Media24Media.com: महासमुंद में खाद संकट की आहट, व्यापारियों का बड़ा ऐलान: 1 जून से बंद होगी खाद की बिक्री

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महासमुंद में खाद संकट की आहट, व्यापारियों का बड़ा ऐलान: 1 जून से बंद होगी खाद की बिक्री

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महासमुंद- महासमुंद ब्लॉक के खाद व्यापारियों ने शासन द्वारा निर्धारित दरों पर खाद न मिलने के विरोध में आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। सोमवार को 'महासमुंद' में आयोजित महासमुंद ब्लॉक खाद विक्रेता संघ और थोक विक्रेताओं (होलसेलर्स) की एक महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि व्यापारियों के हितों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में लिए गए बड़े फैसले 

खाद व्यापारियों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए निम्नलिखित कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है:-

​ नई खरीदी पर रोक : जब तक निर्धारित सरकारी रेट पर खाद उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक कोई भी रिटेल व्यापारी नई खाद नहीं खरीदेगा।

​ 30 मई तक की मोहलत : व्यापारियों के पास वर्तमान में जो स्टॉक मौजूद है, उसे केवल 30 मई 2026 तक ही किसानों को बेचा जाएगा।

​ 1 जून से पूर्ण बंदी: आगामी 1 जून से महासमुंद ब्लॉक में खाद की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।

​ होलसेलरों का बहिष्कार : संघ के फैसलों का समर्थन न करने वाले थोक व्यापारियों से भविष्य में कोई भी लेन-देन नहीं किया जाएगा।

आर्थिक दबाव बना आंदोलन की वजह 

​व्यापारियों का कहना है कि खाद कंपनियां और कुछ थोक व्यापारी सरकारी नियमों और निर्धारित दरों का उल्लंघन कर रहे हैं। इससे फुटकर व्यापारियों पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। व्यापारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो यह विरोध एक बड़े आंदोलन का रूप ले लेगा।

बैठक में प्रमुख उपस्थिति 

​इस महत्वपूर्ण बैठक में रायपुर के प्रमुख होलसेलर्स भी शामिल हुए, जिनमें:

​राजीव बग्गा (संचालक, कृषि सेवा केंद्र रायपुर)

​अशोक असरानी (संचालक, पायल फर्टिलाइजर रायपुर)

​अजित सिंह (प्रतिनिधि, सुहाने एग्रोटेक रायपुर)

​ एकजुट रहने की अपील: 

महासमुंद ब्लॉक खाद विक्रेता संघ के अध्यक्ष जागेश्वर 'जुगनू' चंद्राकर एवं सचिव ईश्वर पटेल ने सभी व्यापारियों से एकजुट रहने का आह्वान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन अपने सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर पर संघर्ष करने को तैयार है।

​किसानों के लिए यह खबर चिंताजनक हो सकती है, क्योंकि खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले खाद की बिक्री बंद होने से खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

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