलेक्टर के अनुसार, मांदागिरी की आध्यात्मिक और प्राकृतिक संभावनाओं को देखते हुए इसके विकास की योजना बनाई जा रही है। पर्यटन स्थल पर पहुंच मार्ग, स्वच्छता, पेयजल और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करने पर जोर दिया जाएगा।

इसके साथ ही स्थल को धार्मिक पर्यटन के साथ इको-टूरिज्म और ट्रेकिंग/एडवेंचर स्पॉट के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

मांदागिरी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने से आसपास के ग्रामीण और स्थानीय समुदाय की पर्यटन गतिविधियों में भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

नगरी से करीब 27 किलोमीटर दूर स्थित मांदागिरी आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक और इको-टूरिज्म स्थलों में अपनी पहचान बना सकता है।

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