Media24Media.com: नवी मुंबई का टेक्सटाइल रिकवरी मॉडल बना मिसाल, कचरे से रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की नई राह नवी मुंबई: नवी मुं

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नवी मुंबई का टेक्सटाइल रिकवरी मॉडल बना मिसाल, कचरे से रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की नई राह नवी मुंबई: नवी मुं

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बई नगर निगम (NMMC) ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत एक अनूठी पहल करते हुए टेक्सटाइल कचरे को संसाधन में बदलने का सफल मॉडल विकसित किया है। बेलापुर में स्थापित देश की पहली म्युनिसिपल टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी (TRF) अब कचरा प्रबंधन, रोजगार सृजन और सर्कुलर इकॉनमी का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।

कचरे से संसाधन की ओर

भारत में हर साल लगभग 7.8 मिलियन टन टेक्सटाइल कचरा उत्पन्न होता है। इस चुनौती से निपटने के लिए NMMC ने एक संगठित प्रणाली विकसित की है, जिसमें कचरे का संग्रह, छंटाई, पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग शामिल है।

शहर के 8 वार्डों में 140 टेक्सटाइल कलेक्शन बिन लगाए गए हैं, जिन्हें बढ़ाकर 250 करने की योजना है, जिससे नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

वैज्ञानिक प्रक्रिया और आधुनिक तकनीक

TRF में एकत्रित कपड़ों को:

  • तौला और टैग किया जाता है

  • अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है (रीयूजेबल, रीसाइक्लेबल आदि)

  • KOSHA स्कैनर से कपड़े की पहचान की जाती है

इसके बाद कपड़ों को साफ कर उन्हें नए उत्पादों में बदला जाता है।

महिलाओं को मिला रोजगार

इस पहल का सबसे बड़ा असर महिलाओं के सशक्तिकरण पर पड़ा है:

  • 300 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण

  • 150+ महिलाएं रोजगार से जुड़ीं

  • मासिक आय: ₹9,000 से ₹15,000

महिलाएं अब बैग, कपड़े, सजावटी सामान जैसे उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

उल्लेखनीय उपलब्धियां

  • 30 टन टेक्सटाइल कचरा एकत्र

  • 25.5 टन की वैज्ञानिक छंटाई

  • 41,000 से अधिक आइटम प्रोसेस

  • 1.14 लाख परिवारों तक पहुंच

  • 400+ नए उत्पाद विकसित

 जागरूकता और बाजार विस्तार

TRF ने 30 से अधिक प्रदर्शनियों में भाग लेकर:

  • रीसाइक्लिंग के प्रति जागरूकता बढ़ाई

  • महिला कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराया

चुनौतियां और समाधान

शुरुआत में:

  • लोगों में जागरूकता की कमी

  • बिन लगाने का विरोध

  • कपड़ों की छंटाई में कठिनाई

लेकिन निरंतर प्रयास और तकनीक के उपयोग से इन समस्याओं को दूर किया गया।

भविष्य की योजना

अब कोपरखैराने में एक स्थायी और बड़े स्तर की TRF स्थापित करने की योजना है, जिससे इस मॉडल को और मजबूत किया जा सके।

निष्कर्ष

नवी मुंबई की यह पहल दिखाती है कि कचरा भी संसाधन बन सकता है। यह मॉडल न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि रोजगार सृजन और सतत विकास की दिशा में भी एक मजबूत कदम है।


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