Media24Media.com: तिहरे हत्याकांड के 5 दोषियों को आजीवन कारावास, कोर्ट परिसर में फूटा परिजनों का गुस्सा

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तिहरे हत्याकांड के 5 दोषियों को आजीवन कारावास, कोर्ट परिसर में फूटा परिजनों का गुस्सा

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 धमतरी (छत्तीसगढ़)। बहुचर्चित भोयना तिहरे हत्याकांड में बुधवार को अदालत ने अपना बड़ा फैसला सुनाया। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मोहन सिंह कोर्राम की अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए सभी 5 वयस्क दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद मृतकों के परिजनों का आक्रोश भड़क उठा और उन्होंने परिसर में ही आरोपियों पर चप्पलें बरसा दीं।


परिजनों का छलका दर्द: आरोपियों पर बरसाईं चप्पलें

फैसले के तुरंत बाद जब पुलिसकर्मी दोषियों को अदालत कक्ष से बाहर ला रहे थे, तब मृतकों के परिजन रोते-बिलखते हुए उन पर टूट पड़े। "हमारा घर उजाड़कर तुम्हें क्या मिला?" कहते हुए परिजनों ने आरोपियों पर चप्पलों से हमला कर दिया। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिसकर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों को सुरक्षा घेरे में लिया और पुलिस वाहन में बैठाकर मौके से रवाना किया।

मामूली विवाद में गई थी 3 लोगों की जान

यह सनसनीखेज वारदात 11 अगस्त 2025 की रात ग्राम भोयना स्थित अन्नपूर्णा ढाबा के पास हुई थी। मामूली बात पर शुरू हुए विवाद के बाद हुए खूनी हमले में रायपुर निवासी आलोक सिंह ठाकुर, नितिन टांडी और सुरेश हियाल की बेदर्दी से हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मामले की तफ्तीश करते हुए कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से 3 नाबालिग थे। सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने 5 वयस्क आरोपियों को हत्या, बलवा, मारपीट और अवैध हथियार रखने का दोषी पाया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

"डेढ़ साल की बेटी आज भी चॉकलेट लाने का इंतजार करती है"

अभियोजन पक्ष की ओर से दोषियों के लिए फांसी (मृत्युदंड) की मांग की गई थी, लेकिन फांसी की सजा न मिलने से परिजन बेहद आहत नज़र आए। मृतक नितिन की पत्नी ने कहा कि उनके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं और उन्हें उम्मीद थी कि हत्यारों को फांसी की सजा मिलेगी।

वहीं मृतक सुरेश की पत्नी अंजू भावुक होकर रो पड़ीं। उन्होंने कहा, "मेरी डेढ़ साल की बेटी आज भी टकटकी लगाए दरवाजे की तरफ देखती है। उसे लगता है कि उसके पापा अभी चॉकलेट लेकर वापस आएंगे।"

हाईकोर्ट में अपील करेंगे परिजन

निचली अदालत के फैसले से असंतुष्ट परिजनों ने साफ किया है कि न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। परिजनों का कहना है कि वे दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा (फांसी) दिलाने के लिए उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।

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