Media24Media.com: TET की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों की ‘टेट मुक्ति महारैली’, शिक्षा मंत्री बोले- विभागीय परीक्षा पर विचार

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TET की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों की ‘टेट मुक्ति महारैली’, शिक्षा मंत्री बोले- विभागीय परीक्षा पर विचार

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का विरोध अब तेज हो गया है। मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों में शिक्षकों ने ‘टेट मुक्ति महारैली’ निकाली। शिक्षकों ने पदोन्नति में TET की अनिवार्यता समाप्त करने सहित अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।

वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों का सवाल- अब TET क्यों?

शिक्षक संगठनों का कहना है कि बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति उस समय हुई थी, जब उनकी भर्ती और पदोन्नति के लिए TET अनिवार्य नहीं था। ऐसे में वर्षों तक सरकारी स्कूलों में सेवा देने के बाद अब पदोन्नति के लिए TET की शर्त लागू किए जाने को शिक्षक अनुचित मान रहे हैं।

अंबिकापुर में आयोजित प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सवाल उठाया कि 20 से 28 वर्षों तक शिक्षण कार्य कर चुके अनुभवी शिक्षकों को अब दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए क्यों बाध्य किया जा रहा है।

शिक्षक संघर्ष मोर्चा का दावा है कि TET की अनिवार्यता से प्रदेश के करीब 80 हजार शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि यह संख्या संगठन द्वारा बताई गई है, इसलिए इसे सरकारी आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

जिला मुख्यालयों पर निकली ‘टेट मुक्ति रैली’

आंदोलन के तहत प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों में शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। अंबिकापुर में बड़ी संख्या में शिक्षक कला केंद्र मैदान में एकत्र हुए। यहां धरना-प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्टोरेट और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक ‘टेट मुक्ति महारैली’ निकाली।

शिक्षकों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय के नाम कलेक्टर तथा संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।

शिक्षकों की पांच प्रमुख मांगें क्या हैं?

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सरकार के सामने पांच सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  1. TET की अनिवार्यता समाप्त की जाए।

  2. पुरानी सेवा अवधि की गणना कर पेंशन संबंधी लाभ दिया जाए।

  3. केंद्रीय वेतनमान लागू कर वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए।

  4. D.Ed. प्रशिक्षित शिक्षकों को ब्रिज कोर्स के माध्यम से B.Ed. कराने की व्यवस्था की जाए।

  5. भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त किया जाए।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि उनकी मांग केवल TET तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से लंबित सेवा और वेतन संबंधी मुद्दे भी आंदोलन का हिस्सा हैं।

शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान, विभागीय परीक्षा का विकल्प तलाश रही सरकार

आंदोलन के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का बयान शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्री ने कहा है कि सरकार मध्य प्रदेश की तर्ज पर विभागीय परीक्षा आयोजित करने के विकल्प पर विचार कर रही है।

मंत्री के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार TET अनिवार्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट गई है और विभागीय TET परीक्षा आयोजित कराने की अनुमति मांग रही है। यदि सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश को ऐसी विभागीय परीक्षा कराने की अनुमति देता है, तो छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश में इसी तरह की व्यवस्था लागू करने के विकल्प पर विचार कर सकती है।

यानी फिलहाल विभागीय परीक्षा को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, बल्कि इसे संभावित समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

TET को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या है?

TET विवाद की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भूमिका महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में लोकसभा में बताया था कि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले के अनुसार TET, RTE Act की धारा 23 के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं में से एक है और संबंधित विद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति के लिए इसे अनिवार्य माना गया है।

इसके बाद 29 मई 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने TET योग्यता हासिल करने की समय-सीमा को 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया। अदालत ने संबंधित सरकारों और प्राधिकरणों से TET नियमित अंतराल पर आयोजित करने का प्रयास करने को भी कहा था, अधिमानतः वर्ष में दो बार।

यही न्यायिक पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के बीच चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई है।

क्या विभागीय परीक्षा से शिक्षकों को राहत मिल सकती है?

यदि सरकार विभागीय TET या विभागीय परीक्षा की व्यवस्था लागू करने में सफल होती है, तो लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए यह मौजूदा व्यवस्था के मुकाबले एक अलग रास्ता हो सकता है। लेकिन इसके लिए कानूनी और प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

मौजूदा समय में मंत्री का बयान केवल विचाराधीन विकल्प की ओर संकेत करता है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि छत्तीसगढ़ में विभागीय परीक्षा निश्चित रूप से लागू हो गई है।

आंदोलन का असर स्कूलों पर भी पड़ा

TET को लेकर शिक्षकों के विरोध का असर कुछ स्थानों पर स्कूलों के संचालन पर भी दिखाई दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में शिक्षकों ने ऑनलाइन अवकाश लिया, जिसके कारण कुछ स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं और कुछ स्थानों पर स्कूल बंद भी रहे।

हालांकि, आंदोलन का उद्देश्य शिक्षकों के अनुसार सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना और पदोन्नति से जुड़ी TET अनिवार्यता पर पुनर्विचार कराना है।

आगे क्या होगा?

अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर हैं। शिक्षकों की मांग है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को उनकी पुरानी सेवा और अनुभव के आधार पर पदोन्नति का अवसर दिया जाए तथा उन पर नई पात्रता शर्त को सीधे लागू न किया जाए।

दूसरी ओर, सरकार के सामने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और शिक्षकों की मांगों के बीच कानूनी रूप से व्यवहार्य समाधान तलाशने की चुनौती है।

शिक्षा मंत्री की ओर से विभागीय परीक्षा के विकल्प पर विचार करने का संकेत मिलने के बाद शिक्षकों को कुछ राहत की उम्मीद जरूर जगी है। लेकिन अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का आंदोलन अब प्रदेशव्यापी मुद्दा बन चुका है। ‘टेट मुक्ति महारैली’ के जरिए शिक्षकों ने सरकार के सामने अपनी नाराजगी और मांगें रखी हैं। वहीं शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा विभागीय परीक्षा के विकल्प पर विचार किए जाने की बात ने इस पूरे विवाद में नया मोड़ ला दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार विभागीय परीक्षा का रास्ता निकालकर वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को राहत देगी, या TET की अनिवार्यता मौजूदा व्यवस्था के तहत ही लागू रहेगी? आने वाले दिनों में सरकार के फैसले से तस्वीर और साफ होगी।

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