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जल संकट के बीच रीवा में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था शुरू, बिछाई जा रही नई पाइपलाइन

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पंचायत प्रतिनिधियों ने श्रीफल तोड़कर किया कार्य का शुभारंभ 

आरंग- ग्राम रीवा में गहराए भारी पेयजल संकट को देखते हुए ग्राम पंचायत ने बड़ी राहत दी है। ग्रामीणों को पानी की किल्लत से निजात दिलाने के लिए रविवार को गांव में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था के तहत पीएचई विभाग द्वारा नई पाइपलाइन विस्तार का कार्य शुरू किया गया। उसके पहले पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में विधि-विधान से श्रीफल तोड़कर इस कार्य का शुभारंभ किया गया।


भीषण गर्मी के इस दौर में पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए यह बड़ी राहत साबित होगी। इस दौरान सरपंच घंसियाराम साहू ने कहा कि गांव के हर घर तक पीने का साफ पानी पहुंचाना हमारी पहली प्राथमिकता है। पेयजल की इस विकट समस्या को अस्थाई रूप से दूर करने के लिए यह वैकल्पिक पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिससे सभी को पानी सुलभता से मिल सके।


इस मौके पर मुख्य रूप से सरपंच घंसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू सहित पंच रमेश चंद्राकर, मनबोध साहू, वेदप्रकाश साहू, घनश्याम डहरिया, चंद्रकली टिकेश्वर डहरिया, धनेश्वरी संजू ढीढी, मीरा अश्विनी चंद्राकर और बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे।

पेयजल संकट दूर करने रीवा में जल प्रबंधन पर महामंथन आज,एसडीएम और भूगर्भ वैज्ञानिक देंगे संरक्षण के गुर

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आरंग- ग्राम पंचायत रीवा में गहराते पेयजल संकट से निपटने के लिए आज सोमवार को जल प्रबंधन एवं संरक्षण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होगा। पीपला वेलफेयर फाउंडेशन और समस्त ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम में प्रशासनिक अफसर, विशेषज्ञ और ग्रामीण एक मंच पर जुटेंगे। फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया कि गांव में पानी की विकट समस्या को देखते हुए साल 2025 से यह कार्यशाला लगातार आयोजित की जा रही है, जिसके अब तक बेहद सकारात्मक परिणाम मिले हैं। कार्यशाला में मुख्य रूप से आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा, जनपद सीईओ अभिषेक बेनर्जी, पीएचई विभाग से ईई अनिल बच्चन, एसडीओ शुभ्रा बघेल, इंजीनियर रानू दिनकर और जिओ हाइड्रोलॉजिस्ट घनश्याम वर्मा,देवव्रत साहू शामिल होकर ग्रामीणों को वाटर रिचार्जिंग व जल सहेजने की तकनीक सिखाएंगे। इसके अलावा जिला पंचायत सदस्य वतन चंद्राकर, जनपद सदस्य कृष्णा महेश साहू, सरपंच घंसियाराम साहू और फाउंडेशन के संरक्षक आनंदराम पत्रकारश्री,अध्यक्ष दूजेराम धीवर, शिक्षाविद मुरली मनोहर देवांगन, समाजसेवी पायलेट ओ के तिवारी,सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।




रीवा में गहराया जल संकट, हाइड्रो फ्रैक्चरिंग से बढ़ेगी हैंडपंपों की ताकत

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पीएचई टीम और नायब तहसीलदार ने ग्रामीणों के साथ बनाई कार्ययोजना; भूगर्भ वैज्ञानिक भी पहुंचे  

आरंग- भीषण गर्मी के बीच ग्राम रीवा में पेयजल की किल्लत गहरा गई है। पानी की बूंद-बूंद को तरसते ग्रामीणों की सुध लेने शुक्रवार को प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर गांव पहुंचा। 

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के अधिकारियों और मंदिर हसौद के नायब तहसीलदार ने सीधे मोर्चा संभालते हुए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से चर्चा की और संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक कार्ययोजना पेश की, जिस पर ग्रामीणों ने सहमति जताई है। गांव में दम तोड़ते जलस्तर को देखते हुए पीएचई विभाग लगातार जद्दोजहद कर रहा है। कम पानी उगलने वाले हैंडपंपों की हाइड्रो फ्रैक्चरिंग मशीनों से जांच की जा रही है, ताकि उनकी जल क्षमता को बढ़ाया जा सके। संकट की गंभीरता को देखते हुए पीएचई ने भूगर्भ विशेषज्ञों (जियोलॉजिस्ट) की टीम को मैदान में उतारा है। यह टीम गांव के भीतर भूगर्भ जल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर रही है, ताकि पानी की उपलब्धता वाले नए पॉइंट चिह्नित किए जा सकें। इस दौरान सरपंच, उपसरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


पीपला फाउंडेशन ने रीवा में 5000 लीटर की टंकी स्थापित की,ग्रामीणों को जल संकट से मिली राहत

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आरंग- भीषण गर्मी और गहराते जल संकट के बीच आरंग क्षेत्र के लोरिक नगर (गढ़रीवां) के ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर आई है। स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश करते हुए ग्राम पंचायत के सहयोग से गांव में 5000 लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी स्थापित की है। 

इस पहल से न केवल पानी की बर्बादी रुकी है, बल्कि राहगीरों और पशुओं के लिए भी पेयजल सुलभ हो गया है। दरअसल, गांव के ट्यूबवेल के पास भंडारण की व्यवस्था न होने के कारण रोजाना हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा था। ग्रामीणों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। समस्या को देखते हुए पीपला फाउंडेशन के सदस्यों ने सरपंच घसियाराम साहू के समक्ष टंकी लगाने का प्रस्ताव रखा। पंचायत ने तत्काल सहमति देते हुए टंकी के लिए पक्का चबूतरा, पाइपलाइन और नलों की व्यवस्था कराई। शनिवार को आयोजित  कार्यक्रम में टंकी का विधिवत शुभारंभ किया गया। अब इस सुविधा का लाभ रीवा के साथ-साथ लखौली और कुकरा के ग्रामीणों को भी मिल रहा है। मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण यहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भी यह प्यास बुझाने का केंद्र बन गया है। गांव के सरपंच घसियाराम साहू का कहना है कि गांव में पानी की समस्या गंभीर थी। संस्था और पंचायत के इस तालमेल से अब पानी सहेजने में मदद मिलेगी। हम पीपला फाउंडेशन के इस सेवाभावी कार्य का आभार व्यक्त करते हैं। इस शुभारंभ अवसर पर सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू और फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने इस कार्य को जनहित में मील का पत्थर बताया। इस दौरान कोषाध्यक्ष कोमल लाखोटी, सचिव अभिमन्यु साहू, संयुक्त सचिव संजय मेश्राम सहित सक्रिय सदस्य सीताराम साहू, ईश्वरी साहू, पोखराज साहू, हीराधर धीवर पंच वेदप्रकाश साहू, रमेश चंद्राकर, मीरा चंद्राकर, समाजसेवी अश्वनी चंद्राकर ,पी के चंद्राकर,  सहित ग्रामीण उपस्थित थे।


​खाद कटौती के खिलाफ फूटा अन्नदाताओं का गुस्सा: रीवा सहकारी समिति में किसानों का शांतिपूर्ण धरना, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

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​आरंग- रासायनिक खाद की मात्रा में शासन द्वारा की गई भारी कटौती के विरोध में ग्रामीण सेवा सहकारी समिति रीवा (पं.क्र. 1527) के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुकरा, रसनी और रीवा के किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। किसानों ने समिति परिसर में शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम समिति प्रबंधक जगदीश साहू को एक ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मांग की है कि खाद वितरण की व्यवस्था को तत्काल पूर्ववत (पहले की तरह) बहाल किया जाए।

 ​नई व्यवस्था से खेती होगी घाटे का सौदा: किसान 

​धरना स्थल पर किसानों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि नई उर्वरक अनुशंसा के कारण खेती की लागत में भारी बढ़ोतरी होगी और उत्पादन पर इसका सीधा प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिससे किसान गहरे आर्थिक संकट में फंस जाएंगे।

​ क्या है नई व्यवस्था? 

प्रदेश सरकार द्वारा कृषि विश्वविद्यालय और वैज्ञानिक अनुसंधान की अनुशंसा का हवाला देकर फसलवार रासायनिक खाद की मात्रा घटा दी गई है। अब प्रति एकड़ केवल 1 बोरी यूरिया, आधा बोरी डीएपी, 1 बोरी पोटाश, 2 बोतल नैनो यूरिया और 1 बोतल नैनो डीएपी देने का प्रावधान किया गया है।

 ​किसान क्यों कर रहे हैं विरोध? 

किसान वर्षों से प्रति एकड़ 2 बोरी यूरिया, 2 बोरी डीएपी और 1 बोरी पोटाश का उपयोग करते आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि एक समय सरकार ने ही 'अधिक अन्न उपजाओ' का नारा देकर रासायनिक खाद को बढ़ावा दिया था, और अब अचानक कटौती की जा रही है। इससे फसल उत्पादन घटेगा और किसानों को मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ेगी।

​ 'जमीन की वास्तविक स्थिति समझे सरकार' : वतन चन्द्राकर 

​धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सहकारी समिति रीवा के शेयर होल्डर एवं क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर ने कहा:

​"अन्नदाता की मेहनत और उसकी जरूरतों को नजरअंदाज कर बनाई गई कोई भी नीति कभी सफल नहीं हो सकती। किसान पहले से ही महंगी खेती, डीजल, बीज और मौसम की अनिश्चितता की मार झेल रहा है। ऐसे संकट के समय में खाद की मात्रा आधी करना किसानों के साथ सरासर अन्याय है। सरकार को जमीन की जमीनी हकीकत को समझते हुए तुरंत पुरानी व्यवस्था लागू करनी चाहिए। किसान हितों की रक्षा के लिए हम हर स्तर पर आवाज बुलंद करेंगे।"


​ भानसोज के बाद अब रीवा में गूंजी विरोध की आवाज 

​उल्लेखनीय है कि खाद कटौती को लेकर किसानों का यह विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे पहले 15 मई को भानसोज सोसायटी में भी किसानों द्वारा व्यापक धरना प्रदर्शन किया गया था। रीवा में जुटे किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

​ प्रदर्शन में ये प्रमुख किसान रहे उपस्थित 

​इस शांतिपूर्ण आंदोलन और नाराजगी जताने वालों में मुख्य रूप से:

​दौलत साहू (पूर्व अध्यक्ष, सहकारी समिति रीवा),​वतन चन्द्राकर (जिला पंचायत सदस्य),हरि बंजारे, सुकुल साहू, दिलीप कुर्रे, रमेश चन्द्राकर, अश्वनी चन्द्राकर,​शोभाराम साहू, संतोष साहू, बेनु राम साहू, बिष्णु साहू, घनाराम साहू,मेघनाथ साहू, हेमलाल साहू, हेमू, मिलु, नोहर सिन्हा, प्रदीप साहू,संतोष चन्द्राकर, मोरज चन्द्राकर, चन्द्प्रकाश चन्द्राकर,सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में जागरूक किसान उपस्थित थे।

लोरिक नगर गढ़ रीवा में गूंजी चंदैनी की स्वर लहरियां

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कलमकारों ने चंदैनी लोकनाट्य की महत्ता पर दिया व्याख्यान

आरंग- छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू और गौरवशाली लोक परंपराओं को सहेजने के उद्देश्य से 'लोरिक नगर' के नाम से विख्यात ग्राम गढ़ रीवा में प्रथम 'लोरिक चंदा (चंदैनी) लोकनाट्य महोत्सव' का ऐतिहासिक आयोजन  हुआ। स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन और समस्त ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में लोक संस्कृति की ऐसी छटा बिखरी कि हजारों की संख्या में मौजूद जनसैलाब मंत्रमुग्ध हो उठा।

छत्तीसगढ़ ​महतारी की आरती से भव्य आगाज 

​महोत्सव का शुभारंभ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार डॉ. के.के. पाटिल द्वारा रचित 'छत्तीसगढ़ महतारी की आरती' के साथ हुआ। भक्ति और संस्कृति के इस संगम ने पूरे आयोजन को गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम में कलमकारों ने चंदैनी लोकनाट्य की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए इसे छत्तीसगढ़ की अस्मिता का प्रतीक बताया।

 ​नामचीन लोगों की उपस्थिति ने बढ़ाया उत्साह 

​महोत्सव में राजनीति, पत्रकारिता और कला जगत की प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, मंत्री व आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब के प्रतिनिधि के रूप में निज सचिव जीतेंद्र साहू, निज सहायक यशवंत टंडन एवं जिला पंचायत सदस्य वतन चंद्राकर,जनपद सदस्य कृष्णा महेश साहू उपस्थित रहे।

साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार डॉ. कृष्ण कुमार पाटिल, वरिष्ठ पत्रकार व पीपला फाउंडेशन के संरक्षक आनंदराम पत्रकारश्री,पायलेट ओंकार तिवारी, ग्राम समिति अध्यक्ष द्वारिका साहू,

जिला ग्रामीण साहू संघ अध्यक्ष देवनाथ साहू,धीवर समाज परगना अध्यक्ष रामानंद धीवर, सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू, वरिष्ठ पत्रकार पवन साहू, आकाशवाणी-दूरदर्शन के एंकर शशांक खरे, सामाजिक कार्यकर्ता महेन्द्र कुमार पटेल और सुरेंद्र नशीने ने भी अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई।

विलुप्त होती कला को सहेजने की कवायद 

​आयोजन का मुख्य केंद्र बिंदु आधुनिकता की चकाचौंध में ओझल हो रही 'चंदैनी' लोककला को पुनर्जीवित करना था। वक्ताओं ने कहा कि गढ़ रीवा जैसे ऐतिहासिक स्थल पर इस तरह का आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करेगा। महोत्सव की सफलता इस बात में रही कि इसमें किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि सर्वसमाज और जनप्रतिनिधियों का भरपूर सहयोग मिला।

इनकी रही सक्रिय भूमिका 

​महोत्सव के सफल क्रियान्वयन में पीपला फाउंडेशन से महेंद्र कुमार पटेल, कोमल लाखोटी, पोखराज साहू, अशोक साहू, प्रतीक टोंड्रे, ईश्वरी साहू और सीताराम साहू ने सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं, ग्राम पंचायत के सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू ,समस्त पंचों के साथ हनी डांस ग्रुप के सदस्यों व चंडी मंदिर समिति के सदस्यों का विशेष योगदान रहा।

​कार्यक्रम का सुव्यवस्थित और प्रवाहपूर्ण क्रमिक संचालन संतोष साहू, अशोक साहू और महेंद्र पटेल ने किया। रात भर चले इस आयोजन में हजारों की संख्या में ग्रामीण डटे रहे, जो लोक कला के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।

​ रीवा में पहली बार सजेगी 'चंदैनी' की महफ़िल, तैयारियां जोरों पर

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 आरंग- छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू और लोक परंपराओं को जीवंत रखने के लिए ग्राम रीवा (गढ़रीवां) में  22 अप्रैल को एक भव्य आयोजन होने जा रहा है। 'लोरिक नगर' के नाम से विख्यात इस गांव में पहली बार लोरिक चंदा (चंदैनी) लोकनाट्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।



बैठक में बनी रणनीति 

​इस महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह है। शनिवार को ग्राम पंचायत में सरपंच घसियाराम साहू की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक हुई। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों और 'पीपला फाउंडेशन' के सदस्यों ने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की। महोत्सव को सफल बनाने के लिए ग्रामीणों ने जनसहयोग का संकल्प लिया है, जिसमें फाउंडेशन ने 10 हजार रुपये की शुरुआती मदद भी दी है।

दिग्गज हस्तियां होंगी शामिल 

​इस सांस्कृतिक महोत्सव के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन करेंगी। साथ ही, क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और इस विधा के जानकार भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।

विलुप्त होती कला को बचाने की पहल 

​सरपंच घसियाराम साहू और पीपला फाउंडेशन के  संयोजक महेंद्र कुमार पटेल ने चिंता जताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रची-बसी 'चंदैनी' विधा अब धीरे-धीरे कम हो रही है। एक समय था जब लोग रात-रात भर चंदैनी देखने दूर-दूर जाया करते थे। आज इस विरासत को फिर से जीवित करने और सहेजने की जरूरत है। इसी क्रम में यह प्रयास किया जा रहा है।



प्रदेश में पहली बार इस तरह का विशेष चंदैनी महोत्सव आयोजित हो रहा है।

​यह आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन बनेगा, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध लोक संस्कृति से रूबरू होने का मौका भी देगा। पूरे क्षेत्र में इस महोत्सव को लेकर जबरदस्त चर्चा है।

22 अप्रैल को गढ़ रीवा में आयोजित होगा 'लोरिक-चंदा' लोकनाट्य महोत्सव

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नवा रायपुर/आरंग- छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकगाथाओं में रची-बसी 'लोरिक चंदा' (चंदैनी लोकनाट्य) विधा को संरक्षण देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ऐतिहासिक ग्राम गढ़ रीवा में आगामी 22 अप्रैल को एक भव्य 'लोरिक चंदा लोकनाट्य महोत्सव' का आयोजन किया जाएगा। यह पहल दम तोड़ती लोक कला को नई ऊर्जा देने और युवा पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से की जा रही है।

 कैबिनेट मंत्री से मिला समर्थन 

​महोत्सव की तैयारियों के सिलसिले में आज मंगलवार को  ग्राम गढ़ रीवा के 73 वर्षीय सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के प्रतिनिधि दूजेराम धीवर, महेन्द्र पटेल एवं प्रतीक कुमार टोंड्रे ने नवा रायपुर में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब से सौजन्य भेंट की।

​प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री जी को महोत्सव का औपचारिक प्रस्ताव सौंपते हुए विस्तार से चर्चा की। प्रस्ताव पर हर्ष व्यक्त करते हुए मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि "चंदैनी जैसी पारंपरिक विधाएं हमारी पहचान हैं। इन्हें विलुप्त होने से बचाने के लिए ग्राम स्तर पर किया जा रहा यह प्रयास मील का पत्थर साबित होगा।" उन्होंने इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे भव्यता प्रदान करने के लिए प्रदेश के संस्कृति मंत्री को भी आमंत्रित करने का आश्वासन दिया।

जनसहयोग से सजेगा महोत्सव का मंच 

​ग्राम के सरपंच घसियाराम साहू ने जानकारी दी कि इस महोत्सव का आयोजन पूर्णतः जनसहयोग से ग्राम के बाजार चौक में किया जाएगा। आयोजन की रूपरेखा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा तैयार की जा रही है। महोत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में छत्तीसगढ़ की तीन सुप्रसिद्ध चंदैनी टीमों का चयन किया गया है, जो रात भर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी।

​ विशेषज्ञों का होगा जुटान 

​केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि इस विधा के वैचारिक पक्ष को समझने के लिए लोरिक चंदा (चंदैनी) के जानकारों और विशेषज्ञों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया जा रहा है। आयोजन को लेकर गढ़ रीवा सहित आसपास के क्षेत्रों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल मनोरंजन होगा, बल्कि हमारी प्राचीन सांस्कृतिक गाथाओं का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

संस्कृति को सहेजने गढ़ रीवा में होगा चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव

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महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह 

आरंग-  ऐतिहासिक गढ़  रीवा गांव में चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव के आयोजन को लेकर मंगलवार को बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्राम के सरपंच घसियाराम साहू ने किया।

बैठक में ग्राम के प्रबुद्धजन, गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने मिलकर महोत्सव के आयोजन पर चर्चा की और अपने विचार रखे।

इस अवसर पर सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू, वरिष्ठ नागरिक मेहत्तर राम साहू, संतोष साहू, हीराधर धीवर, हीरालाल धीवर तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने आयोजन की रूपरेखा, प्रचार-प्रसार और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की।

73 वर्षीय सरपंच घसियाराम साहू ने कहा कि गढ़ रीवा और आरंग क्षेत्र से जुड़ी लोरिक-चंदा  की गाथा को चंदैनी लोकनाट्य परंपरा आज विलुप्ति के कगार पर है। इसे सहेजने के लिए ग्रामीणों और पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के सहयोग से महोत्सव आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने कहा कि अपनी संस्कृति को बचाने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। चंदैनी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा है, लेकिन आज इसकी कुछ ही टीमें सक्रिय रह गई हैं।

बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि 15 अप्रैल के बाद ग्राम रीवा में लोरिक-चंदा की प्रेमगाथा पर केंद्रित चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

बैठक में घसियाराम साहू, सूरज साहू, संतोष कुमार साहू, मेहत्तर राम साहू, महेन्द्र कुमार पटेल, गोवर्धन साहू, प्रेमलाल साहू, हीराधर धीवर, वेद प्रकाश साहू, मनबोध साहू, रमेश चंद्राकर, बेनीराम साहू, अश्वनी चंद्राकर, अनिल साहू, हीरालाल धीवर, भागवत साहू, त्रिलोकीनाथ साहू, महेंद्र साहू, इंद्रपाल और फत्ते साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

रीवा में हुआ शिक्षादान केंद्र का शुभारंभ,पालको ने जताया फाउंडेशन का आभार

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आरंग- रविवार को सामाजिक संगठन पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने ग्राम रीवा में शिक्षादान केंद्र का शुभारंभ किया। जिसमें कक्षा दसवीं के छात्र छात्राओं को निःशुल्क कोचिंग मिलेगा। शिक्षादान केंद्र का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा की पूजा आराधना से हुई। प्रथम दिवस बच्चों को लेखन शैली, परीक्षा में समय प्रबंधन, परीक्षा की तैयारी सहित गणित के महत्वपूर्ण बिंदुओं व कठिनाईयों पर चर्चा की गई।वहीं ग्राम के सरपंच घसियाराम साहू, संस्था के प्राचार्य आर पी चंद्राकर,एसएमडीसी अध्यक्ष नंद साहू व पालकों ने ग्राम में फाऊंडेशन द्वारा शिक्षादान केंद्र संचालन  की पहल का स्वागत करते हुए आभार जताया है।यहां के शिक्षादान केन्द्र के संचालन में विशेष सहयोग नयारायपुर निवासी सेवानिवृत्त इंजीनियर राजकुमार सोनी, फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र पटेल का है।इस अवसर पर फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल, रीवा निवासी समाजसेवी  पोखराज साहू, अध्यापन कराने वाली बीएससी गणित की छात्रा  दीपिका साहू सहित शिक्षादान केंद्र में पढ़ने वाली छात्र छात्राओं की उपस्थित रहे।


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