Media24Media.com: ​खाद कटौती के खिलाफ फूटा अन्नदाताओं का गुस्सा: रीवा सहकारी समिति में किसानों का शांतिपूर्ण धरना, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

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​खाद कटौती के खिलाफ फूटा अन्नदाताओं का गुस्सा: रीवा सहकारी समिति में किसानों का शांतिपूर्ण धरना, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

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​आरंग- रासायनिक खाद की मात्रा में शासन द्वारा की गई भारी कटौती के विरोध में ग्रामीण सेवा सहकारी समिति रीवा (पं.क्र. 1527) के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुकरा, रसनी और रीवा के किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। किसानों ने समिति परिसर में शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम समिति प्रबंधक जगदीश साहू को एक ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मांग की है कि खाद वितरण की व्यवस्था को तत्काल पूर्ववत (पहले की तरह) बहाल किया जाए।

 ​नई व्यवस्था से खेती होगी घाटे का सौदा: किसान 

​धरना स्थल पर किसानों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि नई उर्वरक अनुशंसा के कारण खेती की लागत में भारी बढ़ोतरी होगी और उत्पादन पर इसका सीधा प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिससे किसान गहरे आर्थिक संकट में फंस जाएंगे।

​ क्या है नई व्यवस्था? 

प्रदेश सरकार द्वारा कृषि विश्वविद्यालय और वैज्ञानिक अनुसंधान की अनुशंसा का हवाला देकर फसलवार रासायनिक खाद की मात्रा घटा दी गई है। अब प्रति एकड़ केवल 1 बोरी यूरिया, आधा बोरी डीएपी, 1 बोरी पोटाश, 2 बोतल नैनो यूरिया और 1 बोतल नैनो डीएपी देने का प्रावधान किया गया है।

 ​किसान क्यों कर रहे हैं विरोध? 

किसान वर्षों से प्रति एकड़ 2 बोरी यूरिया, 2 बोरी डीएपी और 1 बोरी पोटाश का उपयोग करते आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि एक समय सरकार ने ही 'अधिक अन्न उपजाओ' का नारा देकर रासायनिक खाद को बढ़ावा दिया था, और अब अचानक कटौती की जा रही है। इससे फसल उत्पादन घटेगा और किसानों को मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ेगी।

​ 'जमीन की वास्तविक स्थिति समझे सरकार' : वतन चन्द्राकर 

​धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सहकारी समिति रीवा के शेयर होल्डर एवं क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर ने कहा:

​"अन्नदाता की मेहनत और उसकी जरूरतों को नजरअंदाज कर बनाई गई कोई भी नीति कभी सफल नहीं हो सकती। किसान पहले से ही महंगी खेती, डीजल, बीज और मौसम की अनिश्चितता की मार झेल रहा है। ऐसे संकट के समय में खाद की मात्रा आधी करना किसानों के साथ सरासर अन्याय है। सरकार को जमीन की जमीनी हकीकत को समझते हुए तुरंत पुरानी व्यवस्था लागू करनी चाहिए। किसान हितों की रक्षा के लिए हम हर स्तर पर आवाज बुलंद करेंगे।"


​ भानसोज के बाद अब रीवा में गूंजी विरोध की आवाज 

​उल्लेखनीय है कि खाद कटौती को लेकर किसानों का यह विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे पहले 15 मई को भानसोज सोसायटी में भी किसानों द्वारा व्यापक धरना प्रदर्शन किया गया था। रीवा में जुटे किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

​ प्रदर्शन में ये प्रमुख किसान रहे उपस्थित 

​इस शांतिपूर्ण आंदोलन और नाराजगी जताने वालों में मुख्य रूप से:

​दौलत साहू (पूर्व अध्यक्ष, सहकारी समिति रीवा),​वतन चन्द्राकर (जिला पंचायत सदस्य),हरि बंजारे, सुकुल साहू, दिलीप कुर्रे, रमेश चन्द्राकर, अश्वनी चन्द्राकर,​शोभाराम साहू, संतोष साहू, बेनु राम साहू, बिष्णु साहू, घनाराम साहू,मेघनाथ साहू, हेमलाल साहू, हेमू, मिलु, नोहर सिन्हा, प्रदीप साहू,संतोष चन्द्राकर, मोरज चन्द्राकर, चन्द्प्रकाश चन्द्राकर,सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में जागरूक किसान उपस्थित थे।

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