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अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद, दिल्ली की अदालत का बड़ा फैसला

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नई दिल्ली- वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई।

इस महीने की शुरुआत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने ताहिर हुसैन को हत्या, अपहरण, घातक हथियारों के साथ दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने सहित कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया। हालांकि, उन्हें आपराधिक साजिश रचने और विद्रोह के लिए उकसाने के आरोपों से बरी कर दिया गया।

अदालत ने जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि मुकदमे का सामना कर रहे छह अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

सजा पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि अंकित शर्मा की निर्मम और सुनियोजित हत्या की गई थी तथा उनके शरीर पर 51 गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। पुलिस ने इसे "दुर्लभ से दुर्लभतम (Rarest of Rare)" श्रेणी का मामला बताया था, लेकिन अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

यह मामला 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है। अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत के आधार पर दयालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, अंकित शर्मा 25 फरवरी को घर लौटने के बाद दोबारा किसी काम से बाहर गए थे, लेकिन वापस नहीं आए। बाद में उनका शव चांदबाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित शर्मा के शरीर पर 51 एंटी-मॉर्टम (मृत्यु से पहले लगी) चोटें दर्ज की गई थीं, जो धारदार हथियारों और कुंद वस्तुओं से किए गए हमले की ओर संकेत करती थीं। जांच के बाद पुलिस ने ताहिर हुसैन और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जबकि 24 मार्च 2023 को अदालत ने आरोप तय कर मुकदमे की सुनवाई शुरू की थी।

इस फैसले के साथ वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक का महत्वपूर्ण न्यायिक निष्कर्ष सामने आया है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: लगातार मानसिक प्रताड़ना और शादी का दबाव आत्महत्या के लिए उकसाने के समान हो सकता है

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाए और उस पर लगातार शादी करने का दबाव बनाया जाए, तो ऐसी परिस्थितियां आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment of Suicide) के दायरे में आ सकती हैं।

अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि किसी व्यक्ति पर लगातार मानसिक दबाव, उत्पीड़न और भावनात्मक प्रताड़ना उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। यदि इस तरह की परिस्थितियां किसी व्यक्ति को आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर करती हैं, तो मामले के तथ्यों के आधार पर इसे आत्महत्या के लिए उकसाने के रूप में देखा जा सकता है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में प्रत्येक घटना के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जाना आवश्यक है। अदालत की यह टिप्पणी मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक दबाव से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी दृष्टिकोण के रूप में देखी जा रही है।

इस फैसले ने यह संदेश भी दिया है कि किसी भी व्यक्ति पर लगातार मानसिक दबाव या अनावश्यक सामाजिक एवं वैवाहिक दबाव बनाना गंभीर कानूनी परिणामों का कारण बन सकता है।

साय सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत त्वरित कार्रवाई,दिवंगत आरक्षक के परिवार से 19 लाख की वसूली मामले में थाना प्रभारी गिरफ्तार

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एक करोड़ के बीमा दावे में कथित हेराफेरी का मामला

धमकी देकर आधी राशि मांगने का आरोप

रायपुर- छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के खिलाफ राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नारायणपुर में एक गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई की गई है। सड़क दुर्घटना में दिवंगत डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की पत्नी को मिले एक करोड़ रुपये के दुर्घटना बीमा दावे में कथित अनियमितता और अवैध वसूली के आरोपों पर पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में एक अधिवक्ता पर भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी के बैंक खाते में भारतीय स्टेट बैंक के वेतन पैकेज के अंतर्गत एक करोड़ रुपये की दुर्घटना बीमा राशि प्राप्त हुई थी। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव और अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा ने बीमा राशि दिलाने के नाम पर मृतक के परिजनों से 19 लाख रुपये ले लिए।

इतना ही नहीं आरोपियों ने कथित रूप से शेष बीमा राशि में भी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की। परिजनों द्वारा इसका विरोध करने पर उन्हें कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने, कानूनी कार्रवाई में फंसाने और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की धमकी दी गई। आरोपियों की लगातार अतिरिक्त रकम की मांग से परेशान होकर मृतक आरक्षक के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नारायणपुर में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर थाना कोतवाली नारायणपुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318, 308 एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। इसके बाद आरोपी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। वहीं सह-आरोपी अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

वास्तव में आरोपियों के विरुद्ध यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और कदाचार के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून का पालन कराने वाले तंत्र में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध वसूली, भ्रष्टाचार अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।आम नागरिकों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता,नर चीतल के अवैध शिकार का खुलासा, सात आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल

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सरकार की सख्ती से वन्यजीव अपराधों पर लग रहा अंकुश, वन्यजीव संरक्षण को मिल रही मजबूती

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन, वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा अवैध शिकार के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में कवर्धा परियोजना मंडल ने नर चीतल के अवैध शिकार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया।

मुखबिर की सूचना पर योजनाबद्ध कार्रवाई

वन विकास निगम के बोड़ला परियोजना परिक्षेत्र के भलपहरी बीट स्थित जंगल में शिकारियों ने जाल बिछाकर लगभग तीन वर्ष के नर चीतल का शिकार किया। इसके बाद उसके मांस को पकाकर आपस में बांटने की तैयारी की जा रही थी। मुखबिर से मिली सूचना पर वन विकास निगम की टीम ने तत्काल योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर दबिश दी और सभी सात आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

शिकार में प्रयुक्त सामग्री और चीतल का मांस जब्त

कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से लगभग 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस, नायलॉन की रस्सी, तीन कुल्हाड़ियां, स्टील के तार एवं लकड़ी से बने फंदे तथा खून से सना थैला बरामद कर जब्त किया गया। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई।

सघन निगरानी और गश्त से मिल रही सफलता

वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा विशेष निगरानी अभियान चलाने के कारण वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है। विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से अवैध शिकार करने वालों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार की स्पष्ट नीति

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक निगरानी व्यवस्था, नियमित गश्त और प्रभावी सूचना तंत्र के माध्यम से वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने का कार्य कर रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वन्यजीवों का अवैध शिकार करने या प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।  वन मंत्री कश्यप ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी अवैध शिकार या वन अपराध की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

बेंगलुरु डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार से देश स्तब्ध, पुलिस जांच में जुटी

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बेंगलुरु- बेंगलुरु के एक डे-केयर सेंटर में छोटे बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और डे-केयर सेंटर के संचालन व कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, डे-केयर सेंटर में मासूम बच्चों के साथ कथित रूप से अमानवीय व्यवहार किए जाने के आरोप लगे हैं। घटना सामने आने के बाद अभिभावकों में भारी नाराजगी है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

इस मामले ने देशभर में डे-केयर और चाइल्डकेयर केंद्रों की निगरानी तथा सुरक्षा मानकों को और सख्त बनाने की मांग तेज कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संस्थानों में नियमित निरीक्षण, प्रशिक्षित स्टाफ और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कोरिया जिले के तिहरे हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला, राज्य सरकार ने जारी की अधिसूचना

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरिया जिले में हुए चर्चित तिहरे हत्याकांड की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का निर्णय लिया है। इस संबंध में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मामला रेत खनन को लेकर चली आ रही आपसी प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा बताया जा रहा है। मामले की गंभीरता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया है।

सीबीआई अब पूरे मामले की जांच अपने हाथ में लेकर हत्या के कारणों, साजिश, आरोपियों की भूमिका तथा रेत खनन से जुड़े संभावित पहलुओं की विस्तृत पड़ताल करेगी। मामले में स्थानीय स्तर पर एकत्र किए गए साक्ष्य और दस्तावेज भी केंद्रीय एजेंसी को उपलब्ध कराए जाएंगे।

राज्य सरकार ने कहा है कि निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच के माध्यम से दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बलौदाबाजार में सनसनीखेज खुलासा: किराना व्यापारी ने 8 हत्याओं का किया कबूलनामा

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छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। एक किराना व्यापारी ने पुलिस पूछताछ के दौरान पिछले चार महीनों में आठ लोगों की हत्या करने की बात स्वीकार की है।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने व्यक्तिगत रंजिश, जमीन संबंधी विवाद, कर्ज के लेन-देन और आपसी दुश्मनी के चलते लोगों को कथित तौर पर जहर देकर मौत के घाट उतारने की बात कबूली है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने निशाने पर उन लोगों को बनाता था, जिनसे उसका किसी न किसी प्रकार का विवाद या मनमुटाव था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम गठित कर दी है और आरोपी के दावों की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मौत से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की अलग-अलग जांच की जाएगी ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद क्षेत्र में दहशत और चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोग मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


महासमुंद: खट्टी जंगल 'ब्लाइंड मर्डर केस' का खुलासा; पुरानी रंजिश में हुई थी प्रकाश की हत्या, 3 आरोपी गिरफ्तार

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महासमुंद- जिला पुलिस ने खट्टी जंगल में मिली युवक की लाश की गुत्थी सुलझाते हुए एक सनसनीखेज अंधे कत्ल (ब्लाइंड मर्डर) का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में उड़ियापारा रावणभांठा निवासी तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हत्या की वजह पुरानी रंजिश और गाली-गलौज को बताया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला? 

​बीती 6 अप्रैल 2026 को ग्राम खट्टी के जंगल में एक अज्ञात युवक का शव संदेहास्पद स्थिति में मिला था। मृतक की पहचान प्रकाश पटेल (23 वर्ष), निवासी खैराभांठा के रूप में हुई। प्रकाश के शरीर पर चोट के गहरे निशान थे और गले में गमछा लिपटा हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच में हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने धारा 103(1) BNS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

शराब पार्टी के दौरान गाली-गलौज बनी मौत का कारण 

​पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित टीम ने जब मृतक के दोस्तों से पूछताछ की, तो परतें खुलने लगीं। जांच में सामने आया कि मृतक प्रकाश और आरोपी (जलांधर, काजू और गोपाल) आपस में दोस्त थे।

​पिछले महीने शराब पीने के दौरान प्रकाश ने नशे की हालत में आरोपियों को मां-बहन की गालियां दी थीं। इसी अपमान का बदला लेने के लिए तीनों ने उसकी हत्या की साजिश रची।

 ​फिल्मी अंदाज में दिया वारदात को अंजाम 

अपहरण और हमला: 5 अप्रैल की रात आरोपियों को सूचना मिली कि प्रकाश गायत्री मंदिर के पास है। आरोपी काजू और गोपाल वहां पहुंचे, प्रकाश के साथ मारपीट की और उसे जबरन बाइक पर बैठाकर खट्टी जंगल ले गए।

जघन्य हत्या: जंगल के सन्नाटे में आरोपियों ने कांच की बोतल और पत्थर से प्रकाश पर ताबड़तोड़ हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।

फरारी की साजिश: हत्या के बाद आरोपियों ने अपने साथी जलांधर सोनवानी को इसकी जानकारी दी। जलांधर ने उन्हें पैसे और अपनी स्प्लेंडर बाइक (CG 04 QQ 6845) देकर गरियाबंद भागने और 'अंडरग्राउंड' होने की सलाह दी।

​पुलिस की मुस्तैदी से दबोचे गए हत्यारे 

​महासमुंद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों की मदद से घेराबंदी की। लगातार दबिश देकर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली गई है। पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम: 

​चंद्रहास नेताम उर्फ काजू (21 वर्ष) - निवासी उड़ियापारा, महासमुंद।

​गोपाल प्रधान (20 वर्ष) - निवासी उड़ियापारा, महासमुंद।

​जालंधर सोनवानी (21 वर्ष) - निवासी वार्ड नं. 30, नया रावणभांठा।

​पुलिस ने तीनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 2025 विंटर इंटर्नशिप कार्यक्रम की शुरुआत की

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत ने अपने चार-सप्ताह लंबे इन-पर्सन विंटर इंटर्नशिप प्रोग्राम (WIP)-2025 का आयोजन किया, जो 15 दिसंबर 2025 से 9 जनवरी 2026 तक नई दिल्ली में चल रहा है। इस कार्यक्रम में देश भर के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विभिन्न संस्थाओं के 1,485 आवेदकों में से चयनित 80 विश्वविद्यालय स्तरीय छात्र भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए NHRC, भारत के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने कहा कि यह इंटर्नशिप भारत जैसे विविध राष्ट्र में सहकर्मी सीखने के लिए अद्वितीय मंच है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य मानवाधिकारों पर सम्यक् दृष्टिकोण प्रदान करना है और इंटर्न्स से आग्रह किया कि वे इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन, कार्यस्थल और समुदाय में आत्मसात करें, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकें।

अपने मुख्य भाषण में NHRC, भारत के महासचिव,भरत लाल ने युवाओं की मानवाधिकारों के क्षेत्र में भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने इंटर्न्स से कहा कि वे संवैधानिक और सांस्कृतिक मूल्यों में निहित सहानुभूति और करुणा की भावना को विकसित करें और इस इंटर्नशिप का उपयोग अपनी दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और समावेशी, न्यायसंगत एवं समान समाज निर्माण की दिशा में काम करने के लिए करें।


कार्यक्रम का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए NHRC, भारत की संयुक्त सचिव, सैडिंगपुई चखछुआक ने बताया कि विषय विशेषज्ञों के साथ इंटरैक्टिव सत्रों के अलावा इंटर्न्स समूह अनुसंधान परियोजनाओं, पुस्तक समीक्षा और भाषण प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे, जिससे उनके मानवाधिकार मुद्दों की समझ में वृद्धि होगी और नवोन्मेषी दृष्टिकोण विकसित होंगे।

NHRC, भारत के निदेशक, ले. कर्नल वीरेंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।


एनएचआरसी ने बेंगलुरु में शोकग्रस्त पिता से रिश्वत वसूली की खबर पर स्वतः संज्ञान लिया

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें बताया गया है कि कर्नाटक के बेंगलुरु में अपनी इकलौती बेटी की मृत्यु पर शोक मना रहे 64 वर्षीय पिता को हर स्तर पर — एंबुलेंस चालक, पुलिस, शवदाह गृह कर्मियों और नगर निगम अधिकारियों — को रिश्वत देनी पड़ी। 30 अक्टूबर, 2025 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जो घटना एक श्रद्धांजलि का अवसर होनी चाहिए थी, वह भ्रष्टाचार, नौकरशाही और अमानवीयता का एक भयावह अनुभव बन गई।

आयोग ने कहा कि यदि रिपोर्ट में दिए गए तथ्य सही हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है। इसलिए आयोग ने कर्नाटक के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

रिपोर्ट के अनुसार, मृतक महिला — जो IIT मद्रास और IIM अहमदाबाद की स्नातक थीं और बेंगलुरु में कार्यरत थीं — को 18 सितंबर, 2025 को ब्रेन हेमरेज हुआ था। बेटी की मृत्यु के बाद जब पिता ने एंबुलेंस बुलाई, तो एंबुलेंस चालक ने कथित रूप से अत्यधिक शुल्क वसूला। पुलिस को मृत्यु की सूचना देने पर न केवल सहानुभूति की कमी दिखाई दी, बल्कि प्राथमिकी (FIR) और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की प्रतियां भी रिश्वत देने के बाद ही सौंपी गईं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मृतका के परिवार ने अंतिम संस्कार से पहले उसकी आंखें दान कीं। किंतु शवदाह गृह में भी धन की मांग की गई, जिसे पिता को देना पड़ा। वहीं, महादेवपुरा नगर निगम से मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने में भी काफी देरी हुई। वरिष्ठ अधिकारी के हस्तक्षेप के बावजूद प्रमाण पत्र तभी जारी किया गया जब पिता ने रिश्वत का भुगतान किया।

आयोग ने इस पूरी घटना को मानव गरिमा और सरकारी जवाबदेही के खिलाफ बताया है और राज्य प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपेक्षा की है।

NHRC, भारत का 32वां स्थापना दिवस मनाया गया और कैदियों के मानवाधिकार पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत ने आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में अपने 32वें स्थापना दिवस के अवसर पर ‘कैदियों के मानवाधिकार’ विषय पर एक कार्यक्रम और राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। आयोग की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को हुई थी।

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए भारत के पूर्व राष्ट्रपति,राम नाथ कोविंद ने कहा कि मानवाधिकारों की आधुनिक व्याख्या से बहुत पहले ही हमारे ऋषि-महर्षियों और शास्त्रों में धर्म की रक्षा करने, करुणा के साथ कार्य करने और न्याय सुनिश्चित करने का संदेश था। यह नैतिक आधार आज भी हमारा मार्गदर्शन करता है। यह याद दिलाता है कि मानवाधिकारों की सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व नहीं बल्कि एक नैतिक और आध्यात्मिक आवश्यकता है, जो भारतीय जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा है।

राम नाथ कोविंद ने कहा कि भारत ने मानवाधिकारों का एक मजबूत और व्यापक ढांचा तैयार किया है। 1993 से अब तक NHRC ने स्वयं को विश्व के सबसे सम्मानित मानवाधिकार संस्थानों में विकसित किया है। 32वें स्थापना दिवस का आयोजन केवल एक संस्थागत मील का पत्थर नहीं, बल्कि संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व के शाश्वत मूल्यों के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि का अवसर है। आयोग की जांच, सलाह, हस्तक्षेप और वकालत के माध्यम से उसने समाज के सबसे कमजोर लोगों की आवाज़ को सुना और मानवाधिकार के मुद्दों को शासन के केंद्र में लाया।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले तीन दशकों में हुई प्रगति का जश्न मनाते हुए, हमें आधुनिक समय की जटिल चुनौतियों को भी पहचानना चाहिए। तकनीकी, पर्यावरणीय और सामाजिक बदलाव के इस युग में असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों जैसे ड्राइवर, सफाई कर्मचारी, निर्माण श्रमिक और प्रवासी मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। ये लोग हमारे शहर और समाज को चलाए रखते हैं, लेकिन अक्सर असुरक्षित कार्य परिस्थितियों, अस्थिर आय और सामाजिक सुरक्षा की अनुपस्थिति का सामना करते हैं। उनके श्रम की सुरक्षा और गरिमा हमारी प्रगति का मापदंड होना चाहिए।

राम नाथ कोविंद ने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों और इससे होने वाले मानवाधिकार प्रभाव, जैसे पलायन और विस्थापन, पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति, चाहे उसकी स्थिति कैसी भी हो, पहचान, सुरक्षा और मूलभूत सेवाओं तक पहुंच का हकदार है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को भी मानवाधिकार के रूप में मान्यता देने की आवश्यकता पर बल दिया और NHRC की सलाहों की सराहना की।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि कैदियों के मानवाधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। समाज के मूल्य का असली परीक्षण यह है कि यह सबसे कमजोर लोगों, विशेष रूप से हिरासत में रखे गए लोगों के साथ कैसे व्यवहार करता है। जेल अधिकारियों का पवित्र दायित्व है कि हर कैदी के साथ मूलभूत शिष्टाचार के साथ व्यवहार किया जाए। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि आयोग ‘कैदियों के मानवाधिकार’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर रहा है, ताकि हमारी जेलें केवल बंदी गृह न होकर सुधार, पुनर्वास और आशा के केंद्र बनें। उन्होंने सभी हितधारकों और विशेष रूप से जेल अधिकारियों से आग्रह किया कि वे ऐसा वातावरण तैयार करें जिसमें हर कैदी को समाज में पुनः एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में शामिल होने का अवसर मिले।

राम नाथ कोविंद ने सरकारों के प्रयासों की भी सराहना की, जिन्होंने sanitation, electricity, healthcare, education और housing जैसी सुविधाओं के माध्यम से नागरिकों, विशेष रूप से समाज के निचले हिस्से में रहने वालों के जीवन में सुधार किया। उन्होंने पुराने कानूनों को हटाने और जीवन को आसान बनाने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने की पहल की भी सराहना की। मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम, 2019 जैसी ऐतिहासिक पहलें यह दर्शाती हैं कि भारत हर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान हमें याद दिलाता है कि अधिकारों के साथ कर्तव्य भी आते हैं। स्वतंत्रता का प्रयोग समाज के कल्याण के साथ संतुलित होना चाहिए। इसी दृष्टि से, मानवाधिकारों की रक्षा केवल NHRC का दायित्व नहीं बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने NHRC के स्थापना दिवस पर सभी से आग्रह किया कि हम एक अधिक मानवीय, न्यायपूर्ण और समावेशी भारत बनाने के अपने संकल्प को दोहराएं।

इससे पहले, NHRC के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने आयोग के पिछले 32 वर्षों के कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयोग ने अब तक 23 लाख से अधिक मामलों को देखा और लगभग 2,900 स्वयं संज्ञान मामले दर्ज किए। आयोग ने पीड़ितों को 263 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राहत दी। पिछले एक वर्ष में लगभग 73,000 शिकायतें और 100 से अधिक स्वयं संज्ञान मामले दर्ज किए गए। इस दौरान 63 स्थल जांच की गई, 38,000 से अधिक मामले निपटाए गए और 200 मामलों में 9 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राहत की सिफारिश की गई।

न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने कहा कि NHRC ने 12 मुख्य समूहों का गठन किया है, जो विभिन्न मानवाधिकार विषयों पर विशेषज्ञ, NGO और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं। इन समूहों ने सरकार की योजनाओं के मूल्यांकन और सुधार के लिए सिफारिशें तैयार की हैं।

NHRC सचिवालय, भरत लाल ने कहा कि आयोग ने भारतीय लोकतंत्र में मानवाधिकारों का रक्षक बनने का प्रयास किया है। आयोग की सबसे बड़ी ताकत इसकी नैतिक और नैतिक नेतृत्व क्षमता है। नागरिकों को शिकायत दर्ज करने और उनके प्रगति की ऑनलाइन जांच करने की सुविधा से न्याय प्रणाली और अधिक समावेशी और सुलभ बन गई है।

भरत लाल ने कहा कि NHRC का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय योगदान है। आयोग ने Global Alliance of NHRIs, Asia Pacific Forum और Commonwealth Forum of NHRIs में भाग लिया है। भारत को हाल ही में मानवाधिकार परिषद के लिए सातवीं बार निर्विरोध चुना गया है, जो भारत की मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता और वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता है।

कार्यक्रम में NHRC के सदस्य, न्यायमूर्ति (डॉ.) विद्युत रंजन सरंगी और विजय भारती सायनी, DG (I) आनंद स्वरूप, रजिस्ट्रार (कानून) जोगिंदर सिंह, संयुक्त सचिव समीर कुमार, राज्य मानवाधिकार आयोगों और अन्य आयोगों के अध्यक्ष एवं सदस्य, उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शैक्षणिक संस्थान, NGO, मानवाधिकार कार्यकर्ता, शोधकर्ता और वरिष्ठ जेल अधिकारी उपस्थित थे। आयोग ‘कैदियों के मानवाधिकार’ पर एक दिन का राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित कर रहा है।


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