Media24Media.com: भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मंजूरी: 4 से 60 साल के लोगों को मिलेगा 'क्यूडेंगा' का सुरक्षा कवच

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भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मंजूरी: 4 से 60 साल के लोगों को मिलेगा 'क्यूडेंगा' का सुरक्षा कवच

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 नई दिल्ली: मानसून की दस्तक के साथ ही देश में मच्छरों से होने वाली बीमारियों, खासकर डेंगू का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। इस जानलेवा बीमारी के बढ़ते जोखिम के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र से एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय दवा नियामक ने जापान की प्रमुख दवा कंपनी 'टाकेडा फार्मास्युटिकल' की डेंगू वैक्सीन QDENGA (क्यूडेंगा) को मंजूरी दे दी है। यह भारत में स्वीकृत होने वाली पहली डेंगू वैक्सीन है।


चारों वेरिएंट्स से मिलेगी सुरक्षा, टेस्ट की जरूरत नहीं

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'क्यूडेंगा' एक टेट्रावैलेंट लाइव-अटेन्यूएटेड वैक्सीन है। इसका सीधा मतलब यह है कि यह डेंगू वायरस के चारों प्रकारों (सीरोटाइप) से सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है। इस वैक्सीन में वायरस के बेहद कमजोर रूप का इस्तेमाल किया गया है, जो शरीर को बिना बीमार किए उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत बनाता है।

इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगवाने से पहले व्यक्ति को यह जांच कराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होगी कि उसे भूतकाल में कभी डेंगू हुआ था या नहीं। यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष तक की आयु के लोगों को दी जा सकेगी।

भारत में तेजी से बढ़े हैं मामले

यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब पिछले दो दशकों के भीतर भारत में डेंगू के मामलों में लगभग 11 गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में देश में डेंगू के 32,000 से अधिक मामले सामने आए थे, जबकि इससे पहले साल 2023 में 18,391 मामले रिपोर्ट किए गए थे। गंभीर स्थिति में डेंगू आंतरिक रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) का कारण बनता है, जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित होता रहा है।

बायोलॉजिकल-ई के साथ साझेदारी: भारत में होगा बंपर उत्पादन

भारत की विशाल आबादी तक इस वैक्सीन को पहुंचाने और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए टाकेडा ने भारतीय वैक्सीन निर्माता कंपनी बायोलॉजिकल-ई के साथ साझेदारी की है।

इस समझौते के तहत:

सालाना उत्पादन: बायोलॉजिकल-ई भारत में हर साल लगभग 5 करोड़ (50 मिलियन) डोज तैयार करने की क्षमता विकसित करेगी।

वैश्विक लक्ष्य: इस साझेदारी की मदद से टाकेडा दशक के अंत तक दुनिया भर में हर साल 10 करोड़ (100 मिलियन) डोज बनाने के अपने लक्ष्य को हासिल कर सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहली वैक्सीन की मंजूरी से भारत में हर साल जुलाई से अक्तूबर के बीच अस्पतालों पर बढ़ने वाला दबाव काफी कम होगा और डेंगू की रोकथाम के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू होगा।

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