Media24Media.com: #FarmersIssue

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #FarmersIssue. Show all posts
Showing posts with label #FarmersIssue. Show all posts

आरंग गोठान में गायों की बदहाली पर सवाल: गोठान से मुक्त करने और खेतों में बाड़ लगाने की उठी मांग

No comments Document Thumbnail

“बेजुबानों पर अत्याचार नहीं, आजादी हर जीव का हक” — प्रशासन से व्यवस्था की समीक्षा और तत्काल कार्रवाई की मांग

आरंग- आरंग क्षेत्र के गोठान में रखी गई गायों की कथित बदहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। 28 सितंबर को सामने आई तस्वीरों में गोठान में मौजूद मवेशियों की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। पशुओं के लिए पर्याप्त चारा, पानी, स्वच्छ स्थान और सुरक्षित वातावरण की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि गोठान में रखे गए मवेशियों की उचित देखभाल नहीं हो पा रही है और लगातार पशुओं के बीमार पड़ने तथा मौत होने की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, मौतों की वास्तविक संख्या और उनके कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

फसल बचाने के लिए गायों को कैद करना ही एकमात्र रास्ता क्यों?

इस पूरे मामले में अब एक अलग समाधान की मांग भी सामने आ रही है। मांग है कि यदि गोठान में पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई जा सकती, तो गायों को गोठान में बंद रखने के बजाय उन्हें मुक्त छोड़ा जाए और किसान अपने खेतों की सुरक्षा के लिए स्वयं बाड़ लगाकर फसल की रक्षा करें।

किसानों के लिए फसल बचाना जरूरी है, लेकिन इसके लिए बेजुबान पशुओं को ऐसी जगह बंद रखना उचित नहीं माना जा सकता जहां उनके भोजन, पानी, आश्रय और उपचार की पर्याप्त व्यवस्था न हो।

“आजादी हर जीव का हक है”

पशु प्रेमियों और ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए। गोठान में मौजूद सभी मवेशियों की स्वास्थ्य जांच, पर्याप्त चारा-पानी, छाया एवं सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यदि व्यवस्था बनाए रखना संभव नहीं है तो पशुओं को वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

साथ ही किसानों को खेतों की सुरक्षा के लिए बाड़ लगाने और अन्य मानवीय उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की मांग की जा रही है।

सवाल सिर्फ गायों का नहीं, व्यवस्था की जिम्मेदारी का भी है।

अगर इंसानों के लिए सुरक्षा जरूरी है तो बेजुबान पशुओं के लिए भी जीवन, भोजन, पानी और सुरक्षित वातावरण उतना ही जरूरी है।

“गायों को गोठान से छोड़िए, किसान अपने खेत में बाड़ लगाकर फसल बचाए।
बेजुबानों पर अत्याचार न करें।
आजादी हर जीव का हक है।”

प्रशासन से प्रमुख मांगें

  • गोठान में मौजूद सभी मवेशियों की तत्काल स्वास्थ्य जांच कराई जाए।

  • किसी भी पशु की मौत होने पर कारण की पशु चिकित्सकीय जांच/पोस्टमार्टम कराया जाए।

  • चारा, स्वच्छ पेयजल और आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

  • गोठान की वास्तविक स्थिति की प्रशासनिक जांच कराई जाए।

  • यदि गोठान में पर्याप्त व्यवस्था संभव नहीं है तो पशुओं के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

  • किसानों को खेतों में बाड़ लगाने तथा फसल सुरक्षा के मानवीय उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

  • भविष्य में पशुओं को ऐसी परिस्थितियों में रखने से बचा जाए, जहां उनके जीवन और स्वास्थ्य पर खतरा उत्पन्न हो।


महासमुंद में खाद संकट की आहट, व्यापारियों का बड़ा ऐलान: 1 जून से बंद होगी खाद की बिक्री

No comments Document Thumbnail

महासमुंद- महासमुंद ब्लॉक के खाद व्यापारियों ने शासन द्वारा निर्धारित दरों पर खाद न मिलने के विरोध में आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। सोमवार को 'महासमुंद' में आयोजित महासमुंद ब्लॉक खाद विक्रेता संघ और थोक विक्रेताओं (होलसेलर्स) की एक महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि व्यापारियों के हितों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में लिए गए बड़े फैसले 

खाद व्यापारियों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए निम्नलिखित कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है:-

​ नई खरीदी पर रोक : जब तक निर्धारित सरकारी रेट पर खाद उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक कोई भी रिटेल व्यापारी नई खाद नहीं खरीदेगा।

​ 30 मई तक की मोहलत : व्यापारियों के पास वर्तमान में जो स्टॉक मौजूद है, उसे केवल 30 मई 2026 तक ही किसानों को बेचा जाएगा।

​ 1 जून से पूर्ण बंदी: आगामी 1 जून से महासमुंद ब्लॉक में खाद की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।

​ होलसेलरों का बहिष्कार : संघ के फैसलों का समर्थन न करने वाले थोक व्यापारियों से भविष्य में कोई भी लेन-देन नहीं किया जाएगा।

आर्थिक दबाव बना आंदोलन की वजह 

​व्यापारियों का कहना है कि खाद कंपनियां और कुछ थोक व्यापारी सरकारी नियमों और निर्धारित दरों का उल्लंघन कर रहे हैं। इससे फुटकर व्यापारियों पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। व्यापारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो यह विरोध एक बड़े आंदोलन का रूप ले लेगा।

बैठक में प्रमुख उपस्थिति 

​इस महत्वपूर्ण बैठक में रायपुर के प्रमुख होलसेलर्स भी शामिल हुए, जिनमें:

​राजीव बग्गा (संचालक, कृषि सेवा केंद्र रायपुर)

​अशोक असरानी (संचालक, पायल फर्टिलाइजर रायपुर)

​अजित सिंह (प्रतिनिधि, सुहाने एग्रोटेक रायपुर)

​ एकजुट रहने की अपील: 

महासमुंद ब्लॉक खाद विक्रेता संघ के अध्यक्ष जागेश्वर 'जुगनू' चंद्राकर एवं सचिव ईश्वर पटेल ने सभी व्यापारियों से एकजुट रहने का आह्वान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन अपने सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर पर संघर्ष करने को तैयार है।

​किसानों के लिए यह खबर चिंताजनक हो सकती है, क्योंकि खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले खाद की बिक्री बंद होने से खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.