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छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में दोहरे हत्याकांड पर बड़ा फैसला: तीन दोषियों को फांसी, एक को उम्रकैद

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सूरजपुर- छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में पुलिस हेड कांस्टेबल की पत्नी और नाबालिग बेटी की निर्मम हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक अन्य दोषी को उम्रकैद की सजा दी है। यह फैसला 8 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया।

किन दोषियों को क्या सजा मिली?

दोषी का नाम    अदालत की सजा
कुलदीप साहू (32)        मृत्युदंड
चंद्रकांत चौधरी (28)        मृत्युदंड
फूल सिंह उर्फ रिंकू (28)        मृत्युदंड
आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी (20)        उम्रकैद

फैसला जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने सुनाया। सरकारी वकील सुरेश शर्मा ने इसकी जानकारी दी।

आखिर क्या हुआ था उस रात?

Chhattisgarh Bulldozer Action; Surajpur Double Murder Case Mastermind Kuldeep Sahu | सूरजपुर डबल मर्डर-केस... 13 घंटे से चल रहा बुलडोजर: आरोपी कुलदीप तीन मंजिला मकान-गोदाम ढहाया गया; सिंहदेव बोले- कानूनी प्रक्रिया के बिना कार्रवाई अनुचित - Chhattisgarh News | Dainik Bhaskar

यह मामला 13 अक्टूबर 2024 की रात का है। पुलिस और अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना की शुरुआत दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान हुई थी।

  1. पुलिसकर्मी पर हमला: मुख्य दोषी कुलदीप साहू ने कथित तौर पर ड्यूटी पर तैनात आरक्षक घनश्याम सोनी पर गर्म तेल फेंका था।

  2. पुलिस की तलाश: घटना के बाद पुलिस ने कुलदीप को पकड़ने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, उसने पुलिसकर्मियों पर कार चढ़ाने की कोशिश की और वहां से भाग निकला।

  3. घर में घुसकर हमला: इसके बाद वह पुलिस हेड कांस्टेबल के घर में घुस गया, जहां उसकी पत्नी और बेटी मौजूद थीं। अभियोजन के मुताबिक, उसके साथियों ने भी वारदात में मदद की।

  4. मां-बेटी की हत्या: अभियोजन पक्ष ने अदालत में बताया कि महिला के साथ यौन हिंसा की गई और मां-बेटी दोनों की हत्या कर दी गई।

  5. शवों को दूसरी जगह फेंका: पुलिस के अनुसार, शवों को घर से लगभग चार किलोमीटर दूर पिढ़ा गांव के पास फेंक दिया गया था।

पोस्टमार्टम और जांच में क्या सामने आया?

अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पेश जानकारी के अनुसार:

  • मृत महिला के शरीर पर चोट के 33 निशान पाए गए।

  • नाबालिग बच्ची के शरीर पर चोट के 28 निशान मिले।

  • मामले की जांच में खून के निशान, आरोपियों के कपड़े, फिंगरप्रिंट और DNA से जुड़े साक्ष्यों का इस्तेमाल किया गया।

अदालत ने फांसी की सजा क्यों सुनाई?

अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, नाबालिग बच्ची की हत्या और वारदात की परिस्थितियों को देखते हुए अधिकतम सजा की मांग की थी।

रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराया। तीन को मृत्युदंड और एक को उम्रकैद दी गई। 

फैसले के बाद क्या हुआ?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य दोषी कुलदीप साहू को दोषसिद्धि के बाद अदालत परिसर से बाहर निकलते समय मुस्कुराते हुए देखा गया था। इस व्यवहार को लेकर लोगों में नाराजगी की खबरें आईं।

मृतक परिवार के एक सदस्य ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद थी।

क्या तीनों को तुरंत फांसी दी जाएगी?

नहीं। मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया बाकी है।

  • मृत्युदंड की पुष्टि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से होना आवश्यक है।

  • दोषियों को दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपील करने का अधिकार है।

  • इसलिए अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाया जाना और वास्तव में फांसी का निष्पादन होना अलग-अलग चरण हैं।


बालोद एसिड अटैक मामले में आरोपियों के खिलाफ फूटा छात्रों का आक्रोश, कोर्ट ले जाते समय जमकर विरोध

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आरोपियों को पैदल कोर्ट ले गई पुलिस, छात्रों ने स्याही और जला हुआ ऑयल फेंका; फांसी की मांग को लेकर की नारेबाजी

बालोद- जिले में 22 वर्षीय छात्रा पर हुए एसिड अटैक की घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। मंगलवार को मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों को पुलिस कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश करने पहुंची, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और स्थानीय लोगों ने आरोपियों के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने से पहले उनका मुंडन कराया गया और इसके बाद उन्हें दल्लीराजहरा चौक से पैदल कोर्ट तक ले जाया गया। जैसे ही आरोपी घड़ी चौक के पास पहुंचे, वहां मौजूद छात्रों और लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों को कड़ी सजा देने और फांसी देने की मांग की।

छात्रों ने फेंकी स्याही और जला हुआ ऑयल

कोर्ट ले जाने के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब आक्रोशित छात्रों और लोगों ने आरोपियों पर स्याही और जला हुआ ऑयल फेंक दिया। कुछ लोगों ने आरोपियों के साथ मारपीट करने की कोशिश भी की, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल सुरक्षा घेरा बनाकर भीड़ को पीछे हटाया।

स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। बड़ी संख्या में पुलिस जवानों की तैनाती की गई थी, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।

लाइब्रेरी से लौट रही छात्रा पर हुआ था हमला

पुलिस के मुताबिक, घटना 5 अक्टूबर 2026 को बालोद शहर की सिंचाई कॉलोनी क्षेत्र में हुई थी। छात्रा लाइब्रेरी से अपने घर लौट रही थी, तभी उस पर एसिड फेंक दिया गया। हमले में छात्रा गंभीर रूप से घायल हुई, जिसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया और बाद में रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर किया गया।

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान यश कुमार सोनकर और करण कुंजाम के रूप में हुई है। पुलिस का दावा है कि घटना के पीछे युवती से जुड़ा कथित प्रेम प्रसंग, शादी से इनकार और दूसरे युवक से बातचीत को लेकर पैदा हुआ विवाद था।

पुलिस ने आठ घंटे में आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया

पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद जांच टीम ने तत्काल सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की। पूछताछ के आधार पर पुलिस पहले एक आरोपी तक पहुंची और उसकी निशानदेही पर दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए एसिड और वारदात के समय पहने गए कपड़े जब्त करने की बात कही है। साथ ही पुलिस टीम ने घटनास्थल पर ले जाकर घटना का रिक्रिएशन भी कराया।

कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात

आरोपियों के खिलाफ छात्रों और स्थानीय लोगों के आक्रोश को देखते हुए न्यायालय परिसर को सुरक्षा घेरे में रखा गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को भीड़ से सुरक्षित रखते हुए न्यायालय में पेश किया।

कोर्ट की कार्रवाई के बाद जब आरोपियों को बाहर निकाला गया तो सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें हेलमेट पहनाकर पुलिस वाहन तक ले जाया गया। पुलिस को आशंका थी कि आक्रोशित भीड़ आरोपियों पर हमला कर सकती है। इसके बाद दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।

अधिवक्ताओं ने भी जताया आक्रोश

मामले को लेकर बालोद जिला अधिवक्ता संघ की ओर से भी कड़ा रुख सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, अधिवक्ता संघ ने आरोपियों की पैरवी नहीं करने की बात कही है। मामले को लेकर अधिवक्ताओं की बैठक भी प्रस्तावित बताई गई है।

एसिड की बिक्री और निगरानी पर भी उठे सवाल

घटना के बाद एसिड की बिक्री और उसके इस्तेमाल पर निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की जांच में आरोपियों द्वारा पहले से एसिड हासिल करने और कथित तौर पर वारदात की योजना बनाने की बात सामने आने के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि ऐसे खतरनाक रसायनों की बिक्री और उपलब्धता पर निगरानी किस तरह की जा रही है।

फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है।


दिल्ली-NCR में दुष्कर्म की हालिया घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

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नई दिल्ली- दिल्ली और NCR में हाल में सामने आई दुष्कर्म एवं यौन हिंसा की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इन घटनाओं को लेकर कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठाए।

किन घटनाओं का उल्लेख हुआ?

सुप्रीम कोर्ट के सामने दिल्ली-NCR में हाल की कई घटनाओं का संदर्भ आया। इनमें दिल्ली के एक पार्क में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और दिल्ली में चलती स्लीपर बस में नाबालिग के कथित यौन उत्पीड़न का मामला शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाएं कानून-प्रवर्तन व्यवस्था की विफलता को उजागर करती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि केवल एकजुटता व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जवाबदेही तय करना जरूरी है।

अदालत ने सार्वजनिक स्थानों—जैसे पार्क और बसों—की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। रिपोर्ट के अनुसार, पीठ ने रोशनी की कमी, निगरानी की कमजोर व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक सुविधाओं की कमी को सार्वजनिक सुरक्षा से जोड़कर देखा।

Nirbhaya मामले का भी संदर्भ

सुप्रीम कोर्ट ने इन हालिया घटनाओं की तुलना 2012 के निर्भया मामले की परिस्थितियों से करते हुए कहा कि इससे उस घटना की याद आती है। हालांकि, अदालत की मौजूदा कार्यवाही का केंद्र दिल्ली-NCR में सार्वजनिक सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े वर्तमान मुद्दे हैं।

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है। इससे आगे अदालत संबंधित अधिकारियों से सुरक्षा व्यवस्था, कानून-प्रवर्तन और जवाबदेही से जुड़े पहलुओं पर जवाब मांग सकती है।

महत्वपूर्ण: यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। संबंधित घटनाओं में लगाए गए आरोपों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।


रायपुर में 8 वर्षीय बच्ची से कथित दुष्कर्म मामले में 30 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

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संतोषी नगर क्षेत्र की घटना, टिकरापारा पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत की कार्रवाई

रायपुर- राजधानी के संतोषी नगर इलाके में 8 वर्षीय बच्ची से कथित यौन अपराध का मामला सामने आया है। पुलिस ने मामले में 30 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी बच्ची के परिवार का परिचित और उसके पिता का दोस्त बताया जा रहा है। घटना के बाद परिजनों की शिकायत पर टिकरापारा पुलिस ने कार्रवाई की।

पुलिस के अनुसार घटना मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे की बताई गई है। शिकायत के मुताबिक आरोपी बच्ची के घर पहुंचा और उसे चिप्स देने के बहाने अपने पास बुलाया। आरोप है कि इसके बाद उसने बच्ची के साथ यौन अपराध किया। बच्ची किसी तरह वहां से निकलकर परिजनों तक पहुंची, जिसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।

पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज

परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपी को बुधवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया है और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

बच्ची की पहचान गोपनीय

पुलिस बच्ची का बयान दर्ज करने के साथ घटना से जुड़े परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। कानून के तहत नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली किसी भी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। मामले में पुलिस की जांच जारी है।

झीरम घाटी हत्याकांड के दोषियों को मृत्युदंड न्याय की जीत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने कहा - झीरम घाटी हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का पीड़ादायक अध्याय, इसकी कटु स्मृतियां लंबे समय तक देती रहेंगी पीड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लौह संकल्प और दृढ़ नेतृत्व में सशस्त्र माओवाद के चंगुल से मुक्त हुआ छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री साय ने कहा - दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर बढ़ रहा

आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए भी आत्मचिंतन का अवसर : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने झीरम घाटी हत्याकांड मामले में दोषी पाए गए सभी दस माओवादियों को जगदलपुर एनआईए कोर्ट द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने को न्याय की जीत बताया है।

मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा है कि झीरम घाटी में हुआ बर्बर हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह पीड़ादायक अध्याय है, जिसकी कटु स्मृतियां हमें लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। इस जघन्य कम्युनिस्ट हिंसा में हमने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को भी खोया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले में दोषी पाए गए सभी दस माओवादियों को जगदलपुर एनआईए कोर्ट द्वारा दी गई मृत्युदंड की सजा न्याय की जीत है। एनआईए ने जिस तरह इस जांच को अंजाम तक पहुंचाया, उसकी भी सराहना होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के लौह संकल्प और उनके दृढ़ नेतृत्व में हमने सशस्त्र माओवाद के चंगुल से प्रदेश को मुक्त कराया है। दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर विशेषकर जनजाति समाज की लाश पर राजनीति करने वालों और आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए आत्मचिंतन का भी अवसर है। दिमागी नक्सल भी यह जान लें कि निहित स्वार्थ के कारण किसी भी आतंक को प्रश्रय और आसरा देने का परिणाम सबके लिए विनाशकारी ही होता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध लड़ने वाले आतंक का भस्मासुर किसी विचार या क्षेत्र की सरहद को नहीं मानता है। यह समझकर उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने झीरम घाटी के क्रूर हमले में प्राण गंवाने वाले सभी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि  दी है।

राज्यपाल डेका ने न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की दिलाई शपथ

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र  (Krushna Ram Mohapatra) को आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। इसके पूर्व कृष्न राम महापात्र उड़ीसा हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज के पद पर कार्यरत थे। राज्यपाल डेका ने मुख्य न्यायाधीश कृष्न राम महापात्र को राष्ट्रपति द्वारा जारी मूल वारंट की प्रति सौंपी। राज्यपाल ने मुख्य न्यायाधीश महापात्र को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री तोखन साहू, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, राज्य सभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, अनुज शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

समारोह में मुख्य न्यायाधीश महापात्र की धर्मपत्नी अनिता महापात्र सहित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण उपस्थित थे। शपथ ग्रहण समारोह का संचालन प्रदेश के मुख्य सचिव विकास शील द्वारा किया गया तथा उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट का वाचन किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव गृह विभाग निहारिका बारिक, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, महाधिवक्ता विवेक शर्मा, उच्च न्यायालय बिलासपुर के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव सहित राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं हाईकोर्ट के अधिवक्तागण उपस्थित थे। 

उल्लेखनीय है कि कृष्न राम महापात्र छत्तीसगढ़ के 16 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे।


देशभर में 8 नए हाईकोर्ट चीफ जस्टिस की नियुक्ति, केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न हाईकोर्ट में 8 नए मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) की नियुक्ति को लेकर 5 सितंबर को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। इन नियुक्तियों के साथ देश की न्यायपालिका के कई प्रमुख हाईकोर्ट में नेतृत्व स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है।

केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद संबंधित हाईकोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इन नियुक्तियों को न्यायिक प्रशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के साथ संबंधित हाईकोर्ट में न्यायिक कार्यों के संचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: यौन उत्पीड़न की शिकायतों की प्राथमिकता से जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट का पैनल

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नई दिल्ली- दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन शिकायतों की जांच के लिए अलग से नई कार्यवाही शुरू करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इस पूरे मामले की जांच के लिए पहले ही हाई-पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी (HPEC) गठित की जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने समिति को महिला प्रदर्शनकारियों की यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों की प्राथमिकता के आधार पर जांच करने और जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़ा है मामला

यह मामला 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर हुए NEET संबंधी छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा को लेकर कई आरोप सामने आए थे। इनमें महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोप भी शामिल हैं।

इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही एक पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी गठित की थी। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। समिति को पुलिस कार्रवाई, कथित अत्यधिक बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों तथा पुलिस के खिलाफ प्रत्यारोपों की जांच का दायित्व दिया गया है।

यौन उत्पीड़न की शिकायतों को प्राथमिकता

सोमवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी मांग रखी कि पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायत सीधे किसी स्वतंत्र अधिकारी या न्यायिक अधिकारी के समक्ष दर्ज करा सकें।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश में इन शिकायतों को विशेष रूप से प्राथमिकता देने का निर्देश दिया जा चुका है। समिति को इन मामलों की जल्द जांच कर अंतरिम रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा गया है।

शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि कथित पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायतें समिति तक किस प्रकार पहुंचाएंगी। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि समिति के अध्यक्ष को नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने का अधिकार दिया गया है। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बाद शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतकर्ताओं को एक स्पष्ट और सुलभ माध्यम उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त बाधा के अपनी शिकायत समिति के सामने रख सकें।

पांच सदस्यीय समिति करेगी व्यापक जांच

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित HPEC केवल यौन उत्पीड़न के आरोपों तक सीमित नहीं है। समिति को छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई और हिंसा से जुड़े अन्य आरोपों की भी जांच करनी है।

समिति का उद्देश्य पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा करना है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ, पुलिस कार्रवाई किस स्तर तक उचित थी और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

सुप्रीम कोर्ट का संदेश—शिकायतों की गंभीरता से जांच जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के निर्देशों से यह स्पष्ट हुआ कि महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को जांच प्रक्रिया में अलग से और गंभीरता के साथ देखा जाएगा। अदालत ने समिति को इन शिकायतों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ जल्द अंतरिम रिपोर्ट देने को कहा है।

फिलहाल अदालत ने अलग से नई जांच प्रक्रिया शुरू करने के बजाय मौजूदा हाई-पावर्ड कमेटी के माध्यम से मामले की जांच को आगे बढ़ाने का रास्ता अपनाया है। अब समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या घटनाएं हुईं और आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई आवश्यक होगी।

क्या होगा आगे?

अब सभी की नजर हाई-पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी की जांच और उसकी अंतरिम रिपोर्ट पर है। समिति द्वारा शिकायतों की जांच, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद आगे की तस्वीर साफ होगी।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश छात्र प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा, पुलिस कार्रवाई में जवाबदेही और शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: पूर्व हाईकोर्ट जजों के रिटायरमेंट लाभों पर बनेगी समान राष्ट्रीय नीति

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नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सुविधाओं में एकरूपता लाने के लिए केंद्र सरकार को समिति गठित करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र की ओर से अतिरिक्त समय मांगे जाने पर यह अनुमति दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र तय समय में समिति का गठन नहीं करता है, तो सुप्रीम कोर्ट स्वयं समिति गठित कर सकता है।

दरअसल, अलग-अलग राज्यों में सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों को मिलने वाली सुविधाओं में काफी अंतर है। इनमें ड्राइवर, सुरक्षा व्यवस्था और यात्रा के दौरान सरकारी आवास जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसी असमानता को दूर करने के लिए पूरे देश में एक समान नीति तैयार करने की दिशा में यह कदम उठाया गया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 20 जुलाई 2026 को केंद्र को दो सप्ताह के भीतर समिति गठित करने का निर्देश दिया था। समिति को इस विषय पर अपनी सिफारिशें तैयार करनी हैं।

अब मामले की अगली सुनवाई करीब 10 दिन बाद होने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश से सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों के लिए देशभर में सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सुविधाओं को लेकर एक समान व्यवस्था बनने का रास्ता साफ हो सकता है।

लोकपाल कार्यालय में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण, भ्रष्टाचार मुक्त शासन के संकल्प पर जोर

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नई दिल्ली- भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोकपाल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजय माणिकराव खानविलकर ने लोकपाल कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर लोकपाल के सदस्य न्यायमूर्ति लिंगप्पा नारायण स्वामी, न्यायमूर्ति संजय यादव, सुशील चंद्र, न्यायमूर्ति ऋतु राज अवस्थी, पंकज कुमार और अजय तिर्की सहित वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवारजन उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में न्यायमूर्ति खानविलकर ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के उस आदर्श को याद किया, जिसमें ऐसे राष्ट्र की कल्पना की गई है जहां मन भय से मुक्त हो और सिर ऊंचा रहे। उन्होंने सभी नागरिकों से इस आदर्श को अपने विचारों और कार्यों में बनाए रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत की आजादी स्वतंत्रता सेनानियों और अनगिनत देशभक्तों के बलिदान का परिणाम है। राष्ट्रीय ध्वज फहराना केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के गौरवशाली अतीत और आजादी के साथ जुड़ी जिम्मेदारियों की याद दिलाने वाला अवसर है।

न्यायमूर्ति खानविलकर ने कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ भूख, अन्याय, उत्पीड़न और असमानता से मुक्ति के साथ हर नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना है।

भ्रष्टाचार मुक्त शासन के लिए लोकपाल की प्रतिबद्धता

उन्होंने लोकपाल संस्था की स्वच्छ और भ्रष्टाचार मुक्त शासन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। लोकपाल को प्राप्त हो रही शिकायतों की बढ़ती संख्या को उन्होंने नागरिकों की बढ़ती भागीदारी और संस्था के प्रति विश्वास का संकेत बताया।

उन्होंने संविधान, कानून का शासन, जवाबदेही, दक्षता, पारदर्शिता और सुगमता के प्रति लोकपाल की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल से संस्था को और अधिक पारदर्शी, कुशल और सुलभ बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि प्रत्येक शिकायत को गंभीरता, निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता के साथ देखा जाए। उन्होंने कहा कि हर फाइल के पीछे एक नागरिक होता है, जो न्याय की उम्मीद रखता है और संस्थागत फैसलों से उसका जीवन प्रभावित होता है।

कार्यक्रम के अंत में न्यायमूर्ति खानविलकर ने लोकपाल के सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों के समर्पण एवं व्यावसायिकता के लिए आभार व्यक्त किया। संबोधन का समापन ‘जय हिंद’ के देशभक्तिपूर्ण उद्घोष के साथ हुआ।


छत्तीसगढ़ में हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI करेगी जांच; परिजनों को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजे का आदेश

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नई दिल्ली/छत्तीसगढ़- छत्तीसगढ़ में 34 वर्षीय व्यक्ति की कथित हिरासत में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा हस्तक्षेप करते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया। सर्वोच्च अदालत ने मामले में राज्य पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मौत के बाद FIR दर्ज करने में करीब दो साल की देरी हुई। कोर्ट ने मृतक के परिवार को राहत देते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

मामला छत्तीसगढ़ में एक 34 वर्षीय व्यक्ति की पुलिस हिरासत के दौरान हुई मौत से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने व्यक्ति को 18 जनवरी 2024 को उसकी किराना दुकान के बाहर कथित रूप से शराब बिक्री के आरोप में हिरासत में लिया था। इसके बाद उसकी मौत हो गई। मामले में मृतक के परिवार की ओर से हिरासत के दौरान उसके साथ हिंसा किए जाने के आरोप लगाए गए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले हाई कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, हाई कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि मृतक परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और उसकी मौत असामान्य परिस्थितियों में हुई थी। राज्य की ओर से इन निष्कर्षों पर विवाद नहीं किया गया।

FIR दर्ज करने में दो साल की देरी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सबसे गंभीर सवाल FIR दर्ज करने में हुई देरी को लेकर उठाया। अदालत ने इस बात पर सवाल किया कि हिरासत में मौत जैसी गंभीर घटना के बावजूद राज्य पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने में लगभग दो साल का समय क्यों लिया।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने पुलिस कार्रवाई और जांच की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने इसी पृष्ठभूमि में मामले की जांच राज्य पुलिस से हटाकर CBI को सौंपने का फैसला किया।

CBI अब करेगी पूरे मामले की जांच

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की जांच CBI करेगी। रिपोर्टों के अनुसार, CBI को नियमित आपराधिक मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने और वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से जांच कराने का निर्देश दिया गया है।

मामले की प्रगति पर CBI को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अगली महत्वपूर्ण रिपोर्टिंग/सुनवाई 13 अक्टूबर को होनी है।

CBI जांच का उद्देश्य हिरासत में मौत से जुड़े पूरे घटनाक्रम, पुलिस की भूमिका, हिरासत के दौरान कथित हिंसा तथा FIR दर्ज करने में हुई देरी जैसे पहलुओं की निष्पक्ष जांच करना होगा।

परिवार को ₹25 लाख की अंतरिम राहत

सुप्रीम कोर्ट ने मृतक के परिवार को आर्थिक राहत देते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फिलहाल अंतरिम राहत है और मामले की सुनवाई के दौरान अंतिम मुआवजे की राशि पर आगे निर्णय लिया जा सकता है।

यह राहत विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत के समक्ष यह बात सामने आई कि मृतक परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसकी मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

हिरासत में मौत के मामलों में जवाबदेही का सवाल

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस हिरासत में नागरिकों के अधिकारों और राज्य की जवाबदेही से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने लाता है।

किसी व्यक्ति की हिरासत के दौरान मौत होने पर जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में परिवार को समय पर न्याय मिलना और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होना कानून के शासन में जनता के विश्वास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस मामले में FIR दर्ज करने में हुई कथित लंबी देरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गंभीरता से लिया जाना भी इसी जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

अब आगे क्या होगा?

CBI अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। जांच में हिरासत से जुड़े रिकॉर्ड, पुलिस की कार्रवाई, मेडिकल एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों तथा उस दौरान हुई घटनाओं की जांच की जा सकती है।

जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि हिरासत के दौरान वास्तव में क्या हुआ और किन परिस्थितियों में व्यक्ति की मौत हुई। यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की आपराधिक भूमिका सामने आती है, तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रमुख बिंदु

  • 34 वर्षीय व्यक्ति की कथित हिरासत में मौत के मामले की जांच अब CBI करेगी।

  • राज्य पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने में करीब दो साल की देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए।

  • छत्तीसगढ़ सरकार को मृतक के परिवार को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश।

  • अंतिम मुआवजे की राशि पर बाद में निर्णय लिया जा सकता है।

  • CBI को मामले की निष्पक्ष जांच कर आगे की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

  • मामले की जांच अब राज्य पुलिस के बजाय केंद्रीय एजेंसी की निगरानी में आगे बढ़ेगी।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के इस हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट का CBI जांच का आदेश और ₹25 लाख अंतरिम मुआवजे का निर्देश पीड़ित परिवार के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक राहत है। साथ ही, FIR दर्ज करने में हुई देरी पर अदालत की नाराजगी पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

अब सभी की नजर CBI की जांच पर रहेगी। जांच से सामने आने वाले तथ्य यह तय करने में अहम होंगे कि हिरासत में हुई मौत के लिए जिम्मेदारी किसकी थी और क्या इस मामले में किसी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जरूरत है।

अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद, दिल्ली की अदालत का बड़ा फैसला

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नई दिल्ली- वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई।

इस महीने की शुरुआत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने ताहिर हुसैन को हत्या, अपहरण, घातक हथियारों के साथ दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने सहित कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया। हालांकि, उन्हें आपराधिक साजिश रचने और विद्रोह के लिए उकसाने के आरोपों से बरी कर दिया गया।

अदालत ने जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि मुकदमे का सामना कर रहे छह अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

सजा पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि अंकित शर्मा की निर्मम और सुनियोजित हत्या की गई थी तथा उनके शरीर पर 51 गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। पुलिस ने इसे "दुर्लभ से दुर्लभतम (Rarest of Rare)" श्रेणी का मामला बताया था, लेकिन अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

यह मामला 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है। अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत के आधार पर दयालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, अंकित शर्मा 25 फरवरी को घर लौटने के बाद दोबारा किसी काम से बाहर गए थे, लेकिन वापस नहीं आए। बाद में उनका शव चांदबाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित शर्मा के शरीर पर 51 एंटी-मॉर्टम (मृत्यु से पहले लगी) चोटें दर्ज की गई थीं, जो धारदार हथियारों और कुंद वस्तुओं से किए गए हमले की ओर संकेत करती थीं। जांच के बाद पुलिस ने ताहिर हुसैन और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जबकि 24 मार्च 2023 को अदालत ने आरोप तय कर मुकदमे की सुनवाई शुरू की थी।

इस फैसले के साथ वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक का महत्वपूर्ण न्यायिक निष्कर्ष सामने आया है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: लगातार मानसिक प्रताड़ना और शादी का दबाव आत्महत्या के लिए उकसाने के समान हो सकता है

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाए और उस पर लगातार शादी करने का दबाव बनाया जाए, तो ऐसी परिस्थितियां आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment of Suicide) के दायरे में आ सकती हैं।

अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि किसी व्यक्ति पर लगातार मानसिक दबाव, उत्पीड़न और भावनात्मक प्रताड़ना उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। यदि इस तरह की परिस्थितियां किसी व्यक्ति को आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर करती हैं, तो मामले के तथ्यों के आधार पर इसे आत्महत्या के लिए उकसाने के रूप में देखा जा सकता है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में प्रत्येक घटना के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जाना आवश्यक है। अदालत की यह टिप्पणी मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक दबाव से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी दृष्टिकोण के रूप में देखी जा रही है।

इस फैसले ने यह संदेश भी दिया है कि किसी भी व्यक्ति पर लगातार मानसिक दबाव या अनावश्यक सामाजिक एवं वैवाहिक दबाव बनाना गंभीर कानूनी परिणामों का कारण बन सकता है।

साय सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत त्वरित कार्रवाई,दिवंगत आरक्षक के परिवार से 19 लाख की वसूली मामले में थाना प्रभारी गिरफ्तार

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एक करोड़ के बीमा दावे में कथित हेराफेरी का मामला

धमकी देकर आधी राशि मांगने का आरोप

रायपुर- छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के खिलाफ राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नारायणपुर में एक गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई की गई है। सड़क दुर्घटना में दिवंगत डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की पत्नी को मिले एक करोड़ रुपये के दुर्घटना बीमा दावे में कथित अनियमितता और अवैध वसूली के आरोपों पर पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में एक अधिवक्ता पर भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी के बैंक खाते में भारतीय स्टेट बैंक के वेतन पैकेज के अंतर्गत एक करोड़ रुपये की दुर्घटना बीमा राशि प्राप्त हुई थी। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव और अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा ने बीमा राशि दिलाने के नाम पर मृतक के परिजनों से 19 लाख रुपये ले लिए।

इतना ही नहीं आरोपियों ने कथित रूप से शेष बीमा राशि में भी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की। परिजनों द्वारा इसका विरोध करने पर उन्हें कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने, कानूनी कार्रवाई में फंसाने और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की धमकी दी गई। आरोपियों की लगातार अतिरिक्त रकम की मांग से परेशान होकर मृतक आरक्षक के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नारायणपुर में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर थाना कोतवाली नारायणपुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318, 308 एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। इसके बाद आरोपी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। वहीं सह-आरोपी अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

वास्तव में आरोपियों के विरुद्ध यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और कदाचार के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून का पालन कराने वाले तंत्र में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध वसूली, भ्रष्टाचार अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।आम नागरिकों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता,नर चीतल के अवैध शिकार का खुलासा, सात आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल

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सरकार की सख्ती से वन्यजीव अपराधों पर लग रहा अंकुश, वन्यजीव संरक्षण को मिल रही मजबूती

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन, वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा अवैध शिकार के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में कवर्धा परियोजना मंडल ने नर चीतल के अवैध शिकार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया।

मुखबिर की सूचना पर योजनाबद्ध कार्रवाई

वन विकास निगम के बोड़ला परियोजना परिक्षेत्र के भलपहरी बीट स्थित जंगल में शिकारियों ने जाल बिछाकर लगभग तीन वर्ष के नर चीतल का शिकार किया। इसके बाद उसके मांस को पकाकर आपस में बांटने की तैयारी की जा रही थी। मुखबिर से मिली सूचना पर वन विकास निगम की टीम ने तत्काल योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर दबिश दी और सभी सात आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

शिकार में प्रयुक्त सामग्री और चीतल का मांस जब्त

कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से लगभग 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस, नायलॉन की रस्सी, तीन कुल्हाड़ियां, स्टील के तार एवं लकड़ी से बने फंदे तथा खून से सना थैला बरामद कर जब्त किया गया। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई।

सघन निगरानी और गश्त से मिल रही सफलता

वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा विशेष निगरानी अभियान चलाने के कारण वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है। विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से अवैध शिकार करने वालों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार की स्पष्ट नीति

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक निगरानी व्यवस्था, नियमित गश्त और प्रभावी सूचना तंत्र के माध्यम से वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने का कार्य कर रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वन्यजीवों का अवैध शिकार करने या प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।  वन मंत्री कश्यप ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी अवैध शिकार या वन अपराध की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

बेंगलुरु डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार से देश स्तब्ध, पुलिस जांच में जुटी

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बेंगलुरु- बेंगलुरु के एक डे-केयर सेंटर में छोटे बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और डे-केयर सेंटर के संचालन व कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, डे-केयर सेंटर में मासूम बच्चों के साथ कथित रूप से अमानवीय व्यवहार किए जाने के आरोप लगे हैं। घटना सामने आने के बाद अभिभावकों में भारी नाराजगी है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

इस मामले ने देशभर में डे-केयर और चाइल्डकेयर केंद्रों की निगरानी तथा सुरक्षा मानकों को और सख्त बनाने की मांग तेज कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संस्थानों में नियमित निरीक्षण, प्रशिक्षित स्टाफ और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कोरिया जिले के तिहरे हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला, राज्य सरकार ने जारी की अधिसूचना

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरिया जिले में हुए चर्चित तिहरे हत्याकांड की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का निर्णय लिया है। इस संबंध में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मामला रेत खनन को लेकर चली आ रही आपसी प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा बताया जा रहा है। मामले की गंभीरता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया है।

सीबीआई अब पूरे मामले की जांच अपने हाथ में लेकर हत्या के कारणों, साजिश, आरोपियों की भूमिका तथा रेत खनन से जुड़े संभावित पहलुओं की विस्तृत पड़ताल करेगी। मामले में स्थानीय स्तर पर एकत्र किए गए साक्ष्य और दस्तावेज भी केंद्रीय एजेंसी को उपलब्ध कराए जाएंगे।

राज्य सरकार ने कहा है कि निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच के माध्यम से दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बलौदाबाजार में सनसनीखेज खुलासा: किराना व्यापारी ने 8 हत्याओं का किया कबूलनामा

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छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। एक किराना व्यापारी ने पुलिस पूछताछ के दौरान पिछले चार महीनों में आठ लोगों की हत्या करने की बात स्वीकार की है।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने व्यक्तिगत रंजिश, जमीन संबंधी विवाद, कर्ज के लेन-देन और आपसी दुश्मनी के चलते लोगों को कथित तौर पर जहर देकर मौत के घाट उतारने की बात कबूली है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने निशाने पर उन लोगों को बनाता था, जिनसे उसका किसी न किसी प्रकार का विवाद या मनमुटाव था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम गठित कर दी है और आरोपी के दावों की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मौत से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की अलग-अलग जांच की जाएगी ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद क्षेत्र में दहशत और चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोग मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


महासमुंद: खट्टी जंगल 'ब्लाइंड मर्डर केस' का खुलासा; पुरानी रंजिश में हुई थी प्रकाश की हत्या, 3 आरोपी गिरफ्तार

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महासमुंद- जिला पुलिस ने खट्टी जंगल में मिली युवक की लाश की गुत्थी सुलझाते हुए एक सनसनीखेज अंधे कत्ल (ब्लाइंड मर्डर) का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में उड़ियापारा रावणभांठा निवासी तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हत्या की वजह पुरानी रंजिश और गाली-गलौज को बताया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला? 

​बीती 6 अप्रैल 2026 को ग्राम खट्टी के जंगल में एक अज्ञात युवक का शव संदेहास्पद स्थिति में मिला था। मृतक की पहचान प्रकाश पटेल (23 वर्ष), निवासी खैराभांठा के रूप में हुई। प्रकाश के शरीर पर चोट के गहरे निशान थे और गले में गमछा लिपटा हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच में हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने धारा 103(1) BNS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

शराब पार्टी के दौरान गाली-गलौज बनी मौत का कारण 

​पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित टीम ने जब मृतक के दोस्तों से पूछताछ की, तो परतें खुलने लगीं। जांच में सामने आया कि मृतक प्रकाश और आरोपी (जलांधर, काजू और गोपाल) आपस में दोस्त थे।

​पिछले महीने शराब पीने के दौरान प्रकाश ने नशे की हालत में आरोपियों को मां-बहन की गालियां दी थीं। इसी अपमान का बदला लेने के लिए तीनों ने उसकी हत्या की साजिश रची।

 ​फिल्मी अंदाज में दिया वारदात को अंजाम 

​अपहरण और हमला: 5 अप्रैल की रात आरोपियों को सूचना मिली कि प्रकाश गायत्री मंदिर के पास है। आरोपी काजू और गोपाल वहां पहुंचे, प्रकाश के साथ मारपीट की और उसे जबरन बाइक पर बैठाकर खट्टी जंगल ले गए।

जघन्य हत्या: जंगल के सन्नाटे में आरोपियों ने कांच की बोतल और पत्थर से प्रकाश पर ताबड़तोड़ हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।

फरारी की साजिश: हत्या के बाद आरोपियों ने अपने साथी जलांधर सोनवानी को इसकी जानकारी दी। जलांधर ने उन्हें पैसे और अपनी स्प्लेंडर बाइक (CG 04 QQ 6845) देकर गरियाबंद भागने और 'अंडरग्राउंड' होने की सलाह दी।

​पुलिस की मुस्तैदी से दबोचे गए हत्यारे 

​महासमुंद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों की मदद से घेराबंदी की। लगातार दबिश देकर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली गई है। पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम: 

​चंद्रहास नेताम उर्फ काजू (21 वर्ष) - निवासी उड़ियापारा, महासमुंद।

​गोपाल प्रधान (20 वर्ष) - निवासी उड़ियापारा, महासमुंद।

​जालंधर सोनवानी (21 वर्ष) - निवासी वार्ड नं. 30, नया रावणभांठा।

​पुलिस ने तीनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 2025 विंटर इंटर्नशिप कार्यक्रम की शुरुआत की

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत ने अपने चार-सप्ताह लंबे इन-पर्सन विंटर इंटर्नशिप प्रोग्राम (WIP)-2025 का आयोजन किया, जो 15 दिसंबर 2025 से 9 जनवरी 2026 तक नई दिल्ली में चल रहा है। इस कार्यक्रम में देश भर के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विभिन्न संस्थाओं के 1,485 आवेदकों में से चयनित 80 विश्वविद्यालय स्तरीय छात्र भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए NHRC, भारत के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने कहा कि यह इंटर्नशिप भारत जैसे विविध राष्ट्र में सहकर्मी सीखने के लिए अद्वितीय मंच है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य मानवाधिकारों पर सम्यक् दृष्टिकोण प्रदान करना है और इंटर्न्स से आग्रह किया कि वे इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन, कार्यस्थल और समुदाय में आत्मसात करें, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकें।

अपने मुख्य भाषण में NHRC, भारत के महासचिव,भरत लाल ने युवाओं की मानवाधिकारों के क्षेत्र में भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने इंटर्न्स से कहा कि वे संवैधानिक और सांस्कृतिक मूल्यों में निहित सहानुभूति और करुणा की भावना को विकसित करें और इस इंटर्नशिप का उपयोग अपनी दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और समावेशी, न्यायसंगत एवं समान समाज निर्माण की दिशा में काम करने के लिए करें।


कार्यक्रम का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए NHRC, भारत की संयुक्त सचिव, सैडिंगपुई चखछुआक ने बताया कि विषय विशेषज्ञों के साथ इंटरैक्टिव सत्रों के अलावा इंटर्न्स समूह अनुसंधान परियोजनाओं, पुस्तक समीक्षा और भाषण प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे, जिससे उनके मानवाधिकार मुद्दों की समझ में वृद्धि होगी और नवोन्मेषी दृष्टिकोण विकसित होंगे।

NHRC, भारत के निदेशक, ले. कर्नल वीरेंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।


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