Media24Media.com: पिछले 12 वर्षों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत ने हासिल की अभूतपूर्व उपलब्धियां: डॉ. जितेंद्र सिंह

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पिछले 12 वर्षों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत ने हासिल की अभूतपूर्व उपलब्धियां: डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि पिछले 12 वर्षों में भारत के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार परिदृश्य में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। इस दौरान देश की जैव-अर्थव्यवस्था (बायोइकोनॉमी) में लगभग 20 गुना वृद्धि हुई, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट ऐतिहासिक सफल लैंडिंग हुई, अंतरिक्ष स्टार्टअप इकोसिस्टम का तेजी से विस्तार हुआ तथा मौसम पूर्वानुमान और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई।

नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर मुख्यालय में आयोजित “विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में परिवर्तनकारी विकास के 12 वर्ष” विषयक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं से निकलकर आम नागरिकों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं और देश के विकास के प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरे हैं।

उन्होंने कहा कि आज सरकार की लगभग सभी प्रमुख योजनाएं भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तंत्र से विकसित तकनीकों पर आधारित हैं। नवाचार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, उद्योग सहभागिता और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर सरकार के विशेष जोर ने स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष, मौसम विज्ञान, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक उपलब्धियों को नई गति दी है।

डॉ. सिंह ने बताया कि भारत की जैव-अर्थव्यवस्था वर्ष 2014 में लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर आज 190 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गई है और वर्ष 2030 तक इसे 300 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा, जीनोमिक्स, डायग्नोस्टिक्स और बायोफार्मास्यूटिकल्स में स्वदेशी नवाचारों के बल पर भारत वैश्विक जैव-प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभरा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने अगली पीढ़ी के एंटीबायोटिक्स, किफायती CAR-T सेल थेरेपी, जीनोमिक्स और प्रिसिजन मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

सीएसआईआर की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अब वैज्ञानिक संस्थान उद्योगों, स्टार्टअप्स, किसानों और स्थानीय समुदायों से पहले की तुलना में कहीं अधिक जुड़े हुए हैं। उन्होंने अरोमा मिशन का उदाहरण देते हुए बताया कि इस पहल ने विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों के हजारों किसानों को उच्च मूल्य वाली कृषि से जोड़कर आजीविका के नए अवसर प्रदान किए हैं।

मौसम एवं जलवायु सेवाओं में सुधार का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 में देश में केवल 17 मौसम रडार थे, जबकि आज लगभग 50 रडार कार्यरत हैं और मिशन मौसम के तहत 50 अतिरिक्त रडार स्थापित किए जाने की योजना है। मौसम पूर्वानुमान की पहुंच 300 शहरों से बढ़कर लगभग 1,700 स्थानों तक पहुंच गई है, जिससे किसानों, नागरिकों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल रही है।

अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए सुधारों ने भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह बदल दिया है। अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या एकल अंक से बढ़कर सैकड़ों में पहुंच गई है। चंद्रयान-3 की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बना।

उन्होंने बताया कि भारत वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर उतारने के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

डॉ. सिंह ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी को भी हाल के वर्षों का एक महत्वपूर्ण सुधार बताया। उन्होंने कहा कि इससे निवेश, नवाचार और क्षमता निर्माण को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने मिशन मौसम, डीप ओशन मिशन, मत्स्य 6000 और वराह जैसी स्वदेशी गहरे समुद्र की प्रौद्योगिकियों सहित कई उपलब्धियों की जानकारी दी। वहीं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले ने बायोई3 नीति, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF), राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन और राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति जैसी पहलों पर प्रकाश डाला।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार भारत को वैश्विक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति न केवल देश की रणनीतिक और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर रही है, बल्कि नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने, रोजगार सृजन और राष्ट्रीय विकास को गति देने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विज्ञान और नवाचार की यह यात्रा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

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