Media24Media.com: अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद, दिल्ली की अदालत का बड़ा फैसला

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अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद, दिल्ली की अदालत का बड़ा फैसला

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नई दिल्ली- वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई।

इस महीने की शुरुआत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने ताहिर हुसैन को हत्या, अपहरण, घातक हथियारों के साथ दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने सहित कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया। हालांकि, उन्हें आपराधिक साजिश रचने और विद्रोह के लिए उकसाने के आरोपों से बरी कर दिया गया।

अदालत ने जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि मुकदमे का सामना कर रहे छह अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

सजा पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि अंकित शर्मा की निर्मम और सुनियोजित हत्या की गई थी तथा उनके शरीर पर 51 गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। पुलिस ने इसे "दुर्लभ से दुर्लभतम (Rarest of Rare)" श्रेणी का मामला बताया था, लेकिन अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

यह मामला 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है। अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत के आधार पर दयालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, अंकित शर्मा 25 फरवरी को घर लौटने के बाद दोबारा किसी काम से बाहर गए थे, लेकिन वापस नहीं आए। बाद में उनका शव चांदबाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित शर्मा के शरीर पर 51 एंटी-मॉर्टम (मृत्यु से पहले लगी) चोटें दर्ज की गई थीं, जो धारदार हथियारों और कुंद वस्तुओं से किए गए हमले की ओर संकेत करती थीं। जांच के बाद पुलिस ने ताहिर हुसैन और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जबकि 24 मार्च 2023 को अदालत ने आरोप तय कर मुकदमे की सुनवाई शुरू की थी।

इस फैसले के साथ वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक का महत्वपूर्ण न्यायिक निष्कर्ष सामने आया है।

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