Media24Media.com: 'साल में 300 दिन खुलें दफ्तर' , सरकारी छुट्टियों पर उठे सवाल: मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

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'साल में 300 दिन खुलें दफ्तर' , सरकारी छुट्टियों पर उठे सवाल: मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

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 रायपुर। ​छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में मिलने वाली छुट्टियों को लेकर अब एक नई बहस छिड़ गई है। किसान मजदूर संघ (छत्तीसगढ़, रायपुर) ने राज्य सरकार से मांग की है कि सरकारी दफ्तरों में छुट्टियों की संख्या कम की जाए और साल में कम से कम 300 दिन काम अनिवार्य किया जाए। संघ का मानना है कि ज्यादा छुट्टियों की वजह से आम जनता के काम रुक जाते हैं और उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।


​संघ के संयोजक ललित चन्द्रनाहू ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्य सचिव विकास शील के नाम एक ज्ञापन सौंपा है।


​ छुट्टियों का गणित: साल में 125 दिन बंद रहते हैं दफ्तर

​किसान मजदूर संघ ने अपने पत्र में छुट्टियों का पूरा हिसाब-किताब दिया है। पत्र में बताया गया है कि
​शनिवार और रविवार की छुट्टियां और सप्ताह में 5 दिन के कार्य के कारण साल में 47 शनिवार और 49 रविवार (कुल 96 दिन) की छुट्टी रहती है।

सरकारी छुट्टियां: इसके अलावा 29 दिन का अन्य शासकीय अवकाश होता है।
​ अतिरिक्त अवकाश: संत रविदास जयंती जैसी नई घोषित छुट्टियों को मिलाकर साल के 365 दिनों में से करीब 125 दिन केवल छुट्टियों में निकल जाते हैं।

​ बचे हुए दिनों में भी बैठकों की वजह से अटकते हैं काम

​संघ का कहना है कि 125 दिन की छुट्टियों के बाद साल में सिर्फ 240 कार्य दिवस (Working Days) बचते हैं। लेकिन इन 240 दिनों में भी आम जनता का काम पूरी तरह नहीं हो पाता है।
​ कलेक्टर कार्यालय की टीएल बैठक: हर सप्ताह मंगलवार को यह बैठक होती है।
​ राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक: महीने के पहले और चौथे सप्ताह के अंतिम कार्य दिवस पर यह बैठक आयोजित होती है।
​इन बैठकों के कारण महीने में लगभग 6 दिन आम जनता के सरकारी काम सही तरीके से संपादित नहीं हो पाते हैं। इसके साथ ही, 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों के समय, मुख्यमंत्री के जिला प्रवास के कारण तीन-तीन दिनों तक काम प्रभावित रहता है।

​ कर्मचारियों की छुट्टियों से भी काम पर असर

​पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न प्रकार के अवकाशों से भी जनहित के काम रुकते हैं:-
​कैजुअल और अर्जित अवकाश: कर्मचारियों को 13 दिन का आकस्मिक अवकाश (Casual Leave), 30 दिन का अर्जित अवकाश (Earned Leave) और 3 दिन का ऐच्छिक अवकाश मिलता है।

​ कलेक्टर द्वारा घोषित छुट्टियां: जिला कलेक्टरों द्वारा 2 अतिरिक्त और 48 अन्य अवकाश दिए जाते हैं।

​ मातृत्व और पितृत्व अवकाश: महिला कर्मचारियों को 365-365 दिनों का मातृत्व अवकाश और पुरुष कर्मचारियों को 30 दिनों का पितृत्व अवकाश मिलता है।
​संघ का तर्क है कि इन सब छुट्टियों के जुड़ने से असल में केवल 192 दिन ही काम हो पाता है, जिससे आम नागरिक लगातार परेशान होते हैं।

​ किसान मजदूर संघ की प्रमुख मांगें

​जनहित को ध्यान में रखते हुए संघ ने सरकार के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:-

  • ​ 300 कार्य दिवस अनिवार्य हों: साल के 365 दिनों में से सरकारी कार्यालयों में कम से कम 300 दिन काम करना अनिवार्य किया जाए।
  • ​ गैर-शासकीय आयोग का गठन: छुट्टियों का नए सिरे से निर्धारण करने के लिए 3 सदस्यीय गैर-शासकीय आयोग बनाया जाए।
  • ​ संविदा कर्मचारियों की तर्ज पर नियम: लाखों संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की तरह ही मातृत्व और पितृत्व अवकाश को अवैतनिक किया जाए।

​ अर्जित अवकाश में कटौती: कर्मचारियों के अर्जित अवकाश को घटाकर 13 दिन किया जाए।

​ त्योहारों की छुट्टियों की समीक्षा: शाकम्भरी जयंती, छेरछेरा, रामनवमी, महावीर जयंती, बुद्ध पूर्णिमा, ईद-उल-जुहा, कबीर जयंती, हरेली, ईद-ए-मिलाद, रक्षा बंधन, कृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका (तीज), महात्मा गांधी जयंती, महाशिवरात्रि, कर्मा जयंती और विश्व आदिवासी दिवस जैसे अवसरों की छुट्टियों को निरस्त करने अथवा ऐच्छिक अवकाश घोषित करने पर विचार किया जाए।

​किसान मजदूर संघ का कहना है कि आम जनता के हित में यह कदम उठाना बेहद जरूरी है ताकि सरकारी सेवाएं बिना किसी रुकावट के लोगों को मिल सकें।

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