Media24Media.com: भारत में सोयाबीन तेल का रिकॉर्ड आयात संभव, रूस-यूक्रेन युद्ध से बदला खाद्य तेल बाजार

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भारत में सोयाबीन तेल का रिकॉर्ड आयात संभव, रूस-यूक्रेन युद्ध से बदला खाद्य तेल बाजार

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अगस्त में 6.2 लाख टन तक पहुंच सकता है सोयाबीन तेल का आयात, सूरजमुखी तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से बढ़ी मांग

नई दिल्ली- रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते सूरजमुखी तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का असर अब भारत के खाद्य तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। भारत में अगस्त 2026 के दौरान सोयाबीन तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। व्यापारियों के मुताबिक अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात करीब 6.20 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है, जो चालू मार्केटिंग वर्ष के मासिक औसत से लगभग 46 प्रतिशत अधिक होगा।

सूरजमुखी तेल की सप्लाई में बड़ी गिरावट

रूस और यूक्रेन भारत के लिए सूरजमुखी तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हैं। युद्ध के कारण ब्लैक सी क्षेत्र से सूरजमुखी तेल की खेप प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत में अगस्त के दौरान सूरजमुखी तेल का आयात घटकर करीब 1.80 लाख टन रहने का अनुमान है, जो फरवरी 2026 के बाद सबसे निचला स्तर हो सकता है।

सूरजमुखी तेल की उपलब्धता कम होने के कारण खासकर दक्षिण भारत के खरीदार सोयाबीन तेल की ओर रुख कर रहे हैं। देश के पश्चिमी और दक्षिणी तटों के बंदरगाहों पर सोयाबीन तेल की खेप पहुंच रही है।

सोयाबीन तेल की कीमत बनी आकर्षक

सोयाबीन तेल और पाम तेल के बीच कीमत का अंतर भी कम हुआ है। पहले सोयाबीन तेल पर पाम तेल की तुलना में 100 डॉलर प्रति टन से अधिक का प्रीमियम था, जो अब घटकर करीब 50 डॉलर प्रति टन रह गया है। इस वजह से आयातकों के लिए सोयाबीन तेल अपेक्षाकृत आकर्षक विकल्प बन गया है।

सितंबर से दिसंबर के लिए भी बड़ी खरीद

भारत ने सितंबर से दिसंबर के बीच डिलीवरी के लिए पहले ही करीब 14 लाख टन सोयाबीन तेल की खरीद कर ली है। अर्जेंटीना और ब्राजील भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं। इसके अलावा चीन, मिस्र, थाईलैंड और तुर्किये से भी सोयाबीन तेल की खरीद की जा रही है।

त्योहारी सीजन से भी बढ़ी मांग

भारत में अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारी सीजन के दौरान खाद्य तेल की खपत आमतौर पर बढ़ जाती है। इससे पहले ही रिफाइनरियों और आयातकों ने अपने स्टॉक को मजबूत करना शुरू कर दिया है। जुलाई में भारत का कुल खाद्य तेल आयात 1.48 मिलियन टन रहा, जो सितंबर 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर था। इसी दौरान सोयाबीन तेल का आयात 31 प्रतिशत बढ़कर करीब 4.99 लाख टन पहुंच गया था।

घरेलू उत्पादन को लेकर भी चिंता

देश में घरेलू तिलहन उत्पादन को लेकर भी बाजार में कुछ चिंता बनी हुई है। एल नीनो से जुड़ी आशंकाएं घरेलू तिलहन उत्पादन की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में आयात पर निर्भरता बढ़ने की संभावना भी बाजार में सोयाबीन तेल की मांग को समर्थन दे रही है।

आम उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?

सोयाबीन तेल की बढ़ती उपलब्धता से बाजार में सूरजमुखी तेल की कमी की भरपाई करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कीमतों, आयात लागत, रुपये की विनिमय दर और घरेलू मांग के आधार पर आने वाले दिनों में खाद्य तेलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातकों में से एक है। ऐसे में रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर वैश्विक आपूर्ति और कीमतों में होने वाले बदलाव का सीधा असर भारतीय खाद्य तेल बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

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